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                <title>disorganized - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई : ‘मराठी’ समाज का हम हिस्सा हैं, वह अव्यवस्थित, नेतृत्वहीन और बिना रीढ़ का हो चुका है - संजय राउत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की शुक्रवार, 23 जनवरी को जन्म शताब्दी पर बाल ठाकरे 100 साल की उम्र के हो जाते. 'हिंदूहृदयसम्राट' कहे जाने वाले बाल ठाकरे के लिए उद्धव गुट के मुखपत्र सामना में लेख छपा है, जिसके जरिये उद्धव ठाकरे गुट ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. सामना के संपादक संजय राउत अपने संपादकीय में लिखते हैं, "बाल ठाकरे के प्रशंसक और शिवसैनिक उनके शताब्दी समारोह को बड़े धूमधाम से मनाते हैं. षण्मुखानंद हॉल के मुख्य समारोह में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ आकर शिवसेना प्रमुख को श्रद्धांजलि अर्पित करना बालासाहेब के लिए इससे बेहतर जन्मदिन का उपहार क्या हो सकता है?"<br />कुछ लोगों की उम्र हो चुकी है'</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47197/we-are-part-of-mumbai-marathi-society-it-has-become"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-23t185736.252.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की शुक्रवार, 23 जनवरी को जन्म शताब्दी पर बाल ठाकरे 100 साल की उम्र के हो जाते. 'हिंदूहृदयसम्राट' कहे जाने वाले बाल ठाकरे के लिए उद्धव गुट के मुखपत्र सामना में लेख छपा है, जिसके जरिये उद्धव ठाकरे गुट ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. सामना के संपादक संजय राउत अपने संपादकीय में लिखते हैं, "बाल ठाकरे के प्रशंसक और शिवसैनिक उनके शताब्दी समारोह को बड़े धूमधाम से मनाते हैं. षण्मुखानंद हॉल के मुख्य समारोह में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ आकर शिवसेना प्रमुख को श्रद्धांजलि अर्पित करना बालासाहेब के लिए इससे बेहतर जन्मदिन का उपहार क्या हो सकता है?"<br />कुछ लोगों की उम्र हो चुकी है'</p>
<p> </p>
<p>सामना में बिना नाम लिए संजय राउत ने लिखा, "महान व्यक्तियों को उम्र से नहीं मापा जा सकता. बालासाहेब जैसे महान लोगों की महानता उनकी उम्र पर निर्भर नहीं करती. देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जिनकी उम्र हो चुकी है फिर भी देश पर बोझ बने बैठे हैं, लेकिन बालासाहेब जैसे नेता हमेशा अमर और प्रेरणादायक लगते हैं. उनकी महानता उम्र पर निर्भर नहीं करती. यह उनके कार्यों, विचारों और समाज के प्रति उनके योगदान पर निर्भर करती है.</p>
<p>संजय राउत ने आगे लिखा, "जिस ‘मराठी’ समाज का हम हिस्सा हैं, वह अव्यवस्थित, नेतृत्वहीन और बिना रीढ़ का हो चुका है. उसकी राय और अस्तित्व का कोई मूल्य नहीं है. उसकी कोई सार्वजनिक राय नहीं है, राज दरबार में उसका कोई महत्व नहीं है. महाराष्ट्र की इस धरती पर जन्म लेने के बावजूद, ‘मराठी’ होने के कारण लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है. यह अन्याय है और बालासाहेब ने इसे दिल से महसूस किया. परिणामस्वरूप, उन्होंने यह निश्चय किया कि मराठी लोगों में जागरूकता और एक सशक्त संगठन बनाना उनका लक्ष्य है. उन्होंने यह तय किया कि वे इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ताउम्र निरंतर प्रयास करते रहेंगे."</p>
<p><strong>हमेशा के लिए मिट गए होते मराठी'</strong><br />सामना में लिखा गया है, "सच तो यह है कि अगर बालासाहेब ने मुंबई में शिवसेना की स्थापना न की होती, तो महाराष्ट्र की इस राजधानी से मराठी लोग हमेशा के लिए मिट गए होते. एक तो मुंबई में मराठी मानुस की संख्या कम है और उस पर शासकों की लापरवाही. इसी वजह से मुंबई की हालत एक धर्मशाला जैसी हो गई है ‘आओ जाओ घर तुम्हारा!’ पिछले 50 साल में इस धर्मशाला का दायरा और भी बढ़ गया है."</p>
<p><strong>'मराठी लोगों का अस्तित्व नहीं बचा'</strong><br />मुंबई से ढाई लाख मिल मजदूर गायब हो गए. इसी वजह से गिरणगाव (मिल मजदूरों की बसाहत) का इतिहास और भूगोल बदल गया. गिरणगाव की चिमनियां गायब हो गर्इं और उनकी जगह गगनचुंबी टावर बन गए. इन टावरों में अब मराठी लोगों का अस्तित्व नहीं बचा. ये सभी टावर राक्षस बनकर मुंबई की ‘मराठी पहचान’ को नष्ट करने पर तुले हैं. ऐसे वक्त में आज बालासाहेब की याद आती है. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 18:58:46 +0530</pubDate>
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