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                <title>₹3 - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई: लाड़की बहिन योजना में ₹3,541 करोड़ का अतिरिक्त व्यय, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने महाराष्ट्र सरकार की प्रमुख लड़की बहिन योजना के कार्यान्वयन में 3,541.16 करोड़ रुपये के अतिरिक्त व्यय, जमा खातों में हजारों करोड़ की पार्किंग और वित्तीय प्रबंधन में कमियों को चिह्नित किया है। शुक्रवार को राज्य विधानमंडल में पेश की गई सीएजी राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट 2024-25 में कहा गया कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने पर्याप्त अतिरिक्त व्यय के लिए कोई विशेष औचित्य प्रदान नहीं किया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50711/big-disclosure-in-report-on-additional-expenditure-of-%E2%82%B93541-crore"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-13t111751.097.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने महाराष्ट्र सरकार की प्रमुख लड़की बहिन योजना के कार्यान्वयन में 3,541.16 करोड़ रुपये के अतिरिक्त व्यय, जमा खातों में हजारों करोड़ की पार्किंग और वित्तीय प्रबंधन में कमियों को चिह्नित किया है। शुक्रवार को राज्य विधानमंडल में पेश की गई सीएजी राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट 2024-25 में कहा गया कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने पर्याप्त अतिरिक्त व्यय के लिए कोई विशेष औचित्य प्रदान नहीं किया।</p>
<p> </p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने 29,693.09 करोड़ रुपये के अधिकृत बजट के मुकाबले योजना पर 33,237.24 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसके परिणामस्वरूप 3,541.16 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि योजना के लिए कुल 29,693.09 करोड़ रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया गया था, जिसमें पूरक प्रावधानों के माध्यम से 26,200 करोड़ रुपये और लेक लड़की योजना से 3,490.75 करोड़ रुपये का पुनर्विनियोजन शामिल था।</p>
<p>सीएजी ने कहा कि ऑडिट जांच से पता चला कि जनवरी और मार्च 2025 के बीच निकाले गए 15,586 करोड़ रुपये वर्चुअल पर्सनल डिपॉजिट अकाउंट (वीपीडीए) में स्थानांतरित किए गए थे। लड़की बहिन योजना में गंभीर वित्तीय अनियमितता: CAG रिपोर्ट में कहा गया है, "इस बड़े पैमाने पर निकासी से पता चलता है कि धन को तत्काल उपयोग की आवश्यकता नहीं थी और वास्तविक व्यय आवश्यकताओं के बिना राजकोष से निकाला गया था।" इस प्रथा को एक गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए, सीएजी ने कहा कि तत्काल आवश्यकता के बिना वीपीडीए में धन की निकासी और पार्किंग "बजटीय अनुशासन और वित्तीय औचित्य के सिद्धांतों के विपरीत" थी और सार्वजनिक वित्त पर विधायी नियंत्रण को कमजोर करती थी।</p>
<p>ऑडिट में आगे पाया गया कि योजना के कार्यान्वयन में "बजट अनुमान, व्यय नियंत्रण और वित्तीय प्रबंधन में महत्वपूर्ण कमियाँ" थीं। इसमें यह भी कहा गया है कि महिलाओं के कल्याण पर व्यय पिछले वर्ष के 261.78 करोड़ रुपये से तेजी से बढ़कर 33,500 करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जो "पूंजीगत संपत्ति निर्माण के बजाय कल्याण-उन्मुख हस्तांतरण की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव" को दर्शाता है। 28 जून, 2024 को स्वीकृत मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है। योजना के तहत, 21 से 65 वर्ष की आयु की पात्र महिलाओं को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से प्रति माह 1,500 रुपये मिलते हैं। सीएजी ने सिफारिश की कि लड़की बहिन योजना जैसी बड़ी डीबीटी योजनाओं के लिए, विभाग को अनावश्यक पूरक मांगों या अनधिकृत अतिरिक्त व्यय से बचने के लिए बजट निर्माण के दौरान लाभार्थी कवरेज और फंड आवश्यकताओं का यथार्थवादी मूल्यांकन सुनिश्चित करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 11:18:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई :58 करोड़ के साइबर ठगी के पीड़ित बुजुर्ग को 2 करोड़ रुपये वापस; फरार मास्टरमाइंड की तलाश तेज, 3 लाख का इनाम घोषित </title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश के सबसे बड़े डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी मामले में महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने बड़ी और निर्णायक सफलता हासिल की है। 58.13 करोड़ रुपये की भारी-भरकम ठगी के इस सनसनीखेज मामले में साइबर पुलिस ने अदालत के आदेश के तहत पीड़ित को 2 करोड़ रुपये की पहली किस्त के रूप में वापस दिला दी है। यह कार्रवाई न केवल आर्थिक रिकवरी की दिशा में अहम कदम है, बल्कि साइबर अपराध के खिलाफ सख्त रुख का स्पष्ट संकेत भी मानी जा रही है। इतना ही नहीं, इस ठगी के मास्टरमाइंड के ऊपर 3 लाख का इनाम घोषित किया गया है। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47104/mumbai-rs-2-crore-returned-to-elderly-victim-of-cyber"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-20t115754.204.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>देश के सबसे बड़े डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी मामले में महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने बड़ी और निर्णायक सफलता हासिल की है। 58.13 करोड़ रुपये की भारी-भरकम ठगी के इस सनसनीखेज मामले में साइबर पुलिस ने अदालत के आदेश के तहत पीड़ित को 2 करोड़ रुपये की पहली किस्त के रूप में वापस दिला दी है। यह कार्रवाई न केवल आर्थिक रिकवरी की दिशा में अहम कदम है, बल्कि साइबर अपराध के खिलाफ सख्त रुख का स्पष्ट संकेत भी मानी जा रही है। इतना ही नहीं, इस ठगी के मास्टरमाइंड के ऊपर 3 लाख का इनाम घोषित किया गया है। </p>
<p> </p>
<p>महाराष्ट्र में साइबर सुरक्षा और साइबर अपराधों की नोडल एजेंसी, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, महाराष्ट्र साइबर कार्यालय द्वारा इस मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की गंभीर धाराओं के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66(सी) और 66(डी) के अंतर्गत दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर पीड़ित से करोड़ों रुपये की ठगी की। लगातार तकनीकी विश्लेषण, वित्तीय ट्रैकिंग और बैंकों के साथ गहन समन्वय के चलते महाराष्ट्र साइबर ने जटिल लेन-देन की कड़ियों को जोड़ते हुए ठगी की राशि तक पहुंच बनाई। समय रहते कानूनी प्रक्रिया पूरी कर अदालत से अनुमति मिलने के बाद 2 करोड़ रुपये की राशि पीड़ित को लौटाई गई। अधिकारियों के अनुसार, यह केवल पहली किस्त है और आगे भी जब्त संपत्तियों के जरिए रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। इस रिकवरी से पीड़ित को आर्थिक राहत के साथ-साथ मानसिक संबल भी मिला है। महाराष्ट्र साइबर अधिकारियों का कहना है कि विभाग की प्राथमिकता केवल अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि साइबर ठगी से वंचित लोगों को जल्द से जल्द न्याय और राहत दिलाना भी है।  </p>
<p>जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से जुड़ी कई चल-अचल संपत्तियों की पहचान कर उन्हें फ्रीज किया गया है, जिन्हें न्यायालय के आदेश के बाद रिकवर की गई संपत्ति माना जाएगा। इस अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के मुख्य साजिशकर्ताओं पर शिकंजा और कसा जा रहा है। मामले का प्रमुख आरोपी देवेंद्र सैनी अब भी फरार है, जिसे पूरे नेटवर्क का अहम ऑपरेशनल हैंडलर बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए महाराष्ट्र साइबर ने 3 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है। पुलिस को भरोसा है कि अंतरराज्यीय तालमेल और जनसहयोग से आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।</p>
<p>महाराष्ट्र साइबर ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। 58 करोड़ रुपये के इस महाघोटाले में पहली किस्त की सफल वापसी यह दर्शाती है कि आधुनिक तकनीक, मजबूत जांच और कानूनी प्रक्रिया के जरिए साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।   </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 11:59:28 +0530</pubDate>
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