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                <title>Workers - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Workers RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : आवास की आस लगाए बैठे हैं करीब डेढ़ लाख मिल कामगार </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई की पहचान रहीं कपड़ा मिलों के बंद होने के बाद उजड़े हजारों परिवार आज भी अपने आशियाने का इंतजार कर रहे हैं। वर्षों पहले मिल कामगारों और उनके वारिसों को घर देने का वादा करने वाली सरकार अब तक अधिकांश पात्र परिवारों को छत उपलब्ध नहीं करा सकी है। हालत यह है कि करीब डेढ़ लाख मिल कामगार आज भी आवास की आस लगाए बैठे हैं, जबकि सरकार ने अब समाधान के नाम पर निजी बिल्डरों के दरवाजे खटखटाने शुरू कर दिए हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50975/nearly-15-lakh-mill-workers-are-waiting-for-housing-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-27t130151.421.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> मुंबई की पहचान रहीं कपड़ा मिलों के बंद होने के बाद उजड़े हजारों परिवार आज भी अपने आशियाने का इंतजार कर रहे हैं। वर्षों पहले मिल कामगारों और उनके वारिसों को घर देने का वादा करने वाली सरकार अब तक अधिकांश पात्र परिवारों को छत उपलब्ध नहीं करा सकी है। हालत यह है कि करीब डेढ़ लाख मिल कामगार आज भी आवास की आस लगाए बैठे हैं, जबकि सरकार ने अब समाधान के नाम पर निजी बिल्डरों के दरवाजे खटखटाने शुरू कर दिए हैं।<br />म्हाडा के मुंबई मंडल ने बोरीवली, ठाणे, मीरा-भायंदर और उलवे में निजी डेवलपर्स की आवासीय परियोजनाओं से घर खरीदने के लिए रुचि निविदाएं (ईओआई) आमंत्रित की हैं। यह कदम सरकार की उस विफलता की ओर इशारा करता है कि इतने वर्षों में वह मिल कामगारों के लिए स्वयं पर्याप्त आवासीय परियोजनाएं विकसित नहीं कर सकी।</p>
<p> </p>
<p>मिल कामगारों के पुनर्वास के लिए तीन चरणों में करीब पौने दो लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, लेकिन अब तक लॉटरी के जरिए केवल १६–१७ हजार परिवारों को ही घर मिल पाए हैं। कुछ हजार और परिवारों को घर मिलने की संभावना है, मगर इसके बाद भी लगभग डेढ़ लाख पात्र परिवार अब भी अपने अधिकार की छत से वंचित हैं।</p>
<p>सरकार ने पहले शेलू और वांगणी जैसे दूरस्थ इलाकों में आवास उपलब्ध कराने की कोशिश की, लेकिन रोजगार, परिवहन और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण बड़ी संख्या में कामगारों ने उन घरों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। मिल कामगार संगठनों का कहना है कि जिन लोगों ने मुंबई के विकास में अपना जीवन खपा दिया, उन्हें शहर से दूर भेजना उनके साथ अन्याय है। उनकी मांग है कि पुनर्वास मुंबई या उसके आसपास ही किया जाए। अब निजी बिल्डरों से घर लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है। निविदा की शर्तों के अनुसार परियोजनाएं कम से कम एक एकड़ क्षेत्र में विकसित हों, सभी सरकारी मंजूरियां प्राप्त हों, रेलवे स्टेशन के निकट हों तथा सड़क, पानी और अन्य नागरिक सुविधाओं से लैस हों।</p>
<p><strong>मुंबई में घर चाहिए, दूर नहीं</strong><br />शेलू और वांगणी जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के घर बड़ी संख्या में कामगारों ने ठुकरा दिए। उनका कहना है कि रोज़गार, परिवहन और बुनियादी सुविधाओं से दूर पुनर्वास स्वीकार्य नहीं है। संगठनों की मांग है कि मिल कामगारों को मुंबई या उसके आसपास ही स्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 13:02:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: संजय निरुपम की गाड़ी पर पथराव, MNS कार्यकर्ता बोले-'गो बैक'</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में एक बार फिर 'मराठी बनाम हिंदी' भाषा का विवाद गहरा गया है. मुंबई के दहिसर इलाके में उस समय भारी बवाल हो गया जब शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और पूर्व सांसद संजय निरुपम ऑटो चालकों से संवाद करने पहुंचे थे. वहां पहले से मौजूद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने निरुपम का कड़ा विरोध करते हुए उनकी गाड़ी पर पथराव किया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49468/mumbai-mns-workers-pelted-stones-at-sanjay-nirupams-car-and"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-25t132623.954.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई:  </strong>मुंबई में एक बार फिर 'मराठी बनाम हिंदी' भाषा का विवाद गहरा गया है. मुंबई के दहिसर इलाके में उस समय भारी बवाल हो गया जब शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और पूर्व सांसद संजय निरुपम ऑटो चालकों से संवाद करने पहुंचे थे. वहां पहले से मौजूद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने निरुपम का कड़ा विरोध करते हुए उनकी गाड़ी पर पथराव किया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की. </p>
<p> </p>
<p><strong>विवाद की जड़: ऑटो चालकों के लिए मराठी की अनिवार्यता</strong><br />इस पूरे विवाद की शुरुआत शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के एक आदेश से हुई है. सरनाईक ने निर्देश दिया है कि 1 मई से मुंबई से सटे मीरा-भायंदर क्षेत्र में सभी ऑटो ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा बोलना, लिखना और पढ़ना अनिवार्य होगा. संजय निरुपम ने अपनी ही पार्टी के मंत्री के इस फैसले का विरोध करते हुए इसे 'परप्रांतीय' चालकों के साथ अन्याय बताया है.  </p>
<p>संजय निरुपम जब दहिसर में रिक्शा चालकों से मिलने पहुंचे, तो MNS कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया. नारेबाजी और हमला: "निरुपम गो बैक" और "एक ही भाषा, मराठी भाषा" के नारों के बीच प्रदर्शनकारियों ने निरुपम की कार के टायर की हवा निकाल दी और वाहन पर पथराव किया.<br />पुलिस की कार्रवाई: स्थिति बिगड़ती देख मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा. पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद संजय निरुपम को सुरक्षित मौके से बाहर निकाला.</p>
<p><strong>11 पदाधिकारियों पर FIR, MNS ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी</strong><br />पुलिस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए MNS के महासचिव नयन कदम और शहर उपाध्यक्ष कुणाल माईनकर को हिरासत में ले लिया है. कुल 11 पदाधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. </p>
<p>दूसरी ओर, MNS ने पुलिसिया कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि उनके कार्यकर्ताओं पर दबाव में आकर कार्रवाई की गई, तो पूरी मुंबई में तीव्र आंदोलन किया जाएगा. MNS की मांग है कि पुलिस पहले संजय निरुपम के खिलाफ मामला दर्ज करे, क्योंकि वे सरकारी नियमों का विरोध कर रहे हैं. </p>
<p><strong>शिवसेना (शिंदे गुट) के भीतर का अंतर्विरोध उजागर</strong><br />इस घटना ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी के भीतर चल रहे वैचारिक मतभेद को भी सतह पर ला दिया है. एक ओर मंत्री प्रताप सरनाईक 'मराठी कार्ड' के जरिए स्थानीय अस्मिता पर जोर दे रहे हैं, वहीं संजय निरुपम उत्तर भारतीय और अन्य राज्यों के प्रवासियों के हितों की वकालत कर रहे हैं. फिलहाल दहिसर और आसपास के इलाकों में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है. पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है और सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके.</p>
<p><strong>संजय न‍िरुपम ने ल‍िखा पत्र </strong><br />न्‍यूज एजेंसी IANS से बातचीत में शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम कहते हैं, "सबसे पहले, मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं और मैंने अपने पत्र में भी यह लिखा है कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा का सम्मान किया जाना चाहिए। राज्य सरकार का यह आग्रह है कि महाराष्ट्र में रहने वाला हर व्यक्ति मराठी भाषा का सम्मान करे, उसे बोलने में सक्षम हो और उसे समझे। यह बात बिल्कुल सही है; यह सरकार, पार्टी और मेरा अपना निजी मत भी है..."</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 13:29:20 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : सरकार ने गिग वर्कर्स के लिए कड़ा वेरिफिकेशन और रेगुलेशन लागू करने का निर्देश दिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के लेबर मिनिस्टर आकाश फुंडकर ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, गिग इकॉनमी और डिलीवरी सर्विस में काम करने वाले वर्कर्स के लिए कड़े वेरिफिकेशन प्रोसेस लागू करने का निर्देश दिया है। उन्होंने इस दौरान कस्टमर की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सर्विस सुरक्षित, भरोसेमंद और कानूनी दायरे में होनी चाहिए। यह निर्देश लेबर और होम डिपार्टमेंट की जॉइंट मीटिंग में जारी किया गया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49040/mumbai-government-directs-to-implement-strict-verification-and-regulation-for"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download-(80).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र के लेबर मिनिस्टर आकाश फुंडकर ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, गिग इकॉनमी और डिलीवरी सर्विस में काम करने वाले वर्कर्स के लिए कड़े वेरिफिकेशन प्रोसेस लागू करने का निर्देश दिया है। उन्होंने इस दौरान कस्टमर की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सर्विस सुरक्षित, भरोसेमंद और कानूनी दायरे में होनी चाहिए। यह निर्देश लेबर और होम डिपार्टमेंट की जॉइंट मीटिंग में जारी किया गया। मिनिस्टर ने कहा कि गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक बड़ा और यूनिफॉर्म रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने की आवश्यकता है, ताकि वर्कर्स के बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और उनके काम की कानूनी जिम्मेदारियाँ स्पष्ट हों।</p>
<p> </p>
<p>अधिकारियों ने मीटिंग में ज़ोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट जैसी कंपनियों के ऑनलाइन और “फेसलेस” रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पर चर्चा की। वर्तमान में ये कंपनियाँ अक्सर थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन एजेंसियों पर निर्भर रहती हैं, जिससे उनकी कानूनी स्टैंडर्ड, अकाउंटेबिलिटी और एम्प्लॉयर-एम्प्लॉई संबंधों में अस्पष्टता पैदा होती है। मिनिस्टर फुंडकर ने स्पष्ट किया कि कंपनियों को अपने गिग वर्कर्स के वेरिफिकेशन की पूरी ज़िम्मेदारी लेनी होगी।</p>
<p>मीटिंग में यह भी तय किया गया कि सभी डिपार्टमेंट मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि डिलीवरी वाहनों का कमर्शियल रजिस्ट्रेशन सही हो, ड्राइवरों के पास वैध लाइसेंस हों और पेमेंट सिस्टम ट्रांसपेरेंट और नियमों के अनुसार संचालित हो। अधिकारियों ने कहा कि ऐप-बेस्ड ऑनबोर्डिंग सिस्टम में वर्कर्स से आधार, पैन, बैंक डिटेल्स, ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी के डॉक्यूमेंट्स, इंश्योरेंस और ई-श्रम रजिस्ट्रेशन जैसे डॉक्यूमेंट्स लेने चाहिए।</p>
<p>इसके अलावा, सभी गिग वर्कर्स का स्टेट साइबर डिपार्टमेंट में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने और उन्हें क्यूआर कोड-बेस्ड आइडेंटिफिकेशन देने के प्रपोज़ल पर चर्चा हुई। यह क्यूआर कोड वर्कर्स के प्रोफाइल और पहचान की जानकारी कस्टमर को रिक्वेस्ट पर दिखाने में मदद करेगा, जिससे कस्टमर और प्लेटफॉर्म दोनों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित होगी। मिनिस्टर ने जोर दिया कि गिग और डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को केवल थर्ड-पार्टी एजेंसियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि खुद ही वर्कर्स की पहचान, लाइसेंस और अनुभव की जांच करें। उन्होंने कहा कि यह कदम गिग वर्कर्स और कस्टमर दोनों के लिए पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाएगा।</p>
<p>सरकारी अधिकारियों ने मीटिंग में यह भी स्पष्ट किया कि ऑनलाइन एग्रीगेटर्स और प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त रेगुलेशन लागू करने की तत्काल जरूरत है। इससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि एम्प्लॉयर-एम्प्लॉई संबंध और कानूनी जिम्मेदारियाँ भी स्पष्ट होंगी। कुल मिलाकर, महाराष्ट्र सरकार का उद्देश्य गिग इकॉनमी और ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म को सुरक्षित, पारदर्शी और कानूनी दायरे में लाना है। मिनिस्टर फुंडकर ने सभी विभागों और कंपनियों को निर्देश दिया कि वे जल्द से जल्द नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और कड़े वेरिफिकेशन प्रोसेस को लागू करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:18:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : लेदर वर्कर्स के लिए स्किल ट्रेनिंग, पारंपरिक हुनर में आधुनिक तकनीक की ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्र सरकार की पहल पर कांदिवली (ईस्ट) स्थित अटल बिहारी वाजपेयी स्किल डेवलपमेंट सेंटर में लेदर वर्कर्स कम्युनिटी के लिए विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। समाज के पारंपरिक और पिछड़े तबकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस पहल के तहत 20 प्रतिभागियों को 27 जनवरी से 24 फरवरी तक 25 दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के लिए केंद्रीय फुटवियर प्रशिक्षण संस्थान, आगरा से विशेषज्ञ प्रशिक्षक देवेंद्र तिवारी और मिथुन कुमार सिंह को नियुक्त किया गया। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47988/skill-training-for-mumbai-leather-workers-the-power-of-modern"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-25t123554.393.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>केंद्र सरकार की पहल पर कांदिवली (ईस्ट) स्थित अटल बिहारी वाजपेयी स्किल डेवलपमेंट सेंटर में लेदर वर्कर्स कम्युनिटी के लिए विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। समाज के पारंपरिक और पिछड़े तबकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस पहल के तहत 20 प्रतिभागियों को 27 जनवरी से 24 फरवरी तक 25 दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के लिए केंद्रीय फुटवियर प्रशिक्षण संस्थान, आगरा से विशेषज्ञ प्रशिक्षक देवेंद्र तिवारी और मिथुन कुमार सिंह को नियुक्त किया गया। </p>
<p> </p>
<p>इस दौरान प्रतिभागियों को डर्बी बूट्स, पुरुषों के लिए स्टिच्ड चप्‍पल और महिलाओं के लिए चप्‍पल तैयार करने की आधुनिक तकनीक सिखाई गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए रोजगार के नए अवसर सृजित करना और लेदर वर्कर्स समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। टेक्निकल ट्रेनर मिथुन कुमार राजपूत ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और मुंबई में लेदर टेक्नोलॉजी के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत करने वालों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने बताया कि 20 उम्मीदवारों को 25 दिनों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें टीम वर्क के माध्यम से जूता निर्माण की बारीकियां सिखाई गईं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जो लोग पहले सड़क किनारे बैठकर जूते बनाते थे, वे अब नए डिजाइन के जूते, चप्पल और सैंडल बनाने में सक्षम हो गए हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इन प्रशिक्षित युवाओं को लघु उद्योग या किसी कारखाने में अवसर प्रदान किए जाएं, ताकि वे अपने कौशल के बल पर कई गुना अधिक आय अर्जित कर सकें। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले रामचंद्र ने बताया कि पहले वे फुटपाथ पर बैठकर जूते-चप्पलों की मरम्मत कर अपनी रोजी-रोटी चलाते थे। जब उन्हें इस कार्यक्रम की जानकारी मिली तो उन्होंने आवेदन कर प्रशिक्षण लिया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पहले वे केवल टूटी चप्पल और जूतों की मरम्मत करते थे, लेकिन अब उन्हें जूते और चप्पल बनाने की पूरी प्रक्रिया सिखाई गई है। इससे उनकी आमदनी में कई गुना वृद्धि होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि चमड़े की विभिन्न किस्मों के आधार पर उत्पाद की कीमत तय की जाती है और अब वे बेहतर गुणवत्ता के उत्पाद तैयार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का लोगों को अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 12:39:54 +0530</pubDate>
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