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                <title>Dadar News - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Dadar News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दक्षिण मुंबई में बिजली संकट गहराया, बार-बार हो रहे पावर कट से बढ़ी लोगों की परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दक्षिण मुंबई में लगातार हो रही बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी केबलें, बढ़ती बिजली मांग और तेजी से हो रहा पुनर्विकास इस संकट की बड़ी वजह हैं। जानिए आखिर क्यों बार-बार गुल हो रही है मुंबई की बिजली। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50047/electricity-crisis-deepens-in-south-mumbai-peoples-problems-increase-due"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/images---2026-06-02t133928.747.jpeg" alt=""></a><br /><p>दक्षिण मुंबई के कई इलाकों में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार हो रही बिजली कटौती ने हजारों नागरिकों और व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गिरगांव, भुलेश्वर, ओपेरा हाउस, ठाकुरद्वार, कालबादेवी, दादर और वडाला जैसे क्षेत्रों में बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती बिजली मांग और पुरानी हो चुकी विद्युत संरचना इस संकट की प्रमुख वजह बन रही है।</p>
<p>हाल ही में गिरगांव और आसपास के इलाकों में केबल फॉल्ट के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई थी। तकनीकी टीमों ने आपूर्ति बहाल कर दी, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि कुछ भूमिगत केबलों तक पहुंचना और उनकी मरम्मत करना बेहद चुनौतीपूर्ण है क्योंकि वे रेलवे ट्रैक और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों के नीचे से गुजरती हैं।</p>
<p>स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिजली कटौती का असर केवल रोशनी तक सीमित नहीं है। कई इमारतों में पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है क्योंकि बिजली न होने पर मोटर और पंप काम नहीं कर पाते। इससे ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, मुंबई में इस गर्मी के दौरान बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है। एयर कंडीशनर और अन्य कूलिंग उपकरणों के बढ़ते उपयोग के कारण बिजली नेटवर्क पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही तेजी से हो रहे पुनर्विकास और नई ऊंची इमारतों के निर्माण ने भी मौजूदा ढांचे पर अतिरिक्त भार डाल दिया है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि कई केबल और विद्युत प्रणालियां दशकों पुरानी हो चुकी हैं और उन्हें चरणबद्ध तरीके से बदलने की आवश्यकता है। यदि समय रहते बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में बिजली आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।</p>
<p>बिजली कंपनियों और संबंधित एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती मांग के अनुरूप नेटवर्क को मजबूत बनाना है ताकि मुंबई जैसे महानगर में बार-बार होने वाली बिजली कटौती से लोगों को राहत मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:39:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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                <title>दादर कबूतरखाना छोटा करने की मांग तेज: Mahim MLA बोले- सड़क चौड़ीकरण से कम होगा ट्रैफिक जाम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>Mahim MLA ने दादर कबूतरखाना की जगह कम करके सड़क चौड़ीकरण की मांग की है ताकि ट्रैफिक जाम कम किया जा सके।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50003/demand-to-reduce-the-size-of-dadar-pigeon-house-intensifies"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/images---2026-05-29t233229.680.jpeg" alt=""></a><br /><p>मुंबई के दादर स्थित प्रसिद्ध कबूतरखाना को लेकर नया विवाद सामने आया है। Mahim विधानसभा क्षेत्र के विधायक ने दादर कबूतरखाना की जगह कम करके आसपास की सड़कों को चौड़ा करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि इलाके में लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम और मानसून से पहले सड़क व्यवस्था सुधारने के लिए यह कदम जरूरी है। <br /><br />रिपोर्ट्स के मुताबिक, दादर का कबूतरखाना मुंबई के सबसे व्यस्त जंक्शनों में से एक के बीच स्थित है। यहां रोज हजारों वाहन गुजरते हैं, जिसके कारण ट्रैफिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। विधायक का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण से ट्रैफिक फ्लो बेहतर होगा और नागरिकों को राहत मिलेगी। <br /><br />दादर कबूतरखाना मुंबई की एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान भी माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में लोग कबूतरों को दाना खिलाने आते हैं। इसी वजह से प्रस्ताव सामने आते ही स्थानीय नागरिकों, धार्मिक समूहों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी शुरू हो गई हैं। कई लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर शहर की विरासत को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। <br /><br />मुंबई में ट्रैफिक और सड़क चौड़ीकरण को लेकर पहले भी कई विवाद सामने आते रहे हैं। शहर में बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण कई प्रमुख सड़कों पर भारी दबाव है। BMC और अन्य एजेंसियां लगातार सड़क सुधार और ट्रैफिक प्रबंधन योजनाओं पर काम कर रही हैं। <br /><br />विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण से कुछ हद तक ट्रैफिक कम हो सकता है, लेकिन लंबे समय के समाधान के लिए सार्वजनिक परिवहन और ट्रैफिक प्लानिंग पर भी फोकस जरूरी है। मुंबई में कई इलाकों में सड़क परियोजनाओं को लेकर कानूनी और पर्यावरणीय विवाद भी सामने आ चुके हैं। <br /><br />फिलहाल इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा ट्रैफिक, सांस्कृतिक महत्व और स्थानीय भावनाओं को ध्यान में रखते हुए आगे निर्णय लिया जा सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 23:34:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई का पहला डिटेंशन सेंटर शुरू होते ही हुआ फुल, भोईवाडा केंद्र में बढ़ा दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के भोईवाडा में शुरू हुआ महाराष्ट्र का पहला डिटेंशन सेंटर कुछ ही हफ्तों में लगभग भर गया है। डिपोर्टेशन में देरी और कार्रवाई तेज होने से दबाव बढ़ा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49898/mumbai-bhoiwada-detention-centre-full-weeks-after-launch"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/detention-centre-1770072103692_d.webp" alt=""></a><br /><p>मुंबई के Bhoiwada इलाके में शुरू किया गया महाराष्ट्र का पहला डिटेंशन सेंटर शुरू होने के कुछ ही हफ्तों के भीतर क्षमता के दबाव का सामना करने लगा है। अधिकारियों के मुताबिक, अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ तेज कार्रवाई और डिपोर्टेशन प्रक्रिया में देरी के कारण सेंटर तेजी से भर गया है। </p>
<p>यह डिटेंशन सेंटर मार्च 2026 में चालू किया गया था। दो मंजिला इस सुविधा में करीब 40 कमरे हैं और लगभग 80 लोगों को रखने की क्षमता है। इसे उन विदेशी नागरिकों के लिए बनाया गया है जो डिपोर्टेशन प्रक्रिया पूरी होने तक अस्थायी रूप से रखे जाते हैं। <br /><br />पुलिस सूत्रों के अनुसार, केंद्र खुलने के कुछ ही दिनों में यहां बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया। अधिकारियों का कहना है कि डिपोर्टेशन प्रक्रिया लंबी होने के कारण नए लोगों के लिए जगह की समस्या पैदा हो रही है। नागरिकता सत्यापन, दूतावास समन्वय, यात्रा दस्तावेज और सीमा हस्तांतरण जैसी प्रक्रियाओं में कई सप्ताह या महीने लग जाते हैं। <br /><br />रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने 2025 में 1000 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लेकर डिपोर्ट किया था, जबकि 2026 में भी कई सौ लोगों को पकड़ा जा चुका है। मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में झुग्गी बस्तियों, निर्माण स्थलों, लेबर हब और किराये के मकानों में बड़े स्तर पर सत्यापन अभियान चलाए जा रहे हैं। <br /><br />अधिकारियों का कहना है कि इस सेंटर के शुरू होने से पहले विदेशी नागरिकों को लंबे समय तक पुलिस स्टेशनों या लॉकअप में रखना पड़ता था। कई मामलों में लोगों को पुलिस स्टेशन की सीमा में रहने और नियमित रिपोर्टिंग करने के निर्देश दिए जाते थे। नई सुविधा का उद्देश्य पुलिस स्टेशनों पर बढ़ते दबाव को कम करना था। <br /><br />डिटेंशन सेंटर में रहने वालों के लिए भोजन, बंक बेड, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सुरक्षा की जिम्मेदारी महाराष्ट्र स्टेट सिक्योरिटी फोर्स और मुंबई पुलिस के पास है। <br /><br />हालांकि मानवाधिकार संगठनों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ऐसे डिटेंशन सेंटरों को लेकर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि डिपोर्टेशन और हिरासत की प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी सहायता सुनिश्चित की जानी चाहिए। <br /><br />राज्य सरकार ने पहले ही नवी मुंबई में 213 क्षमता वाले स्थायी डिटेंशन सेंटर की मंजूरी दी है। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा दबाव को देखते हुए भविष्य में और बड़ी सुविधाओं की जरूरत पड़ सकती है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 17:40:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दादर कबूतरखाना विवाद पर बड़ी खबर: जैन मुनि का अनशन 15 दिन के लिए रुका, क्या निकलेगा समाधान?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>शीर्षक:</strong> मुंबई: दादर कबूतरखाना को फिर से खोलने की मांग, जैन मुनि नीलेशचंद्र विजय का अनिश्चितकालीन अनशन 15 दिनों के लिए स्थगित</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45208/big-news-on-dadar-pigeon-khana-dispute-jain-monks-fast"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/images---2025-11-04t144524.731.jpeg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"> </p>
<p dir="ltr">​<strong>rokthoklekhani.com</strong></p>
<p dir="ltr">​<strong>मुंबई</strong>​ : मुंबई के दादर (Dadar) में स्थित ऐतिहासिक कबूतरखाना को बंद करने के बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के फैसले के खिलाफ चल रहा बड़ा विरोध प्रदर्शन फिलहाल 15 दिनों के लिए टाल दिया गया है। जैन धर्मगुरु मुनि नीलेशचंद्र विजय (Jain Muni Nileshchandra Vijay) ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को सरकारी प्रतिनिधियों से ठोस आश्वासन मिलने के बाद स्थगित करने का फैसला किया है।</p>
<p dir="ltr">​<strong>विरोध का कारण: आस्था बनाम स्वास्थ्य</strong></p>
<p dir="ltr">​यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश और आम नागरिकों के स्वास्थ्य संबंधी खतरों को देखते हुए बीएमसी ने दादर सहित कई स्थानों पर कबूतरों को दाना खिलाने वाले स्थानों (Kabutarkhanas) को बंद कर दिया। निवासियों ने कबूतरों के अत्यधिक जमावड़े और उनके मल से फैलने वाली श्वसन संबंधी बीमारियों (respiratory ailments) को लेकर चिंता जताई थी।</p>
<p dir="ltr">​हालांकि, जैन समुदाय (Jain Community) इसे अपनी धार्मिक आस्था और अहिंसा के सिद्धांत के खिलाफ मानता है। मुनि नीलेशचंद्र विजय का तर्क है कि दादर का कबूतरखाना 100 साल से अधिक पुराना है और यह केवल एक जगह नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र है। उन्होंने बीएमसी द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक स्थानों को भी अव्यावहारिक बताया था।</p>
<p dir="ltr">​<strong>आजाद मैदान में शुरू हुआ था आमरण अनशन</strong></p>
<p dir="ltr">​इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए मुनि नीलेशचंद्र विजय ने मुंबई के आजाद मैदान में आमरण अनशन (Indefinite Hunger Strike) शुरू कर दिया था। इस विरोध प्रदर्शन ने न सिर्फ मुंबई, बल्कि पूरे महाराष्ट्र में जैन समुदाय के बीच एक व्यापक हलचल पैदा कर दी थी।</p>
<p dir="ltr">​<strong>15 दिन का मिला समय, समाधान की उम्मीद</strong></p>
<p dir="ltr">​मंगलवार को सरकारी अधिकारियों और मुनि नीलेशचंद्र विजय के बीच कई दौर की बातचीत हुई। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने मुनि को आश्वासन दिया है कि अगले 15 दिनों के भीतर इस जटिल मुद्दे पर एक स्वीकार्य और स्थायी समाधान (acceptable solution) खोजने की दिशा में गंभीरता से काम किया जाएगा। इसी भरोसे पर, मुनि ने अस्थायी रूप से अपना अनशन समाप्त कर दिया है।</p>
<p dir="ltr">​यदि 15 दिनों की अवधि में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया जाता है या कोई हल नहीं निकलता है, तो जैन मुनि ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपना आंदोलन और भी बड़े स्तर पर दोबारा शुरू करेंगे। अब देखना यह है कि राज्य सरकार आस्था और जन स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाते हुए क्या रास्ता निकालती है।</p>
<p dir="ltr">​</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Nov 2025 14:46:51 +0530</pubDate>
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