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                <title>Sagar - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>भोपाल से कोटा 5 घंटे में, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा बुंदेलखंड, सागर, जयपुर-उदयपुर तक सीधी कनेक्टिविटी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कोटा जाने में अभी 8 से 9 घंटे का समय लगता है, लेकिन जल्द ही यह दूरी महज 4 से 5 घंटे में पूरी कर ली जाएगी. क्योंकि सागर कोटा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे दोनों शहरों की दूरी को कम कर देगा. यह हाईवे एमपी भोपाल और सागर को राजस्थान के कोटा, जयपुर और उदयपुर से सीधा कनेक्टिविटी देने वाला है. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51807/bhopal-to-kota-will-be-connected-to-delhi-mumbai-expressway-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/images---2026-09-12t123744.332.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>भोपाल : </strong>कोटा जाने में अभी 8 से 9 घंटे का समय लगता है, लेकिन जल्द ही यह दूरी महज 4 से 5 घंटे में पूरी कर ली जाएगी. क्योंकि सागर कोटा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे दोनों शहरों की दूरी को कम कर देगा. यह हाईवे एमपी भोपाल और सागर को राजस्थान के कोटा, जयपुर और उदयपुर से सीधा कनेक्टिविटी देने वाला है. 16000 हजार करोड़ की लागत से तैयार होने वाले इस प्रोजेक्ट का पूरा नाम कोटा-विदिशा-सागर एक्सप्रेसवे है. यह नया 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल एक्सप्रेसवे होगा, जिसकी खासियत यह है कि यह तीन बड़े कॉरिडोर से सीधा कनेक्ट होगा. जिससे मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बीच भी दूरियां अब और कम होने वाली हैं. यह कॉरिडोर मध्य भारत में कनेक्टिविटी और यात्रा को पूरी तरह से बदलने वाला है. </p>
<p> </p>
<p><strong>भोपाल से कोटा का सफर 5 घंटे में होगा </strong><br />सागर कोटा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के बनने से भोपाल और कोटा की दूरी में बड़ा बदलाव आएगा. अभी दोनों शहरों के बीच आने जाने के लिए नेशनल हाईवे-52 का इस्तेमाल होता है. दोनों शहरों के बीच की कुल दूरी 345 किलोमीटर होती है, जिसे तय करने में 8 से 9 घंटे तक समय लग जाता है. लेकिन नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर पूरी तरह से एक नए अलाइनमेंट रूट तैयार कर रहा है. जहां आप पहले भोपाल से सागर आएंगे और यहां से सीधे कोटा तक हाई स्पीड कनेक्टिविटी हो जाएगी. जहां गाड़ियों की रफ्तार 100 से 120 किलोमीटर रहेगी. इसे भोपाल के बाहरी हिस्से और भोपाल-बैरसिया रोड से सीधे कनेक्ट किया जाएगा, जिससे भोपाल से कोटा के बीच की दूरी लगभग 75 किलोमीटर तक कम भी होगी और ट्रैफिक का दवाब भी नहीं रहेगा. जिससे यात्रियों के पूरे 4 घंटे तक की बचत होगी. </p>
<p><strong>चार बड़े एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी</strong></p>
<p><strong>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे: </strong>यह प्रोजेक्ट राजस्थान के कोटा से सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होगा. </p>
<p><strong>भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: </strong>यह हाईवे सागर और विदिशा के बीच भोपाल-कानपुर एक्सप्रेसवे से इंटरकनेक्ट करेगा. </p>
<p><strong>लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे: </strong>इसके अलावा यह भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर से होते हुए यह चेन सीधे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से भी जुड़ जाएगी. </p>
<p><strong>चंबल एक्सप्रेसवे:</strong> सागर कोटा एक्सप्रेसवे कोटा क्षेत्र में बनने वाले नए इंटरचेंज के माध्यम से चंबल एक्सप्रेसवे से भी कनेक्ट होगा.</p>
<p><strong>एमपी-राजस्थान की हाईस्पीड कनेक्टिविटी</strong><br />यह एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच कनेक्टिविटी को और मजबूत करने वाला है. यह कॉरिडोर कोटा से शुरू होकर झालावाड़ और अकलेरा जैसे प्रमुख क्षेत्रों को कवर करेगा, इसके बाद यह एमपी में एंट्री करेगा और गुना जिले के चाचौड़ा और मकसूदनगढ़ से निकलेगा, यहां से बैरसिया, विदिशा और अंत में बुंदेलखंड के केंद्र सागर तक जाएगा.  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 12:39:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई: तानसा और मोदक सागर बांधों पर 100 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाएगी बीएमसी; सालाना 219 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होने की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मिडिल वैतरणा प्रोजेक्ट के बाद, बीएमसी अब तानसा और मोदक सागर बांधों पर 100 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाएगी। महात्मा फुले रिन्यूएबल एनर्जी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी लिमिटेड (महाप्रीत) द्वारा 25 सालों तक डेवलप और मेंटेन किए जाने वाले इस प्लांट से सालाना 219 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होने की उम्मीद है और इससे बीएमसी को सब्सिडाइज्ड बिजली के ज़रिए लगभग 165.51 करोड़ रुपये की बचत होगी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45064/mumbai-bmc-to-set-up-100-mw-floating-solar-power"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-10/download---2025-10-30t121647.709.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मिडिल वैतरणा प्रोजेक्ट के बाद, बीएमसी अब तानसा और मोदक सागर बांधों पर 100 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाएगी। महात्मा फुले रिन्यूएबल एनर्जी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी लिमिटेड (महाप्रीत) द्वारा 25 सालों तक डेवलप और मेंटेन किए जाने वाले इस प्लांट से सालाना 219 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होने की उम्मीद है और इससे बीएमसी को सब्सिडाइज्ड बिजली के ज़रिए लगभग 165.51 करोड़ रुपये की बचत होगी।</p>
<p> </p>
<p>बीएमसी और महाप्रीत के बीच समझौता कुछ महीने पहले महाप्रीत और सिविक अधिकारियों के बीच एक जॉइंट मीटिंग में यह तय हुआ था कि महाप्रीत 25 साल के “बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट, एंड ट्रांसफर” मॉडल के तहत तानसा और मोदक सागर में 100 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट डेवलप करेगा।</p>
<p>तानसा, मोदक सागर, विहार, तुलसी और पवई झीलों को कवर करने वाली एक बड़ी पहल के हिस्से के तौर पर, इस प्रोजेक्ट को महाप्रीत पूरी तरह से फंड करेगा, जिसकी अनुमानित लागत 546.07 करोड़ रुपये है। पैदा होने वाली बिजली एमएसईडीसीएल के इंफ्रास्ट्रक्चर के ज़रिए ओपन एक्सेस से सप्लाई की जाएगी और एमएसईडीसीएल गाइडलाइंस के मुताबिक, पीसे पंजरापुर और भांडुप कॉम्प्लेक्स जैसी ज़्यादा बिजली इस्तेमाल करने वाली जगहों को टैरिफ का फायदा मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 12:18:13 +0530</pubDate>
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