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                <title>asks - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई: बीएमसी पर सख्त हाईकोर्ट; पूछा - इंदौर साफ हो सकता है तो मुंबई क्यों नहीं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई की सफाई व्यवस्था पर सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब इंदौर लगातार सबसे स्वच्छ शहर बन सकता है तो मुंबई क्यों नहीं। अदालत ने बीएमसी को सड़कों से तुरंत कचरा हटाने, ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन कराने और वार्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर जुर्माना 200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये करने का सुझाव भी दिया। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50774/mumbai-high-court-came-down-hard-on-bmc-and-asked"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/1200-675-27155933-1055-27155933-1784123579205.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई की सफाई व्यवस्था पर सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब इंदौर लगातार सबसे स्वच्छ शहर बन सकता है तो मुंबई क्यों नहीं। अदालत ने बीएमसी को सड़कों से तुरंत कचरा हटाने, ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन कराने और वार्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर जुर्माना 200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये करने का सुझाव भी दिया। </p>
<p> </p>
<p><strong>क्या मुंबई में भी मोशी जैसा हादसा हो सकता है?</strong><br />अदालत ने पुणे जिले के मोशी में हाल ही में हुए कचरा संयंत्र भवन हादसे का भी जिक्र किया और कहा कि मुंबई में ऐसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि मुंबई में भी कचरे के बड़े-बड़े ढेर मौजूद हैं, इसलिए समय रहते प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।<br /><strong>किस मामले की सुनवाई के दौरान हुई यह टिप्पणी?</strong><br />न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की खंडपीठ उपनगर कांजुरमार्ग स्थित डंपिंग ग्राउंड के आसपास रहने वाले लोगों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में प्रदूषण, लगातार फैल रही दुर्गंध, गैस उत्सर्जन और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को लेकर चिंता जताई गई है।<br /><strong>मोशी हादसे में क्या हुआ था?</strong><br />अदालत ने 8 जुलाई को पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी इलाके में हुए हादसे का भी उल्लेख किया। भारी बारिश के बाद वर्षों से जमा अनुपचारित ठोस कचरे और औद्योगिक अपशिष्ट का विशाल ढेर अचानक खिसक गया और पास की दो मंजिला इमारत पर गिर पड़ा। इस दर्दनाक हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई थी।<br /><strong>हाईकोर्ट ने मुंबई को लेकर क्या चिंता जताई?</strong><br />खंडपीठ ने कहा कि मुंबई में भी कचरे के ऊंचे-ऊंचे ढेर हैं। यहां भी ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए। अदालत ने माना कि समस्या केवल नगर निगम की नहीं, बल्कि नागरिकों की भी है। इच्छाशक्ति की कमी के कारण शहर की सड़कों पर कचरा फैला रहता है, जिससे मानसून के दौरान जलभराव और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं।<br />नागरिकों को लेकर अदालत ने क्या कहा?<br />हाईकोर्ट ने कहा कि लोगों को भी जागरूक बनाने की जरूरत है ताकि वे सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फेंकें और घरों से निकलने वाले कचरे का अलग-अलग वर्गों में पृथक्करण (सेग्रिगेशन) करें। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मुंबई में किसी भी नागरिक को सार्वजनिक सड़क पर कचरा फेंकने की छूट नहीं है। <br />थूकने की आदत पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी क्यों?<br />अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी कड़ी नाराजगी जताई। खंडपीठ ने टिप्पणी की, 'हमारे देश में थूकना मानो राष्ट्रीय शौक बन गया है।' कोर्ट ने कहा कि थूकने पर वर्तमान 200 रुपये का जुर्माना बेहद कम है और इसे बढ़ाकर 2,000 रुपये किया जाना चाहिए ताकि लोगों में डर पैदा हो और इस आदत पर रोक लग सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 12:10:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : संजय निरुपम की परिवहन मंत्री को चिट्ठी, मराठी अनिवार्यता पर करें विचार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>शिवसेना नेता संजय निरुपम ने महाराष्ट्र सरकार के ‘रिक्शा व टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य’ करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को पत्र लिखकर इस निर्णय को वापस लेने की अपील की है। संजय निरुपम ने अपने पत्र में कहा कि 1 मई से लागू होने वाला यह फैसला हजारों मेहनतकश रिक्शा चालकों के बीच भय, भ्रम और असुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49445/mumbai-sanjay-nirupams-letter-to-transport-minister-consider-marathi-essentiality"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-24t103514.294.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> शिवसेना नेता संजय निरुपम ने महाराष्ट्र सरकार के ‘रिक्शा व टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य’ करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को पत्र लिखकर इस निर्णय को वापस लेने की अपील की है। संजय निरुपम ने अपने पत्र में कहा कि 1 मई से लागू होने वाला यह फैसला हजारों मेहनतकश रिक्शा चालकों के बीच भय, भ्रम और असुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा का सम्मान सभी के दिलों में है, लेकिन इसे अनिवार्य करना और इसके लिए परीक्षा लागू करना चालकों के जीवन और रोजगार पर नकारात्मक असर डाल सकता है।</p>
<p> </p>
<p>निरुपम ने मुंबई की बहुसांस्कृतिक पहचान का जिक्र करते हुए लिखा कि शहर में करीब 70 प्रतिशत से अधिक रिक्शा और टैक्सी चालक गुजरात, उत्तर भारत, पंजाब और दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों से आते हैं। उन्होंने अपनी मेहनत से यहां अपनी जगह बनाई है और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। ऐसे में यह फैसला उनके रोजगार पर संकट खड़ा कर सकता है और शहर की यातायात व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि उन्हें कई चालकों के फोन आ रहे हैं, जिनमें वे अपनी परेशानियां और भविष्य को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं। निरुपम के मुताबिक, चालकों के मन में बढ़ती असुरक्षा बेहद चिंताजनक है। उन्होंने पत्र में सरकार से आग्रह किया कि मराठी भाषा के सम्मान को बनाए रखते हुए, टूटी-फूटी या कामचलाऊ मराठी बोलने और समझने वाले चालकों को छूट दी जाए। साथ ही भाषा को अनिवार्य बनाने और परीक्षा लागू करने के फैसले पर पुनर्विचार कर इसे वापस लिया जाए। निरुपम ने कहा कि प्रेम से सिखाई गई भाषा दिल में बसती है, जबकि जबरन थोपी गई भाषा भय पैदा करती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ निर्णय लेगी।</p>
<p>वहीं, महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री का कहना है कि परिवहन विभाग पर ‘मराठी राजभाषा अधिनियम’ लागू होता है और नागरिकों के साथ संवाद करते समय चालकों के पास मराठी का कम से कम ‘कार्यसाधक ज्ञान’ होना आवश्यक है। कानून के प्रावधानों के आधार पर, नियमों में संशोधन किए जाएंगे और लाइसेंस, बैज तथा परमिट जारी करते या उनका नवीनीकरण करते समय मराठी ज्ञान की शर्त लागू की जाएगी। साथ ही, चालकों पर कोई अतिरिक्त बोझ डाले बिना उन वाक्यों और वाक्यांशों को सिखाने पर जोर दिया जाएगा जो उनके दैनिक कामकाज में उपयोगी होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 12:34:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नई दिल्ली : कांग्रेस सांसद को चुनाव आयोग का नोटिस, मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए पहचान साबित करने को कहा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दक्षिण गोवा के कांग्रेस सांसद विरियाटो फर्नांडिस को चुनाव आयोग ने नोटिस भेजकर मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए पहचान के सबूत मांगे हैं। सांसद ने इसे हैरान करने वाला बताया है। इस नोटिस ने ईसीआई की एसआईआर प्रक्रिया पर नई बहस छेड़ दी है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46839/election-commission-notice-to-new-delhi-congress-mp-asked-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-08t183307.672.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>दक्षिण गोवा के कांग्रेस सांसद विरियाटो फर्नांडिस को चुनाव आयोग ने नोटिस भेजकर मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए पहचान के सबूत मांगे हैं। सांसद ने इसे हैरान करने वाला बताया है। इस नोटिस ने ईसीआई की एसआईआर प्रक्रिया पर नई बहस छेड़ दी है।</p>
<p> </p>
<p><strong>नेता ने पोस्ट में लिखा?</strong><br />मामले को लेकर फर्नांडीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के एक पोस्ट में लिखा, "मुझे चुनाव आयोग (ईसीआई) से नोटिस मिला है जिसमें मुझसे मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए पहचान साबित करने वाले दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा गया है। यह नोटिस ऐसे समय में आया है जब ईसीआई ने 2024 के पिछले लोकसभा चुनावों में चुनाव लड़ने के लिए नाम स्वीकृत करने से पहले मेरे सहित सभी उम्मीदवार की कड़ी जांच की थी।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "संयोगवश, मैं 1989 से मतदान कर रहा हूं, जब मैं स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी की 18 वर्ष के युवाओं को मतदान का अधिकार देने की पहल के कारण मतदान के योग्य हुआ था। उन्होंने कहा भारतीय नौसेना में अपनी 26 वर्षों की सेवा के दौरान मैंने दूर-दराज के सैन्य पदों से कई बार सिर्फ अपना वोट डालने के लिए गोवा की यात्रा की। चाहे वह लोकसभा हो, विधानसभा हो, पंचायत हो या जिला चुनाव हो। </p>
<p><strong>लगाए गंभीर आरोप</strong><br />उन्होंने आगे कहा, "अगर एक सांसद को इस तरह की जांच से गुजरना पड़ सकता है, तो सोचिए आम आदमी का क्या हाल होगा। यह विपक्षी दलों और गैर सरकारी संगठनों/नागरिकों द्वारा ईसीआई के जरिए वैध मतदाताओं के नाम हटाने और उन्हें मतदान से रोकने के लिए एसआईआर के बारे में उठाई गई चिंताओं की पुष्टि करता है। उन्होंने कहा कई कोशिशों के बावजूद, राज्य चुनाव आयोग के अधिकारी इस मामले पर टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 18:35:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : राज्य चुनाव आयोग ने स्थानीय निकायों को विशेष अभियान चलाने को कहा </title>
                                    <description><![CDATA[<p>विपक्ष द्वारा मतदाता सूची में विसंगतियों के आरोप लगाए जाने के कुछ दिनों बाद, जिसमें कई वार्डों में नाम बार-बार दर्ज हैं, राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने स्थानीय निकायों को पत्र लिखकर ऐसे मतदाताओं की पहचान करने और यह सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष अभियान चलाने को कहा है कि वे केवल एक ही मतदान केंद्र पर मतदान करें। इसका मतलब है कि कई बार पंजीकृत मतदाताओं को एक मतदान केंद्र चुनना होगा और यह शपथ पत्र देना होगा कि वे किसी अन्य मतदान केंद्र पर मतदान नहीं करेंगे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45049/mumbai-state-election-commission-asks-local-bodies-to-run-special"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-10/download---2025-10-29t113349.441.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>विपक्ष द्वारा मतदाता सूची में विसंगतियों के आरोप लगाए जाने के कुछ दिनों बाद, जिसमें कई वार्डों में नाम बार-बार दर्ज हैं, राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने स्थानीय निकायों को पत्र लिखकर ऐसे मतदाताओं की पहचान करने और यह सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष अभियान चलाने को कहा है कि वे केवल एक ही मतदान केंद्र पर मतदान करें। इसका मतलब है कि कई बार पंजीकृत मतदाताओं को एक मतदान केंद्र चुनना होगा और यह शपथ पत्र देना होगा कि वे किसी अन्य मतदान केंद्र पर मतदान नहीं करेंगे।</p>
<p> </p>
<p>एसईसी ने अपने प्राथमिक आकलन में पाया है कि कई मतदाताओं, खासकर शहरी निकायों में, ने कई वार्डों में अपना पंजीकरण कराया है, और इस साल विशेष संक्षिप्त संशोधन के अभाव में, ये नाम अभी भी मौजूद हैं। विपक्षी दलों ने दो हफ्ते पहले एसईसी और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के साथ एक बैठक में मतदाता सूची की सफाई होने तक स्थानीय निकाय चुनाव स्थगित करने की मांग की थी। एसईसी के एक अधिकारी ने कहा, "ऐसे मतदाता हैं जिन्होंने विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में अपना पंजीकरण कराया है, लेकिन उन क्षेत्रों से अपना नाम नहीं हटाया है जहाँ वे अब नहीं रहते हैं।" हमारा सॉफ्टवेयर उन्हें पहचान सकता है। बूथ-स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) ऐसे मतदाताओं से मिलेंगे और उनसे पूछेंगे कि वे कहाँ मतदान करना चाहते हैं। उनकी पसंद के अनुसार, शेष वार्डों के अधिकारियों को फर्जी मतदान से बचने के लिए मतदाता की डुप्लिकेट प्रविष्टियों के बारे में सूचित किया जाएगा।</p>
<p>ऐसे मतदाताओं को 'मतदाता सूची की चिह्नित प्रति' में सूचित किया जाएगा, जिसका उल्लेख प्रत्येक बूथ के पीठासीन अधिकारी द्वारा किया जाता है। अधिकारी ने कहा, "जब ऐसे मतदाता मतदान केंद्र पर पहुँचेंगे, तो उनसे एक शपथ-पत्र देने के लिए कहा जाएगा कि वे अन्य बूथों पर मतदान नहीं करेंगे।" उन्होंने आगे कहा, "यदि ब्लॉक-स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को यह शपथ-पत्र पहले ही दे दिया गया है, तो मतदान केंद्र पर इसकी आवश्यकता नहीं होगी। स्थानीय निकायों को भी नियमों का उल्लंघन करने पर मतदाताओं और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।"</p>
<p>शहरी विकास विभाग के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि स्थानीय निकायों को तुरंत अभियान शुरू करना होगा ताकि वास्तविक मतदान से पहले यह पूरा हो जाए। उन्होंने कहा, "मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई जैसे बड़े शहरों में डुप्लिकेट मतदाताओं की समस्या ज़्यादा है।" "जनवरी में निगम चुनाव होने की उम्मीद है, इसलिए मशीनरी को मामले को सुधारने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।" अधिकारी ने कहा कि एकाधिक प्रविष्टियों की समस्या इसलिए थी क्योंकि इस वर्ष राज्य में कोई विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण ने मतदाता सूची से डुप्लिकेट मतदाताओं को हटाना सुनिश्चित किया, क्योंकि बीएलओ ने दिए गए पते पर मतदाताओं की मौजूदगी का सत्यापन किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Oct 2025 11:35:13 +0530</pubDate>
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