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                <title>boom - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>boom RSS Feed</description>
                
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                <title>मुंबई से बॉलीवुड तक था जलवा; कौन था असली मटका किंग? ओटीटी पर धूम </title>
                                    <description><![CDATA[<p>70 के दशक पूरे देश में एक अजीब से सट्टे के लिए पागल हो रहा था. तकरीबन हर कोई सट्टे पर पैसा लगा रहा था. मुंबई का मटका सट्टा. पहले एक ओपन नंबर निकलता था और फिर क्लोज. रकम दांव पर लगाने वालों को एक पर्ची मिलती थी. जिसमें उसके लगाए नंबर और दांव लगाई रकम लिखी होती थी. और कुछ नहीं. जीते तो 9 गुना रकम मिलती थी. देश में जिस जगह लैंडलाइन फोन था, वहां इस सट्टे का जलवा था. इसका किंग था रतन खत्री. बंटवारे में पाकिस्तान से उजड़ कर मुंबई आया एक नौजवान. सच में उसकी कहानी रंक से राजा बनने की जीती जागती मिसाल है. उसने हजारों करोड़ रुपए. बॉलीवुड में उसका जलवा था.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49359/there-was-magic-from-mumbai-to-bollywood-who-was-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-21t140448.169.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>70 के दशक पूरे देश में एक अजीब से सट्टे के लिए पागल हो रहा था. तकरीबन हर कोई सट्टे पर पैसा लगा रहा था. मुंबई का मटका सट्टा. पहले एक ओपन नंबर निकलता था और फिर क्लोज. रकम दांव पर लगाने वालों को एक पर्ची मिलती थी. जिसमें उसके लगाए नंबर और दांव लगाई रकम लिखी होती थी. और कुछ नहीं. जीते तो 9 गुना रकम मिलती थी. देश में जिस जगह लैंडलाइन फोन था, वहां इस सट्टे का जलवा था. इसका किंग था रतन खत्री. बंटवारे में पाकिस्तान से उजड़ कर मुंबई आया एक नौजवान. सच में उसकी कहानी रंक से राजा बनने की जीती जागती मिसाल है. उसने हजारों करोड़ रुपए. बॉलीवुड में उसका जलवा था.</p>
<p> </p>
<p>मटका किंग रतन खत्री की कहानी गजब की है. कैसे उसने ये सट्टा शुरू किया, कैसे भारत के सबसे बड़े अवैध जुआ साम्राज्य का संस्थापक बना. रतन खत्री 1960 के दशक में मुंबई में एक कपड़ा व्यापारी के यहां काम करता था. फिर वो एक सट्टा खिलाने वाले से जुड़ा. फिर अलग होकर अपना बड़ा एंपायर बनाया. </p>
<p><strong>बंटवारे में पाकिस्तान से मुंबई आया</strong><br />रतन खत्री का जन्म लगभग 1932 में कराची में एक सिंधी हिंदू परिवार में हुआ था. 1947 के विभाजन के समय वह परिवार के साथ मुंबई आ गया. तब वह किशोर ही था. खत्री ने टेक्सटाइल मिलों और बाजारों में काम शुरू किया. मुंबई में उस समय कपड़ा मिलों, कपास कारोबार का बोलबाला था. न्यू यॉर्क कॉटन एक्सचेंज से आने वाले भावों से रोज बाजार ऊपर नीचे होता था. लोग इन भावों पर भी दांव लगाते थे.   </p>
<p>साधारण जिंदगी के शुरुआती सालों में रतन खत्री मिल वर्करों और छोटे व्यापारियों के बीच घुल-मिल चुका था. वह बेशक कपड़ा बाजार में काम करता लेकिन जल्द ही कॉटन एक्सचेंज के नंबरों पर सट्टा लगाने लगा, तब बांबे में बहुत से लोग ऐसा करते थे. ये आंकड़ा जुआं कहलाता था. रतन की गिनती बुद्धि तेज थी. उन्हीं दिनों वो कल्याणजी भगत के संपर्क में आया, जो वर्ली मटका चलाता था. </p>
<p><strong>रिफ्यूजी से छोटा सट्टेबाज</strong><br />कल्याणजी ने मटका की शुरुआत की थी. वह मटका में ताश के सारे पत्तों को डालकर नंबर निकालता था. रतन उसके साथ काम करने लगे. अभी उसकी जिंदगी मामूली ही थी. ये कह सकते हैं कि ऱिफ्यूजी से वह छोटा सट्टेबाज बन गया था. <br />यूं शुरू हुआ मटका किंग बनने का सफर<br />1962 के आसपास जीवन में मोड़ आया. रतन के दोस्तों ने उससे अपना सिंडिकेट शुरू करने को कहा. कल्याणजी के साथ थोड़े मतभेद के बाद रतन ने 1964 में अपना ‘रतन मटका’ या ‘मेन बाजार मटका’ शुरू किया. बस यहीं से उसका ‘मटका किंग’ बनना का सफर शुरू हुआ. वह इस मामले में अलग था कि उसने इस खेल को पारदर्शी बनाया. पहले नंबर गुप्त तरीके से निकलते थे, रतन ने सार्वजनिक ड्रॉ शुरू किए. <br />कहा जाता है कि एक बार वो मुंबई पुलिस कमिश्नर के दफ्तर गया. क्राइम रिपोर्टरों को साथ लिया. ज़वेरी बाजार ले गया. वहां मटके में कार्ड डाले गए, तीन नंबर निकाले गए. रिपोर्टरों ने खुद कार्ड निकाले. यह तरीका तुरंत हिट हो गया. लोग विश्वास करने लगे -‘रतन मटका’ में धांधली नहीं होती. उसने दो चीजें जोड़ीं – समय की पाबंदी और भरोसा. सुबह-शाम दो ड्रॉ, फोन से नंबर पूरे मुंबई, गुजरात, यहां तक कि दुबई-लंदन तक पहुंचाए जाते थे. टेलीफोन लाइन जहां जाती, मटका सट्टा कारोबार वहां फैल जाता. </p>
<p><strong>70 के दशक में रोजाना एक करोड़ रु का टर्नओवर</strong><br />1970 के दशक तक रोजाना टर्नओवर एक करोड़ रुपये तक पहुंच गया. गरीब मिल मजदूर से लेकर अमीर व्यापारी, फिल्मी हस्तियां और नेता तक सब दांव लगाते. रतन ने मटका को एलीट क्लब से आम आदमी का खेल बना दिया. <br />रतन ने अपनी निजी जिंदगी को जुए के कारोबार से अलग रखा. इसी वजह से पब्लिक डोमेन में उसके परिवार, शादी और बच्चों का कोई जिक्र नहीं मिलता. रतन की जिंदगी मुख्य तौर पर नंबर्स, कारोबार और मुंबई की अंडरवर्ल्ड की थी. </p>
<p><strong>फिल्म भी बनाई</strong><br />कारोबार फैलने के साथ रतन ने फिल्मों में भी कदम रखा. 1976 में उसने रंगीला रतन फिल्म प्रोड्यूस की, जिसमें ऋषि कपूर, परवीन बाबी और अशोक कुमार थे. रतन ने खुद छोटा रोल किया. ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा खुल्लम खुल्ला में लिखा कि रतन कभी-कभी उन्हें या अशोक कुमार को फोन करके कार्ड चुनने को कहते. वह नंबर मुंबई में ‘लकी नंबर’ बन जाता. यह उसका बॉलीवुड कनेक्शन था. </p>
<p><strong>क्यों बंद किया मटका सट्टा धंधा</strong><br />1975-77 की इमरजेंसी के दौरान रतन को 19 महीने जेल हुई. जेल से निकलकर वो फिर सक्रिय हुआ. लेकिन 1990 के दशक में पुलिस छापे, राज्य लॉटरी और अन्य सट्टेबाजी के विकल्पों ने मटका को कमजोर किया. 1993 में आखिरी तूफान आया. वो परिवार के साथ लंदन छुट्टी मनाने जा रहा था. जब वो एयरपोर्ट पहुंचा तो पता लगा कि उसका नाम नो-फ्लाई लिस्ट में डाल दिया गया. परिवार और लोगों के सामने उसकी बहुत बेइज्जती हुई. बस इसके बाद उसने मटका बंद करने का फैसला किया. बाद में महालक्ष्मी रेसकोर्स पर घोड़ों पर छोटे-मोटे दांव लगाता रहा. </p>
<p><strong>फिल्म फाइनेंशिंग और डिस्ट्रीब्यूशन</strong><br />1990 के दशक में रतन ने फिल्म फाइनेंशिंग और डिस्ट्रीब्यूशन में हाथ आजमाया, लेकिन मुख्य कारोबार खत्म हो चुका था. 9 मई 2020 को 88 साल की उम्र में मुंबई में घर में हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 14:05:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट में वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में भारी उछाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट में वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में भारी उछाल दर्ज किया गया है और ऑफिस लीजिंग लगातार छठी तिमाही में सप्लाई से अधिक रही है. यह जानकारी आई एक रिपोर्ट में दी गई. नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 की तीसरी तिमाही में नेट लीजिंग पिछले वर्ष की तुलना में 31 प्रतिशत बढ़कर 15.9 मिलियन वर्ग फुट हो गई, जबकि निर्माण कार्य पूरा होने की दर पिछले वर्ष की तुलना में 44 प्रतिशत बढ़कर 13.6 मिलियन वर्ग फुट हो गई. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44775/mumbai--commercial-real-estate-market-to-witness-massive-boom-in-the-third-quarter-of-2025"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-10/images---2025-10-18t114652.130.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट में वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में भारी उछाल दर्ज किया गया है और ऑफिस लीजिंग लगातार छठी तिमाही में सप्लाई से अधिक रही है. यह जानकारी आई एक रिपोर्ट में दी गई. नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 की तीसरी तिमाही में नेट लीजिंग पिछले वर्ष की तुलना में 31 प्रतिशत बढ़कर 15.9 मिलियन वर्ग फुट हो गई, जबकि निर्माण कार्य पूरा होने की दर पिछले वर्ष की तुलना में 44 प्रतिशत बढ़कर 13.6 मिलियन वर्ग फुट हो गई. </p>
<p> </p>
<p><strong>14.2 फीसदी रही रिक्तियों की दर</strong><br />निर्माण कार्य पूरा होने के कारण रिक्तियों की दर 14.2 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 240 आधार अंकों की गिरावट और पिछली तिमाही की तुलना में 60 आधार अंकों की गिरावट को दर्शाता है. नुवामा ने वर्ष 2025-26 में सालाना 50-54 मिलियन वर्ग फुट निर्माण कार्य पूरा होने का अनुमान लगाया है, हालांकि कुछ प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाया जा सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यम अवधि में रिक्तियों के स्तर में मामूली गिरावट आने की संभावना है, जबकि वार्षिक किराये में वृद्धि में तेजी आने की उम्मीद है. </p>
<p><strong>22.3 मिलियन वर्ग फुट ग्रॉस लीजिंग</strong><br />ग्रॉस लीजिंग क्रमिक रूप से 5 प्रतिशत बढ़कर 22.3 मिलियन वर्ग फुट हो गई, जो लगातार आठवीं तिमाही है जिसमें अब्सॉर्प्शन 20 मिलियन वर्ग फुट या उससे अधिक रहा. सभी प्रमुख शहरों में किराए में वृद्धि हुई, जो डेवलपर्स और मकान मालिकों की बढ़ती मूल्य निर्धारण शक्ति को दर्शाता है. बेंगलुरु में रिक्तियों का स्तर सबसे कम 9.2 प्रतिशत रहा, जबकि हैदराबाद में 22 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक रहा. मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में रिक्तियों में 10.6 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जो 2015 के बाद से सबसे कम है. </p>
<p><strong>टेक सेक्टर में सबसे ज्यादा लीजिंग</strong><br />रिपोर्ट के मुताबिक एनसीआर क्षेत्र में 2012 के बाद से सबसे कम रिक्तियों की दर 20.2 प्रतिशत दर्ज की गई. टेक्नोलॉजी सेक्टर ने लीजिंग में 31 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हुए लीजिंग एक्टिविटी पर हावी रहा, इसके बाद वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) का स्थान रहा, जिसने तिमाही के दौरान ग्रॉस लीजिंग में 38 प्रतिशत का योगदान दिया. जीसीसी एक्टिविटी में बेंगलुरु सबसे आगे रहा, जहां लगभग 38 प्रतिशत लेनदेन हुए. हालांकि घरेलू ऑक्यूपायर्स की हिस्सेदारी दूसरी तिमाही के 52 प्रतिशत से थोड़ी कम होकर तीसरी तिमाही में 46 प्रतिशत रह गई, लेकिन बहुराष्ट्रीय और वैश्विक क्षमता केंद्रों से मांग मजबूत बनी रही. </p>
<p>ब्रोकरेज का कहना है कि आर्थिक रूप से मजबूत डेवलपर्स अपनी मार्केट पॉजिशन को कंसोलिडेट कर रहे हैं क्योंकि कमजोर प्लेयर्स अपनी हिस्सेदारी खो रहे हैं. नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने कहा कि बड़े रेंटल पोर्टफोलियो वाले डेवलपर्स इस मजबूत ऑफिस स्पेस मांग का लाभ उठाने की सबसे अच्छी स्थिति में हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Oct 2025 11:47:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्‍ली : दीपावली से खिला कारोबार, बाजारों में उमड़ी रौनक... कारोबार 5 लाख करोड़ के पार पहुंचने की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश के बाजारों में इस बार दीपावली की रौनक कुछ अलग ही है. दुकानों में खरीदारों की भीड़ है, गलियों में ट्रैफिक बढ़ गया है और हर तरफ उत्साह का माहौल है. छोटे कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक, हर जगह लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं. व्यापारियों के मुताबिक, इस बार का त्योहारी सीजन बीते कई सालों की तुलना में ज्यादा चमकदार साबित हो रहा है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44731/new-delhi-diwali-brings-excitement-in-business-markets-business-expected"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-10/download---2025-10-16t194922.387.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्‍ली : </strong>देश के बाजारों में इस बार दीपावली की रौनक कुछ अलग ही है. दुकानों में खरीदारों की भीड़ है, गलियों में ट्रैफिक बढ़ गया है और हर तरफ उत्साह का माहौल है. छोटे कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक, हर जगह लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं. व्यापारियों के मुताबिक, इस बार का त्योहारी सीजन बीते कई सालों की तुलना में ज्यादा चमकदार साबित हो रहा है.</p>
<p> </p>
<p><strong>बड़े शहरों से लेकर कस्बों तक भीड़ का नजारा</strong><br />दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद, लखनऊ, भोपाल, इंदौर, पटना, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में बाजारों की हालत यह है कि शाम होते-होते पैर रखने की जगह नहीं बचती. दुकानदार लगातार ग्राहकों की सेवा में जुटे हैं. वहीं छोटे कस्बों और टाउन मार्केट्स में भी लोगों का उत्साह देखने लायक है. कई दुकानों में तो सामान खत्म होने की नौबत आ चुकी है.</p>
<p><strong>मोदी की ‘वोकल फॉर लोकल’ अपील से बढ़ी स्वदेशी चीजों की बिक्री</strong><br />कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि पीएम मोदी की “वोकल फॉर लोकल” अपील ने इस बार दीपावली के कारोबार में नई जान डाल दी है. खंडेलवाल के मुताबिक, सरकार द्वारा जीएसटी दरों में की गई कटौती और स्वदेशी उत्पादों के प्रचार ने लोगों की सोच बदली है. लोग अब विदेशी चीजों के बजाय देश में बने उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं. इससे ऑनलाइन और विदेशी कंपनियों की बिक्री को झटका लगा है.</p>
<p><strong>कारोबार का आंकड़ा छू सकता है 5 लाख करोड़ रुपये</strong><br />कैट का अनुमान है कि इस बार दीपावली सीजन में कुल व्यापार ₹5 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता है. पहले जहां अनुमान 4.75 लाख करोड़ का था, वहीं अब उम्मीद है कि यह आंकड़ा उससे कहीं आगे जाएगा. सिर्फ पारंपरिक बाजार ही नहीं, बल्कि इवेंट मैनेजमेंट, गिफ्ट पैकिंग, टैक्सी सर्विस, डेकोरेशन, मिठाइयों, फूलों, आतिशबाजी और ऑर्केस्ट्रा कलाकारों से जुड़े कारोबार में भी इस बार जबरदस्त बढ़त की संभावना जताई जा रही है.</p>
<p><strong>दीए से लेकर मोबाइल तक– हर चीज की भारी मांग</strong><br />बाजारों में मिट्टी के दीए, रंगीन कैंडल्स, झालरें, पारंपरिक सजावट की वस्तुएं, सूखे मेवे, उपहार पैक, भारतीय परिधान, सोने-चांदी के गहने, मोबाइल और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक सामान की बिक्री अपने चरम पर है. दुकानदारों का कहना है कि “मेड इन इंडिया” सामान की बिक्री बढ़ी है और ग्राहक अब स्थानीय उत्पादों को ज़्यादा तवज्जो दे रहे हैं. इससे देश के छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बड़ा फायदा हो रहा है.</p>
<p>त्योहारों का सिलसिला अब भी जारी रहेगा. दीपावली के साथ ही त्योहारों की श्रृंखला अभी खत्म नहीं हुई है. 18 अक्टूबर को धनतेरस, 19 को नरक चतुर्दशी, 20 को दीपावली, 22 को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव, 23 को भैया दूज, 27–28 को छठ पूजा और 2 नवंबर को तुलसी विवाह के साथ त्योहारों का यह दौर आगे बढ़ेगा. हर राज्य और क्षेत्र में इन पर्वों को लेकर अलग-अलग तैयारियां चल रही हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Oct 2025 19:51:11 +0530</pubDate>
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