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                <title>मुंबई : लोकल ट्रेन हत्या मामला: जीआरपी ने 12 घंटे में 247 पेज की चार्जशीट दाखिल की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बोरीवली जीआरपी ने एक तेज कार्रवाई करते हुए बुधवार को बोरीवली कोर्ट में 27 वर्षीय मजदूर के खिलाफ 247 पेज की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट उस मामले में है जिसमें भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेन में एक प्रोफेसर की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने यह चार्जशीट घटना के महज 12 घंटे के भीतर तैयार कर ली थी। यह मामला चर्चगेट से बोरीवली जाने वाली लोकल ट्रेन का है, जिसमें एनएम कॉलेज के प्रोफेसर आलोक सिंह पर हमला किया गया था। जांच के अनुसार, घटना मलाड के पास सीट को लेकर हुए विवाद के बाद हुई थी, जो बाद में हिंसक झगड़े में बदल गया। आरोपी की पहचान ओमकार शिंदे (27) के रूप में हुई है, जो पेशे से मजदूर बताया जा रहा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49268/mumbai-local-train-murder-case-grp-filed-247-page-charge"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/malad-train-killer.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बोरीवली जीआरपी ने एक तेज कार्रवाई करते हुए बुधवार को बोरीवली कोर्ट में 27 वर्षीय मजदूर के खिलाफ 247 पेज की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट उस मामले में है जिसमें भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेन में एक प्रोफेसर की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने यह चार्जशीट घटना के महज 12 घंटे के भीतर तैयार कर ली थी। यह मामला चर्चगेट से बोरीवली जाने वाली लोकल ट्रेन का है, जिसमें एनएम कॉलेज के प्रोफेसर आलोक सिंह पर हमला किया गया था। जांच के अनुसार, घटना मलाड के पास सीट को लेकर हुए विवाद के बाद हुई थी, जो बाद में हिंसक झगड़े में बदल गया। आरोपी की पहचान ओमकार शिंदे (27) के रूप में हुई है, जो पेशे से मजदूर बताया जा रहा है।</p>
<p> </p>
<p>पुलिस जांच में तेजी लाते हुए कुल 63 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। इनमें वे चश्मदीद भी शामिल हैं जिन्होंने कथित रूप से आरोपी को ट्रेन के अंदर हमला करते देखा था। इन गवाहों के बयान केस को मजबूत करने में अहम साबित हुए हैं। जांच टीम ने गवाहों की पहचान और घटनाक्रम की पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज और फेशियल रिकग्निशन तकनीक का भी उपयोग किया। पुलिस के अनुसार, घटनास्थल और आसपास के रूट पर लगे कैमरों से प्राप्त फुटेज का विश्लेषण किया गया, जिससे आरोपी की गतिविधियों की पुष्टि करने में मदद मिली। इसके साथ ही तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की लोकेशन और मूवमेंट को भी ट्रैक किया गया।फोरेंसिक रिपोर्ट ने भी मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<p>रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि घटना में इस्तेमाल किए गए हथियार और आरोपी के कपड़ों पर मिले खून के धब्बे पीड़ित प्रोफेसर आलोक सिंह के रक्त से मेल खाते हैं। इस वैज्ञानिक साक्ष्य ने जांच को और मजबूत आधार प्रदान किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला लोकल ट्रेन जैसे भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच एजेंसियों ने कहा है कि घटना के हर पहलू की विस्तृत जांच की गई है और सभी डिजिटल तथा भौतिक साक्ष्यों को चार्जशीट में शामिल किया गया है।</p>
<p>जीआरपी ने बताया कि इतनी कम अवधि में चार्जशीट दाखिल करना जांच में तेजी और उपलब्ध साक्ष्यों की स्पष्टता को दर्शाता है। मामले की आगे की सुनवाई अब बोरीवली कोर्ट में होगी, जहां आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह घटना मुंबई लोकल ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर नए सिरे से सवाल उठे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 17:44:21 +0530</pubDate>
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                <title>मुंबई : फर्जी भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर वैज्ञानिक मामले में 689 पन्नों की चार्जशीट दाखिल </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई क्राइम ब्रांच ने फर्जी भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) वैज्ञानिक मामले में 689 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। क्राइम ब्रांच के सूत्रों ने बताया कि उन्होंने मुख्य आरोपी अख्तर कुतुबुद्दीन हुसैनी, जिसने खुद को BARC वैज्ञानिक बताया था, और सह-आरोपी मुनाज़िर नाज़िमुद्दीन खान, जिसने उसे तीन पासपोर्ट सहित दस्तावेज़ों में हेराफेरी करने में मदद की थी, के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46236/689-page-charge-sheet-filed-in-mumbai-fake-bhabha-atomic"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/download---2025-12-16t104352.056.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई क्राइम ब्रांच ने फर्जी भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) वैज्ञानिक मामले में 689 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। क्राइम ब्रांच के सूत्रों ने बताया कि उन्होंने मुख्य आरोपी अख्तर कुतुबुद्दीन हुसैनी, जिसने खुद को BARC वैज्ञानिक बताया था, और सह-आरोपी मुनाज़िर नाज़िमुद्दीन खान, जिसने उसे तीन पासपोर्ट सहित दस्तावेज़ों में हेराफेरी करने में मदद की थी, के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।</p>
<p> </p>
<p>पुलिस ने बताया कि उन्होंने BARC का एक पत्र भी अटैच किया है, जो उनके इस मामले का समर्थन करता है कि हुसैनी का संस्थान से कोई लेना-देना नहीं था।क्राइम ब्रांच ने फर्जी BARC वैज्ञानिक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कीचार्जशीट भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 319 (पहचान बदलकर धोखाधड़ी), 336 (जालसाजी), 337 (अदालत या सार्वजनिक रजिस्टर आदि के रिकॉर्ड की जालसाजी), 338 (कीमती सुरक्षा, वसीयत और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी), 339 (जाली दस्तावेज़ रखना) और 340 (जाली दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को असली के रूप में इस्तेमाल करना) के तहत दाखिल की गई है। </p>
<p>वर्सावा निवासी हुसैनी उर्फ ​​अलेक्जेंडर पामर, जो एक संदिग्ध जासूसी रैकेट में मुख्य आरोपी है, को मुंबई पुलिस ने 17 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। 60 वर्षीय व्यक्ति भारत की प्रमुख परमाणु सुविधा, BARC के जाली पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर रहा था। उसके पास से दो जाली पहचान पत्र बरामद किए गए, एक पर 'अलेक्जेंडर पामर' और दूसरे पर 'अली रज़ा होसैनी' नाम लिखा था।हुसैनी की फर्जी पहचान को जाली शैक्षणिक डिग्रियों और एक जाली पासपोर्ट, आधार कार्ड और पैन कार्ड से पुख्ता किया गया था। ये दस्तावेज़ उसके एक सहयोगी, जमशेदपुर निवासी 34 वर्षीय मुनाज़िर नाज़िमुद्दीन खान ने 2016-17 में बनाए थे। खान को 25 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। </p>
<p>एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "जब क्राइम ब्रांच के अधिकारी हुसैनी से पूछताछ कर रहे थे, तो उसने उन्हें बताया कि उसके पिता कुतुबुद्दीन हुसैनी, मां नूर जहां हुसैनी और उसके भाई आसिफ, आरिफ और आदिल हुसैनी सभी मर चुके हैं।" उसके मुताबिक, आसिफ की मौत सऊदी अरब के दम्माम में, आरिफ की प्रयागराज में और आदिल की जमशेदपुर में हुई थी। यह बात खान ने भी कही थी। हालांकि, कुछ दिनों बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आदिल को उसके सीमापुरी वाले घर से पकड़ लिया, जिससे हुसैनी का बयान झूठा साबित हुआ।पुलिस ने बताया कि आदिल मूल रूप से झारखंड के टाटा नगर का रहने वाला था, कई सालों से दिल्ली में रह रहा था और पाकिस्तान और मिडिल ईस्ट की कई यात्राएं कर चुका था। वे जमशेदपुर के मोहम्मद इलियास मोहम्मद इस्माइल की तलाश कर रहे हैं, जिसने खान को हुसैनी के जाली दस्तावेज़ बनाने में मदद की थी।जांचकर्ताओं ने बताया कि हुसैनी को फिजिक्स और जासूसी में दिलचस्पी थी, और उसे खुद को सीक्रेट एजेंट या न्यूक्लियर एक्सपर्ट बताना पसंद था।</p>
<p>उन्होंने बताया कि उसने मिडिल ईस्ट में तेल और मार्केटिंग फर्मों में काम किया था, और 2004 में उसे दुबई से डिपोर्ट कर दिया गया था। उस समय, हुसैनी पर भारत के बारे में "संवेदनशील जानकारी" बेचने की कोशिश करने का आरोप लगा था। हालांकि, पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) की जांच में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला।हुसैनी अपने नकली वैज्ञानिक वाले रूप का इस्तेमाल विदेशी नागरिकों से मिलने, विदेश यात्रा करने और कथित तौर पर गोपनीय सामग्री तक पहुंच होने का दावा करके पैसे लेने के लिए करता था। उसके पास से नक्शे और अन्य संदिग्ध दस्तावेज़ बरामद किए गए हैं।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 10:44:49 +0530</pubDate>
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                <title>मुंबई : जीशान सिद्दीकी और रिंकू सिंह को धमकी मामले में बड़ा खुलासा; 90 पन्नों की चार्जशीट दायर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई क्राइम ब्रांच ने दिवंगत एनसीपी नेता और पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान सिद्दीकी और क्रिकेटर रिंकू सिंह को धमकी देने वाले मामले में बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में आरोपी मोहम्मद दिलशाद नौशाद को त्रिनिदाद और टोबैगो से प्रत्यर्पित किया गया है। नौशाद ने अंडरवर्ल्ड के नाम पर धमकी भरे ईमेल भेजे थे। क्राइम ब्रांच की एंटी एक्सटॉर्शन सेल ने इस मामले में 90 पन्नों की चार्जशीट दायर की है, जिसमें 8 गवाहों के बयान शामिल हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपी के ईमेल की जांच के दौरान पता चला कि उसने ज़ीशान सिद्दीकी और रिंकू सिंह के अलावा एक बड़े विदेशी व्यापारी को भी धमकी दी थी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44552/mumbai-big-revelation-in-threat-case-to-zeeshan-siddiqui-and"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-10/download---2025-10-10t111419.469.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई क्राइम ब्रांच ने दिवंगत एनसीपी नेता और पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान सिद्दीकी और क्रिकेटर रिंकू सिंह को धमकी देने वाले मामले में बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में आरोपी मोहम्मद दिलशाद नौशाद को त्रिनिदाद और टोबैगो से प्रत्यर्पित किया गया है। नौशाद ने अंडरवर्ल्ड के नाम पर धमकी भरे ईमेल भेजे थे। क्राइम ब्रांच की एंटी एक्सटॉर्शन सेल ने इस मामले में 90 पन्नों की चार्जशीट दायर की है, जिसमें 8 गवाहों के बयान शामिल हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपी के ईमेल की जांच के दौरान पता चला कि उसने ज़ीशान सिद्दीकी और रिंकू सिंह के अलावा एक बड़े विदेशी व्यापारी को भी धमकी दी थी। जांच में सामने आया कि नौशाद ने फरवरी 2025 में रिंकू सिंह को ईमेल भेजकर पहले आर्थिक मदद मांगी थी। जवाब न मिलने पर उसने अंडरवर्ल्ड के नाम का इस्तेमाल कर धमकी भरे ईमेल भेजे और करोड़ों रुपये की उगाही की मांग की। रिंकू सिंह के दो इवेंट मैनेजरों के बयान अगस्त में दर्ज किए गए।</p>
<p> </p>
<p>एक मैनेजर ने बताया कि रिंकू के नाम पर कई ईमेल आते हैं, जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण नहीं होते। नौशाद का धमकी भरा ईमेल तब सामने आया जब पुलिस ने इसकी जानकारी दी। वहीं, ज़ीशान सिद्दीकी ने अप्रैल में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें 19 से 21 अप्रैल के बीच धमकी भरे ईमेल मिले। इनमें डी-कंपनी का नाम इस्तेमाल कर 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई थी। ईमेल में लिखा था कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उनका अंजाम उनके पिता बाबा सिद्दीकी जैसा होगा। आरोपी ने यह भी दावा किया कि बाबा सिद्दीकी की हत्या से लॉरेंस बिश्नोई का कोई संबंध नहीं है, जिससे पुलिस जांच को गुमराह करने की कोशिश की गई। </p>
<p>मुंबई क्राइम ब्रांच ने इंटरपोल के जरिए लुकआउट सर्कुलर जारी किया और आरोपी को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि नौशाद ने कई लोगों को निशाना बनाया था। क्राइम ब्रांच अब इस मामले में गहन जांच कर रही है ताकि अन्य संभावित पीड़ितों का पता लगाया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/44552/mumbai-big-revelation-in-threat-case-to-zeeshan-siddiqui-and</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Oct 2025 11:15:56 +0530</pubDate>
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