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                <title>writes - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई : चीनी के बढ़ते दाम पर महाराष्ट्र सरकार का कदम, केंद्र को लिखा पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p>चीनी की कीमतें बढ़ने से आमजनों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। साथ ही सियासी घमाशान भी मचने के आसार हैं। इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि खाने व कर्मशियल उपयोग के लिए चीनी की कीमतें अलग-अलग रखी जाएं। चीनी की बढ़ी कीमतों का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। त्योहारों के मौसम में चीनी की बढ़ती कीमतों की वजह से आम ग्राहकों का घरेलू बजट लडखड़ा गया है। क्योंकि 50 रुपये प्रति किलो मिलने वाली चीनी सीधे 65 से 70 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51545/maharashtra-governments-action-on-rising-sugar-prices-letter-written-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-25t122101.564.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>चीनी की कीमतें बढ़ने से आमजनों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। साथ ही सियासी घमाशान भी मचने के आसार हैं। इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि खाने व कर्मशियल उपयोग के लिए चीनी की कीमतें अलग-अलग रखी जाएं। चीनी की बढ़ी कीमतों का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। त्योहारों के मौसम में चीनी की बढ़ती कीमतों की वजह से आम ग्राहकों का घरेलू बजट लडखड़ा गया है। क्योंकि 50 रुपये प्रति किलो मिलने वाली चीनी सीधे 65 से 70 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है।</p>
<p> </p>
<p>सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि खाने के लिए चीनी का कोटा और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए चीनी का कोटा अलग-अलग होना चाहिए। खाने की चीनी की कीमतें कम होनी चाहिए। गन्ने की एफआरपी और चीनी के एमएसपी को जोड़ना होगा. तभी उत्पादक बचेंगे और गन्ना किसानों को कीमत मिलेगी।</p>
<p>सहकारिता मंत्री पाटिल के मुताबिक चाय और खाने के लिए 10 फीसदी चीनी इस्तेमाल होती है। जबकि बिस्कुट, कोल्ड ड्रिंक्स और दूसरे कमर्शियल कामों के लिए बड़ी मात्रा में चीनी की जरूरत होती है। इसलिए केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें मांग की गई है कि आम जनता को जितनी चीनी की आवश्यकता होती है, उसका कोटा अलग रखा जाए और उसकी कीमतें अलग रखी जाएं। केंद्र सरकार चीनी इंपोर्ट की योजना भी बना रही है, ताकि त्योहारी सीजन में लोगों को राहत मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 12:21:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई ओपन स्पेस पॉलिसी पर देरी, बीजेपी  कॉर्पोरेटर ने बीएमसी को लिखा पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बृहन्मुंबई महानगरपालिका की ओपन स्पेस पॉलिसी को अंतिम रूप देने में हो रही देरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यह नीति वर्ष 2016 से लंबित है। इसी मुद्दे को लेकर कोलाबा से बीजेपी कॉर्पोरेटर मकरंद नार्वेकर ने लोकल एएलएम (एडवांस्ड लोकैलिटी मैनेजमेंट) ग्रुप्स के साथ मिलकर बीएमसी  को पत्र लिखा है और जल्द निर्णय लेने की मांग की है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49353/delay-on-mumbai-open-space-policy-bjp-corporator-writes-letter"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-20t165349.226.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बृहन्मुंबई महानगरपालिका की ओपन स्पेस पॉलिसी को अंतिम रूप देने में हो रही देरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यह नीति वर्ष 2016 से लंबित है। इसी मुद्दे को लेकर कोलाबा से बीजेपी कॉर्पोरेटर मकरंद नार्वेकर ने लोकल एएलएम (एडवांस्ड लोकैलिटी मैनेजमेंट) ग्रुप्स के साथ मिलकर बीएमसी  को पत्र लिखा है और जल्द निर्णय लेने की मांग की है। अपने पत्र में मकरंद नार्वेकर ने मेयर रितु तावड़े और बीएमसी चीफ अश्विनी भिड़े को संबोधित करते हुए कहा है कि शहर में ओपन स्पेस से जुड़ी नीति लंबे समय से अधर में है, जिसके कारण मुंबई के सीमित होते खुले स्थानों पर अतिक्रमण और गलत उपयोग की समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि औपचारिक नीति के अभाव में गार्डन और सार्वजनिक खुले स्थानों का सही प्रबंधन नहीं हो पा रहा है।</p>
<p> </p>
<p>इस मांग में कई स्थानीय एएलएम समूह भी शामिल हैं, जिनमें माई ड्रीम कोलाबा, कोलाबा एडवांस्ड लोकैलिटी मैनेजमेंट, ओल्ड कफ परेड रेजिडेंट्स एसोसिएशन और स्ट्रैंड मार्ग रेजिडेंट्स एसोसिएशन शामिल हैं। इन समूहों का कहना है कि ओपन स्पेस को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने के लिए एक स्पष्ट नीति बेहद जरूरी है। पत्र में कई सुझाव भी दिए गए हैं, जिनमें ओपन स्पेस के लिए एक समर्पित मोबाइल एप्लीकेशन विकसित करना शामिल है, ताकि नागरिक आसानी से पार्क और सार्वजनिक स्थानों की जानकारी और स्थिति की रिपोर्ट कर सकें। इसके अलावा एक संयुक्त वॉचडॉग कमेटी बनाने की मांग की गई है, जो ओपन स्पेस के उपयोग और संरक्षण पर नजर रखे। </p>
<p>एक अन्य महत्वपूर्ण सुझाव यह है कि हर प्रशासनिक वार्ड में केवल महिलाओं के लिए विशेष गार्डन बनाए जाएं, जिससे महिलाओं के लिए सुरक्षित और समर्पित सार्वजनिक स्थान उपलब्ध हो सकें। कॉर्पोरेटर का कहना है कि मुंबई में ओपन स्पेस पहले से ही सीमित हैं और यदि समय पर नीति लागू नहीं की गई तो इन स्थानों पर और अधिक अतिक्रमण होने की संभावना है।</p>
<p>उन्होंने जोर दिया कि शहर के सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित रखना और उनका सही उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। स्थानीय निवासियों और एएलएम समूहों ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा है कि लंबे समय से नीति न होने के कारण कई गार्डन और ओपन स्पेस अव्यवस्थित स्थिति में हैं। अब देखना होगा कि बीएमसी इस प्रस्ताव पर कब तक कोई ठोस कदम उठाती है और लंबित ओपन स्पेस पॉलिसी को अंतिम रूप देती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 16:54:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : जेल में पॉक्सो के कैदी ने महात्मा गांधी के विचार पढ़े, लिखा निबंध, बॉम्बे हाई कोर्ट ने घटाई सजा </title>
                                    <description><![CDATA[<div>बॉम्बे हाई कोर्ट ने पॉक्सो के मामले में दोषी एक युवक की सजा को लेकर नरम रुख अपनाया है, क्योंकि उसने जेल में रहते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों का अध्ययन किया था। युवक को इस मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई थी, जिसे कोर्ट ने घटाकर 12 साल कर दिया है। पॉक्सो कानून के तहत बच्चों के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले आते हैं। विशेष अदालत ने युवक को पड़ोस में रहने वाली चार साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया था। </div>
<div> </div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47637/pocso-prisoner-read-the-thoughts-of-mahatma-gandhi-and-wrote"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/750x450_415006-374596-prison-jail-prisoner.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मुंबई : </strong>बॉम्बे हाई कोर्ट ने पॉक्सो के मामले में दोषी एक युवक की सजा को लेकर नरम रुख अपनाया है, क्योंकि उसने जेल में रहते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों का अध्ययन किया था। युवक को इस मामले में आजीवन कारावास की सजा हुई थी, जिसे कोर्ट ने घटाकर 12 साल कर दिया है। पॉक्सो कानून के तहत बच्चों के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले आते हैं। विशेष अदालत ने युवक को पड़ोस में रहने वाली चार साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया था। </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>साल 2020 के विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी। जस्टिस सारंग कोतवाल और जस्टिस संदेश पाटिल की बेंच ने सबूतों के मद्देनजर कहा कि आरोपी ने आईपीसी की धारा 376 और पॉक्सो की धारा 6 के तहत अपराधकिया है, लेकिन जब उसने यह करतूत की थी, तब उसकी उम्र 20 साल थी।</div>
<div> </div>
<div><strong>हाई कोर्ट बेंच ने क्या-क्या कहा</strong></div>
<div>बेंच ने कहा कि आरोपी की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है। उसने स्वयं में सुधार के प्रयास किए हैं, इसलिए हम उसकी सजा कम करने के पक्ष में है। इस तरह बेंच ने युवक को राहत दी। आगे बेंच ने कहा कि अपीलकर्ता (युवक) को कोविड में भी बेल पर रिहा नहीं किया गया था। वह साल 2016 में गिरफ्तारी के बाद से जेल में है। यानी नौ साल से जेल में है। इस मामले में यह पहलू भी ध्यान देने योग्य है।</div>
<div> </div>
<div>अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, इन सुधारात्मक कारकों पर विचार करते हुए, पीठ ने कहा, 'हमारी राय में, 12 वर्ष की सजा न्यायसंगत होगी।' पीठ ने आगे कहा कि दोषी द्वारा पहले से जेल में बिताई गई अवधि को कम की गई सजा में से घटा दिया जाएगा।</div>
<div> </div>
<div><strong>अदालत ने जुर्माना रखा बरकरार</strong></div>
<div>इन दलीलों और केस को देखते हुए बेंच ने कहा कि हम युवक को राहत देने के पक्ष में है। युवक के लिए 12 साल की सजा न्यायसंगत होगी। हालांकि बेंच ने युवक पर लगाए गए 25 हजार रुपये के जुर्माने की रकम को बरकरार रखा है।</div>
<div> </div>
<div><strong>निबंध प्रतियोगिताओं में हुआ शामिल'</strong></div>
<div>सुनवाई के दौरान युवक के वकील ने अपने मुवक्किल की सजा घटाने का आग्रह किया। उन्होंने बेंच को बताया कि युवक ने जेल में रहते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों का अध्ययन किया है। इस संबंध में उसे कई संस्थाओं की ओर से परीक्षा के बाद सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। उसने निबंध प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया है।</div>
<div> </div>
<div><strong>जानिए क्या है पूरा मामला</strong></div>
<div>अभियोजन पक्ष का मामला यह था कि 9 दिसंबर, 2016 को, पीड़िता, जिसकी उम्र उस समय पांच वर्ष थी, पानी लेने के लिए पड़ोसी के घर गई थी, जहां आरोपी ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। डरी हुई बच्ची ने तुरंत परिवार को घटना के बारे में बताया, जिन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता ने बाद में आठ वर्ष की आयु में निचली अदालत में गवाही दी। हाई कोर्ट ने नाबालिग लड़की की गवाही को विश्वसनीय और सुसंगत पाया, यह देखते हुए कि उसने घटना का स्पष्ट रूप से और बिना किसी प्रशिक्षण के वर्णन किया था।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/47637/pocso-prisoner-read-the-thoughts-of-mahatma-gandhi-and-wrote</link>
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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 12:00:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : वकील ने बॉम्बे हाई कोर्ट को लेटर लिखकर स्कूल गर्ल की मौत के मामले में दखल देने की मांग की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के एक वकील ने बॉम्बे हाई कोर्ट को लेटर लिखकर वसई की एक 13 साल की स्कूल गर्ल की मौत के मामले में दखल देने की मांग की है। कहा जा रहा है कि स्कूल में उसे बुरी तरह से शारीरिक सज़ा दिए जाने के कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो गई थी। वसई की स्कूल गर्ल की मौत के बाद वकील ने हाई कोर्ट से शारीरिक सज़ा पर रोक लगाने की मांग की।बुधवार को चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर को भेजे एक लेटर में, वकील स्वप्ना प्रमोद कोडे ने इस घटना को एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में शारीरिक सज़ा से होने वाले खतरों की एक कड़ी याद दिलाने वाली घटना बताया। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45630/mumbai-lawyer-writes-letter-to-bombay-high-court-seeking-intervention"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/download---2025-11-20t120611.206.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई के एक वकील ने बॉम्बे हाई कोर्ट को लेटर लिखकर वसई की एक 13 साल की स्कूल गर्ल की मौत के मामले में दखल देने की मांग की है। कहा जा रहा है कि स्कूल में उसे बुरी तरह से शारीरिक सज़ा दिए जाने के कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो गई थी। वसई की स्कूल गर्ल की मौत के बाद वकील ने हाई कोर्ट से शारीरिक सज़ा पर रोक लगाने की मांग की।बुधवार को चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर को भेजे एक लेटर में, वकील स्वप्ना प्रमोद कोडे ने इस घटना को एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में शारीरिक सज़ा से होने वाले खतरों की एक कड़ी याद दिलाने वाली घटना बताया। </p>
<p> </p>
<p>उन्होंने कोर्ट से जवाबदेही और सिस्टम में सुधार पक्का करने के लिए दखल देने की मांग की।वसई (ईस्ट) के श्री हनुमत विद्या मंदिर में क्लास 6 की स्टूडेंट काजल गौड़ उन स्टूडेंट्स के ग्रुप में शामिल थीं, जिन्हें 8 नवंबर को देर से आने की सज़ा के तौर पर स्कूल बैग लेकर 100 सिट-अप्स करने के लिए मजबूर किया गया था। काजल बहुत दर्द की शिकायत लेकर घर लौटीं, और अगले कुछ दिनों में उनकी हालत और खराब हो गई। 14 नवंबर को उसकी मौत हो गई।स्कूल ने बाद में दावा किया कि काजल को पहले से कोई हेल्थ प्रॉब्लम थी और टीचर ममता यादव को यह पता नहीं था कि 13 साल की काजल उन स्टूडेंट्स में से थी जिन्हें सज़ा दी गई थी। स्कूल ने यह भी कहा कि उसने पहले काजल के माता-पिता को मेडिकल मदद लेने की सलाह दी थी। माना जा रहा है कि शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट में पल्मोनरी एडिमा और स्प्लेनोमेगाली दर्ज किया गया है, और आखिरी रिपोर्ट अभी जारी नहीं की गई है।अपने लेटर में, कोडे ने कहा कि यह घटना संविधान के आर्टिकल 21 का गंभीर उल्लंघन है, जो हर व्यक्ति, खासकर बच्चे को, जीवन, सम्मान और सुरक्षा का अधिकार देता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि कानूनी और पॉलिसी में साफ रोक के बावजूद स्कूलों में शारीरिक सज़ा दी जाती है, और काजल की मौत मजबूत इंस्टीट्यूशनल सुरक्षा उपायों की तुरंत ज़रूरत को दिखाती है।वकील ने हाई कोर्ट से अपील की है कि वह इस मामले का खुद संज्ञान ले, बच्चे की मौत और स्कूल के कामकाज की इंडिपेंडेंट जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाए, इसके कामकाज में कथित गड़बड़ियों की जांच करे, एडमिशन रोकने और इसकी मान्यता रद्द करने पर विचार करे, शारीरिक सज़ा पर सख्ती से रोक लगाने के लिए पूरे राज्य में निर्देश जारी करे, और काजल के छोटे भाई समेत इस घटना से प्रभावित स्टूडेंट्स का पढ़ाई का भविष्य सुरक्षित करे।कोडे के लेटर में यह भी कहा गया है कि इस मामले में जवाबदेही पक्का करने और यह साफ मैसेज देने के लिए कि एजुकेशन सिस्टम में शारीरिक सज़ा की कोई जगह नहीं है, न्यायिक दखल ज़रूरी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Nov 2025 18:07:06 +0530</pubDate>
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