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                <title>Arun - Rokthok Lekhani</title>
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                <description>Arun RSS Feed</description>
                
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                <title>मुंबई : इंडसइंड बैंक में 2,000 करोड़ रुपये की अकाउंटिंग गड़बड़ी; पूर्व डिप्टी सीईओ अरुण खुराना और पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी गोविंद जैन के बयान दर्ज</title>
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                        <![CDATA[<p>मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की जांच में, इंडसइंड बैंक में 2,000 करोड़ रुपये की अकाउंटिंग गड़बड़ी से जुड़े कई अहम खुलासे हुए हैं. जांच में सामने आया है कि बैंक के तत्कालीन टॉप मैनेजमेंट के कुछ अधिकारियों ने अपने बयान में यह स्वीकार किया है कि बैंक की अकाउंटिंग बुक्स में जानबूझकर एडजस्टमेंट किए गए थे.</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44296/mumbai--indusind-bank-faces-rs-2-000-crore-accounting-irregularities--statements-recorded-of-former-deputy-ceo-arun-khurana-and-former-chief-financial-officer-govind-jain"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/download---2025-09-30t122835.124.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की जांच में, इंडसइंड बैंक में 2,000 करोड़ रुपये की अकाउंटिंग गड़बड़ी से जुड़े कई अहम खुलासे हुए हैं. जांच में सामने आया है कि बैंक के तत्कालीन टॉप मैनेजमेंट के कुछ अधिकारियों ने अपने बयान में यह स्वीकार किया है कि बैंक की अकाउंटिंग बुक्स में जानबूझकर एडजस्टमेंट किए गए थे. सूत्रों के मुताबिक, आर्थिक अपराध शाखा ने पिछले सप्ताह बैंक के पूर्व सीईओ सुमंत कथपालिया, पूर्व डिप्टी सीईओ अरुण खुराना और पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी गोविंद जैन के बयान दर्ज किए हैं. इनमें खासतौर पर अरुण खुराना की भूमिका को अहम मानते हुए, उन्हें दोबारा समन भेजा गया है. </p>
<p> </p>
<p><strong>बैंक खातों में एडजस्टमेंट्स से स्टॉक वैल्यूएशन प्रभावित</strong><br />जांच अधिकारियों को शक है कि इन एडजस्टमेंट्स के जरिए बैंक के शेयर मूल्य कृत्रिम रूप से बढ़ाए गए, जिससे कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने इनसाइडर ट्रेडिंग के जरिए भारी मुनाफा कमाया. आरोप है कि इस अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाकर अधिकारियों ने सैकड़ों करोड़ रुपये का लाभ कमाया. आर्थिक अपराध शाखा की जांच में यह भी सामने आया है कि बैंक के खातों में दो अलग-अलग हेडिंग्स के तहत एडजस्टमेंट्स किए गए, जिनका सीधा असर स्टॉक वैल्यूएशन पर पड़ा. हालांकि, कुछ पूर्व अधिकारियों ने किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार किया है, लेकिन एजेंसी अब इन विरोधाभासी बयानों की गहन पड़ताल कर रही है. </p>
<p><strong>बयानों के आधार पर पूर्व टॉप अधिकारियों को समन भेजा गया</strong><br />जानकारी के मुताबिक, आर्थिक अपराध शाखा जल्द ही कानूनी विशेषज्ञों और वित्तीय विश्लेषकों की राय लेने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगी. गौरतलब है कि यह गड़बड़ी सबसे पहले बैंक के डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में सामने आई थी, जो बाद में माइक्रोफाइनेंस कारोबार तक फैल गई. इसी विवाद के बाद, अप्रैल 2025 में, सीईओ सुमंत कथपालिया और डिप्टी सीईओ अरुण खुराना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. अब तक, EOW सात से आठ कर्मचारियों के बयान दर्ज कर चुकी है और इन्हीं बयानों के आधार पर पूर्व टॉप अधिकारियों को समन भेजा गया है. अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आगे, और पूछताछ के लिए कई अधिकारियों को फिर से बुलाया जा सकता है.</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Sep 2025 12:30:29 +0530</pubDate>
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                <title>नागपुर : गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली को शिवसेना पार्षद कमलाकर जामसांडेकर की हत्या  मामले में ज़मानत</title>
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                        <![CDATA[<p>गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली, जिन्हें 'डैडी' के नाम से भी जाना जाता है, 17 साल से ज़्यादा समय जेल में बिताने के बाद बुधवार को नागपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ गए। सुप्रीम कोर्ट ने 2007 के एक हत्या के मामले में उन्हें ज़मानत दे दी। 70 वर्षीय गवली, जो शिवसेना पार्षद कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे, कानूनी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद दोपहर लगभग 12.30 बजे जेल से बाहर आए।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43611/nagpur--gangster-turned-politician-arun-gawli-gets-bail-in-shiv-sena-councilor-kamlakar-jamsandekar-murder-case"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/images---2025-09-03t223805.135.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नागपुर : </strong>गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली, जिन्हें 'डैडी' के नाम से भी जाना जाता है, 17 साल से ज़्यादा समय जेल में बिताने के बाद बुधवार को नागपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ गए। सुप्रीम कोर्ट ने 2007 के एक हत्या के मामले में उन्हें ज़मानत दे दी। 70 वर्षीय गवली, जो शिवसेना पार्षद कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे, कानूनी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद दोपहर लगभग 12.30 बजे जेल से बाहर आए।</p>
<p> </p>
<p>रिहाई के कुछ ही देर बाद, गवली को नागपुर हवाई अड्डे पर मुंबई जाने की तैयारी करते देखा गया। ऑनलाइन सामने आए एक वीडियो में सफ़ेद दाढ़ी के साथ उन्हें पहचानना लगभग मुश्किल लग रहा था और जेल में पिछले कुछ सालों में उनका वज़न भी बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है। गवली के शाम को मुंबई के भायखला स्थित दगड़ी चॉल जाने की संभावना है। जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने 28 अगस्त को गवली की लंबी कैद और बढ़ती उम्र को देखते हुए ज़मानत दे दी थी। अदालत ने पाया कि मामले में उनकी अपील 17 वर्षों से अधिक समय से लंबित है और मामले की अंतिम सुनवाई फरवरी 2026 में निर्धारित की गई है।</p>]]>
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                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Sep 2025 22:39:31 +0530</pubDate>
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