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                <title>-year-old - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई : 7 साल तक टीबी और अस्थमा का इलाज करते रहे मुंबई के डॉक्टर, 10 वर्षीय बच्ची के फेफड़े में फंसा मिला पेन का ढक्कन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>एक 10 साल की बच्ची के फेफड़े का कुछ हिस्सा निकालना पड़ा क्योंकि सात साल से ज्यादा समय तक उसके बाएं फेफड़े के निचले हिस्से की नली (ब्रोंकस) के पास पेन का ढक्कन फंसा हुआ था। कई डॉक्टरों ने उसके असामान्य एक्स-रे को टीबी या अस्थमा समझकर गलत इलाज किया था।  बच्ची की मां और धारावी की रहने वाली मैमुना शेख ने बताया कि जब लगातार खांसी और अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण दिखे, तो कई डॉक्टरों ने संक्रामक बीमारी का शक होने पर उसका इलाज किया और एंटीबायोटिक्स दीं। इसके बाद उसे बीएमसी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने टीबी का इलाज शुरू कर दिया, जबकि उसका बलगम का सैंपल नेगेटिव आया था। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50971/mumbai-doctors-kept-treating-tb-and-asthma-for-7-years"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-27t122456.725.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>एक 10 साल की बच्ची के फेफड़े का कुछ हिस्सा निकालना पड़ा क्योंकि सात साल से ज्यादा समय तक उसके बाएं फेफड़े के निचले हिस्से की नली (ब्रोंकस) के पास पेन का ढक्कन फंसा हुआ था। कई डॉक्टरों ने उसके असामान्य एक्स-रे को टीबी या अस्थमा समझकर गलत इलाज किया था।  बच्ची की मां और धारावी की रहने वाली मैमुना शेख ने बताया कि जब लगातार खांसी और अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण दिखे, तो कई डॉक्टरों ने संक्रामक बीमारी का शक होने पर उसका इलाज किया और एंटीबायोटिक्स दीं। इसके बाद उसे बीएमसी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने टीबी का इलाज शुरू कर दिया, जबकि उसका बलगम का सैंपल नेगेटिव आया था। </p>
<p> </p>
<p>उस समय अस्पताल में मौजूद और मायशा के केस में शामिल एक रेजिडेंट डॉक्टर ने कहा कि यह शायद उन दुर्लभ मामलों में से एक था जहां चीज की जगह की वजह से सही बीमारी का पता लगाना बहुत मुश्किल था, और इलाज लक्षणों के आधार पर किया गया। डॉक्टर ने कहा कि हम तब तक एंटी-कोच थेरेपी का कोर्स शुरू नहीं कर सकते जब तक कि कोई पक्का संकेत न मिले। नेगेटिव रिज़ल्ट के बावजूद इलाज भविष्य के डॉक्टरों के लिए टीबी की संभावना को खत्म करने में मददगार होता है।</p>
<p><strong>टीबी का इलाज होने के बाद भी हालत नहीं हुई ठीक</strong><br />टीबी का इलाज होने के बाद भी जब मैमुना ने देखा कि उसकी बच्ची की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है, तो वह उसे दूसरे प्राइवेट अस्पताल ले गईं। वहाँ डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि मायशा को अस्थमा है और राहत के लिए इनहेलर दिया। एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल (नारायण हेल्थ) की पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. इंदु खोसला, जो इस केस में शामिल थीं, ने कहा कि ज़्यादातर डॉक्टरों को निमोनिया दिखा जो ठीक नहीं हो रहा था, इसलिए उन्होंने एंटी-टीबी दवाएं लिख दीं। उन्होंने कहा कि फेफड़े के अंदर किसी बाहरी चीज के होने का शक किया जाना चाहिए था, लेकिन यह राय का फर्क है और इसके लिए डॉक्टरों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।</p>
<p><strong>ब्रोंकोस्कोपी में दिखा पेन का ढक्कन</strong><br />डॉ. इंदु ने बताया कि सीटी स्कैन में फेफड़ा सिकुड़ा हुआ (कोलेप्स) दिखा, और क्योंकि बाकी अंग सामान्य लग रहे थे, इसलिए उन्हें बाहरी चीज के होने का शक हुआ। डॉ. खोसला ने कहा, ब्रोंकोस्कोपी के दौरान हमने देखा कि पेन का ढक्कन गहराई में फंसा हुआ था। उसे बाहर निकालने के लिए हमें अपनी ईएनटी टीम की मदद लेनी पड़ी और ज्यादा एनेस्थीसिया देना पड़ा। </p>
<p><strong>प्रोसीजर के बाद ठीक हुआ निमोनिया, पर...</strong><br />इसे निकालते ही मायशा को काफी बेहतर महसूस हुआ। डॉ. खोसला ने कहा कि प्रोसीजर के लगभग दो से तीन हफ्ते बाद, उसका निमोनिया- जो फेफड़े के निचले बाएं हिस्से और बीच वाले हिस्से में फैला था- कम हो गया और सिर्फ निचले हिस्से तक ही सीमित रह गया। फेफड़े का जो हिस्सा खराब नहीं हुआ था, वह खुल गया। </p>
<p>डॉक्टरों ने एक महीने तक इंतजार किया कि क्या फेफड़े का बाकी प्रभावित हिस्सा फिर से फैल पाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गंभीर इन्फेक्शन और टिश्यू को हुए ऐसे नुकसान की वजह से जिसे ठीक नहीं किया जा सकता था, उन्हें आख़िरकार उसके फेफड़े का लगभग एक-तिहाई हिस्सा निकालना पड़ा। उम्मीद है कि मायशा सामान्य जिंदगी जी पाएगी, लेकिन मैमूना ने कहा कि एक मेडिकल चूक की वजह से वह लगभग अपनी बेटी को खो ही बैठी थीं। उन्होंने कहा कि अब तक हुए खर्च का तो हमें हिसाब ही नहीं रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 12:35:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : 12 साल की बच्ची के पेट से निकला एक किलो बालों का गुच्छा, चार साल से बाल खाने की थी आदत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल मामले में 12 वर्षीय बच्ची के पेट से 16:14 सेंटीमीटर का बालों का बड़ा गुच्छा (ट्राइकोबेज़ोआर) निकालकर उसकी जान बचाई। यह गुच्छा पेट के करीब 90% हिस्से में फैला हुआ था और छोटी आंत तक पहुंच गया था। नारायणा हेल्थ चिल्ड्रंस हॉस्पिटल से मिली जानकारी के अनुसार, 12 वर्षीय ऋतुजा (परिवर्तित नाम)पिछले डेढ़ महीने से लगातार उल्टी, पेट भरा-भरा लगना और भूख कम लगने की समस्या झेल रही थी। अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों को पेट के ऊपरी हिस्से में गांठ महसूस हुई। इसके बाद किए गए सीटी स्कैन और अपर गैस्ट्रोइटेस्टिनल एंडोस्कोपी में पेट के भीतर बालों का बड़ा गुच्छा होने की पुष्टि हुई। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48878/mumbai-one-kilo-bunch-of-hair-found-in-the-stomach"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-01t134621.338.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मुंबई के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल मामले में 12 वर्षीय बच्ची के पेट से 16:14 सेंटीमीटर का बालों का बड़ा गुच्छा (ट्राइकोबेज़ोआर) निकालकर उसकी जान बचाई। यह गुच्छा पेट के करीब 90% हिस्से में फैला हुआ था और छोटी आंत तक पहुंच गया था। नारायणा हेल्थ चिल्ड्रंस हॉस्पिटल से मिली जानकारी के अनुसार, 12 वर्षीय ऋतुजा (परिवर्तित नाम)पिछले डेढ़ महीने से लगातार उल्टी, पेट भरा-भरा लगना और भूख कम लगने की समस्या झेल रही थी। अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों को पेट के ऊपरी हिस्से में गांठ महसूस हुई। इसके बाद किए गए सीटी स्कैन और अपर गैस्ट्रोइटेस्टिनल एंडोस्कोपी में पेट के भीतर बालों का बड़ा गुच्छा होने की पुष्टि हुई। </p>
<p> </p>
<p>डॉक्टरों ने पहले एंडोस्कोपी के जरिए इसे निकालने की कोशिश की, लेकिन आकार बड़ा और सख्त होने के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसके बाद डॉक्टर ने ओपन सर्जरी का निर्णय लिया। तीन घंटे चले ऑपरेशन के बाद बच्ची के पेट से बालों का गुच्छा निकाला गया। बच्ची की हालत तेजी से सुधरी है।</p>
<p><strong>3 से 4 साल से पेट में हो रहे थे जमा</strong><br />अस्पताल के कंसल्टेंट गेस्ट्रोएट्रोलॉजी और हेपेटोलॉजी आदित्य कुलकर्णी ने बताया कि बाल पचता नहीं है। लबे समय तक निगलने पर ये पेट में जमा होकर ठोस गुच्छा बना लेते है। इस मामले में यह समस्या 3 से 4 साल से धीरे-धीरे विकसित हो रही थी। अस्पताल के वरिष्ठ पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. रसिकलाल शाह ने बताया कि इतने बड़े ट्राइकोबेजोआर को एंडोस्कोपी से पूरी तरह निकालना मुश्किल है। ओपन सर्जरी के जरिए ही इसे सुरक्षित तरीके से हटाया जा सकता है। हमारी टीम ने एक ही सत्र में यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। </p>
<p><strong>क्या है ट्राइकोबेज़ोआर?</strong><br />यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक बाल निगलता है, तो वे पेट में जमा होकर एक ठोस गुच्छा बना लेते है, जिसे ट्राइकोबेजोआर कहा जाता है। यह समस्या अक्सर ट्राइकोटिलोमेनिया (बाल तोड़ने की आदत) और ट्राइकोफेजिया ( बाल खाने की आदत ) से जुड़ी होती है, जो मानसिक तनाव या चिंता के कारण विकसित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 13:47:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>मुंबई : नकली पुलिसवालों ने एयरपोर्ट के पास दुबई से लौटे 28 साल के युवक से 53,000 लूटे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दो अनजान लोगों ने कथित तौर पर पुलिस ऑफिसर बनकर एक 28 साल के आदमी को ठगा, जो युद्ध जैसे हालात में दुबई से लौटा था। आरोपियों ने उससे यूएई दिरहम और भारतीय रुपये में कुल 53,000 रुपये ले लिए। यह घटना 26 मार्च को विले पार्ले वेस्ट में हुई। सहार पुलिस ने शनिवार को दो अनजान लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी करने और खुद को सरकारी कर्मचारी बताने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48807/fake-policemen-looted-rs-53000-from-a-28-year-old"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/images---2026-03-29t174740.062.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>दो अनजान लोगों ने कथित तौर पर पुलिस ऑफिसर बनकर एक 28 साल के आदमी को ठगा, जो युद्ध जैसे हालात में दुबई से लौटा था। आरोपियों ने उससे यूएई दिरहम और भारतीय रुपये में कुल 53,000 रुपये ले लिए। यह घटना 26 मार्च को विले पार्ले वेस्ट में हुई। सहार पुलिस ने शनिवार को दो अनजान लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी करने और खुद को सरकारी कर्मचारी बताने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित की पहचान बबलू खान के तौर पर हुई है, जो समोसा बनाने का काम करता है और कुर्ला ईस्ट के नेहरू नगर का रहने वाला है। खान एक ऐसे परिवार से है जो पिछले दो दशकों से समोसा बनाने का बिज़नेस चला रहा है। बेहतर नौकरी के मौकों की तलाश में, वह जनवरी 2026 में दुबई गया था। हालांकि, वहां युद्ध जैसे हालात होने की वजह से, उसने भारत लौटने का फैसला किया।</p>
<p> </p>
<p>26 मार्च को सुबह करीब 9 बजे, खान मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा। सुबह करीब 10 बजे, वह एयरपोर्ट के बाहर से कुर्ला जाने के लिए एक ऑटोरिक्शा में सवार हुआ। सफ़र के पाँच मिनट के अंदर, साकीनाका रूट पर होटल जेडब्ल्यू मैरियट के सामने एक मोड़ के पास, दो अनजान आदमी एक काली स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर रिक्शा के पास आए और ड्राइवर को रुकने के लिए कहा। आरोपियों में से एक रिक्शा में चढ़ा और खुद को पुलिस ऑफिसर बताते हुए कहा कि उसे खान की जेबें चेक करनी हैं।</p>
<p>जब खान ने पहचान पत्र माँगा, तो आरोपी ने कोई आयई दिखाने से मना कर दिया। हालाँकि, उसके दावे पर भरोसा करते हुए, खान ने 1,500 रुपये कैश और 2,000 यूएई दिरहम, जो लगभग 53,000 रुपये थे, दे दिए। प्राथमिकी में यह नहीं बताया गया है कि आरोपियों ने पैसे लेने के लिए किस बहाने का इस्तेमाल किया। पुलिस ने कहा कि मामले की जाँच की जा रही है। फिर आरोपियों ने उससे कहा कि पैसे पुलिस स्टेशन पर वापस कर दिए जाएँगे और उसे वहाँ आने के लिए कहा। इसके बाद वे अपनी मोटरसाइकिल पर साकीनाका की ओर भाग गए।</p>
<p>कुछ देर बाद, खान को शक हुआ और उसे एहसास हुआ कि वे लोग नकली थे। इंटरनेशनल ट्रैवल की थकान की वजह से वह तुरंत शिकायत नहीं कर सका। बाद में ठीक होने के बाद उसने पुलिस से संपर्क किया। सहार पुलिस ने अनजान आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और उन्हें ढूंढने के लिए सर्च शुरू कर दी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 17:49:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : ७२ वर्षीय बुजुर्ग के साथ ५२ करोड़ रुपए के साइबर फ्रॉड मामले में सनसनीखेज खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में ७२ वर्षीय बुजुर्ग के साथ ५२ करोड़ रुपए के साइबर फ्रॉड मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आरोपियों ने ५२ करोड़ रुपए की बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए चीन, इंडोनेशिया और हांगकांग में तकरीबन १० हजार फर्जी बैंक खाते खुलवाए थे। बता दें कि महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने ५८ करोड़ रुपए के ‘डिजिटल अरेस्ट’ केस में २,५०० पेज की चार्जशीट फाइल की है, जिसमें ३२ गिरफ्तार लोगों और ४१ वॉन्टेड आरोपियों के नाम हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46871/mumbai-sensational-revelation-in-cyber-fraud-case-of-rs-52"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-10t121404.387.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई में ७२ वर्षीय बुजुर्ग के साथ ५२ करोड़ रुपए के साइबर फ्रॉड मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आरोपियों ने ५२ करोड़ रुपए की बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए चीन, इंडोनेशिया और हांगकांग में तकरीबन १० हजार फर्जी बैंक खाते खुलवाए थे। बता दें कि महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने ५८ करोड़ रुपए के ‘डिजिटल अरेस्ट’ केस में २,५०० पेज की चार्जशीट फाइल की है, जिसमें ३२ गिरफ्तार लोगों और ४१ वॉन्टेड आरोपियों के नाम हैं। स्कैम में अहम भूमिका निभाने वाले और फरार कुछ आरोपियों जैसे अजमेर के विजय खन्ना और देवेंद्र सैनी के बारे में जानकारी देने पर इनाम की घोषणा की गई है।</p>
<p> </p>
<p>पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, इस मामले में चीन, इंडोनेशिया और हांगकांग से जुड़े १०,००० से ज्यादा बैंक अकाउंट इस्तेमाल किए गए थे। इन अकाउंट का इस्तेमाल साइबर क्रिमिनल्स ने ५८ करोड़ रुपए बॉर्डर पार भेजने के लिए किया था। पैसे को क्रिप्टो करेंसी में भी बदला गया और डिजिटल वॉलेट के जरिए विदेश भेजा गया।</p>
<p><strong>फर्मों के नाम से करंट अकाउंट</strong><br />जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने अलग-अलग फर्मों के नाम पर करंट बैंक अकाउंट भी खोले थे, जिनका इस्तेमाल इस स्कैम में किया गया। यह स्कैम अगस्त २०२५ में शुरू हुआ था, जब मुंबई के एक ७२ वर्षीय बुजुर्ग को धोखेबाजों ने फंसाया, जिन्होंने खुद को पुलिस अधिकारी बताया था।</p>
<p><strong>यह है मामला</strong><br />सीनियर सिटीजन से सबसे पहले एक आदमी ने कॉन्टैक्ट किया, जो खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) का ऑफिसर बता रहा था। उसने आरोप लगाया कि उसके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल गैर-कानूनी मैसेज भेजने के लिए किया जा रहा है। फिर कॉल दूसरे धोखेबाज को ट्रांसफर कर दी गई जो मुंबई क्राइम ब्रांच का ऑफिसर बनकर आया था, जिसने दावा किया कि पीड़ित के बैंक अकाउंट मनी-लॉन्ड्रिंग एक्टिविटीज से जुड़े हैं। उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया गया है और अगर उसने सहयोग नहीं किया तो उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। यह कहकर डराया था। आरोपियों ने वीडियो कॉल पर कोर्ट कार्रवाई की बात की थी, जिससे डरकर पीड़ित ने ४० दिनों में ५८ करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम ट्रांसफर कर दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Jan 2026 12:15:04 +0530</pubDate>
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