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                <title>or - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई : नाबालिग की पहाड़ी से धक्का देकर हत्या: आरोपी गिरफ्तार; क्या दोहराया गया 'सिया-केतन' जैसा हत्याकांड?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के कांदिवली पूर्व स्थित समतानगर इलाके में एक नाबालिग लड़की की हत्या के मामले में पुलिस ने 24 घंटे के भीतर आरोपी डिलीवरी बॉय सूरज मारुति वाघमारे को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर युवती को पहाड़ी से धक्का देकर उसकी हत्या की। तकनीकी साक्ष्यों, खुफिया इनपुट और वैज्ञानिक जांच की मदद से आरोपी तक पहुंचा गया।  </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50697/accused-arrested-for-murdering-mumbai-minor-by-pushing-her-from"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/dfsds.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई के कांदिवली पूर्व स्थित समतानगर इलाके में एक नाबालिग लड़की की हत्या के मामले में पुलिस ने 24 घंटे के भीतर आरोपी डिलीवरी बॉय सूरज मारुति वाघमारे को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर युवती को पहाड़ी से धक्का देकर उसकी हत्या की। तकनीकी साक्ष्यों, खुफिया इनपुट और वैज्ञानिक जांच की मदद से आरोपी तक पहुंचा गया।  </p>
<p> </p>
<p>मुंबई के कांदिवली पूर्व स्थित समतानगर इलाके में एक नाबालिग लड़की की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस का आरोप है कि युवती के साथ रिश्ते में रहे एक डिलीवरी बॉय ने उसे पहाड़ी से धक्का देकर मौत के घाट उतार दिया। मामले की जांच करते हुए पुलिस ने घटना के करीब 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।  </p>
<p><strong>आखिर पुलिस को घटनास्थल पर क्या मिला?</strong><br />पुलिस के अनुसार, शुक्रवार सुबह दामूनगर के पीछे स्थित पहाड़ी क्षेत्र में एक किशोरी का शव मिलने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही समतानगर पुलिस, क्राइम ब्रांच और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल की बारीकी से जांच कर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए गए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।<br />मृतका की पहचान कैसे हुई और शक की सुई किस पर गई?</p>
<p>जांच के दौरान पुलिस ने स्थानीय लोगों से पूछताछ, गुमशुदगी के रिकॉर्ड की जांच और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इन प्रयासों के बाद मृतका की पहचान हुई। जांच में यह भी सामने आया कि किशोरी का सूरज मारुति वाघमारे नामक युवक के साथ प्रेम संबंध था। इसके बाद पुलिस ने उसी दिशा में जांच आगे बढ़ाई।</p>
<p><strong>आरोपी तक पुलिस आखिर कैसे पहुंची?</strong><br />तकनीकी जानकारी और खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध की तलाश शुरू की। पूछताछ और जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर युवक को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी डिलीवरी बॉय के रूप में काम करता है।</p>
<p><strong>हत्या की असली वजह क्या थी?</strong><br />फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या के पीछे की असली वजह क्या थी। शुरुआती जांच में अभी तक हत्या के कारण का स्पष्ट खुलासा नहीं हुआ है। यह भी जांच की जा रही है कि वारदात पहले से बनाई गई साजिश का हिस्सा थी या किसी विवाद के बाद अचानक हुई।</p>
<p><strong>24 घंटे में पुलिस ने कैसे सुलझाई गुत्थी?</strong><br />डीसीपी गजानन राजमाने ने बताया कि घटनास्थल से मिले सबूत, तकनीकी जांच और खुफिया सूचनाओं की मदद से पुलिस ने 24 घंटे के भीतर मामले का खुलासा कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और पूछताछ पूरी होने के बाद हत्या के पीछे की पूरी कहानी सामने लाई जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:15:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : लोग तय करेंगे कि मैं रील्स स्टार हूं या रियल स्टार - मेयर रितु तावड़े</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की मेयर रितु तावड़े ने मुंबई में पिछले हफ्ते बारिश और समुद्र हाई टाइड के बीच कोस्टल रोड के वीडियो पर ट्रोल किए जाने पर चुप्पी तोड़ी है। मेयर रितु तावड़े ने कहा है कि वह समुद्र में ऊंची लहरों के उठने के अलर्ट के वह कोस्टल रोड के विजिट पर गई थीं। यह कदम मुंबई के लोगों के प्रति उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा था और साफ किया कि वह 'रील्स स्टार' बनने के लिए वहां नहीं गई थीं। गौरतलब हो कि कोस्टल रोड के विजिट में मेयर रितु तावड़े ने वहां रेलिंग पर बैठे एक कपल को हटाया था। इसका वीडियो सामने आने के बाद उन्हें ट्रोल किया जा रहा था। खुद आदित्य ठाकरे ने हमला बोला था।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50695/mumbai-people-will-decide-whether-i-am-a-reels-star"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-12t100759.998.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की मेयर रितु तावड़े ने मुंबई में पिछले हफ्ते बारिश और समुद्र हाई टाइड के बीच कोस्टल रोड के वीडियो पर ट्रोल किए जाने पर चुप्पी तोड़ी है। मेयर रितु तावड़े ने कहा है कि वह समुद्र में ऊंची लहरों के उठने के अलर्ट के वह कोस्टल रोड के विजिट पर गई थीं। यह कदम मुंबई के लोगों के प्रति उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा था और साफ किया कि वह 'रील्स स्टार' बनने के लिए वहां नहीं गई थीं। गौरतलब हो कि कोस्टल रोड के विजिट में मेयर रितु तावड़े ने वहां रेलिंग पर बैठे एक कपल को हटाया था। इसका वीडियो सामने आने के बाद उन्हें ट्रोल किया जा रहा था। खुद आदित्य ठाकरे ने हमला बोला था।</p>
<p> </p>
<p><strong>कोस्टल रोड के वीडियो पर बोलीं रितु तावड़े </strong><br />अब मुंबई में बारिश थमने और हालात सामान्य होने के बाद रितु तावड़े ने ट्रोल करने वाले लोगों को जवाब देते हुए कहा है कि मुंबई के लोग तय करेंगे कि मैं रील्स स्टार हूं या रियल स्टार। मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने अपना बचाव करते हुए कहा कि उनके काम के पीछे लोगों की सुरक्षा की चिंता थी, न कि पब्लिसिटी। रितु तावड़े ने इस पूरे मुद्दे पर बोलते हुए कहा है कि मुझे इस बात पर ट्रोल किया गया कि मेयर कोस्टल रोड पर क्या कर रही थीं। मैं कोस्टल रोड पर इसलिए गई क्योंकि मैंने छोटे बच्चों को रेलिंग के किनारे बैठे देखा। समुद्र की लहरें इतनी ऊंची थीं कि वे उन बच्चों को बहा ले जा सकती थीं। इसीलिए मैं वहां नीचे गई। रितु तावड़े ने कहा कि मुंबई की मेयर और मुंबई की एक सेवक के तौर पर मैं अपने साथी मुंबईकरों के लिए वहां गई थी। मैं वहां कोई 'रील्स स्टार' बनने नहीं गई थी। इसीलिए मैंने कहा कि मुंबईकर ही तय करेंगे कि मैं 'रील्स स्टार' हूं या 'रियल स्टार'। यह तय करने का हक किसी और को नहीं है।</p>
<p><strong>मैं जमीनी स्तर की कार्यकर्ता हूं...</strong><br />रितु तावड़े ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा है कि शहर के सबसे ऊंचे नागरिक पद पर होने के बावजूद भी मैं खुद को जमीनी स्तर की कार्यकर्ता ही मानती हूं। तावड़े ने कहा कि मैं लगातार काम करते हुए मैं कॉरपोरेटर बनी और वहां से मेयर के तौर पर सेवा करने के मुकाम तक पहुंची। मेरे अंदर का कार्यकर्ता हमेशा बाहर आएगा क्योंकि मैंने हमेशा जन-आंदोलनों और सड़कों पर उतरकर काम किया है। जो लोग मुझे जानते हैं, वे सब यह बात जानते हैं। रितु तावड़े ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी, लेकिन साल 2012 में वह भाजपा में शामिल हो गईं। वह घाटकोपर क्षेत्र से लगातार तीन बार अलग-अलग वार्डों से नगर निगम पार्षद (कॉर्पोरेटर) चुनी जा चुकी हैं। उन्होंने पहली बार 2012 (वार्ड 127), दूसरी बार 2017 (वार्ड 121) और तीसरी बार 2025 के बीएमसी चुनाव (वार्ड 132) में शानदार जीत हासिल की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:08:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्‍ली : 60 साल बाद बदलने जा रहा गन्‍ने से जुड़ा कानून, किसानों को फायदा होगा या नुकसान, एथनॉल उत्‍पादन पर भी असर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>यूपी सहित देश के तमाम गन्‍ना उत्‍पादक राज्‍यों के किसानों के लिए बड़ी खबर है. केंद्र सरकार 60 साल बाद गन्‍ने से जुड़े कानून में बदलाव करने जा रही है. इसका फायदा सीधे तौर पर किसानों को होगा. मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने साल 1966 के गन्ना नियंत्रण आदेश को एक व्यापक और नए नियामक ढांचे से बदलने का प्रस्ताव किया है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49398/new-delhi-the-law-related-to-sugarcane-is-going-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-22t184642.138.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्‍ली : </strong>यूपी सहित देश के तमाम गन्‍ना उत्‍पादक राज्‍यों के किसानों के लिए बड़ी खबर है. केंद्र सरकार 60 साल बाद गन्‍ने से जुड़े कानून में बदलाव करने जा रही है. इसका फायदा सीधे तौर पर किसानों को होगा. मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने साल 1966 के गन्ना नियंत्रण आदेश को एक व्यापक और नए नियामक ढांचे से बदलने का प्रस्ताव किया है. इसमें पहली बार एथनॉल उत्पादन, डिजिटल नियमों के पालन और कारखानों की मंजूरी के लिए एक औपचारिक व्यवस्था को साथ लाया गया है. सरकार ने इस मसौदे पर 20 मई तक सुझाव मांगे हैं.</p>
<p> </p>
<p>केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के गन्ना (नियंत्रण) आदेश 2026 के मसौदे में पुराने कानून की बुनियादी संरचना को बरकरार रखा गया है. इसमें उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) के नियम, गन्ने की आवाजाही पर नियंत्रण, 14 दिनों के भीतर भुगतान की समय सीमा और देरी से भुगतान पर 15 फीसदी सालाना ब्याज शामिल है. हालांकि, इसमें पूरी तरह बदल चुके उद्योग के अनुरूप एक नया ढांचा तैयार किया गया है. इन नियमों का ज्‍यादातर लाभ किसानों को होगा, क्‍योंकि अभी मिलों के पास उनके हजारों करोड़ के बकाए पड़े हुए हैं.</p>
<p><strong>600 लीटर एथनॉल बराबर एक टन चीनी</strong><br />साल 1966 के कानून में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव एथनॉल को गन्ना नियामक ढांचे में स्पष्ट रूप से शामिल करना है और मसौदे में चीनी कारखाने की परिभाषा का विस्तार कर इसमें गन्ने के रस, सिरप, चीनी और मोलासेस से एथनॉल उत्पादन को भी शामिल किया गया है. इसके लिए एक ठोस रूपांतरण सूत्र पेश किया गया है, जिसके तहत उत्पादन गणना करते समय 600 लीटर एथनॉल को एक टन चीनी के बराबर माना जाएगा.</p>
<p><strong>कुछ कंपनियों को बैंक गारंटी से छूट</strong><br />मसौदे में कहा गया है कि केवल एथनॉल बनाने वाली इकाइयां, जो अपने परिसर में गन्ना नहीं पेरती हैं. उन्हें प्रदर्शन बैंक गारंटी की आवश्यकता से छूट दी गई है. यह एकीकृत चीनी-सह-एथनॉल मिलों पर नियंत्रण हल्का किए बिना एकल एथनॉल क्षमता बढ़ाने के लिए एक सोची-समझी नीतिगत पहल है. मसौदे की धारा 6ए से 6जी में ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो पुराने आदेश में नहीं थे. इसमें नए कारखानों के लिए औपचारिक आईईएम-आधारित मंजूरी प्रक्रिया, न्यूनतम दूरी के नियम, प्रदर्शन बैंक गारंटी को बढ़ाकर दो करोड़ रुपये करना और प्रभावी कदम तथा व्यावसायिक उत्पादन के लिए समय सीमा तय करना शामिल है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:48:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : महिला के शरीर को देखने और घूरने को अपराध मानने से इंकार  - बॉम्बे हाईकोर्ट </title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी महिला सहकर्मी के शरीर को घूरना अनैतिक व्यवहार है, लेकिन यह 'ताक-झांक' का अपराध नहीं है, बॉम्बे हाई कोर्ट ने शनिवार को एक फैसले में यह बात कही।जस्टिस अमित बोरकर ने कहा कि ऐसे काम नैतिक रूप से गलत हैं, लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा 354C के तहत कानूनी मानदंडों को पूरा नहीं करते। उन्होंने कहा कि महिला सहकर्मी के शरीर को घूरना 'ताक-झांक' नहीं है। हाईकोर्ट की इस फैसले एक नई चर्चा छिड़ी है। दरअसल घूरने को भी मोटे तौर पर अपराध मान लिया जाता है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49166/refuses-to-criminalize-looking-at-and-staring-at-mumbai-womans"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-13t131948.232.jpg" alt=""></a><br /><p><br /><strong>मुंबई : </strong>बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी महिला सहकर्मी के शरीर को घूरना अनैतिक व्यवहार है, लेकिन यह 'ताक-झांक' का अपराध नहीं है, बॉम्बे हाई कोर्ट ने शनिवार को एक फैसले में यह बात कही।जस्टिस अमित बोरकर ने कहा कि ऐसे काम नैतिक रूप से गलत हैं, लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा 354C के तहत कानूनी मानदंडों को पूरा नहीं करते। उन्होंने कहा कि महिला सहकर्मी के शरीर को घूरना 'ताक-झांक' नहीं है। हाईकोर्ट की इस फैसले एक नई चर्चा छिड़ी है। दरअसल घूरने को भी मोटे तौर पर अपराध मान लिया जाता है। </p>
<p> </p>
<p><strong>दफ्तर के माहौल का किया जिक्र</strong><br />हाईकोर्ट के जस्टिस अमित बोरकर ने कहा कि यह प्रावधान ताक-झांक के अपराध को परिभाषित करता है और उसके लिए सजा तय करता है। इसमें किसी महिला को कोई निजी काम करते हुए देखना, उसकी तस्वीरें लेना या उन्हें फैलाना शामिल है, जब उसे यह उम्मीद हो कि उसकी निजता बनी रहेगी। यह उन स्थितियों पर लागू होता है जहां शरीर के निजी अंग खुले हों, कोई महिला शौचालय का इस्तेमाल कर रही हो, या कोई ऐसा कृत्य कर रही हो जो आमतौर पर सार्वजनिक रूप से नहीं किया जाता। दफ्तर के माहौल में घूरना इस श्रेणी में नहीं आता।</p>
<p><strong>बीमा एक्जीक्यूटिव को बड़ी राहत</strong><br />कोर्ट ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने एक बीमा कंपनी के एग्जीक्यूटिव के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कानून के शब्दों का मतलब उनके सीधे-सादे अर्थ से ज़्यादा नहीं निकाला जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले को आगे बढ़ाना कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल होगा। गौरतलब हो कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि मीटिंग के दौरान आरोपी उससे नजरें नहीं मिलाता था, बल्कि उसके शरीर के अंगों को घूरता था और गलत टिप्पणियां करता था। कंपनी की आंतरिक शिकायत समिति ने पहले ही इस मामले में आरोपी को बरी कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49166/refuses-to-criminalize-looking-at-and-staring-at-mumbai-womans</link>
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 13:20:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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