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                <title>or - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>नई दिल्‍ली : 60 साल बाद बदलने जा रहा गन्‍ने से जुड़ा कानून, किसानों को फायदा होगा या नुकसान, एथनॉल उत्‍पादन पर भी असर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>यूपी सहित देश के तमाम गन्‍ना उत्‍पादक राज्‍यों के किसानों के लिए बड़ी खबर है. केंद्र सरकार 60 साल बाद गन्‍ने से जुड़े कानून में बदलाव करने जा रही है. इसका फायदा सीधे तौर पर किसानों को होगा. मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने साल 1966 के गन्ना नियंत्रण आदेश को एक व्यापक और नए नियामक ढांचे से बदलने का प्रस्ताव किया है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49398/new-delhi-the-law-related-to-sugarcane-is-going-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-22t184642.138.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्‍ली : </strong>यूपी सहित देश के तमाम गन्‍ना उत्‍पादक राज्‍यों के किसानों के लिए बड़ी खबर है. केंद्र सरकार 60 साल बाद गन्‍ने से जुड़े कानून में बदलाव करने जा रही है. इसका फायदा सीधे तौर पर किसानों को होगा. मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने साल 1966 के गन्ना नियंत्रण आदेश को एक व्यापक और नए नियामक ढांचे से बदलने का प्रस्ताव किया है. इसमें पहली बार एथनॉल उत्पादन, डिजिटल नियमों के पालन और कारखानों की मंजूरी के लिए एक औपचारिक व्यवस्था को साथ लाया गया है. सरकार ने इस मसौदे पर 20 मई तक सुझाव मांगे हैं.</p>
<p> </p>
<p>केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के गन्ना (नियंत्रण) आदेश 2026 के मसौदे में पुराने कानून की बुनियादी संरचना को बरकरार रखा गया है. इसमें उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) के नियम, गन्ने की आवाजाही पर नियंत्रण, 14 दिनों के भीतर भुगतान की समय सीमा और देरी से भुगतान पर 15 फीसदी सालाना ब्याज शामिल है. हालांकि, इसमें पूरी तरह बदल चुके उद्योग के अनुरूप एक नया ढांचा तैयार किया गया है. इन नियमों का ज्‍यादातर लाभ किसानों को होगा, क्‍योंकि अभी मिलों के पास उनके हजारों करोड़ के बकाए पड़े हुए हैं.</p>
<p><strong>600 लीटर एथनॉल बराबर एक टन चीनी</strong><br />साल 1966 के कानून में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव एथनॉल को गन्ना नियामक ढांचे में स्पष्ट रूप से शामिल करना है और मसौदे में चीनी कारखाने की परिभाषा का विस्तार कर इसमें गन्ने के रस, सिरप, चीनी और मोलासेस से एथनॉल उत्पादन को भी शामिल किया गया है. इसके लिए एक ठोस रूपांतरण सूत्र पेश किया गया है, जिसके तहत उत्पादन गणना करते समय 600 लीटर एथनॉल को एक टन चीनी के बराबर माना जाएगा.</p>
<p><strong>कुछ कंपनियों को बैंक गारंटी से छूट</strong><br />मसौदे में कहा गया है कि केवल एथनॉल बनाने वाली इकाइयां, जो अपने परिसर में गन्ना नहीं पेरती हैं. उन्हें प्रदर्शन बैंक गारंटी की आवश्यकता से छूट दी गई है. यह एकीकृत चीनी-सह-एथनॉल मिलों पर नियंत्रण हल्का किए बिना एकल एथनॉल क्षमता बढ़ाने के लिए एक सोची-समझी नीतिगत पहल है. मसौदे की धारा 6ए से 6जी में ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो पुराने आदेश में नहीं थे. इसमें नए कारखानों के लिए औपचारिक आईईएम-आधारित मंजूरी प्रक्रिया, न्यूनतम दूरी के नियम, प्रदर्शन बैंक गारंटी को बढ़ाकर दो करोड़ रुपये करना और प्रभावी कदम तथा व्यावसायिक उत्पादन के लिए समय सीमा तय करना शामिल है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:48:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : महिला के शरीर को देखने और घूरने को अपराध मानने से इंकार  - बॉम्बे हाईकोर्ट </title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी महिला सहकर्मी के शरीर को घूरना अनैतिक व्यवहार है, लेकिन यह 'ताक-झांक' का अपराध नहीं है, बॉम्बे हाई कोर्ट ने शनिवार को एक फैसले में यह बात कही।जस्टिस अमित बोरकर ने कहा कि ऐसे काम नैतिक रूप से गलत हैं, लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा 354C के तहत कानूनी मानदंडों को पूरा नहीं करते। उन्होंने कहा कि महिला सहकर्मी के शरीर को घूरना 'ताक-झांक' नहीं है। हाईकोर्ट की इस फैसले एक नई चर्चा छिड़ी है। दरअसल घूरने को भी मोटे तौर पर अपराध मान लिया जाता है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49166/refuses-to-criminalize-looking-at-and-staring-at-mumbai-womans"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-13t131948.232.jpg" alt=""></a><br /><p><br /><strong>मुंबई : </strong>बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी महिला सहकर्मी के शरीर को घूरना अनैतिक व्यवहार है, लेकिन यह 'ताक-झांक' का अपराध नहीं है, बॉम्बे हाई कोर्ट ने शनिवार को एक फैसले में यह बात कही।जस्टिस अमित बोरकर ने कहा कि ऐसे काम नैतिक रूप से गलत हैं, लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा 354C के तहत कानूनी मानदंडों को पूरा नहीं करते। उन्होंने कहा कि महिला सहकर्मी के शरीर को घूरना 'ताक-झांक' नहीं है। हाईकोर्ट की इस फैसले एक नई चर्चा छिड़ी है। दरअसल घूरने को भी मोटे तौर पर अपराध मान लिया जाता है। </p>
<p> </p>
<p><strong>दफ्तर के माहौल का किया जिक्र</strong><br />हाईकोर्ट के जस्टिस अमित बोरकर ने कहा कि यह प्रावधान ताक-झांक के अपराध को परिभाषित करता है और उसके लिए सजा तय करता है। इसमें किसी महिला को कोई निजी काम करते हुए देखना, उसकी तस्वीरें लेना या उन्हें फैलाना शामिल है, जब उसे यह उम्मीद हो कि उसकी निजता बनी रहेगी। यह उन स्थितियों पर लागू होता है जहां शरीर के निजी अंग खुले हों, कोई महिला शौचालय का इस्तेमाल कर रही हो, या कोई ऐसा कृत्य कर रही हो जो आमतौर पर सार्वजनिक रूप से नहीं किया जाता। दफ्तर के माहौल में घूरना इस श्रेणी में नहीं आता।</p>
<p><strong>बीमा एक्जीक्यूटिव को बड़ी राहत</strong><br />कोर्ट ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने एक बीमा कंपनी के एग्जीक्यूटिव के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कानून के शब्दों का मतलब उनके सीधे-सादे अर्थ से ज़्यादा नहीं निकाला जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले को आगे बढ़ाना कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल होगा। गौरतलब हो कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि मीटिंग के दौरान आरोपी उससे नजरें नहीं मिलाता था, बल्कि उसके शरीर के अंगों को घूरता था और गलत टिप्पणियां करता था। कंपनी की आंतरिक शिकायत समिति ने पहले ही इस मामले में आरोपी को बरी कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 13:20:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिक्‍कों के साथ हवाई सफर है गुनाह? जान लीजिए कस्‍टम के ये नियम, नहीं तो जाना पड़ सकता है जेल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 3 सिक्‍कों की वजह से एक पैसेंजर को अरेस्‍ट कर लिया गया. यह पैसेंजर लंदन से वर्जिन अटलांटिक एयरलाइंस की फ्लाइट वि.एस.-354 से मुंबई एयरपोर्ट पहुंचा था. कस्‍टम की तलाशी में इस पैसेंजर के कब्‍जे से तीन सिक्‍के बरामद किए गए. तीन सिक्‍कों में दो सिक्‍के सोने के और एक चांदी का था. कस्‍टम का दावा है कि जांच के दौरान जब्त किए गए सिक्‍के बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक महत्व वाले हैं, जो अलग-अलग कालखंडों से जुड़े हुए हैं. ये सिक्‍के भारतीय इतिहास की समृद्ध विरासत को भी दर्शाते हैं.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47916/699aa5e1e7d8d"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/images---2026-02-22t121359.505.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 3 सिक्‍कों की वजह से एक पैसेंजर को अरेस्‍ट कर लिया गया. यह पैसेंजर लंदन से वर्जिन अटलांटिक एयरलाइंस की फ्लाइट वि.एस.-354 से मुंबई एयरपोर्ट पहुंचा था. कस्‍टम की तलाशी में इस पैसेंजर के कब्‍जे से तीन सिक्‍के बरामद किए गए. तीन सिक्‍कों में दो सिक्‍के सोने के और एक चांदी का था. कस्‍टम का दावा है कि जांच के दौरान जब्त किए गए सिक्‍के बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक महत्व वाले हैं, जो अलग-अलग कालखंडों से जुड़े हुए हैं. ये सिक्‍के भारतीय इतिहास की समृद्ध विरासत को भी दर्शाते हैं.</p>
<p> </p>
<p><strong>पैसेंजर से बरामद हुए सिक्‍कों में क्‍या है खास?</strong><br />- पहला सिक्‍का ईस्ट इंडिया कंपनी के बंगाल प्रेसिडेंसी की मोहर है, जिसे 12.37 ग्राम सोने से तैयार किया गया है. इस सिक्‍के की ढलाई मुर्शिदाबाद मिंट में हुई थी.<br />-यह सिक्का मुगल सम्राट शाह आलम 2 के नाम पर जारी किया गया था और उस पर एएच 1202 / आरवाई 19 दर्ज है.<br />-एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस तरह के गोल्ड मोहर ऐतिहासिक और कलेक्टर्स मार्केट में काफी हाई वैल्यू रखते हैं.<br />-मुंबई एयरपोर्ट पर तैनात कस्‍टम की टीम के अनुसार, 8 ग्राम सोने से बना दूसरा कॉइन एंशिएंट कुशान एम्पायर के शासक हुषिश्का का गोल्ड दिनार है.<br />-कुशान काल भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दौर माना जाता है, और उस समय जारी किए गए गोल्ड दिनार अपनी कला, डिजाइन और ऐतिहासिक महत्व के कारण बेहद कीमती माने जाते हैं.<br />-यह कॉइन भी न्यूमिस्मैटिक वैल्यू के लिहाज से काफी अहम है. चांदी से बना तीसरा कॉइन 11.44 ग्राम का है.<br />-यह मुगल बादशाह जहांगीर के दौर का चांदी से तैयार किया गया सिक्‍का है, जिस पर कर्क राशि की तस्‍वीर गुदी हुई है.</p>
<p>जहांगीर द्वारा जारी किए गए जोडिएक सीरीज के सिक्के दुनिया भर में मशहूर हैं और कलेक्टर्स के बीच इनकी काफी डिमांड रहती है. यह खास सिल्वर कॉइन अहमदाबाद मिंट में ढाला गया था.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Feb 2026 12:14:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : डिप्टी मेयर संजय घाडी की दो टूक; चाहे मजार हो या कोई और अवैध निर्माण, सब पर चलेगा बुलडोजर </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में अवैध कब्जों को लेकर बीएमसी के डिप्टी मेयर संजय घाडी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि चाहे मजार हो या दूसरा कोई अवैध निर्माण, प्रशासन को कार्रवाई के लिए आदेश दिया जाएगा। उन्होंने अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों को भी मुंबई से बाहर करने का महायुति का वादा दोहराया है। वहीं 'वंदे मातरम' को लेकर केंद्र सरकार की नई गाइडलाइंस पर भी संजय घाडी ने अपनी बात रखी। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47714/mumbai-deputy-mayor-sanjay-ghadi-bluntly-said-that-whether-it"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-14t115709.867.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मुंबई में अवैध कब्जों को लेकर बीएमसी के डिप्टी मेयर संजय घाडी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि चाहे मजार हो या दूसरा कोई अवैध निर्माण, प्रशासन को कार्रवाई के लिए आदेश दिया जाएगा। उन्होंने अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों को भी मुंबई से बाहर करने का महायुति का वादा दोहराया है। वहीं 'वंदे मातरम' को लेकर केंद्र सरकार की नई गाइडलाइंस पर भी संजय घाडी ने अपनी बात रखी। </p>
<p> </p>
<p><strong>अवैध कब्जों पर क्या कहा?</strong><br />डिप्टी मेयर संजय घाडी ने कहा कि चाहे वह 'मजार' हो या कोई और बिना इजाजत किया गया निर्माण, प्रशासन को उसके खिलाफ एक्शन लेने का आदेश देंगे। बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर उन्होंने कहा कि मेयर रितु तावडे ने अपने इंटरव्यू में पहले ही स्पष्ट किया था कि मुंबई शहर में बांग्लादेशी घुसपैठियों को हटाया जाना चाहिए। जल्द मुंबई पुलिस के बड़े अधिकारियों के साथ बीएमसी मेयर के नेतृत्व में बैठक होगी। इसके बाद अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों पर एक्शन लिया जाएगा।</p>
<p><strong>मुंबई सबकी है</strong><br />एआईएमआईएम को लेकर भी संजय घाडी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी को भी अपने धर्म के बारे में इस तरह से बात नहीं करनी चाहिए, न ही उन्हें जाति के आधार पर भेदभाव करना चाहिए। मुंबई सबकी है और हम सब मुंबई में एक साथ रहते हैं। यहां गुजराती, मराठी और उत्तर भारतीय हैं। सभी ने मुंबई को आर्थिक राजधानी बनाने में योगदान दिया है। चुनावों के वक्त राजनीति ठीक है, लेकिन सभी को चुनावों के बाद मुंबई में विकास के लिए काम करना चाहिए। </p>
<p><strong>हर नेता को हर चुनाव में कड़ी मेहनत करनी चाहिए</strong><br />उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई का मुस्लिम समुदाय पहले कांग्रेस का समर्थन करता था। धीरे-धीरे वे दूर हो गए और लोकसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी के साथ रहने का फैसला किया। उसके बाद इस गठबंधन को भी छोड़ दिया और एआईएमआईएम में शामिल हो गए। नतीजतन, मुस्लिम-बहुल इलाकों से आठ कॉर्पोरेटर चुने गए हैं। संजय घाडी ने आगे कहा कि हर नेता को हर चुनाव में कड़ी मेहनत करनी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी व एकनाथ शिंदे और हमारी शिवसेना, हम सभी ने लगातार काम किया है और इसीलिए हम जीते हैं।</p>
<p><strong>'वंदे मातरम' पर क्या बोले?</strong><br />'वंदे मातरम' को लेकर केंद्र सरकार की नई गाइडलाइंस पर संजय घाडी बोले कि अगर केंद्र सरकार या राज्य सरकार कोई कानून बनाती है व उसे नागरिकों के लिए लागू किया जाता है, तो उसका पालन होना चाहिए। लेकिन हम किसी धर्म का विरोध करके ऐसा नहीं करेंगे। हमें एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 11:58:11 +0530</pubDate>
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