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                <title>levels - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई में बारिश से 7 में 4 झीलें ओवरफ्लो, 3 का जलस्तर भी बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लगातार हो रही बारिश ने मुंबई के जल संकट की चिंता को काफी हद तक कम कर दिया है। बीएमसी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, शहर को पेयजल उपलब्ध कराने वाली सातों झीलों में पानी का कुल भंडार बढ़कर 10,09,432 मिलियन लीटर पहुंच गया है। यह इन झीलों की कुल भंडारण क्षमता 14.47 लाख मिलियन लीटर का 69.74 प्रतिशत है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50903/due-to-rain-in-mumbai-4-out-of-7-lakes"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-23t202804.348.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>लगातार हो रही बारिश ने मुंबई के जल संकट की चिंता को काफी हद तक कम कर दिया है। बीएमसी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, शहर को पेयजल उपलब्ध कराने वाली सातों झीलों में पानी का कुल भंडार बढ़कर 10,09,432 मिलियन लीटर पहुंच गया है। यह इन झीलों की कुल भंडारण क्षमता 14.47 लाख मिलियन लीटर का 69.74 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटों में जल भंडारण में 7.84 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बारिश के चलते चार जलाशय ओवरफ्लो हो चुके हैं, जबकि मुंबई को सबसे अधिक पानी उपलब्ध कराने वाली भातसा झील अभी अपनी कुल क्षमता के लगभग 65 प्रतिशत तक भर चुकी है। हालांकि इस वर्ष का जलस्तर पिछले साल इसी अवधि के 86.88 प्रतिशत की तुलना में अभी भी कम है।</p>
<p> </p>
<p><strong>लगातार बारिश से बढ़ी उम्मीद</strong><br />बीएमसी के अनुसार, पिछले 24 घंटों में जलग्रहण क्षेत्रों में 100 से 230 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले 24 से 48 घंटों तक बारिश जारी रहने की संभावना है। इससे झीलों का स्तर और बढ़ सकता है। सातों झीलें भातसा, मोदक सागर, अपर वैतरणा, मिडिल वैतरणा, तानसा, विहार और तुलसी मुंबई, ठाणे, पालघर और नासिक जिलों में स्थित हैं और पूरी तरह मॉनसून पर निर्भर हैं। लगातार हो रही बारिश से जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे आने वाले महीनों में मुंबई की पेयजल आपूर्ति बेहतर रहने की उम्मीद है। हालांकि प्रशासन ने नागरिकों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने और खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है।</p>
<p>भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए मुंबई और आसपास के इलाकों में बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार, शहर और उपनगरों में मध्यम से भारी बारिश के साथ 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। मुंबई के लिए फिलहाल येलो अलर्ट, ठाणे के लिए येलो अलर्ट और पालघर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पालघर और ठाणे में 24 जुलाई तक भारी बारिश जारी रहने का अनुमान है, जबकि उसके बाद 26 जुलाई तक हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं नासिक में भी आंधी-तूफान के साथ हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान है।</p>
<p><strong>हाई टाइड को लेकर भी चेतावनी</strong><br />BMC ने समुद्र तटीय इलाकों के लिए भी सतर्कता बरतने की सलाह दी है। नगर निगम के मुताबिक, शाम 6:22 बजे लगभग 3 मीटर ऊंची हाई टाइड आने की संभावना है। इसके अलावा दोपहर 1:32 बजे और देर रात 1:21 बजे लो टाइड की स्थिति रहेगी। प्रशासन ने लोगों से समुद्र तटों और निचले तटीय क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने से बचने की अपील की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 20:28:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों के स्तर को मापने के लिए अब सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश के प्रमुख महानगरों मुंबई और दिल्ली में वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों (मीथेन और कार्बन डाईऑक्साइड) के स्तर को मापने के लिए अब सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जाएगा। आईआईटी बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट से प्राप्त डाटा का उपयोग कर इन शहरों में कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी गैसों की मात्रा को सटीकता से मापने का तरीका खोज निकाला है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44767/satellite-will-now-be-used-to-measure-mumbai-air-pollution"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-10/images---2025-10-18t113700.736.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>देश के प्रमुख महानगरों मुंबई और दिल्ली में वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों (मीथेन और कार्बन डाईऑक्साइड) के स्तर को मापने के लिए अब सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जाएगा। आईआईटी बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट से प्राप्त डाटा का उपयोग कर इन शहरों में कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी गैसों की मात्रा को सटीकता से मापने का तरीका खोज निकाला है। </p>
<p> </p>
<p>भारत में फिलहाल ग्रीनहाउस गैसों की निगरानी के लिए जमीन आधारित स्टेशनों का बड़ा नेटवर्क नहीं है। इसी कमी को देखते हुए आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर मनोरंजन साहू और आदर्श अलगडे ने अंतरिक्ष से मिलने वाले डाटा पर भरोसा किया। सैटेलाइट डाटा के विश्लेषण से उन्होंने पाया कि पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली और मुंबई में ग्रीनहाउस गैसों का स्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही मौसम और शहर के अलग-अलग हिस्सों के आधार पर इसमें अंतर भी देखने को मिला। इस विश्लेषण से शोधकर्ताओं को “मीथेन हॉटस्पॉट्स” यानी उच्च मीथेन उत्सर्जन वाले इलाकों की पहचान करने में मदद मिली। ये स्थान आम तौर पर कचरा भराव क्षेत्र (लैंडफिल), अपशिष्ट जल (वेस्टवॉटर) प्रबंधन केंद्रों या अधिक औद्योगिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों के आसपास पाए गए। <br />प्रो. साहू के अनुसार, सैटेलाइट मॉनिटरिंग से सरकार और नीति-निर्माताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोत कहां हैं। इससे वे ट्रैफिक नियंत्रण, लैंडफिल गैस प्रबंधन और औद्योगिक उत्सर्जन पर निगरानी जैसी नीतियों को प्राथमिकता दे सकेंगे। साथ ही समय के साथ इन नीतियों के प्रभाव का भी मूल्यांकन कर पाएंगे। <br />नासा और ईएसए के सैटेलाइट डाटा का उपयोग</p>
<p>शोधकर्ताओं ने मुख्य रूप से नासा के ऑर्बिटिंग कार्बन ऑब्जर्वेटरी-2 से प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड डाटा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सेंटिनल-5पी सैटेलाइट से मिले मीथेन डाटा का उपयोग किया। चूंकि ये सैटेलाइट सीधे उत्सर्जन की मात्रा नहीं बताते, इसलिए आवश्यक मान निकालने के लिए शोधकर्ताओं ने विशेष एल्गोरिदम का सहारा लिया। डाटा की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए इसे टीसीसीओएन नामक वैश्विक जमीनी मापन नेटवर्क के साथ मिलाकर सत्यापित किया गया। </p>
<p><strong>सैटेलाइट और जमीनी स्टेशन का संयुक्त उपयोग होगा सबसे प्रभावी</strong><br />टीम ने पुराने डाटा के आधार पर भविष्य के रुझान अनुमानित करने के लिए सारिमा जैसे सांख्यिकीय मॉडल को दिल्ली और मुंबई के लिए अनुकूलित किया। हालांकि, प्रो. साहू का कहना है कि सैटेलाइट तकनीक की अपनी सीमाएं हैं, बादल, धूल और शहरी धुंध (स्मॉग) जैसे तत्व कभी-कभी माप को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा सैटेलाइट लगातार निगरानी करने के बजाय केवल एक-एक स्नैपशॉट प्रदान करते हैं। इसलिए उनका मानना है कि सबसे बेहतर समाधान सैटेलाइट और जमीनी स्टेशनों का संयुक्त उपयोग है। इससे उत्सर्जन संबंधी अनुमानों की सटीकता बढ़ेगी और जलवायु नीति-निर्माण में ठोस आधार मिलेगा। भविष्य में मशीन लर्निंग और भौतिकी-आधारित मॉडल का संयोजन इस प्रक्रिया को और अधिक उन्नत बना सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Oct 2025 11:37:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: वाहनों की बढ़ती भीड़ और बढ़ते प्रदूषण के स्तर से निपटने के लिए ऑड-ईवन वाहन योजना या कलर कोडिंग योजना लागू करने का आग्रह</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ट्रैफिक जाम और खराब होती वायु गुणवत्ता के बीच, एक प्रमुख नागरिक समूह, वॉचडॉग फाउंडेशन ने महाराष्ट्र सरकार से मुंबई में वाहनों की बढ़ती भीड़ और बढ़ते प्रदूषण के स्तर से निपटने के लिए ऑड-ईवन वाहन योजना या कलर कोडिंग योजना लागू करने का आग्रह किया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/40505/mumbai--urge-to-implement-odd-even-vehicle-scheme-or-colour-coding-scheme-to-tackle-increasing-vehicle-congestion-and-rising-pollution-levels"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-05/download---2025-05-11t201041.765.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>ट्रैफिक जाम और खराब होती वायु गुणवत्ता के बीच, एक प्रमुख नागरिक समूह, वॉचडॉग फाउंडेशन ने महाराष्ट्र सरकार से मुंबई में वाहनों की बढ़ती भीड़ और बढ़ते प्रदूषण के स्तर से निपटने के लिए ऑड-ईवन वाहन योजना या कलर कोडिंग योजना लागू करने का आग्रह किया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और यातायात पुलिस आयुक्त सहित प्रमुख अधिकारियों को संबोधित एक खुले पत्र में, फाउंडेशन ने शहर की पुरानी यातायात समस्याओं को कम करने के लिए नियामक उपायों की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डाला।</p>
<p> </p>
<p>फाउंडेशन के अनुसार, मुंबई की वाहन आबादी लगभग 50 लाख हो गई है, जिसमें प्रतिदिन 193 कारें और 460 दोपहिया वाहन जुड़ते हैं। हालांकि, शहर की सड़कें इस बढ़ती मांग के साथ तालमेल बिठाने में विफल रही हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में प्रति किलोमीटर 800 वाहनों का औसत वाहन घनत्व हो गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 May 2025 20:11:23 +0530</pubDate>
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