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                <title>Maratha community - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Maratha community RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नागपुर : मराठा समुदाय को सामान्य ओबीसी से आरक्षण दिया जाएगा...  यह मूल OBC समुदाय के साथ अन्याय - विजय वडेट्टीवार </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">नागपुर के रवि भवन में विदर्भ के नागपुर, भंडारा, गोंदिया, गढ़चिरौली, चंद्रपुर, वर्धा, यवतमाल, अमरावती, अकोला, बुलढाणा और वाशिम जिलों के ओबीसी संगठनों की एक बैठक हुई। विजय वडेट्टीवार ने कहा कि ओबीसी के लिए लड़ते समय अक्सर आर्थिक तंगी महसूस होती है। हालाँकि, जैसे ही नेताओं को ओबीसी का डर महसूस होने लगेगा, यह समस्या अपने आप दूर हो जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे समय-समय पर ओबीसी की लड़ाई में हाथ बँटाएँगे, लेकिन कानूनी लड़ाई के लिए किसी भी तरह की आर्थिक कठिनाई नहीं आने देंगे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43726/nagpur-maratha-community-will-be-given-reservation-from-general-obc"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/download-(4)1.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नागपुर :</strong> राज्य सरकार ने मराठा समुदाय को ओबीसी से आरक्षण देने के अपने पहले सरकारी फैसले में 'पात्र' शब्द का इस्तेमाल किया था। बाद में, एक दूसरे सरकारी फैसले में इस शब्द को हटा दिया गया। इसका मतलब है कि मराठा समुदाय को सामान्य ओबीसी से आरक्षण दिया जाएगा। यह मूल ओबीसी समुदाय के साथ अन्याय है। इसके खिलाफ लड़ने के लिए, 25 प्रमुख लोगों की एक समिति बनाई जाएगी और अक्टूबर में नागपुर में ओबीसी का एक विशाल मार्च निकाला जाएगा, यह जानकारी ओबीसी नेताओं और कांग्रेस विधानसभा में पार्टी के नेता विजय वडेट्टीवार ने दी।</p>
<p style="text-align:justify;">नागपुर के रवि भवन में विदर्भ के नागपुर, भंडारा, गोंदिया, गढ़चिरौली, चंद्रपुर, वर्धा, यवतमाल, अमरावती, अकोला, बुलढाणा और वाशिम जिलों के ओबीसी संगठनों की एक बैठक हुई। विजय वडेट्टीवार ने कहा कि ओबीसी के लिए लड़ते समय अक्सर आर्थिक तंगी महसूस होती है। हालाँकि, जैसे ही नेताओं को ओबीसी का डर महसूस होने लगेगा, यह समस्या अपने आप दूर हो जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे समय-समय पर ओबीसी की लड़ाई में हाथ बँटाएँगे, लेकिन कानूनी लड़ाई के लिए किसी भी तरह की आर्थिक कठिनाई नहीं आने देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि मराठा समुदाय को आरक्षण दिया जाता है, तो ओबीसी के लिए कितना आरक्षण बचेगा? मराठा आरक्षण: इस संबंध में लिया गया सरकारी निर्णय निश्चित रूप से ओबीसी को नुकसान पहुँचाएगा। 27 प्रतिशत आरक्षण में से 13 प्रतिशत पहले ही काटा जा चुका है। यदि शेष 19 प्रतिशत में मराठा समुदाय को आरक्षण दिया जाता है, तो ओबीसी के लिए कितना आरक्षण बचेगा? ओबीसी के अधिकार समाप्त होने की संभावना है। वडेट्टीवार ने अपील की कि जो लोग हमारे लिए काम करते हैं, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों, उनका समर्थन करें। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरक्षण का विरोधी है। उनकी विचारधारा के लोग सत्ता में हैं। हम उनसे ओबीसी आरक्षण को झटका न देने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? यदि हम कानूनी लड़ाई नहीं लड़ेंगे, तो ओबीसी को बड़ा झटका लगेगा। वडेट्टीवार ने दावा किया कि यह ओबीसी के राजनीतिक आरक्षण को समाप्त करने की उनकी योजना है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच, 12 सितंबर को नागपुर में प्रमुख ओबीसी नेताओं की एक बैठक होगी। इस बैठक में मराठा आरक्षण को लेकर सरकार के सार्वजनिक फैसले पर लड़ाई के अनुसार रणनीति तय की जाएगी। हालांकि, बैठक में दो स्तरों पर लड़ाई लड़ने का फैसला किया गया। पहली लड़ाई न्यायिक स्तर पर लड़ी जाएगी। विदर्भ के वकील संघ पूरी ताकत से अदालत में अपना पक्ष रखेंगे। अगर उन्हें ओबीसी संगठनों का समर्थन मिला तो दूसरी लड़ाई आंदोलन के जरिए लड़ी जाएगी, वडेट्टीवार ने यह भी स्पष्ट किया। हमारा रुख है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही हमारे अधिकारों की रक्षा करना भी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा रुख है कि ओबीसी का आरक्षण प्रभावित नहीं होना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 08:29:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मराठा समुदाय को बचाने के लिए लिया ये निर्णय...  महाराष्ट्र चुनाव से यू-टर्न पर मनोज जरांगे ने दी सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने बुधवार को दावा किया कि वे महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य का राजनीतिक परिदृश्य बदल सकते हैं। चुनाव से दूर रहने का फैसला लेकर मराठा आरक्षण की लड़ाई को जीवित रखा है। जरांगे ने कहा कि अगर वे चुनावी मैदान में उतरते, तो मराठा समुदाय बंट सकता था। जरांगे ने कहा कि मराठा समुदाय पहले ही निशाने पर है। उन्होंने कहा कि ‘‘अगर हम चुनाव लड़ते, तो समुदाय में विभाजन पैदा हो सकता था।”</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/35531/this-decision-was-taken-to-save-the-maratha-community-manoj-jarange-gave-clarification-on-the-u-turn-from-maharashtra-elections"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-11/989.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>छत्रपति संभाजीनगर: </strong>महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन मनोज जरांगे ने चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान करते हुए अपने सभी प्रत्याशियों को नामांकन वापस लेने के लिए कहा था। चुनाव नहीं लड़ने के फैसले पर मनोज जरांगे ने अब बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि हम चुनावी मैदान में उतरते तो मराठा समुदाय बंट सकता था।</p>
<p style="text-align:justify;">आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने बुधवार को दावा किया कि वे महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य का राजनीतिक परिदृश्य बदल सकते हैं। चुनाव से दूर रहने का फैसला लेकर मराठा आरक्षण की लड़ाई को जीवित रखा है। जरांगे ने कहा कि अगर वे चुनावी मैदान में उतरते, तो मराठा समुदाय बंट सकता था। जरांगे ने कहा कि मराठा समुदाय पहले ही निशाने पर है। उन्होंने कहा कि ‘‘अगर हम चुनाव लड़ते, तो समुदाय में विभाजन पैदा हो सकता था।”<br /><br />मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने जालना जिले में कहा कि 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों को समर्थन देने के बारे में निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा। मनोज जरांगे ने पहले कुछ निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान की थी, जहां वह कुछ उम्मीदवारों का विरोध करने पर विचार कर रहे थे, लेकिन नामांकन वापस लेने के आखरी दिन 4 नवंबर को उन्होंने कहा कि “हम राज्य में किसी भी उम्मीदवार को चुनाव मैदान में नहीं उतारेंगे और न ही किसी प्रत्याशी का समर्थन करेंगे।”<br /><br />आगे की रणनीति के बारे में मनोज जरांगे ने कहा कि ‘‘चुनाव न लड़ने के फैसले से कुछ उम्मीदवार नाराज हो सकते हैं। लेकिन इस फैसले से मैंने आरक्षण की लड़ाई को जिंदा रखा है। चुनाव थोड़े समय के लिए खुशी देते हैं, जिससे हमें बचना चाहिए।” उन्होंने कहा कि वह समय आने पर निर्णय लेंगे कि चुनाव में किसे हराना है, क्योंकि मतदान में अभी कुछ दिन बाकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने कहा कि ‘‘जो हमसे समर्थन मांग रहे हैं, हम उन लोगों को मराठा आरक्षण के समर्थन में मसौदा देंगे। उसके बाद तय करेंगे कि हमें किसका समर्थन करना चाहिए। हमारे पास अंतिम चरण में राजनीतिक माहौल बदलने की क्षमता है। हम देखेंगे कि कौन मजबूत उम्मीदवार है और फिर तय करेंगे कि हमें किसे मसौदा और समर्थन देना चाहिए।”<br /><br />मनोज जरांगे के चुनाव नहीं लड़ने के उनके फैसले से विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी को फायदा होगा? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ‘‘यह बात तो बहुत पहले से कही जा रही है। फिर पिछले साल अंतरवाली सराती गांव में हमारे लोगों पर हमला क्यों किया गया?</p>
<p style="text-align:justify;">उनके खिलाफ मामले क्यों दर्ज किए गए। हाल ही में 15-16 समुदायों को आरक्षण दिया गया, लेकिन हमें आरक्षण नहीं दिया गया।” राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) प्रमुख शरद पवार ने सोमवार को कहा था कि विपक्षी गठबंधन में किसी का भी मनाेज जरांगे के चुनाव नहीं लड़ने के फैसले से कोई संबंध नहीं है। एनसीपी (एसपी) एमवीए का घटक दल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Nov 2024 20:24:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मनोज जरांगे पाटील का बड़ा ऐलान...  मराठा समाज विधानसभा चुनाव लड़ेगा </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मराठा बहुल सीटों पर उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने का नुकसान महायुति और महा विकास आघाडी दोनों को हो सकता है। वैसे, जरांगे का गुस्सा आघाडी से ज्यादा देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी पर रहा है, इसलिए कुछ लोगों का मानना है कि बीजेपी को ज्यादा नुकसान होगा। वहीं, कुछ जानकार यह भी दावा कर रहे हैं कि मराठा उम्मीदवार चुनाव मैदान में होने से ओबीसी वोटर्स का ध्रुवीकरण होगा। ऐसे में, अगर महा विकास आघाडी और महायुति ने ओबीसी उम्मीदवार दिए, तो दोनों के बीच वोटों का विभाजन होगा और दोनों को नुकसान झेलना पड़ सकता है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/35101/manoj-jarange-patil-s-big-announcementmaratha-community-will-contest-the-assembly-elections"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-10/download-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई:</strong> मराठा आरक्षण आंदोलन के नायक मनोज जरांगे पाटील ने ऐलान किया है कि मराठा समाज विधानसभा चुनाव लड़ेगा। मनोज जरांगे ने कहा कि समय कम है, ऐसे में चुनाव लड़ने के इच्छुक मराठा उम्मीदवार नामांकन फॉर्म भर दें, लेकिन सूचित किए जाने पर नाम वापस लेने की भी तैयारी रखें। अपने गांव अंतरवाली सराटी में पिछले 2 दिन से चल रही सकल मराठा समाज की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।</p>
<p style="text-align:justify;">जरांगे की 3 प्रमुख घोषणाएं<br />1. जिस सीट पर मराठा उम्मीदवार के जीतने की गारंटी है, वहां चुनाव लड़ेंगे।<br />2. एससी/एसटी के लिए रिजर्व सीटों पर चुनाव लड़ रहे एससी/एसटी उम्मीदवारों में जो मराठा समाज के विचारों से सहमत है, उसे हम सपोर्ट करेंगे।<br />3. जहां मराठा समाज का उम्मीदवार नहीं होगा, उस सीट पर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में से जो 500 रुपये के बॉन्ड पेपर पर यह लिखकर देगा कि मराठा समाज की सभी मांगों से सहमत है, उसे समर्थन दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मराठा उम्मीदवारों से फॉर्म भरने की अपील<br />जरांगे ने कहा कि मराठा समाज का जो उम्मीदवार कहने के बावजूद नाम वापस नहीं लेगा, समाज समझेगा कि उसने पैसा खाया है। उन्होंने कहा कि मराठवाडा की कई सीटों पर मराठा वोटिंग 1 लाख से ज्यादा है। इतने बहुमत को तोड़ना किसी के लिए भी संभव नहीं है। कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में अन्य समीकरण महत्वपूर्ण हैं। वह उन समीकरणों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। अगर समीकरण जुड़ गए तो ठीक है, लेकिन अगर नहीं जुड़े, तो सबके लिए मुश्किल होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मराठा बहुल सीटों पर उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने का नुकसान महायुति और महा विकास आघाडी दोनों को हो सकता है। वैसे, जरांगे का गुस्सा आघाडी से ज्यादा देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी पर रहा है, इसलिए कुछ लोगों का मानना है कि बीजेपी को ज्यादा नुकसान होगा। वहीं, कुछ जानकार यह भी दावा कर रहे हैं कि मराठा उम्मीदवार चुनाव मैदान में होने से ओबीसी वोटर्स का ध्रुवीकरण होगा। ऐसे में, अगर महा विकास आघाडी और महायुति ने ओबीसी उम्मीदवार दिए, तो दोनों के बीच वोटों का विभाजन होगा और दोनों को नुकसान झेलना पड़ सकता है।<br /><br />हालांकि, यह भी एक सचाई है कि महाराष्ट्र में ओबीसी और मराठों की जनसंख्या लगभग समान है। ज्यादा से ज्यादा एक या दो पर्सेंट का अंतर है। इस समय ओबीसी बीजेपी के करीब है, जबकि मराठा समाज राजनीतिक रूप से बिखरा हुआ है। इसका एक बड़ा कारण आर्थिक विषमता है। यही वजह है कि मनोज जरांगे पाटील मराठों को ओबीसी में शामिल कर आरक्षण की मांग कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Oct 2024 10:17:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरक्षण पर मराठा समुदाय को शरद पवार ने दिया धोखा...</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">2021 में, सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग अधिनियम, 2018 को रद्द कर दिया, जिसने आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा के उल्लंघन का हवाला देते हुए मराठा समुदाय को आरक्षण दिया था। वर्तमान में, मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में शामिल करके अपने समुदाय के लिए कोटा की जोरदार मांग कर रहे हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/32602/sharad-pawar-betrayed-the-maratha-community-on-reservation"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-07/cf1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जालना:</strong> महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक बबनराव लोनीकर ने एनसीपी (सपा) प्रमुख शरद पवार पर आरक्षण के मुद्दे पर मराठा समुदाय को धोखा देने का आरोप लगाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जालना जिले के परतुर में बुधवार को पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में बोलते हुए उन्होंने पवार को 'शकुनि मामा' भी कहा, जो महाभारत के पात्र का संदर्भ है जिसे आमतौर पर दुष्ट और चतुर माना जाता है। लोनीकर ने कहा, "शरद पवार ने मराठा समुदाय को आरक्षण न देकर धोखा दिया है। 2018 में भाजपा सरकार ने इस समुदाय को आरक्षण दिया था, लेकिन यह सुप्रीम कोर्ट में टिक नहीं सका।</p>
<p style="text-align:justify;">शरद पवार के कहने पर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने के लिए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को नियुक्त किया। लेकिन सिब्बल की संलिप्तता के कारण सरकार को मामले में अस्वीकृति का सामना करना पड़ा।"</p>
<p style="text-align:justify;">2021 में, सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग अधिनियम, 2018 को रद्द कर दिया, जिसने आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा के उल्लंघन का हवाला देते हुए मराठा समुदाय को आरक्षण दिया था। वर्तमान में, मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में शामिल करके अपने समुदाय के लिए कोटा की जोरदार मांग कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jul 2024 18:01:40 +0530</pubDate>
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