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                <title>Setback - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई : पार्षद विशाखा राउत का कुनबी ओबीसी सर्टिफकेट रद्द, बीएमसी में उद्धव ठाकरे को झटका लगना तय</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी को बीएमसी में बड़ा झटका लग सकता है। पूर्व मेयर और पार्षद विशाखा राउत को चुनाव रद्द हो सकता है क्योंकि पालघर जाति जांच कमेटी ने बीएमसी चुनाव लड़ते समय उनके जमा किए गए ओबीसी सर्टिफिकेट को अमान्य कर दिया है। अगर ऐसा हुआ तो बीएमसी में उद्धव ठाकरे का एक पार्षद कम हो जाएगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51552/mumbai-councilor-vishakha-rauts-kunbi-obc-certificate-canceled-uddhav-thackeray"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-26t114540.606.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मुंबई में पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी को बीएमसी में बड़ा झटका लग सकता है। पूर्व मेयर और पार्षद विशाखा राउत को चुनाव रद्द हो सकता है क्योंकि पालघर जाति जांच कमेटी ने बीएमसी चुनाव लड़ते समय उनके जमा किए गए ओबीसी सर्टिफिकेट को अमान्य कर दिया है। अगर ऐसा हुआ तो बीएमसी में उद्धव ठाकरे का एक पार्षद कम हो जाएगा। विशाखा राउत ने दादर के वार्ड 191 से शिवसेना (यूबीटी) के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जो ओबीसी कैटेगरी की महिलाओं के लिए रिजर्व था। उन्होंने रिजर्व सीट के लिए अपनी योग्यता साबित करने के लिए एक ओबीसी सर्टिफिकेट जमा किया था।</p>
<p> </p>
<p><strong>कुनबी सर्टिफिकेट हो गया कैंसल</strong><br />एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के नेता सदा सरवणकर की बेटी प्रिया गुरव वार्ड संख्या 191 में विशाखा के सामने लड़ी थीं। वार्ड 191 से यूबीबी पार्षद विशाखा राउत के चुनाव को रद्द करने की मांग के साथ मंगलवार को बीएमसी कमिश्नर से मुलाकात की और राउत को अयोग्य ठहराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने कुनबी जाति सर्टिफिकेट का इस्तेमाल करके ओबीसी-रिजर्व वार्ड से चुनाव लड़ा था। 24 अगस्त को बीएमसी कमिश्नर को दिए एक रिप्रेजेंटेशन में गुरव ने पालघर डिस्ट्रिक्ट जाति वेरिफिकेशन कमेटी के 20 अगस्त के आदेश का हवाला दिया, जिसकी एक कॉपी उन्हें ईमेल से मिली थी।</p>
<p><strong>उद्धव ठाकरे को लगेगा झटका</strong><br />इसी साल की शुरुआत में हुए बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) चुनाव में उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें जीती थीं। विशाखा राउत वर्ष 1997 से 1998 तक मुंबई (बृहन्मुंबई नगर निगम) की मेयर (महापौर) रही थीं। वह स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने के बाद मुंबई की पहली महिला मेयर बनी थीं। वह 1999 से 2004 तक दादर विधानसभा क्षेत्र से महाराष्ट्र विधानसभा की विधायक भी रह चुकी हैं।</p>
<p>विशाखा राउत की सदस्यता रद्द होने से उद्धव ठाकरे को झटका लगेगा। बीएमसी के नियमों और अदालती फैसलों के अनुसार यदि किसी निर्वाचित पार्षद की सदस्यता फर्जी दस्तावेजों या अन्य कारणों से रद्द होती है, तो चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को उस पद के लिए पात्र घोषित किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 11:46:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नई दिल्ली : 'चुनाव आयोग को नियुक्ति के पूरे अधिकार, नए आदेश की जरूरत नहीं'; टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ झटका लगा है। चुनाव आयोग द्वारा वोटों की गिनती के लिए मुख्य रूप से केंद्र सरकार और पीएसयू के कर्मचारियों को तैनात करने के निर्देश के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस अहम मुद्दे को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आज टीएमसी की याचिका पर सुनवाई की।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49631/new-delhi-election-commission-has-full-powers-of-appointment-no"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-02t131314.131.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली :</strong> पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ झटका लगा है। चुनाव आयोग द्वारा वोटों की गिनती के लिए मुख्य रूप से केंद्र सरकार और पीएसयू के कर्मचारियों को तैनात करने के निर्देश के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस अहम मुद्दे को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आज टीएमसी की याचिका पर सुनवाई की। विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी नया आदेश पारित करने से साफ इनकार कर दिया है। दरअसल, चुनाव आयोग ने अदालत को आश्वासन दिया है कि वह अपने 13 अप्रैल के परिपत्र (सर्कुलर) का पूरी तरह से पालन करेगा।</p>
<p> </p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के मुताबिक, इस सर्कुलर में मतगणना प्रक्रिया में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य सरकार के कर्मचारियों की तैनाती का भी प्रावधान है। चुनाव आयोग के वकील के इस बयान के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने केवल यह दोहराया कि चुनौती दिए गए सर्कुलर को लागू किया जाएगा और मामले में आगे कोई अन्य आदेश देने से मना कर दिया। साथ ही यह भी कहा कि चुनाव आयोग को नियुक्ति के पूरे अधिकार हैं।</p>
<p><strong>फर्क नहीं पड़ता कि अधिकारी केंद्र का है- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी</strong><br />सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि मतगणना के दौरान वहां हर राजनीतिक दल के चुनाव एजेंट मौजूद रहेंगे। इसलिए, इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता कि पर्यवेक्षक केंद्र सरकार का नामित अधिकारी है या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की तैनाती पूरी तरह से चुनाव आयोग की अपनी संतुष्टि पर निर्भर करती है, क्योंकि वहां सभी पार्टियों के एजेंट मौजूद होंगे। <br />क्या है पूरा मामला?<br />यह पूरा मामला वोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है। चुनाव आयोग ने निर्देश दिया था कि बंगाल में वोटों की गिनती के लिए केंद्रीय कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) बनाया जाएगा। टीएमसी इस फैसले का विरोध कर रही है। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया में राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी बराबर शामिल किया जाना चाहिए। इसी आदेश को चुनौती देने के लिए टीएमसी ने अर्जी दी थी, जिस पर जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई की। </p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट के जजों ने नियमों को लेकर क्या स्पष्ट किया? </strong><br />मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने नियमों को लेकर स्थिति साफ की।<br />उन्होंने कहा कि नियमों में यह विकल्प पूरी तरह से खुला है कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट केंद्र सरकार के भी हो सकते हैं और राज्य सरकार के भी।<br />कोर्ट ने कहा कि जब यह विकल्प खुला हुआ है, तो हम यह बिल्कुल नहीं कह सकते कि चुनाव आयोग का यह नोटिफिकेशन नियमों के खिलाफ है।<br />जस्टिस बागची ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के पास यह अधिकार है कि वह कह सकता है कि दोनों अधिकारी केंद्र सरकार के ही होंगे। <br /> कपिल सिब्बल ने कोर्ट में क्या दलील दी? <br />टीएमसी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के सर्कुलर (परिपत्र) पर सवाल उठाए।<br />सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि चुनाव आयोग के सर्कुलर में खुद ऐसा स्पष्ट तौर पर नहीं कहा गया है कि केवल केंद्रीय कर्मचारी ही होंगे।<br />टीएमसी का तर्क है कि चुनाव आयोग का यह कदम जानबूझकर राज्य सरकार के कर्मचारियों को गिनती से दूर रखने के लिए उठाया गया है। <br />सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की दलीलों पर क्या जवाब दिया?<br />वकील सिब्बल की दलीलों पर जस्टिस बागची ने तुरंत अपना पक्ष रखा। उन्होंने ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने ऐसा कहा भी होता, तब भी हम उन्हें इस बात के लिए गलत नहीं ठहरा सकते थे। इसका मुख्य कारण यह है कि नियम साफ तौर पर कहते हैं कि मगणना के लिए केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधिकारियों को नियुक्त किया जा सकता है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 13:15:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : मेयर रितू तावडे को झटका, कोर्ट ने केस से बरी करने से किया इनकार, जानिए पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बीएमसी की नई मेयर और बीजेपी नगरसेवक रितु तावडे को मुंबई की कोर्ट से झटका लगा है। सेशन कोर्ट ने 2 टीचरों पर हमले के आरोपों का सामना कर रही तावडे को आपराधिक केस से बरी करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने माना है कि विक्टिम और गवाहों के बयान आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त हैं। मामले से जुड़ा विवाद टीचर के ट्रांसफर को लेकर पैदा हुआ था। झगड़े के दौरान तावडे ने टीचरों के साथ मारपीट की थी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48553/shock-to-mumbai-mayor-ritu-tawde-court-refuses-to-acquit"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-19t183445.778.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बीएमसी की नई मेयर और बीजेपी नगरसेवक रितु तावडे को मुंबई की कोर्ट से झटका लगा है। सेशन कोर्ट ने 2 टीचरों पर हमले के आरोपों का सामना कर रही तावडे को आपराधिक केस से बरी करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने माना है कि विक्टिम और गवाहों के बयान आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त हैं। मामले से जुड़ा विवाद टीचर के ट्रांसफर को लेकर पैदा हुआ था। झगड़े के दौरान तावडे ने टीचरों के साथ मारपीट की थी।</p>
<p> </p>
<p><strong>टीचर ट्रांसफर का विवाद</strong><br />यह घटना 29 जुलाई 2016 को वाकोला स्थित उर्दू मीडियम स्कूल में हुई थी। मामले से जुड़ा विवाद टीचर के ट्रांसफर को लेकर पैदा हुआ था। झगड़े के दौरान तावडे ने टोचरों के साथ मारपीट की थी। अडिशनल सेशन जज वाईपी मंथाका ने केस के तथ्यों के मद्देनजर तावडे को राहत देने से इनकार कर दिया।</p>
<p><strong>दो टीचर्स को थप्पड़ मारने का आरोप</strong><br />अभियोजन पक्ष के मुताबिक, कैंसर से जूझ रही महिला के तबादले के चलते तनावपूर्ण स्थित पैदा हुई थी। इस बीच तावडे की 6 लोगों के साध स्कूल प्रबंधन के साथ पहले तीखी बहस हुई थी। इस दौरान कथित रूप से तावडे ने 2 टीचर के साथ असभ्य भाषा में बात की थी और उन्हें थप्पड़ मारा था।</p>
<p><strong>13 दिन बाद ऋतु तावडे पर हुई थी एफआईआर</strong><br />घटना के 13 दिन बाद केस को लेकर एफआईआर दर्ज की गई थी। वहीं, केस से बरी करने के आवेदन में रितू तावडे ने दावा किया था कि उनका इस मामले से संबंध नही था। उन पर लगे आरोप अस्पष्ट थे। घटनास्थल पर उनकी उपस्थिति संयोगवश थी। स्कूल ने प्रचार पाने के लिए उनके खिलाफ शिकायत की थी। उन्हें झूठे केस में फंसाने का प्रयास किया गया था।</p>
<p><strong>सरकारी वकील ने किया था आवेदन का विरोध</strong><br />सरकारी चकील ने आवेदन का विरोध किया। उन्होंने कहा, इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। स्कूल वह स्थान होता है, जहां स्टूडेंट को सीख मिलती है। इस लिहाज से आरोपी के आचरण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इन दलीलों के मह्देनजर जज ने कहा, केस के विक्टिम ने आरोपी का नाम लिया है। आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने के लिए गवाह के बयान पर्याप्त है। यह टिप्पणी कर जज ने आरोपी को केस से आरोपमुक्त करने से इनकार कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 18:35:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका मेयर के चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ा झटका; कांग्रेस का मेयर चुनने का रास्ता लगभग साफ</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में मेयर चुनाव से पहले सियासी उलटफेर की बड़ी खबर सामने आई है. यहां मेयर के चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. उसके 22 पार्षदों में से 9 ने अलग गुट बनाकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन दिया है. इसके बाद अब कांग्रेस पार्टी के लिए यहां अपना मेयर चुनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है. इस महानगरपालिका के चुनाव में कांग्रेस को सबसे अधिक 30 सीटें मिली थीं. हालांकि किसी पार्टी को यहां बहुमत नहीं मिला है. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में कुल 90 सीटें हैं. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47856/big-blow-to-bjp-before-the-election-of-bhiwandi-nizampur-municipal"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-19t180927.446.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>भिवंडी : </strong>महाराष्ट्र के भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में मेयर चुनाव से पहले सियासी उलटफेर की बड़ी खबर सामने आई है. यहां मेयर के चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ा झटका लगा है. उसके 22 पार्षदों में से 9 ने अलग गुट बनाकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन दिया है. इसके बाद अब कांग्रेस पार्टी के लिए यहां अपना मेयर चुनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है. इस महानगरपालिका के चुनाव में कांग्रेस को सबसे अधिक 30 सीटें मिली थीं. हालांकि किसी पार्टी को यहां बहुमत नहीं मिला है. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में कुल 90 सीटें हैं. </p>
<p> </p>
<p>कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बुधवार (18) को जानकारी देते हुए बताया कि अलग हुए पार्षदों की ओर से गठित भिवंडी सेक्युलर फ्रंट (बीएसएफ) के समर्थन से कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) गठबंधन ने 90 सदस्यीय निकाय में 46 सीटों के बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में कांग्रेस का मेयर बनना तय? उन्होंने दावा करते हुए कहा कि 9 पार्षदों ने हमारा समर्थन करने का फैसला किया है और बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच मतभेद पैदा हो गए हैं. गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी ने शिवसेना का समर्थन किया था. पिछले महीने हुए भिवंडी-निज़ामपुर नगर निगम चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी कांग्रेस अब अपना मेयर और डिप्टी मेयर नियुक्त करने के लिए तैयार दिख रही है.</p>
<p>भिवंडी-निजामपुर में किस पार्टी के पास कितनी सीटें? महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिका के चुनाव 15 जनवरी को हुए थे, जबकि नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए गए थे. भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका के चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और इस पार्टी को सबसे अधिक 30 सीटें मिलीं थीं, उसके बाद बीजेपी को 22 सीटें मिली. वहीं, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 12, शरद पवार गुट की एनसीपी-एसपी 12, समाजवादी पार्टी को 6, कोनार्क विकास अघाड़ी 4 और भिवंडी विकास अघाड़ी को 3 सीटों पर जीत मिली थी. यहां एक निर्दलीय उम्मीदवार को जीत हासिल हुई.<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/47856/big-blow-to-bjp-before-the-election-of-bhiwandi-nizampur-municipal</link>
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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 18:10:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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