<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.rokthoklekhani.com/tag/2693/project" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Rokthok Lekhani News  RSS Feed Generator</generator>
                <title>project - Rokthok Lekhani News </title>
                <link>https://www.rokthoklekhani.com/tag/2693/rss</link>
                <description>project RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई: मीरा-भाईंदर से वसई-विरार मेट्रो कॉरिडोर को मिली मंजूरी, 5 साल में प्रोजेक्ट होगा पूरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के बाहर ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एमएमआर में मेट्रो कॉरिडोर के विस्तार को मंजूरी प्रदान कर दी है। सरकारी मंजूरी के बाद मीरा भाईंदर को वसई विरार को मेट्रो से कनेक्ट करने का रास्ता साफ हो गया है। 17,725 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस कॉरिडोर से मीरा रोड, वसई, नालासोपारा, नायगांव और विरार के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला हुआ है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51444/mumbai-mira-bhayander-to-vasai-virar-metro-corridor-gets-approval-project-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/jfeng4bs_metro_625x300_18_august_26.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई के बाहर ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एमएमआर में मेट्रो कॉरिडोर के विस्तार को मंजूरी प्रदान कर दी है। सरकारी मंजूरी के बाद मीरा भाईंदर को वसई विरार को मेट्रो से कनेक्ट करने का रास्ता साफ हो गया है। 17,725 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस कॉरिडोर से मीरा रोड, वसई, नालासोपारा, नायगांव और विरार के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला हुआ है।</p>
<p> </p>
<p><strong>25 किमी लंबा होगा कॉरिडोर</strong><br />मेट्रो-13 की कुल लंबाई 25.03 किमी होगी। इसमें 21.78 किमी एलिवेटेड और 3.25 किमी भूमिगत मार्ग होगा। कॉरिडोर पर कुल 16 स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें 13 एलिवेटेड और तीन भूमिगत स्टेशन होंगे। एमएमआरडीए इस प्रोजेक्ट को लागू करेगा और मंजूरी के बाद इसे पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।</p>
<p><strong>लोकल ट्रेन से होगी कनेक्ट</strong><br />अधिक से अधिक यात्रियों को मेट्रो लाइन का लाभ पहुंचाने के लिए मेट्रो-13 को नायगांव, नालासोपारा, विरार रेलवे स्टेशन से जोड़ा जाएगा। साथ ही इस लाइन को दहिसर ( पूर्व ) से मीरा भाईंदर के बीच बने मेट्रो-9 से भी जोड़ा जायगा। मेट्रो-9 के नेताजी सुभाषचंद्र बोस स्टेडियम स्टेशन पर यह दोनों लाइन कनेक्ट होगी। मेट्रो 9 के जरिये लोग विरार से मुंबई तक मेट्रो में सफर कर सकेंगे। यात्रियों को मेट्रो के रूप में नया विकल्प उपलब्ध होगा।<br />पांजू बेट के लिए बनेगा खास पुल<br />इस प्रोजेक्ट की खासियत वसई खाड़ी पर पांजू बेट को जोड़ने वाला 4.92 किमी लंबा छह लेन का संयुक्त सड़क-मेट्रो पुल होगा। चिखल डोंगरी में मेट्रो डिपो प्रस्तावित है। सभी मेट्रो स्टेशनों तक बस सेवा उपलब्ध कराने की भी योजना है।</p>
<p><strong>4.49 लाख यात्रियों का अनुमान</strong><br />सरकार के अनुसार वर्ष 2031 में इस कॉरिडोर से रोजाना करीब 4.49 लाख यात्री सफर कर सकते हैं। मेट्रो शुरू होने से सड़क मार्ग की तुलना में यात्रा का समय करीब 50 फीसदी तक कम होने की उम्मीद है। इससे निजी वाहनों और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात का दबाव घटने के साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।</p>
<p><strong>मुंबईकर पर क्या असर पड़ेगा</strong><br />मुंबई में प्रॉपर्टी की दाम आसमान छूने के बाद विरार और वसई में तेजी से लोगों की आबादी बढ़ी है। यहां से रोजाना हजारों लोग रोजगार व अन्य कार्यों के लिए लोकल ट्रेन या सड़क मार्ग से मुंबई आते है। लोकल ट्रेन में अधिक भीड़ होने की वजह से यात्रियों का यह सफर पीड़ादायक होता है, वहीं मेट्रो के शुरू होने से यात्रा तेजी से आरामदायक तरीके से पूरी हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/51444/mumbai-mira-bhayander-to-vasai-virar-metro-corridor-gets-approval-project-to</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/51444/mumbai-mira-bhayander-to-vasai-virar-metro-corridor-gets-approval-project-to</guid>
                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 11:43:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2026-08/jfeng4bs_metro_625x300_18_august_26.webp"                         length="12518"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड ट्विन टनल प्रोजेक्ट में बड़ी उपलब्धि</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के महत्वाकांक्षी गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड ट्विन टनल प्रोजेक्ट ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल कर लिया है। परियोजना के लिए पहली टनल बोरिंग मशीन को पूरी तरह से असेंबल कर लिया गया है। इसके सभी प्रमुख हिस्सों को जोड़ने का अंतिम काम गुरुवार को पूरा होने की उम्मीद है। टनल निर्माण शुरू होने से पहले इसे परियोजना की दिशा में बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51055/big-achievement-in-mumbai-goregaon-mulund-link-road-twin-tunnel-project"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-31t101235.945.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मुंबई के महत्वाकांक्षी गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड ट्विन टनल प्रोजेक्ट ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल कर लिया है। परियोजना के लिए पहली टनल बोरिंग मशीन को पूरी तरह से असेंबल कर लिया गया है। इसके सभी प्रमुख हिस्सों को जोड़ने का अंतिम काम गुरुवार को पूरा होने की उम्मीद है। टनल निर्माण शुरू होने से पहले इसे परियोजना की दिशा में बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका के अधिकारियों के अनुसार, टीबीएम के सभी जरूरी सिस्टम की जांच पूरी कर ली गई है। मशीन के मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, हाइड्रोलिक, कंट्रोल और सेफ्टी सिस्टम के इंटीग्रेटेड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। अब अंतिम तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मशीन जमीन के अंदर सुरंग बनाने का काम शुरू करेगी।</p>
<p> </p>
<p>अतिरिक्त नगर आयुक्त (प्रोजेक्ट्स) अभिजीत बांगर ने बताया कि टीबीएम को सुरंग निर्माण के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी तकनीकी और सुरक्षा जांच पूरी होने तथा प्रमाणन मिलने के बाद ही मशीन से टनल बनाने का काम शुरू किया जाएगा। प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि निर्माण कार्य अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो। गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना मुंबई के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी सुधारने वाली एक महत्वपूर्ण योजना है। इस परियोजना का उद्देश्य गोरेगांव और मुलुंड के बीच यात्रा समय को कम करना और शहर की सड़कों पर बढ़ते यातायात दबाव को कम करना है।</p>
<p>वर्तमान में मुंबई के पश्चिमी और पूर्वी उपनगरों के बीच आवागमन के लिए लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना पूरी होने के बाद दोनों क्षेत्रों के बीच सीधा संपर्क बेहतर होगा। इससे लाखों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है और शहर के परिवहन नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। इस परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा ट्विन टनल का निर्माण है। जमीन के नीचे बनने वाली इन सुरंगों के लिए अत्याधुनिक टीबीएम तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। टीबीएम मशीनें बड़े व्यास की सुरंगों को सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से बनाने के लिए उपयोग की जाती हैं। इनके जरिए खुदाई के साथ-साथ सुरंग की संरचना को मजबूत करने का काम भी किया जाता है।</p>
<p>पहली टीबीएम के असेंबल होने के बाद अब परियोजना अगले चरण में प्रवेश कर रही है। मशीन के संचालन से पहले विशेषज्ञों की टीम सभी सुरक्षा मानकों की अंतिम जांच करेगी। इसमें मशीन के दबाव नियंत्रण, खुदाई प्रणाली, आपातकालीन व्यवस्था और अन्य तकनीकी पहलुओं की समीक्षा शामिल होगी। बीएमसी अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े स्तर की भूमिगत परियोजना में सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। सुरंग निर्माण के दौरान आसपास के क्षेत्रों पर किसी तरह का नकारात्मक प्रभाव न पड़े, इसके लिए आधुनिक तकनीक और निगरानी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/51055/big-achievement-in-mumbai-goregaon-mulund-link-road-twin-tunnel-project</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/51055/big-achievement-in-mumbai-goregaon-mulund-link-road-twin-tunnel-project</guid>
                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 10:14:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2026-07/images---2026-07-31t101235.945.jpg"                         length="13179"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: धारावी प्रोजेक्ट के लिए पेड़ हटाने का प्रस्ताव अथॉरिटी को सौंपा; क्या 8000 पेड़ काटे जाएंगे? </title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र सरकार के धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत आठ हजार पेड़ काटे जाएंगे। हालांकि बीएमसी की योजना धारावी इलाके में मौजूद खुली जगहों पर 30,000 पेड़ फिर से लगाने की है। इस मामले से जुड़ा एक प्रस्ताव मंगलवार को 'ट्री अथॉरिटी' की बैठक में पेश किया गया। इसके अलावा धारावी पुनर्वास प्रोजेक्ट की वजह से हुए पेड़ों के नुकसान की भरपाई के लिए पालघर जिले में भी पेड़ लगाए जाएंगे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51014/proposal-for-removal-of-trees-for-mumbai-dharavi-project-submitted"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-29t122720.353.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र सरकार के धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत आठ हजार पेड़ काटे जाएंगे। हालांकि बीएमसी की योजना धारावी इलाके में मौजूद खुली जगहों पर 30,000 पेड़ फिर से लगाने की है। इस मामले से जुड़ा एक प्रस्ताव मंगलवार को 'ट्री अथॉरिटी' की बैठक में पेश किया गया। इसके अलावा धारावी पुनर्वास प्रोजेक्ट की वजह से हुए पेड़ों के नुकसान की भरपाई के लिए पालघर जिले में भी पेड़ लगाए जाएंगे।</p>
<p> </p>
<p><strong>धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार</strong><br />धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत धारावी में रहने वाले पात्र झुग्गी-झोपड़ी निवासियों को 'स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी' के जरिए मुफ़्त घर दिए जाएंगे। लगभग 3,50,000 अपात्र झुग्गी-झोपड़ी निवासियों को किराए पर घर उपलब्ध कराए जाएंगे। शुरू में इन लोगों को दूसरी जगह बसाने के लिए मुंबई में ही कुछ जगहों पर विचार किया गया था, लेकिन इस कदम का विरोध हुआ। अब जबकि प्रोजेक्ट तेजी पकड़ रहा है। इस प्रक्रिया में धारावी इलाके के पेड़ प्रभावित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>पहले फेज में कितने पेड़ होंगे प्रभावित</strong><br />धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के पहले चरण में 1,693 पेड़ प्रभावित होंगे। इनमें से 871 पेड़ काटे जाएंगे। जबकि 822 पेड़ दूसरी जगह लगाए जाएंगे। मुआवजे के तौर पर कंपनी ने नगर निगम को एक लिखित वादा (अंडरटेकिंग) दिया है कि वह पालघर जिले के चहाडे गांव में 90 एकड़ जमीन पर स्थानीय प्रजातियों के 22,904 पेड़ लगाएगी। </p>
<p><strong>22,904 नए पेड़ लगाए जाएंगे</strong><br />नगर निगम के गार्डन विभाग को सौंपे गए प्रस्ताव के अनुसार, धारावी में सिटी सर्वे नंबर 2 (हिस्सा) और 3 (हिस्सा), सब-प्लॉट B पर पुनर्वास इमारतों के निर्माण के लिए खुदाई के काम से 8,000 पेड़ प्रभावित होंगे। मई 2026 में की गई संयुक्त जांच में साइट पर कुल 2,005 पेड़ पाए गए थे। इनमें 1,998 जीवित पेड़ और 7 उखड़े हुए पेड़ शामिल थे। मंजूर की गई योजना के मुताबिक, प्रोजेक्ट के काम में बाधा बन रहे 1,693 पेड़ों को हटाने का प्रस्ताव दिया गया है। कंपनी की ओर से दिए गए लिखित वादे के अनुसार, पेड़ काटे जाने के 15 दिनों के भीतर 22,904 नए पेड़ लगाए जाएंगे। </p>
<p><strong>एक और प्रस्ताव</strong><br />मुंबई नगर निगम के अलग-अलग प्रोजेक्ट्स, साथ ही प्राइवेट रीडेवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की वजह से कुल 1,443 पेड़ प्रभावित होंगे। इनमें से 902 पेड़ों को सीधे काटा जाएगा, जबकि 541 पेड़ों को दूसरी जगह लगाया (ट्रांसप्लांट) जाएगा। नगर निगम ने कहा है कि पेड़ों को हटाने से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए 21,625 पेड़ लगाए जाएंगे। इस प्रस्ताव को मंगलवार को ट्री अथॉरिटी की बैठक में पेश किया जाना है। </p>
<p><strong>प्रोजेक्ट के लिए 'बेस्ट' डिपो की ज़मीन की भी जरूरत</strong><br />धारावी रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में 'बेस्ट' अंडरटेकिंग के धारावी और काला किला डिपो की ज़मीन का भी इस्तेमाल किया जाएगा। नगर निगम की ओर से इन बस डिपो की जमीन को धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट और नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर करने की मंजूरी मिलने के बाद इस पहल पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसमें शामिल कुल जमीन में से 2.35 एकड़ जमीन 'बेस्ट' अंडरटेकिंग की है, जबकि बाकी जमीन जिला कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र में आती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/51014/proposal-for-removal-of-trees-for-mumbai-dharavi-project-submitted</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/51014/proposal-for-removal-of-trees-for-mumbai-dharavi-project-submitted</guid>
                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 12:28:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2026-07/images---2026-07-29t122720.353.jpg"                         length="11850"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में आया एक और रोड़ा, ₹40 हजार करोड़ के एक्स्ट्रा बोझ से रुक सकता है काम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर ने गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने 'लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट अथॉरिटी' द्वारा जमीन के मुआवजे में बढ़ोतरी के आदेश के बाद 1.1 लाख करोड़ रुपये के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत में भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50699/another-hurdle-in-mumbai-ahmedabad-bullet-train-project-work-may-stop"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-12t101737.627.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर ने गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने 'लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट अथॉरिटी' द्वारा जमीन के मुआवजे में बढ़ोतरी के आदेश के बाद 1.1 लाख करोड़ रुपये के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत में भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई है। एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी ने हाई कोर्ट को बताया कि बुलेट ट्रेन अथॉरिटी का अनुमान है कि 'लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट अथॉरिटी' द्वारा जनवरी और फरवरी में जारी किए गए ज्यादा मुआवज़े के आदेशों से 40,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है, जिससे प्रोजेक्ट के जारी रहने पर खतरा पैदा हो सकता है। कोर्ट ने सूरत और भरूच जिलों से 'लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट अथॉरिटी' के आदेशों को चुनौती देने वाली तीन अपीलें स्वीकार कर ली हैं।</p>
<p> </p>
<p>ये मामले भरूच जिले के अमोद तालुका के ओछन गांव में जमीन के टुकड़ों से जुड़े हैं। इन्हें 'राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट एक्ट' के तहत 2018 की अधिसूचना के बाद अधिग्रहित किया गया था।</p>
<p><strong>2020 में तय हुआ था मुआवजा </strong><br />2020 में, अधिग्रहण अथॉरिटी ने बाजार भाव के आधार पर मुआवज़ा 50 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया था, जिससे एक मामले में मुआवज़ा 85.86 लाख रुपये बना था। ज़मीन मालिक ने मुआवज़ा बढ़ाने की मांग की, जिसके बाद 'लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट अथॉरिटी' ने उसी जमीन के टुकड़े के लिए 660 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से 8.46 करोड़ रुपये मुआवज़ा देने का आदेश दिया। </p>
<p><strong>वकील ने गुजरात हाई कोर्ट को क्या बताया </strong><br />मुआवजे में लगभग दस गुना बढ़ोतरी को चुनौती देते हुए, एडवोकेट जनरल ने हाई कोर्ट को बताया कि 'लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट अथॉरिटी' ने ओछन के पास के गांवों में जमीन की बिक्री के उदाहरणों को नजरअंदाज किया और इसके बजाय 14 किमी दूर स्थित सिमर्था गांव के आंकड़ों पर भरोसा किया। उन्होंने कहा कि 'लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट अथॉरिटी' ने सिमर्था की 450 रुपये प्रति वर्ग मीटर की 'जंत्री' कीमत और वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़े 2013 के जमीन अधिग्रहण के मामले का इस्तेमाल किया, और फिर चार साल आठ महीने के लिए 10% सालाना बढ़ोतरी लागू करके 660 रुपये प्रति वर्ग मीटर की कीमत तय की। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/50699/another-hurdle-in-mumbai-ahmedabad-bullet-train-project-work-may-stop</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/50699/another-hurdle-in-mumbai-ahmedabad-bullet-train-project-work-may-stop</guid>
                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:19:07 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2026-07/images---2026-07-12t101737.627.jpg"                         length="74293"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        