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                <title>homebuyers - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>homebuyers RSS Feed</description>
                
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                <title>मुंबई : सेंट्रल मुंबई का प्रॉपर्टी मार्केट ठंडा; घर खरीदारों ने मोड़ा मुंह, 100 में से बिके सिर्फ 6 घर, आखिर क्यों घट रही है दिलचस्पी?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>साल 2025 के आखिरी महीने में जहां मायानगरी मुंबई के रियल एस्टेट मार्केट ने 14 साल का हाई छुआ है. वहीं, शहर का अहम हिस्सा सेंट्रल मुंबई का प्रॉपर्टी मार्केट ठंडा पड़ा हुआ है. </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46680/mumbai-central-mumbais-property-market-cold-home-buyers-turned-away"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/images-(55).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>साल 2025 के आखिरी महीने में जहां मायानगरी मुंबई के रियल एस्टेट मार्केट ने 14 साल का हाई छुआ है. वहीं, शहर का अहम हिस्सा सेंट्रल मुंबई का प्रॉपर्टी मार्केट ठंडा पड़ा हुआ है. </p>
<p> </p>
<p><strong>चमक खो रहा है प्रॉपर्टी मार्केट</strong><br />सेंट्रल मुंबई का प्रॉपर्टी मार्केट लगातार अपनी चमक खो रहा है. नाइट फ्रैंक इंडिया की ताजा रिपोर्ट के आंकड़े साफ बता रहे हैं कि घर खरीदार इस इलाके से अपना मुंह मोड़ रहे हैं. </p>
<p><strong>सेंट्रल मुंबई का शेयर 6% गिरा</strong><br />दिसंबर 2025 में मुंबई में हुए घरों की कुल बिक्री में सेंट्रल मुंबई का शेयर गिरकर महज 6 फीसदी रह गया है. दिसंबर 2024 में यह मार्केट हिस्सेदारी 8 फीसदी थी, यानी पूरी दो फीसदी की गिरावट. </p>
<p><strong>खरीदारों की दिलचस्पी घटी</strong><br />नवंबर 2025 से तुलना करें तो भी सेंट्रल मुंबई का शेयर 6 फीसदी ही था. नवंबर 2024 में यह 7 फीसदी था. इससे साफ पता चलता है कि इस इलाके में खरीदारों की दिलचस्पी घट रही है. </p>
<p><strong>कुल बाजार हिस्सेदारी 86%</strong><br />वेस्टर्न सबर्ब्स का दबदबा लगातार बढ़ रहा है. वेस्टर्न और सेंट्रल मुंबई की कुल बाजार हिस्सेदारी 86 फीसदी हो गई है. अकेले वेस्टर्न सबर्ब्स की हिस्सेदारी 57 फीसदी है.</p>
<p><strong>उपनगरों को दे रहे हैं तरजीह</strong><br />सेंट्रल मुंबई के अलावा साउथ मुंबई की हिस्सेदारी गिरकर 7 फीसदी रह गई है. इससे साफ जाहिर है कि बड़ी जगह और कनेक्टिविटी के कारण लोग सेंट्रल मुंबई के बजाय उपनगरों को तरजीह दे रहे हैं.<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 12:23:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नालासोपारा की 41 अवैध बिल्डिगों के घर खरीदारों के पुनर्वास की मांग पर बेरुखी; पुनर्वास का वित्तीय भार सरकार पर नहीं डाला जाना चाहिए - बॉम्बे हाई कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरकारी खजाने से नालासोपारा की 41 अवैध बिल्डिगों के घर खरीदारों के पुनर्वास की मांग पर बेरुखी दिखाई है। वहीं ऐसी बिल्डिगों के निर्माण में शामिल डिवेलपर के खिलाफ अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने वसई विरार महानगर पालिका को निर्देश दिया है कि अवैध बिल्डिंगों को गिराने से खाली हुई जगह पर डिवेलपर को निर्माण कार्य करने की अनुमति न दी जाए।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44285/homebuyers-of-41-illegal-buildings-in-nalasopara-have-been-ignored-in-their-demand-for-rehabilitation--the-financial-burden-of-rehabilitation-should-not-be-placed-on-the-government---bombay-high-court"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/download---2025-09-30t121508.489.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>बॉम्बे हाई कोर्ट ने सरकारी खजाने से नालासोपारा की 41 अवैध बिल्डिगों के घर खरीदारों के पुनर्वास की मांग पर बेरुखी दिखाई है। वहीं ऐसी बिल्डिगों के निर्माण में शामिल डिवेलपर के खिलाफ अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने वसई विरार महानगर पालिका को निर्देश दिया है कि अवैध बिल्डिंगों को गिराने से खाली हुई जगह पर डिवेलपर को निर्माण कार्य करने की अनुमति न दी जाए।</p>
<p> </p>
<p>कोर्ट ने कहा कि डिवेलपर और मकान मालिक किसी अन्य बिल्डर के साथ मिलकर कोई व्यवसायिक लेन देन न करें। इससे पहले सरकारी वकील ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इस मामले में निजी व्यक्तियों ने बिल्डर के साथ बिना अनुमति के बनी बिल्डिंगों में घरों का सौदा किया है, इसलिए ऐसे लोगों के पुनर्वास का वित्तीय भार सरकार पर नहीं डाला जाना चाहिए।</p>
<p><strong>डिवेलपर को याचिका में नहीं किया शामिल</strong><br />अवैध बिल्डिंग को जमीदोज करने के कारण करीब ढाई हजार लोग बेघर हुए थे। आशियाने से वंचित लोगों ने अब जय अंबे वेलफेयर सोसायटी के जरिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। हालांकि, कोर्ट ने प्रभावित घर खरीदारों की "चतुराई" पर नाराजगी जताई। जस्टिस रविन्द्र घुघे और जस्टिस अश्विन भोभे की बेंच ने अब याचिका में डिवेलपर को प्रतिवादी के तौर पर शामिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सरकारी वकील की दलीलों के मद्देनजर कहा कि हमें इस याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं दिखता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Sep 2025 12:17:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : प्रमोटर ने घर खरीदने वाले लोगों से 522.90 करोड़ रुपये जुटाए; फ्लैट के बदले पैसे कहीं और लगा दिए</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रवर्तन निदेशालय ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कई स्थानों पर छापेमारी की। धन शोधन निवारण कानून (पीएमएलए) के तहत की गई इस कार्रवाई के दौरान चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। ईडी के मुताबिक प्रमोटर ने घर खरीदने वाले लोगों से 522.90 करोड़ रुपये जुटाए। इसके बाद फ्लैट के बदले पैसे कहीं और लगा दिए गए।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/39928/new-delhi--promoter-raised-rs-522-90-crore-from-homebuyers--invested-the-money-elsewhere-instead-of-buying-flats"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-04/download---2025-04-19t174131.478.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>प्रवर्तन निदेशालय ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कई स्थानों पर छापेमारी की। धन शोधन निवारण कानून (पीएमएलए) के तहत की गई इस कार्रवाई के दौरान चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। ईडी के मुताबिक प्रमोटर ने घर खरीदने वाले लोगों से 522.90 करोड़ रुपये जुटाए। इसके बाद फ्लैट के बदले पैसे कहीं और लगा दिए गए। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), लखनऊ जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत मेसर्स उन्नति फॉर्च्यून होल्डिंग्स लिमिटेड और अन्य के मामले में आगरा, मेरठ, नोएडा और दिल्ली में 8 स्थानों पर छापेमारी की है। दो दिन पहले हुई इस रेड में कई खुलासे हुए हैं। प्रमोटर अनिल मिठास को ईडी की सात दिन की हिरासत में भेजा गया है।</p>
<p> </p>
<p>आरोप है कि प्रमोटर ने घर खरीदने वाले लोगों से 522.90 करोड़ रुपये एकत्रित कर लिए। वे लोग इंतजार कर रहे थे कि अब उनका घर खरीदने का सपना साकार होने जा रहा है। जैसे ही उन्हें मालूम पड़ा कि कंपनी ने उनके साथ 'खेला' यानी धोखा कर दिया है तो उनका सपना टूट गया। कंपनी ने उन लोगों का पैसा फ्लैट बनाने की बजाए कहीं दूसरी जगह लगा दिया। घर खरीद की चाह रखने वाले लोगों ने जब अपना पैसा वापस मांगा तो उन्हें टरकाने का प्रयास किया गया।</p>
<p>जांच एजेंसी ने कथित धोखाधड़ी के किंगपिन अनिल मिठास को हिरासत में ले लिया है। धन की हेराफेरी में शामिल उन्नति फॉर्च्यून होल्डिंग्स लिमिटेड और उसके निदेशक अनिल मिठास एवं अन्य संबंधित संस्थाओं के पदाधिकारियों के आवासों और कार्यालय परिसरों में तलाशी ली गई। ईडी की रेड का मकसद, अपराध की आय (पीओसी) और अपराध से संबंधित सबूतों का पता लगाना  था। ईडी ने यूपी पुलिस और ईओडब्ल्यू दिल्ली द्वारा आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत मेसर्स उन्नति फॉर्च्यून होल्डिंग्स लिमिटेड, प्रमोटरों और अन्य के खिलाफ दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। ईडी की जांच से पता चला है कि उन्नति फॉर्च्यून होल्डिंग्स लिमिटेड (इसके बाद 'यूएफएचएल' के रूप में संदर्भित) ने नोएडा के सेक्टर-119 में 'अरण्य' शैली में एक आवासीय और वाणिज्यिक परियोजना के लिए होमबॉयर्स से 522.90 करोड़ रुपये एकत्र किए थे। प्रमोटर द्वारा उक्त राशि वर्ष 2012-2019 के दौरान एकत्र की गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Apr 2025 17:42:25 +0530</pubDate>
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