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                <title>exports - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई : युद्ध के बीच प्याज के एक्सपोर्ट में गिरावट, लासलगांव मार्केट में कीमतों में भारी गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और झगड़े का असर भारत के प्याज़ एक्सपोर्ट पर साफ दिखाई दे रहा है। इस कारण एशिया की सबसे बड़ी प्याज़ मंडी लासलगांव एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी में प्याज़ की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले एक्सपोर्ट में लगभग 45 फीसदी की कमी देखी गई है। युद्ध जैसी स्थिति ने कंटेनर ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ा दी है और शिपमेंट धीमा कर दिया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49031/onion-export-decline-amid-mumbai-war-huge-fall-in-prices"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download-(76).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और झगड़े का असर भारत के प्याज़ एक्सपोर्ट पर साफ दिखाई दे रहा है। इस कारण एशिया की सबसे बड़ी प्याज़ मंडी लासलगांव एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी में प्याज़ की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले एक्सपोर्ट में लगभग 45 फीसदी की कमी देखी गई है। युद्ध जैसी स्थिति ने कंटेनर ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ा दी है और शिपमेंट धीमा कर दिया है।</p>
<p> </p>
<p>खबर है कि मार्च 2026 में भारतीय एक्सपोर्टर्स लगभग 350 कंटेनर प्याज़ शिप करने में सफल रहे, जबकि पिछले साल इसी महीने में लगभग 600 कंटेनर शिप किए गए थे। एग्रीकल्चरल एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट विकास सिंह के अनुसार, विश्व स्तर पर प्याज़ के एक्सपोर्ट में भी लगभग 35 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे डिमांड पर असर पड़ा है। मार्च 2026 में गर्मियों के प्याज़ की कीमत ₹1,500 प्रति क्विंटल तक रह गई, जबकि लाल प्याज़ ₹1,417 प्रति क्विंटल में बिक रही थी। यह पिछले साल मार्च की तुलना में काफी गिरावट है, जब गर्मियों के प्याज़ ₹2,627 और लाल प्याज़ ₹3,101 प्रति क्विंटल बिक रहे थे। कीमतों में इस भारी गिरावट से किसान और ट्रेडर दोनों परेशान हैं। </p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय माल ढुलाई का खर्च भी तेज़ी से बढ़ा है। गल्फ़ देशों को भेजे जाने वाले कंटेनर चार्ज पहले $600-$700 के बीच थे, जो अब बढ़कर लगभग $6,500 हो गए हैं। इस बढ़ती लागत ने भारतीय प्याज़ को एक्सपोर्ट के लिहाज से महंगा कर दिया है। वहीं, यमन और मिस्र जैसे देश रोड ट्रांसपोर्ट के माध्यम से गल्फ़ मार्केट में कम रेट पर प्याज़ सप्लाई कर रहे हैं। इसका सीधा असर भारतीय प्याज़ की डिमांड पर पड़ा है। बाजार में सप्लाई बढ़ने के बावजूद कीमतें गिर रही हैं, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है।</p>
<p>लासलगांव एपीएमसी के एक्सपोर्टर और ट्रेडर-डायरेक्टर प्रवीण कदम ने केंद्र सरकार से अपील की है कि बढ़ती ढुलाई लागत को कंट्रोल किया जाए और किसानों और व्यापारियों की मदद के लिए प्याज़ एक्सपोर्ट पर कम से कम 10 प्रतिशत सब्सिडी दी जाए। उन्होंने कहा कि इससे किसान और व्यापारियों दोनों को राहत मिलेगी और भारतीय प्याज़ की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनी रहेगी। कुल मिलाकर, अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे विवाद ने भारतीय प्याज़ एक्सपोर्ट को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।</p>
<p>कंटेनर चार्ज में भारी बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में सस्ते विकल्प की वजह से लासलगांव मंडी में कीमतें गिर रही हैं। इस समय सरकार और एक्सपोर्टर्स के बीच सहयोग जरूरी है, ताकि किसान और व्यापारियों को राहत मिल सके और भारतीय प्याज़ की डिमांड बनाए रखी जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 16:57:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : महाराष्ट्र 7,343 करोड़ के साथ मछली एक्सपोर्ट में दूसरा स्थान हासिल किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>एक बार फिर फिशरीज़ सेक्टर में अपनी ताकत दिखाई है, पूरे भारत में मछली एक्सपोर्ट में दूसरा स्थान हासिल किया है। यह कामयाबी फिशरीज़ डेवलपमेंट मिनिस्टर नितेश राणे की लीडरशिप में मिली है, जिनकी खास कोशिशों से इस सेक्टर को काफी बढ़ावा मिला है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48930/mumbai-secured-second-place-in-fish-export-with-rs-7343"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-03t120311.266.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>एक बार फिर फिशरीज़ सेक्टर में अपनी ताकत दिखाई है, पूरे भारत में मछली एक्सपोर्ट में दूसरा स्थान हासिल किया है। यह कामयाबी फिशरीज़ डेवलपमेंट मिनिस्टर नितेश राणे की लीडरशिप में मिली है, जिनकी खास कोशिशों से इस सेक्टर को काफी बढ़ावा मिला है। राज्य ने 2024–25 में ₹7,343 करोड़ के मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किए केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य ने फाइनेंशियल ईयर 2024–25 में ₹7,343.40 करोड़ के मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किए। यह 2020–21 में ₹3,684 करोड़ की तुलना में काफी बढ़ोतरी दिखाता है, जिससे पांच सालों में एक्सपोर्ट असल में दोगुना हो गया है। एक्सपोर्ट वॉल्यूम भी बढ़ा है, जो सालाना 2.27 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है।</p>
<p> </p>
<p>कोंकण तट इस कामयाबी की रीढ़ बनकर उभरा है, जिसमें झींगा और फ्रोजन मछली का बड़ा हिस्सा है। खास तौर पर, कोंकण झींगा की यूनाइटेड स्टेट्स और चीन जैसे ग्लोबल मार्केट में बढ़ती डिमांड देखी गई है, जो अपनी बेहतरीन क्वालिटी और स्वाद के लिए पॉपुलर हो रहा है। मंत्री राणे ने एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देकर, इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करके और एक्सपोर्ट क्षमताओं को बढ़ाकर फिशरीज़ सेक्टर को मॉडर्न बनाने में अहम भूमिका निभाई है। उनकी पहलों से तटीय इलाकों के मछुआरों को सीधे इंटरनेशनल मार्केट से जुड़ने में मदद मिली है।</p>
<p>नेशनल लेवल पर, यूनाइटेड स्टेट्स समुद्री प्रोडक्ट्स के लिए भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन बना हुआ है, जिसका 2024-25 में ₹22,723 करोड़ का हिस्सा है। इसके बाद चीन (₹10,668 करोड़) का नंबर आता है, साथ ही यूरोपियन यूनियन, साउथईस्ट एशिया और जापान से भी इसकी अच्छी डिमांड है। ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव और बढ़ती प्रोडक्शन लागत जैसी चुनौतियों के बावजूद, महाराष्ट्र ने गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे लीडिंग राज्यों के साथ अपनी कॉम्पिटिटिव बढ़त बनाए रखी है। कुल मिलाकर, स्ट्रेटेजिक पॉलिसी बनाने और कोंकण के मछली पकड़ने वाले समुदाय की लगातार कोशिशों ने महाराष्ट्र के सीफूड एक्सपोर्ट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है, जिससे राज्य की इकोनॉमिक ग्रोथ में काफी मदद मिली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 12:17:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नागपुर : भारत के निर्यात को बढ़ाने और आयात को कम करने की आवश्यकता - नितिन गडकरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि आज की दुनिया में जो देश दादागिरी कर रहे हैं, वे ऐसा इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि वे आर्थिक रूप से मजबूत हैं और उनके पास तकनीक है। उन्होंने नागपुर में विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (वीएनआईटी) में बोलते हुए, भारत के निर्यात को बढ़ाने और आयात को कम करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। गडकरी ने कहा, 'अगर हमारे निर्यात और अर्थव्यवस्था की दर बढ़ती है, तो मुझे नहीं लगता कि हमें किसी के पास जाने की जरूरत पड़ेगी। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/42899/nagpur--india-needs-to-increase-exports-and-reduce-imports---nitin-gadkari"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-08/images---2025-08-10t110856.519.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नागपुर : </strong>केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि आज की दुनिया में जो देश दादागिरी कर रहे हैं, वे ऐसा इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि वे आर्थिक रूप से मजबूत हैं और उनके पास तकनीक है। उन्होंने नागपुर में विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (वीएनआईटी) में बोलते हुए, भारत के निर्यात को बढ़ाने और आयात को कम करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। गडकरी ने कहा, 'अगर हमारे निर्यात और अर्थव्यवस्था की दर बढ़ती है, तो मुझे नहीं लगता कि हमें किसी के पास जाने की जरूरत पड़ेगी। </p>
<p> </p>
<p>अगर हमें बेहतर तकनीक और संसाधन मिल जाएं, तो हम किसी पर धौंस नहीं जमाएंगे, क्योंकि हमारी संस्कृति हमें सिखाती है कि विश्व कल्याण सबसे महत्वपूर्ण है।' उन्होंने आगे कहा कि हम वैश्विक स्तर पर विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं और इन सभी समस्याओं का समाधान विज्ञान और प्रौद्योगिकी, यानी ज्ञान, जो एक शक्ति है, में है।</p>
<p>भाजपा नेता ने कहा कि अगर भारत को 'विश्वगुरु' बनना है तो निर्यात बढ़ाना और आयात कम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान संस्थानों, आईआईटी और इंजीनियरिंग कॉलेजों को देश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शोध करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य क्षेत्रों में शोध भी उतना ही महत्वपूर्ण है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/42899/nagpur--india-needs-to-increase-exports-and-reduce-imports---nitin-gadkari</link>
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                <pubDate>Sun, 10 Aug 2025 11:10:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक मई से आभूषण का निर्यात शुरू हो जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने कहा कि मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक मई से हाथ में लेकर जाने वाले आभूषण का निर्यात शुरू हो जाएगा। जीजेईपीसी ने कहा कि इस पहल से खास तौर पर उभरते निर्यातकों को लाभ होगा, क्योंकि इससे उन्हें वैश्विक बाजारों में व्यक्तिगत रूप से आभूषण ले जाने की सुविधा मिलेगी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/40066/jewellery-exports-to-resume-at-mumbai-international-airport-from-may-1"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-04/whatsapp-image-2025-04-24-at-4.24.05-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने कहा कि मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक मई से हाथ में लेकर जाने वाले आभूषण का निर्यात शुरू हो जाएगा। जीजेईपीसी ने कहा कि इस पहल से खास तौर पर उभरते निर्यातकों को लाभ होगा, क्योंकि इससे उन्हें वैश्विक बाजारों में व्यक्तिगत रूप से आभूषण ले जाने की सुविधा मिलेगी।</p>
<p> </p>
<p>जीजेईपीसी ने इसे देश के रत्न एवं आभूषण कारोबार के लिए एक प्रमुख मील का पत्थर बताते हुए कहा कि इसमें सहायता के लिए पहले ही एक समर्पित हवाई अड्डा कार्यालय स्थापित कर दिया गया है। शीर्ष उद्योग निकाय ने एक बयान में कहा कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने इस साल 28 मार्च को इस प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया, जिससे व्यक्तिगत परिवहन के माध्यम से आयात या निर्यात संभव हो सकेगा।</p>
<p>इस संबंध में 24 अप्रैल, 2025 को हवाई अड्डे पर एक अभ्यास सत्र आयोजित किया गया। इसमें भारत डायमंड बोर्स, बीवीसी, प्रीशियस कार्गो कस्टम्स क्लीयरेंस सेंटर (पीसीसीसीसी), हवाई अड्डा सीमा शुल्क विभाग और जीजेईपीसी की भागीदारी रही। जीजेईपीसी के चेयरमैन किरीट भंसाली ने कहा, “एक मई, 2025 को मुंबई हवाई अड्डे से हाथ में ले जाने वाले आभूषण के निर्यात की शुरुआत के साथ, हम भारत के रत्न और आभूषण व्यापार के लिए एक नए युग की शुरुआत कर रहे हैं।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/40066/jewellery-exports-to-resume-at-mumbai-international-airport-from-may-1</link>
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                <pubDate>Fri, 25 Apr 2025 11:35:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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