<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.rokthoklekhani.com/tag/26536/tarifs" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Rokthok Lekhani News  RSS Feed Generator</generator>
                <title>tariffs - Rokthok Lekhani News </title>
                <link>https://www.rokthoklekhani.com/tag/26536/rss</link>
                <description>tariffs RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिका : टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भड़के ट्रंप...  लीक हुई बैठक की बातें, अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- ‘कुछ करना होगा’</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के निर्णय में कहा कि राष्ट्रपति ने जिस आपातकालीन अधिकार का हवाला देकर टैरिफ लगाए, वह उनके संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर था. अदालत ने साफ किया कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को आपात स्थिति में व्यापार को 'नियंत्रित' करने का अधिकार है, लेकिन इस कानून में सीधे तौर पर टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी गई है. कोर्ट के इस फैसले को उन राज्यों और कंपनियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने बढ़े हुए आयात शुल्क के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47902/trump-angry-over-supreme-courts-decision-on-us-tariffs-talks"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/6999176a9783d-donald-trump-tariff-212437107-16x9.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमेरिका : </strong>अमेरिका में टैरिफ को लेकर सियासी घमासान अब कानूनी मोर्चे पर खुलकर सामने आ गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति को उस समय बड़ा झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन कानून के तहत लगाए गए उनके टैरिफ को अवैध ठहरा दिया. 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले ने न सिर्फ ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि चुनावी साल में व्यापार नीति को भी नई बहस के केंद्र में ला दिया है.<br /><br />अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के निर्णय में कहा कि राष्ट्रपति ने जिस आपातकालीन अधिकार का हवाला देकर टैरिफ लगाए, वह उनके संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर था. अदालत ने साफ किया कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को आपात स्थिति में व्यापार को 'नियंत्रित' करने का अधिकार है, लेकिन इस कानून में सीधे तौर पर टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी गई है. कोर्ट के इस फैसले को उन राज्यों और कंपनियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने बढ़े हुए आयात शुल्क के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था.<br /><br />राष्ट्रपति ट्रंप ने इसी कानून का सहारा लेते हुए पहले मेक्सिको, कनाडा और चीन पर अतिरिक्त शुल्क लगाए थे. इसके बाद उन्होंने 'लिबरेशन डे' के नाम पर भारत समेत कई देशों पर व्यापक टैरिफ लागू कर दिए थे. ट्रंप का तर्क था कि ये कदम अमेरिकी उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए जरूरी हैं. उनका कहना रहा है कि टैरिफ से विदेशी कंपनियां अमेरिका में निवेश करने को मजबूर होंगी और फैक्ट्रियां वापस लौटेंगी.<br /><br />सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गवर्नर्स के साथ एक निजी बैठक में उन्होंने फैसले को 'शर्मनाक' बताया और कहा कि 'इन अदालतों के बारे में कुछ करना होगा.' एक बयान में उन्होंने कहा कि वे व्यापार को पूरी तरह रोक सकते हैं या प्रतिबंध लगा सकते हैं, लेकिन एक डॉलर का टैरिफ नहीं लगा सकते - इसे उन्होंने 'अजीब स्थिति' बताया. उनके इन बयानों से यह संकेत मिला है कि वे न्यायपालिका के फैसले को चुनौती देने या अन्य कानूनी रास्ते अपनाने की तैयारी में हैं.<br /><br />कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने नया कदम उठाते हुए वैश्विक स्तर पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी. इसे पहले वाले टैरिफ की जगह लेने वाला कदम बताया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन अन्य कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल करेगा और व्यापार नीति पर पीछे नहीं हटेगा. उनके मुताबिक, टैरिफ से अमेरिकी निवेश और रोजगार को मजबूती मिलती है.<br /><br />अदालत के फैसले को उन अमेरिकी राज्यों और कारोबारियों की बड़ी जीत माना जा रहा है, जिन्होंने तर्क दिया था कि अचानक बढ़े आयात शुल्क से उत्पादन लागत बढ़ी और उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ पड़ा. अब इस निर्णय के बाद अरबों डॉलर के संभावित रिफंड का रास्ता खुल सकता है. हालांकि ट्रंप ने संकेत दिया है कि मामला आगे भी कानूनी प्रक्रिया में उलझा रह सकता है.<br /><br />टैरिफ को ट्रंप अपनी आर्थिक नीति की आधारशिला बताते रहे हैं. चुनावी रैलियों में वे दावा करते रहे कि इन कदमों से नौकरियां बढ़ेंगी और अमेरिकी उद्योग को मजबूती मिलेगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने चुनावी साल में उनकी व्यापार रणनीति पर अनिश्चितता पैदा कर दी है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन कौन-से वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाता है और क्या यह टकराव कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच बड़े संवैधानिक संघर्ष का रूप लेता है. फिलहाल इतना तय है कि अमेरिका में टैरिफ को लेकर सियासी और कानूनी जंग अभी थमी नहीं है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/47902/trump-angry-over-supreme-courts-decision-on-us-tariffs-talks</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/47902/trump-angry-over-supreme-courts-decision-on-us-tariffs-talks</guid>
                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 12:39:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2026-02/6999176a9783d-donald-trump-tariff-212437107-16x9.webp"                         length="47282"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : चीन पर लगाए गए इन टैरिफ्स के बाद; भारत के लिए मौके, वहीं दूसरी ओर चुनौतियां</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए अंतरराष्ट्रीय टैरिफ (शुल्क) नियमों ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है। भारत की इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं है। खासकर चीन पर लगाए गए इन टैरिफ्स के बाद ऐसा माना जा रहा है कि अब सस्ते और सब्सिडी वाले लिथियम-आयन बैटरी सेल्स भारत में भारी मात्रा में आ सकते हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/39685/new-delhi--after-these-tariffs-imposed-on-china--there-are-opportunities-for-india-on-one-hand-and-challenges-on-the-other-hand"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-04/trumps-tariff-bombshell-hits-india-with-26-import-tax-but-s.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए अंतरराष्ट्रीय टैरिफ (शुल्क) नियमों ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है। भारत की इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं है। खासकर चीन पर लगाए गए इन टैरिफ्स के बाद ऐसा माना जा रहा है कि अब सस्ते और सब्सिडी वाले लिथियम-आयन बैटरी सेल्स भारत में भारी मात्रा में आ सकते हैं। ये बदलाव भारत के लिए एक ओर जहां मौके लेकर आ सकते हैं, वहीं दूसरी ओर चुनौतियां भी खड़ी कर सकते हैं - खासकर 'मेक इन इंडिया' पहल के लिए।</p>
<p><strong>चीन के मुकाबले भारत एक बेहतर विकल्प?</strong><br />लिथियम-आयन रिसाइकिलिंग संगठन, LICO मटेरियल्स के संस्थापक और सीईओ गौरव डोलवानी के अनुसार, "मुझे लगता है कि भारत चीन प्लस वन रणनीति के लिए एक बेहतरीन विकल्प है। मुझे लगता है कि भारत में बैटरी बनाने का खर्च चीन, जापान और कोरिया जैसे देशों की तुलना में काफी कम है।"</p>
<p><strong>भारत में बैटरी उत्पादन की स्थिति</strong><br />फिलहाल भारत अपनी जरूरत की 100 प्रतिशत लिथियम-आयन सेल्स आयात करता है। हाल के कुछ वर्षों में देश में लिथियम के भंडार तो जरूर मिले हैं, लेकिन बैटरी सेल मैन्युफैक्चरिंग अब भी अपने शुरुआती चरण पर है। हालांकि, अगले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव आने वाला है। रिलायंस इंडस्ट्रीज गुजरात में एक गीगाफैक्ट्री बना रही है, जो 2030 तक 100 GWh उत्पादन क्षमता तक पहुंचना चाहती है। इसके अलावा, एक्साइड इंडस्ट्रीज भी 6 GWh की क्षमता वाली एक यूनिट बना रही है। और ओला इलेक्ट्रिक पहले ही अपने सिलिंड्रिकल सेल्स का उत्पादन शुरू कर चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/39685/new-delhi--after-these-tariffs-imposed-on-china--there-are-opportunities-for-india-on-one-hand-and-challenges-on-the-other-hand</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/39685/new-delhi--after-these-tariffs-imposed-on-china--there-are-opportunities-for-india-on-one-hand-and-challenges-on-the-other-hand</guid>
                <pubDate>Thu, 10 Apr 2025 17:54:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2025-04/trumps-tariff-bombshell-hits-india-with-26-import-tax-but-s.webp"                         length="41158"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        