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                <title>tariffs - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>tariffs RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिका : ट्रंप-शी मुलाकात से पहले बड़ी डील की तैयारी... अरबों के सामान पर टैरिफ से राहत?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ को लेकर बातचीत ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश पहले से चले आ रहे व्यापार युद्ध को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे हैं. प्रस्तावित टैरिफ कटौती पर सहमति बनती है तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप और शी की बैठक के बाद व्यापार युद्ध विराम की अवधि कितनी बढ़ेगी या दोनों देशों के बीच कितना बड़ा समझौता होगा. टैरिफ के अलावा रेयर मिनरल, तकनीक, सेमीकंडक्टर और दूसरे आर्थिक मुद्दे भी दोनों देशों के रिश्तों में महत्वपूर्ण बने हुए हैं.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51882/america-preparing-for-big-deal-before-trump-xi-meeting-relief-from"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/erewr.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमेरिका : </strong>अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापार तनाव के बीच दोनों देशों की ट्रेड टीमें टैरिफ कम करने की दिशा में बातचीत कर रही हैं. चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि दोनों देशों के आर्थिक और व्यापार अधिकारी संबंधित मुद्दों पर लगातार संपर्क में हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सितंबर के अंत में होने वाली प्रस्तावित बैठक से पहले चल रही है. मौजूदा योजना के तहत करीब 30 अरब डॉलर के सामान पर दोनों देशों के टैरिफ में आपसी कटौती की जा सकती है.<br /><br />बातचीत में कुछ खास अमेरिकी उत्पादों पर चीन की ओर से लगाए गए टैरिफ को कम करने का मुद्दा शामिल है. इनमें अमेरिकी ऊर्जा और एग्रीकल्चर प्रोडक्ट भी शामिल हैं. इससे अमेरिकी किसानों और एनर्जी कंपनियों के लिए चीन का बाजार फिर से ज्यादा खुल सकता है. चीन से अमेरिका जाने वाले कुछ सामान और इंडस्ट्रीज इनपुट पर भी टैरिफ कम करने की संभावना पर चर्चा हो रही है. रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों पक्ष 30 अरब डॉलर के व्यापार से जुड़े पहले से तय ढांचे के तहत अलग-अलग उत्पादों की सूची तैयार कर रहे हैं.<br /><br /><strong>अमेरिका : </strong>चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि दोनों देशों की आर्थिक और व्यापार टीमें संबंधित मुद्दों पर लगातार बातचीत कर रही हैं. इससे पहले भी चीन ने करीब 30 अरब डॉलर के व्यापार पर आपसी टैरिफ कटौती की व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए कंपनियों, कारोबारी संगठनों और स्थानीय सरकारों से सुझाव मांगे थे. जुलाई में चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा था कि दोनों देश इस ढांचे की अंतिम व्यवस्था पर जल्द सहमति बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.<br /><br />अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ को लेकर बातचीत ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश पहले से चले आ रहे व्यापार युद्ध को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे हैं. प्रस्तावित टैरिफ कटौती पर सहमति बनती है तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप और शी की बैठक के बाद व्यापार युद्ध विराम की अवधि कितनी बढ़ेगी या दोनों देशों के बीच कितना बड़ा समझौता होगा. टैरिफ के अलावा रेयर मिनरल, तकनीक, सेमीकंडक्टर और दूसरे आर्थिक मुद्दे भी दोनों देशों के रिश्तों में महत्वपूर्ण बने हुए हैं.<br /><br />अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की बैठक सितंबर के अंत में होने वाली है. ताजा रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के अधिकारी इस मुलाकात से पहले कई आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 12:08:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका : टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भड़के ट्रंप...  लीक हुई बैठक की बातें, अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- ‘कुछ करना होगा’</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के निर्णय में कहा कि राष्ट्रपति ने जिस आपातकालीन अधिकार का हवाला देकर टैरिफ लगाए, वह उनके संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर था. अदालत ने साफ किया कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को आपात स्थिति में व्यापार को 'नियंत्रित' करने का अधिकार है, लेकिन इस कानून में सीधे तौर पर टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी गई है. कोर्ट के इस फैसले को उन राज्यों और कंपनियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने बढ़े हुए आयात शुल्क के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47902/trump-angry-over-supreme-courts-decision-on-us-tariffs-talks"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/6999176a9783d-donald-trump-tariff-212437107-16x9.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अमेरिका : </strong>अमेरिका में टैरिफ को लेकर सियासी घमासान अब कानूनी मोर्चे पर खुलकर सामने आ गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति को उस समय बड़ा झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन कानून के तहत लगाए गए उनके टैरिफ को अवैध ठहरा दिया. 6-3 के बहुमत से आए इस फैसले ने न सिर्फ ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि चुनावी साल में व्यापार नीति को भी नई बहस के केंद्र में ला दिया है.<br /><br />अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के निर्णय में कहा कि राष्ट्रपति ने जिस आपातकालीन अधिकार का हवाला देकर टैरिफ लगाए, वह उनके संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर था. अदालत ने साफ किया कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को आपात स्थिति में व्यापार को 'नियंत्रित' करने का अधिकार है, लेकिन इस कानून में सीधे तौर पर टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी गई है. कोर्ट के इस फैसले को उन राज्यों और कंपनियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्होंने बढ़े हुए आयात शुल्क के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था.<br /><br />राष्ट्रपति ट्रंप ने इसी कानून का सहारा लेते हुए पहले मेक्सिको, कनाडा और चीन पर अतिरिक्त शुल्क लगाए थे. इसके बाद उन्होंने 'लिबरेशन डे' के नाम पर भारत समेत कई देशों पर व्यापक टैरिफ लागू कर दिए थे. ट्रंप का तर्क था कि ये कदम अमेरिकी उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए जरूरी हैं. उनका कहना रहा है कि टैरिफ से विदेशी कंपनियां अमेरिका में निवेश करने को मजबूर होंगी और फैक्ट्रियां वापस लौटेंगी.<br /><br />सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गवर्नर्स के साथ एक निजी बैठक में उन्होंने फैसले को 'शर्मनाक' बताया और कहा कि 'इन अदालतों के बारे में कुछ करना होगा.' एक बयान में उन्होंने कहा कि वे व्यापार को पूरी तरह रोक सकते हैं या प्रतिबंध लगा सकते हैं, लेकिन एक डॉलर का टैरिफ नहीं लगा सकते - इसे उन्होंने 'अजीब स्थिति' बताया. उनके इन बयानों से यह संकेत मिला है कि वे न्यायपालिका के फैसले को चुनौती देने या अन्य कानूनी रास्ते अपनाने की तैयारी में हैं.<br /><br />कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने नया कदम उठाते हुए वैश्विक स्तर पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी. इसे पहले वाले टैरिफ की जगह लेने वाला कदम बताया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन अन्य कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल करेगा और व्यापार नीति पर पीछे नहीं हटेगा. उनके मुताबिक, टैरिफ से अमेरिकी निवेश और रोजगार को मजबूती मिलती है.<br /><br />अदालत के फैसले को उन अमेरिकी राज्यों और कारोबारियों की बड़ी जीत माना जा रहा है, जिन्होंने तर्क दिया था कि अचानक बढ़े आयात शुल्क से उत्पादन लागत बढ़ी और उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ पड़ा. अब इस निर्णय के बाद अरबों डॉलर के संभावित रिफंड का रास्ता खुल सकता है. हालांकि ट्रंप ने संकेत दिया है कि मामला आगे भी कानूनी प्रक्रिया में उलझा रह सकता है.<br /><br />टैरिफ को ट्रंप अपनी आर्थिक नीति की आधारशिला बताते रहे हैं. चुनावी रैलियों में वे दावा करते रहे कि इन कदमों से नौकरियां बढ़ेंगी और अमेरिकी उद्योग को मजबूती मिलेगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने चुनावी साल में उनकी व्यापार रणनीति पर अनिश्चितता पैदा कर दी है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन कौन-से वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाता है और क्या यह टकराव कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच बड़े संवैधानिक संघर्ष का रूप लेता है. फिलहाल इतना तय है कि अमेरिका में टैरिफ को लेकर सियासी और कानूनी जंग अभी थमी नहीं है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 12:39:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>नई दिल्ली : चीन पर लगाए गए इन टैरिफ्स के बाद; भारत के लिए मौके, वहीं दूसरी ओर चुनौतियां</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए अंतरराष्ट्रीय टैरिफ (शुल्क) नियमों ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है। भारत की इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं है। खासकर चीन पर लगाए गए इन टैरिफ्स के बाद ऐसा माना जा रहा है कि अब सस्ते और सब्सिडी वाले लिथियम-आयन बैटरी सेल्स भारत में भारी मात्रा में आ सकते हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/39685/new-delhi--after-these-tariffs-imposed-on-china--there-are-opportunities-for-india-on-one-hand-and-challenges-on-the-other-hand"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-04/trumps-tariff-bombshell-hits-india-with-26-import-tax-but-s.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए अंतरराष्ट्रीय टैरिफ (शुल्क) नियमों ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है। भारत की इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं है। खासकर चीन पर लगाए गए इन टैरिफ्स के बाद ऐसा माना जा रहा है कि अब सस्ते और सब्सिडी वाले लिथियम-आयन बैटरी सेल्स भारत में भारी मात्रा में आ सकते हैं। ये बदलाव भारत के लिए एक ओर जहां मौके लेकर आ सकते हैं, वहीं दूसरी ओर चुनौतियां भी खड़ी कर सकते हैं - खासकर 'मेक इन इंडिया' पहल के लिए।</p>
<p><strong>चीन के मुकाबले भारत एक बेहतर विकल्प?</strong><br />लिथियम-आयन रिसाइकिलिंग संगठन, LICO मटेरियल्स के संस्थापक और सीईओ गौरव डोलवानी के अनुसार, "मुझे लगता है कि भारत चीन प्लस वन रणनीति के लिए एक बेहतरीन विकल्प है। मुझे लगता है कि भारत में बैटरी बनाने का खर्च चीन, जापान और कोरिया जैसे देशों की तुलना में काफी कम है।"</p>
<p><strong>भारत में बैटरी उत्पादन की स्थिति</strong><br />फिलहाल भारत अपनी जरूरत की 100 प्रतिशत लिथियम-आयन सेल्स आयात करता है। हाल के कुछ वर्षों में देश में लिथियम के भंडार तो जरूर मिले हैं, लेकिन बैटरी सेल मैन्युफैक्चरिंग अब भी अपने शुरुआती चरण पर है। हालांकि, अगले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव आने वाला है। रिलायंस इंडस्ट्रीज गुजरात में एक गीगाफैक्ट्री बना रही है, जो 2030 तक 100 GWh उत्पादन क्षमता तक पहुंचना चाहती है। इसके अलावा, एक्साइड इंडस्ट्रीज भी 6 GWh की क्षमता वाली एक यूनिट बना रही है। और ओला इलेक्ट्रिक पहले ही अपने सिलिंड्रिकल सेल्स का उत्पादन शुरू कर चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Apr 2025 17:54:56 +0530</pubDate>
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