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                <title>Maharashtra government - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Maharashtra government RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मरीजों को बड़ी राहत: निजी अस्पतालों के मनमाने बिलों पर लगाम लगाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ला रही नई नीति</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr">महाराष्ट्र सरकार जल्द ही राज्य के निजी अस्पतालों (Private Hospitals) द्वारा वसूले जाने वाले मनमाने और भारी-भरकम बिलों पर लगाम लगाने के लिए एक ठोस नीति (Policy) लाने जा रही है। विधानसभा में इस मुद्दे पर हुई चर्चा के बाद स्पष्ट किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सरकार इस दिशा में काम कर रही है। इस नई नीति के तहत अस्पतालों को रेट कार्ड (Rate Card) प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा और मरीजों की आर्थिक लूट करने वाले संस्थानों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50406/big-relief-to-patients-maharashtra-government-is-bringing-a-new"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/istockphoto-1220415792-612x612.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>मुंबई: </strong>निजी अस्पतालों (Private Hospitals) में इलाज के नाम पर वसूले जाने वाले भारी-भरकम बिलों से आम जनता को जल्द ही बड़ी राहत मिल सकती है। महाराष्ट्र सरकार राज्य में निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही लूट और मनमाने शुल्कों पर अंकुश लगाने के लिए एक ठोस नीति (Policy) और संभवतः एक नया नियामक कानून लाने की पूरी तैयारी कर रही है।</p>
<p dir="ltr">​हाल ही में समाप्त हुए महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र के दौरान इस बहुप्रतीक्षित कदम की घोषणा की गई है, जिससे लाखों मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।</p>
<h3 dir="ltr">​विधानसभा में उठा था 'लूट' का मुद्दा</h3>
<p dir="ltr">​विधानसभा सत्र के दौरान कई विधायकों ने निजी अस्पतालों, विशेष रूप से एनआईसीयू (NICU) और आपातकालीन देखभाल (Emergency Care) में वसूले जाने वाले अत्यधिक शुल्कों का मुद्दा उठाया था। सदन में जवाब देते हुए मंत्री प्रकाश आबिटकर (Prakash Abitkar) ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इन मनमाने बिलों को नियंत्रित करने के लिए जल्द ही एक नीति पेश करेगी।</p>
<p dir="ltr">​इस नीति के मसौदे को अंतिम रूप देने और इसे लागू करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए जल्द ही मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक भी आयोजित की जाएगी।</p>
<h3 dir="ltr">​प्रस्तावित नीति की मुख्य विशेषताएं (Key Features)</h3>
<p dir="ltr">​प्रस्तावित नीति और सरकार द्वारा लाए जा रहे 'क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) बिल' के मसौदे के अनुसार, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बड़े सुधार किए जाने वाले हैं:</p>
<ul>
<li dir="ltr">​<strong>रेट कार्ड दिखाना अनिवार्य:</strong> सभी निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और डायग्नोस्टिक सेंटर्स को अपने रिसेप्शन डेस्क और वेबसाइट पर इलाज, सर्जरी और अन्य सेवाओं के शुल्कों का स्पष्ट 'रेट कार्ड' (Rate Card) प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।</li>
<li dir="ltr">​<strong>मानकीकृत दरें (Standardized Rates):</strong> सरकार विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए एक मानक दर तय करने पर विचार कर रही है ताकि मरीजों से मनमाना पैसा न वसूला जा सके।</li>
<li dir="ltr">​<strong>सख्त दंड और जुर्माना:</strong> जो अस्पताल या क्लीनिक इन नियमों का उल्लंघन करेंगे या मरीजों से तय सीमा से अधिक फीस वसूलेंगे, उन पर भारी जुर्माना (5 लाख रुपये तक) और संभवतः जेल की सजा का प्रावधान भी शामिल किया जा सकता है।</li>
<li dir="ltr">​<strong>पारदर्शिता:</strong> इलाज के दौरान मरीजों के परिजनों को बिलिंग और अन्य अतिरिक्त खर्चों के बारे में पूरी पारदर्शिता रखनी होगी।</li>
</ul>
<h3 dir="ltr">​सुप्रीम कोर्ट का निर्देश बना आधार</h3>
<p dir="ltr">​गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने भी देश भर में निजी और सरकारी अस्पतालों के इलाज के खर्च में मौजूद भारी अंतर पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। सर्वोच्च अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को सख्त निर्देश दिए थे कि वे निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं (Healthcare Providers) की फीस को विनियमित (Regulate) करने के लिए उचित और तत्काल कदम उठाएं।</p>
<h3 dir="ltr">​क्या होगा इसका असर?</h3>
<p dir="ltr">​स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) होने के बावजूद कई बार निजी अस्पताल मरीजों से 'को-पेमेंट' या अन्य हिडन चार्जेस के नाम पर भारी रकम वसूल लेते हैं। इस नीति के लागू होने से न केवल आम मरीजों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में व्याप्त अनिश्चितता और मुनाफे की संस्कृति पर भी लगाम लगेगी।</p>
<p dir="ltr">​हालांकि, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) जैसे संगठनों ने इस बिल के कुछ दंडात्मक प्रावधानों पर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं, लेकिन आम जनमानस के व्यापक हित को देखते हुए सरकार इसे जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 16:32:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई में ऐप-आधारित कैब कंपनियों को टक्कर देने आ रही 'देवाभाऊ टैक्सी', 3,000 युवाओं को मिलेंगे परमिट</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr">मुंबई और एमएमआर (MMR) क्षेत्र में ऐप-आधारित कैब कंपनियों की मनमानी और बढ़ते किराये (Surge Pricing) से आम जनता को राहत दिलाने के लिए जल्द ही सहकारिता के आधार पर 'देवाभाऊ सहकार टैक्सी' सेवा शुरू की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी योजना के पहले चरण में 3,000 युवाओं को टैक्सी परमिट दिए जाएंगे, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और यात्रियों को किफायती सफर की सुविधा मिलेगी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50311/devabhau-taxi-is-coming-to-compete-with-app-based-cab-companies"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/images---2026-06-17t162240.627.jpeg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>मुंबई: </strong>मुंबई और एमएमआर (MMR) इलाके में सफर करने वाले यात्रियों और टैक्सी चालकों दोनों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। निजी ऐप-आधारित कैब कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले भारी कमीशन और मनमाने किराये से निजात दिलाने के लिए सरकार जल्द ही <strong>'देवाभाऊ सहकार टैक्सी'</strong> और <strong>'छावा टैक्सी'</strong> ऐप सेवा शुरू करने जा रही है।</p>
<p dir="ltr">​इस योजना का मुख्य उद्देश्य मुंबईकरों को सस्ता और सुरक्षित सफर मुहैया कराना और वाहन चालकों को बिना किसी कॉर्पोरेट कमीशन के उनकी मेहनत का सीधा मुनाफा पहुंचाना है।</p>
<h3 dir="ltr">​योजना के प्रमुख बिंदु और रोजगार के अवसर</h3>
<ul>
<li dir="ltr">​<strong>3,000 युवाओं को मिलेंगे परमिट:</strong> योजना के पहले चरण के तहत शुरुआत में कम से कम 3,000 युवाओं को टैक्सी उपलब्ध कराकर उन्हें 'देवाभाऊ टैक्सी सर्विस' के नाम से परमिट दिए जाएंगे।</li>
<li dir="ltr">​<strong>रोजगार का सृजन:</strong> इन 3,000 टैक्सियों के सड़क पर उतरने से अनुमान है कि 6,000 से 9,000 युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।</li>
<li dir="ltr">​<strong>"हमारी टैक्सी, हमारा मालिकाना हक":</strong> इस योजना का मुख्य नारा यही रखा गया है, जिसका अर्थ है कि चालक अपनी गाड़ी के खुद मालिक होंगे और उन्हें किसी कंपनी को अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा कमीशन के तौर पर नहीं देना होगा।</li>
<li dir="ltr">​<strong>'भारत टैक्सी' की तर्ज पर:</strong> दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए सफल 'भारत टैक्सी' मॉडल की तर्ज पर ही महाराष्ट्र में यह नया सहकारी प्रयोग किया जा रहा है।</li>
</ul>
<h3 dir="ltr">​सरकार का समर्थन और वित्तीय सहायता</h3>
<p dir="ltr">​इस परियोजना को राज्य सरकार के शीर्ष स्तर से हरी झंडी मिल चुकी है। परिवहन विभाग द्वारा इसके लिए आवश्यक नीतियां और नियम तय किए जा चुके हैं।</p>
<p dir="ltr">​योजना के तहत पात्र युवाओं को सहकारी बैंकों के जरिए वाहन खरीदने के लिए आसान दरों पर लोन (Loan) मुहैया कराया जाएगा। इसके अलावा, लाभार्थियों पर ब्याज का बोझ कम करने के लिए अन्नासाहेब पाटिल आर्थिक विकास निगम, ओबीसी निगम और अन्य राज्य विकास निगमों के माध्यम से ब्याज वापसी (Interest Reimbursement) की सब्सिडी भी दी जाएगी।</p>
<h3 dir="ltr">​एयरपोर्ट और होटलों के साथ गठजोड़ की तैयारी</h3>
<p dir="ltr">​इस नई टैक्सी सेवा को शुरुआत से ही मजबूती देने और चालकों को नियमित सवारियां सुनिश्चित करने के लिए एयरपोर्ट प्रबंधन, कई बड़ी संस्थाओं और पांच सितारा होटलों के साथ गठजोड़ (Tie-up) की बातचीत अंतिम चरण में है।</p>
<p dir="ltr">​जहां एक ओर इस योजना से हजारों युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है, वहीं विपक्षी दल इस योजना में सहकारी बैंकों के पैसे के इस्तेमाल और लोन आवंटन में पूरी पारदर्शिता बरतने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल, आम मुंबईकरों को अब इस बात का बेसब्री से इंतजार है कि यह सस्ती टैक्सी सेवा आधिकारिक रूप से सड़कों पर कब उतरेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 16:25:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाराष्ट्र में RTI अपीलों का बढ़ता बैकलॉग, लंबित मामलों में 38% की बढ़ोतरी से पारदर्शिता पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में RTI की दूसरी अपीलों का बैकलॉग 38% बढ़ गया है। मार्च 2026 तक लंबित मामलों की संख्या 5,060 पहुंच गई है, जिससे सूचना प्राप्त करने में देरी और सरकारी जवाबदेही को लेकर चिंता बढ़ रही है। #RTI #MaharashtraNews #RightToInformation #Transparency #MumbaiNews #BreakingNews #Governance #Accountability</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50195/increasing-backlog-of-rti-appeals-in-maharashtra-increase-in-pending"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/copy-of-queen-of-all-mayhem-47.jpg" alt=""></a><br /><p><br />महाराष्ट्र में सूचना का अधिकार (RTI) कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में लंबित दूसरी अपीलों (Second Appeals) की संख्या में करीब 38 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया और सरकारी जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं।</p>
<p><br />पारदर्शिता के क्षेत्र में काम करने वाले संगठन Sajag Nagrik Manch द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, मार्च 2026 तक लंबित दूसरी अपीलों की संख्या बढ़कर 5,060 हो गई, जबकि वर्ष की शुरुआत में यह आंकड़ा 3,672 था। इस दौरान संबंधित आयोग को 4,870 नई अपीलें प्राप्त हुईं, लेकिन केवल 3,482 मामलों का निपटारा हो सका।</p>
<p><br />RTI कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई नागरिकों को दूसरी अपील की सुनवाई के लिए दो से तीन साल तक इंतजार करना पड़ रहा है। उनका मानना है कि इतनी लंबी देरी से RTI कानून का मूल उद्देश्य—समयबद्ध सूचना उपलब्ध कराना—कमजोर पड़ रहा है।</p>
<p><br />विशेषज्ञों के अनुसार, अपीलों में वृद्धि का एक बड़ा कारण सरकारी विभागों द्वारा सूचना देने से इनकार, अधूरी जानकारी उपलब्ध कराना या जवाब देने में देरी है। कई मामलों में व्यक्तिगत जानकारी, सार्वजनिक हित की कमी या रिकॉर्ड की अधिकता जैसे कारणों का हवाला देकर आवेदन खारिज किए जाते हैं, जिसके बाद नागरिकों को अपील का सहारा लेना पड़ता है।</p>
<p><br />सजग नागरिक मंच की प्रतिनिधि त्रिशिला कांबले ने चिंता जताते हुए कहा कि जब तक अपीलों पर फैसला आता है, तब तक संबंधित अधिकारी कई बार स्थानांतरित हो चुके होते हैं, जिससे जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता है।</p>
<p><br />RTI विशेषज्ञों का मानना है कि आयोगों में रिक्त पदों को भरने, सुनवाई की गति बढ़ाने, डिजिटल प्रक्रियाओं को मजबूत करने और सरकारी विभागों द्वारा स्वप्रेरित सूचना प्रकटीकरण (Proactive Disclosure) बढ़ाने से इस समस्या को कम किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 19:06:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पिंपलेश्वर मंदिर भूमि विवाद का हुआ समाधान, देवेंद्र फडणवीस ने बताया श्रद्धालुओं की जीत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>डोंबिवली के पिंपलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ा करीब 20 साल पुराना भूमि विवाद सुलझ गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि पूरी भूमि मंदिर को समर्पित कर दी गई है और इसे श्रद्धालुओं की बड़ी जीत बताया। #DevendraFadnavis #PimpaleshwarTemple #Dombivli #MaharashtraNews #Mahadev #BreakingNews #Shivotsav</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50154/pimpleshwar-temple-land-dispute-resolved-devendra-fadnavis-calls-victory-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/1003052462.jpg" alt=""></a><br /><p> </p>
<p>महाराष्ट्र के डोंबिवली स्थित ऐतिहासिक पिंपलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ा वर्षों पुराना भूमि विवाद आखिरकार सुलझ गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि विवादित पूरी भूमि अब मंदिर को समर्पित कर दी गई है। उन्होंने इसे "महादेव भक्तों की जीत" बताते हुए कहा कि यह लंबे संघर्ष और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि मंदिर की भूमि से जुड़ा मुद्दा कई वर्षों से लंबित था, जिसे राज्य सरकार ने राजस्व और उद्योग विभागों के सहयोग से सुलझाया है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय मंदिर के श्रद्धालुओं और समाज के उन लोगों को दिया जिन्होंने लगातार इस मुद्दे को उठाया।</p>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, मंदिर के लिए लगभग 4 एकड़ 25 गुंठा भूमि मंजूर की गई है। यह विवाद करीब दो दशकों से चला आ रहा था और इसके समाधान के लिए कानूनी लड़ाई, जनआंदोलन और विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए गए थे।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मंदिर में महापूजा भी की और कहा कि सरकार मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को संरक्षित करने के लिए विकास योजनाओं पर काम करेगी। उन्होंने मंदिर परिसर के समग्र विकास का भी आश्वासन दिया।</p>
<p>इस अवसर पर कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, मंदिर ट्रस्ट के सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। स्थानीय लोगों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास का महत्वपूर्ण क्षण बताया।</p>
<p>मंदिर भूमि विवाद के समाधान के बाद अब परिसर के संरक्षण, विस्तार और सुविधाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त हो गया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 18:13:42 +0530</pubDate>
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