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                <title>stench - Rokthok Lekhani</title>
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                <title>भायंदर : गंदगी एवं बदबू में जीने को मजबूर गणेश देवल नगर के रहवासी...</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">भायंदर (पश्चिम) स्थित गणेश देवल नगर के लोग गंदगी एवं बदबूदार माहौल में जीने को मजबूर है। गणेश देवल नगर एवं जय बजरंग नगर के बीच में एक बड़ा नाला है। यह नाला गंदगी से भरा पड़ा है, एवं यहां पर दुर्गंध फैली हुई है। हालही में मनपा द्वारा यहां पर ठेकेदार के माध्यम से इस नाले की सफाई कराई गयी थी, परन्तु ठेकेदार द्वारा यहां पर सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गयी है।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/41598/residents-of-ganesh-deval-nagar-forced-to-live-in-dirt"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-06/sdasd.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भायंदर :</strong> भायंदर (पश्चिम) स्थित गणेश देवल नगर के लोग गंदगी एवं बदबूदार माहौल में जीने को मजबूर है। गणेश देवल नगर एवं जय बजरंग नगर के बीच में एक बड़ा नाला है। यह नाला गंदगी से भरा पड़ा है, एवं यहां पर दुर्गंध फैली हुई है। हालही में मनपा द्वारा यहां पर ठेकेदार के माध्यम से इस नाले की सफाई कराई गयी थी, परन्तु ठेकेदार द्वारा यहां पर सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">ठेकेदार तो यहां पैसा कमाने के चक्कर में था परन्तु यहां की देख रेख करने वाले मनपा अधिकारी एवं कर्मचारीयों की भी इस मामलें में उदासीनता समझ से परे हैं। यहां के स्थानीय रहवासी एवं पूर्व नगरसेवक पंकज पांडेय ने मनपा अधिकारियों एवं ठेकेदार की मिली भगत का आरोप लगाया हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पंकज पांडेय ने आरोप लगाया की इस नाले की सफाई को सिर्फ 10 दिन के करीब हुआ हैं उसके बावजूद यहां पर गंदगी भरी पड़ी हैं। इस नाले के बगल में रहने वाले लोग इस गंदगी की वजह से हमेशा बिमार रहते हैं। इतनी बड़ी महानगरपालिक में भी आज लोग ग्रामीण क्षेत्रों से भी बुरी स्थिति में रहने को मजबूर हैं। वहीं ठेकेदार के काम करने के तरीके से भी अंदाजा लग रहा हैं की उसने किस गुणवत्ता का काम किया हैं।</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Jun 2025 09:47:51 +0530</pubDate>
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                <title>नेपीडॉ: म्यांमार में भूकंप के 3 दिन बाद मलबे में दबी लाशों की फैली भीषण दुर्गंध... </title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर की सड़कों पर रविवार को सड़ते हुए शवों की गंध फैली हुई थी, क्योंकि लोग किसी जीवित व्यक्ति को खोजने की उम्मीद में मलबा हटाने के लिए हाथों से काम कर रहे हैं। दो दिन पहले आए भीषण भूकंप में 1,600 से अधिक लोग मारे गए हैं और अनगिनत लोग दब गए, जिनकी तलाश की जा रही है। </p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/39399/naypyidaw--3-days-after-the-earthquake-in-myanmar--the-stench-of-dead-bodies-buried-in-the-rubble-spreads"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-03/download1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नेपीडॉ: </strong>म्यांमार में भूकंप के 3 दिन बाद मलबे में दबी लाशों की भीषण दुर्गंध चारों ओर फैल गई है। इससे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने वाली टीम के सामने बड़ी चुनौती आ गई है। साथ ही आसपास के लोगों को महामारी की चपेट में भी आने का खतरा बढ़ गया है। जैसे-जैसे वक्त बीतता जा रहा है, तैसे-तैसे मलबे में दबे लोगों के जीवित मिलने की उम्मीदें कम होती जा रही हैं। भारत से भी कई टीमें म्यांमार में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने और घायलों के इलाज के लिए पहुंच चुकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर की सड़कों पर रविवार को सड़ते हुए शवों की गंध फैली हुई थी, क्योंकि लोग किसी जीवित व्यक्ति को खोजने की उम्मीद में मलबा हटाने के लिए हाथों से काम कर रहे हैं। दो दिन पहले आए भीषण भूकंप में 1,600 से अधिक लोग मारे गए हैं और अनगिनत लोग दब गए, जिनकी तलाश की जा रही है। <br /><br />शुक्रवार दोपहर को 7.7 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र मांडले के पास था। इससे झूले की तरह धरती डोलने लगी। कई इमारतें गिर गईं। इस दौरान शहर के हवाई अड्डे जैसे तमाम बुनियादी और ऐतिहासिक ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा। टूटी हुई सड़कों, गिरे हुए पुलों, संचार व्यवस्था में गड़बड़ी और गृहयुद्ध के बीच देश में काम करने की चुनौतियों के कारण राहत कार्य बाधित हो रहे हैं।<br /><br />स्थानीय निवासियों द्वारा जीवित बचे लोगों की तलाश मुख्य रूप से भारी उपकरणों की सहायता के बिना की गई है, जो 41 डिग्री सेल्सियस (106 फ़ारेनहाइट) की गर्मी में हाथों और फावड़ियों से मलबा हटा रहे हैं, केवल कभी-कभार ट्रैक किए गए उत्खननकर्ता दिखाई देते हैं। हालांकि अब भारत से बड़ी सहायता पहुंच गई है। एनडीआरएफ की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर चुकी हैं। </p>]]>
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                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Mar 2025 18:48:19 +0530</pubDate>
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