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                <title>conditions - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई-नागपुर समृद्धि महामार्ग पर एक्सिडेंट बढ़े, पुणे हाइवे पर सुधरे हालात, महाराष्ट्र के ये आंकड़े चौंक देंगे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग पर 2025 में दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों में तेजी से वृद्धि हुई, जबकि मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं में मामूली वृद्धि देखी गई। हालांकि, कुल दुर्घटनाओं में मामूली गिरावट आई है। अधिकारियों ने रविवार को महाराष्ट्र राजमार्ग पुलिस के अनंतिम आंकड़ों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी। राजमार्ग पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, समृद्धि महामार्ग पर 2025 में 185 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2024 के आंकड़े 137 की तुलना में 35 प्रतिशत की वृद्धि है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48299/accidents-increased-on-mumbai-nagpur-samriddhi-mahamarg-situation-improved-on-pune"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/images---2026-03-09t110301.407.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग पर 2025 में दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों में तेजी से वृद्धि हुई, जबकि मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर दुर्घटनाओं में मामूली वृद्धि देखी गई। हालांकि, कुल दुर्घटनाओं में मामूली गिरावट आई है। अधिकारियों ने रविवार को महाराष्ट्र राजमार्ग पुलिस के अनंतिम आंकड़ों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी। राजमार्ग पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, समृद्धि महामार्ग पर 2025 में 185 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2024 के आंकड़े 137 की तुलना में 35 प्रतिशत की वृद्धि है। </p>
<p> </p>
<p>विदर्भ के सबसे बड़े शहर नागपुर को देश की वित्तीय राजधानी से जोड़ने वाले कॉरिडोर पर जानलेवा दुर्घटनाओं की संख्या 2024 के 96 से बढ़कर 2025 में 128 हो गई, जबकि मौतों की संख्या 126 से बढ़कर 152 हो गई, जो क्रमशः 33 प्रतिशत और 21 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।</p>
<p><strong>दोगुनी हुईं दुर्घटनाएं</strong><br />आंकड़ों से पता चला कि गंभीर चोट का कारण बनने वाली दुर्घटनाओं की संख्या भी दोगुनी होकर 23 से बढ़कर 46 हो गई। ऐसी दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों की संख्या 50 से बढ़कर 140 हो गई। </p>
<p><strong>आईटीएमएस लागू</strong><br />छह लेन वाला 'एक्सेस-कंट्रोल्ड समृद्धि कॉरिडोर' दिसंबर 2022 से चरणबद्ध तरीके से यातायात के लिए खोला गया था और इसका पूरा हिस्सा पिछले साल चालू हो गया था। वर्तमान में निगरानी में सुधार और सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक 'इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' (आईटीएमएस) लागू किया जा रहा है। </p>
<p><strong>महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने छिपाए आंकड़े?</strong><br />महाराष्ट्र परिवहन आयुक्त के कार्यालय ने इस वर्ष 22 जनवरी को जारी अपनी प्रेस विज्ञप्ति में, समृद्धि महामार्ग पर दुर्घटनाओं और मौतों में वृद्धि का उल्लेख नहीं किया। हालांकि उसने देश के पहले 'एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर' मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर गंभीर दुर्घटनाओं और मौतों में कमी को उजागर किया। </p>
<p><strong>पुणे एक्सप्रेसवे का हाल</strong><br />मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 2025 में 187 दुर्घटनाएं हुईं, जो 2024 में हुई 191 दुर्घटनाओं से थोड़ी कम हैं। हालांकि, मामूली चोट का कारण बनने वाली दुर्घटनाओं में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 25 से बढ़कर 28 हो गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 11:04:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : 18 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में गहराते संकट; रेजिडेंट डॉक्टरों के काम करने और रहने की स्थिति प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सेंट्रल महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स द्वारा किए गए हालिया राज्यव्यापी सर्वे ने महाराष्ट्र के 18 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में गहराते संकट को उजागर किया है, जिससे 5,800 से ज़्यादा पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट डॉक्टरों के काम करने और रहने की स्थिति प्रभावित हो रही है। MARD डॉक्टरों ने बताया कि सर्वे के नतीजों से अस्पताल की सुरक्षा में बड़ी कमियां, रहने लायक न होने वाली हॉस्टल सुविधाएं, देरी से मिलने वाला स्टाइपेंड और अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर सामने आया है - ये ऐसी स्थितियां हैं जो डॉक्टरों को जोखिम में डाल रही हैं और पूरे महाराष्ट्र में मरीजों की देखभाल से समझौता कर रही हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46151/mumbai-deepening-crisis-in-18-government-medical-colleges-working-and"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/download-(89).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> सेंट्रल महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स द्वारा किए गए हालिया राज्यव्यापी सर्वे ने महाराष्ट्र के 18 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में गहराते संकट को उजागर किया है, जिससे 5,800 से ज़्यादा पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट डॉक्टरों के काम करने और रहने की स्थिति प्रभावित हो रही है। MARD डॉक्टरों ने बताया कि सर्वे के नतीजों से अस्पताल की सुरक्षा में बड़ी कमियां, रहने लायक न होने वाली हॉस्टल सुविधाएं, देरी से मिलने वाला स्टाइपेंड और अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर सामने आया है - ये ऐसी स्थितियां हैं जो डॉक्टरों को जोखिम में डाल रही हैं और पूरे महाराष्ट्र में मरीजों की देखभाल से समझौता कर रही हैं।</p>
<p> </p>
<p>औसतन 25% सुरक्षा कर्मियों की कमी के साथ काम कर रहे हैं, जिससे इमरजेंसी वार्ड, हॉस्टल, आउटपेशेंट डिपार्टमेंट और कैंपस जैसे<br /> महत्वपूर्ण क्षेत्र अपर्याप्त रूप से सुरक्षित हैं। कई संस्थानों में सुरक्षा गार्डों के लिए 200 से ज़्यादा स्वीकृत पद हैं, लेकिन सिर्फ़ 150 ही तैनात हैं। MARD के अनुसार, इसके परिणाम हिंसा, उत्पीड़न, हॉस्टल में अनाधिकृत प्रवेश और इमरजेंसी के दौरान भीड़ प्रबंधन में कमी के बढ़ते मामलों में दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा, रेजिडेंट डॉक्टरों को पीछा करने, धमकाने और प्राइवेसी के उल्लंघन का सामना करना पड़ा है। शुक्रवार को जारी MARD के एक बयान के अनुसार, हालांकि ज़्यादातर कॉलेज महाराष्ट्र सुरक्षा बल (72%) पर निर्भर हैं, लेकिन प्रशासनिक देरी और निगरानी में विफलता के कारण सुरक्षा की मौजूदगी अनियमित रही है।सर्वे में हॉस्टल सुविधाओं की दयनीय तस्वीर सामने आई है।</p>
<p>लगभग आधे (50%) रेजिडेंट डॉक्टरों को हॉस्टल में रहने की जगह नहीं मिलती है और उन्हें अजीब समय पर लंबी और असुरक्षित दूरी तय करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। जो डॉक्टर कैंपस में रहते हैं, वे अस्वच्छ और असुरक्षित स्थितियों की रिपोर्ट करते हैं, जिसमें कीड़े-मकोड़ों का प्रकोप, आवारा जानवर, टूटी-फूटी इमारतें, अविश्वसनीय पानी की आपूर्ति/कमी और बार-बार बिजली कटौती शामिल है। लगभग आधे कॉलेजों (50%) में मेस की सुविधाएं या तो काम नहीं कर रही हैं या अपर्याप्त हैं। इसके अलावा, कई अस्पतालों में पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग हॉस्टल भी नहीं हैं, जिससे महिला रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए सुरक्षा संबंधी चिंताएं और बढ़ गई हैं।सर्वे के अनुसार, वित्तीय तनाव ने परेशानी और बढ़ा दी है। सेंट्रल MARD ने पाया कि तीन में से एक मेडिकल कॉलेज समय पर स्टाइपेंड जारी करने में विफल रहा है, जिसमें कई रेजिडेंट डॉक्टरों को महीने की 10 तारीख तक अपना स्टाइपेंड नहीं मिला है।</p>
<p>अक्सर ड्यूटी प्रति सप्ताह 80 घंटे से ज़्यादा होने के कारण, कई रेजिडेंट किराए, भोजन और परिवहन के लिए स्टाइपेंड पर निर्भर रहते हैं। सर्वे के अनुसार, इसके अलावा, इन देरी ने कई रेजिडेंट डॉक्टरों को वित्तीय अस्थिरता, कर्ज या असुरक्षित समझौतों की ओर धकेल दिया है, जिसमें अपर्याप्त यात्रा और आवास शामिल हैं। खराब सुरक्षा, भयानक रहने की स्थिति और वित्तीय कठिनाई के कारण पूरे राज्य में रेजिडेंट डॉक्टरों पर मानसिक रूप से बुरा असर पड़ा है।</p>
<p>केवल 39% रेजिडेंट डॉक्टरों ने काम पर सुरक्षित महसूस करने की बात कही, जबकि लगभग आधे ने कहा कि वे सिर्फ़ आंशिक रूप से सुरक्षित महसूस करते हैं। बड़ी संख्या में (11%) लोगों ने कहा कि वे असुरक्षित महसूस करते हैं और लगातार डर में काम करते हैं, जिससे उनमें क्रोनिक तनाव, चिंता, बर्नआउट और फ़ैसले लेने में दिक्कत होती है।इसके अलावा, बार-बार शिकायतें करने के बावजूद, आधे मेडिकल कॉलेजों ने बताया है कि उनके संबंधित प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। सुरक्षा तैनाती, हॉस्टल की मरम्मत, समय पर स्टाइपेंड और बुनियादी अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है और ये महीनों से अनसुलझे हैं। सेंट्रल MARD ने कहा कि यह सिस्टम की विफलता को दिखाता है, न कि संसाधनों की कमी को।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Dec 2025 12:02:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : हवा की गुणवत्ता लगातार खराब; अंधेरी ईस्ट और वेस्ट के जमीनी हालात बीएमसी के रिकॉर्ड हकीकत से मेल नहीं खाते</title>
                                    <description><![CDATA[<p>हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। बृहन्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) का कहना है कि वह धूल नियंत्रण के लिए गहन प्रयास कर रही है। हालांकि शहर के सबसे प्रदूषित इलाकों में शामिल अंधेरी ईस्ट और वेस्ट के जमीनी हालात देख कर पता चलता है कि बीएमसी के रिकॉर्ड हकीकत से मेल नहीं खाते। अंधेरी ईस्ट के चकलाका वार्ड ऑफिस में पदस्थ बीएमसी अधिकारी के मुताबिक नगरीय निकाय हर सुबह करीब 7 बजे मशीनों से करीब 80 किलोमीटर इलाके में छिड़काव करता है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45937/mumbai-air-quality-continues-to-be-poor-bmc-records-do"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/download---2025-12-03t103432.601.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। बृहन्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) का कहना है कि वह धूल नियंत्रण के लिए गहन प्रयास कर रही है। हालांकि शहर के सबसे प्रदूषित इलाकों में शामिल अंधेरी ईस्ट और वेस्ट के जमीनी हालात देख कर पता चलता है कि बीएमसी के रिकॉर्ड हकीकत से मेल नहीं खाते। अंधेरी ईस्ट के चकलाका वार्ड ऑफिस में पदस्थ बीएमसी अधिकारी के मुताबिक नगरीय निकाय हर सुबह करीब 7 बजे मशीनों से करीब 80 किलोमीटर इलाके में छिड़काव करता है। रोज करीब 10,000 लीटर पानी का इस्तेमाल धूल को रोकने के लिए किया जाता है। इसके लिए 5,000 लीटर के दो टैंकर प्रयोग किए जाते हैं। इसके अलावा पाइपलाइन से भी छिड़काव होता है। अधिकारी के मुताबिक यहां 1,200 सफाईकर्मी कार्यरत हैं जो दो पालियों में काम करते हैं।</p>
<p> </p>
<p>इनमें बीएमसी के 900 और अनुबंधित 165 कर्मचारी शामिल हैं। झाड़ू लगाने का काम सुबह 6.30 बजे से 1.30 बजे तक और दोपहर 2 बजे से 8 बजे तक किया जाता है। तीन-चार दिन पहले बीएमसी मुख्यालय से जारी सर्कुलर में सभी वार्डों को निर्देश दिया गया था कि वे धूल रोकने के प्रयास करें। मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि मुंबई का वायु गुणवत्ता सूचकांक मंगलवार को 105 के करीब रहा जो खराब श्रेणी में है लेकिन बहुत गंभीर नहीं। वहां प्रदूषण का स्तर लंबे समय से संतोषजनक या अच्छा नहीं है। </p>
<p><strong>संतुष्ट नहीं हैं शहरवासी</strong><br />जमीनी स्तर पर शहरवासी, कामगार और वेंडर कहीं अधिक गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। ग्लोबल हॉस्पिटल ऐंड रिसर्च सेंटर के पास निर्माणाधीन जगह और बीएमसी कार्यालय से बाहर के इलाके में निर्माण गतिविधियों की धूल लगातार हवा में फैलती रहती है। एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि अस्पताल ने औपचारिक रूप से नगरीय निकाय से इस धूल के बारे में शिकायत की थी, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ। निर्माण कार्य पूरा होने वाला है लेकिन वहां धूल रोकने के कोई उपाय नहीं हैं। </p>
<p>वहीं तैनात एक यातायात पुलिसकर्मी ने कहा कि उसने सड़क धुलने या पानी के छिड़काव जैसे धूल रोकने के तरीके आजमाए जाते नहीं देखते। उन्होंने कहा, ‘स्वीपर शाम को 4.30 से 5 बजे के बीच आते हैं और पौधों को पानी देते हैं। परंतु वाहनों के चलते धूल उड़ती रहती है।’ उसने यह भी कहा कि स्वास्थ्य कारणों से वह लंबे समय तक मास्क का इस्तेमाल नहीं कर सकते। इलाके के रेहड़ी-पटरी वाले भी इसी तरह की बात कहते हैं। दो दशक से अधिक समय से अंधेरी में नारियल बेच रहे एक व्यक्ति ने कहा कि कभी-कभी सुबह के समय पानी का छिड़काव होता है, लेकिन इससे बहुत कम राहत मिलती है क्योंकि धूल तुरंत वापस आ जाती है। उन्होंने कहा कि वह तीन सालों से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन जिंदगी यूं ही चल रही है। अंधेरी स्टेशन पर फूल बेचने वाली 42 वर्षीय संजीवनी ने कहा कि सफाई व्यवस्था में कोई इजाफा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ‘हर जगह धूल और धुंआ है।’ </p>
<p>वहीं अंधेरी ईस्ट के निवासी कहते हैं कि स्वास्थ्य समस्याएं आम होती जा रही हैं। पूनम नगर की 47 वर्षीय नर्स ध्वनि फेंडर (नाम बदला हुआ) ने कहा कि हाल के हफ्तों में उनकी एलर्जी की समस्या और गंभीर हो गई है। उन्होंने कहा,’हाथ से झाड़ू लगाई जा रही है लेकिन धूल का स्तर कम नहीं हो रहा।’ <br />हालांकि बीएमसी का कहना है कि मशीनों से रोज हजारों लीटर पानी छिड़का जा रहा है और लगभग 14 घंटे तक झाड़ू लगाई जाती है, लेकिन निवासियों का कहना है कि प्रमुख चौराहों पर कुछ बदलाव नजर नहीं आता। पहले की तरह निर्माण स्थलों से उड़ती धूल परेशान कर रही है। मुंबई की धूल-नियंत्रण व्यवस्था कागज पर कारगर दिख सकती है। लेकिन अंधेरी के रहवासी कहते हैं कि वे अब भी रोज धूल को झेल रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Dec 2025 10:34:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वसई : जरूरी शर्तों के तहत प्राकृतिक तालाबों में पूजा की अनुमति; समुद्र में निर्माल्य विसर्जन पर रोक </title>
                                    <description><![CDATA[<p>वसई-विरार में रहने वाले छठ व्रतियों के लिए बड़ी खबर है। आगामी 27 और 28 अक्टूबर को मनाए जाने वाले छठ पूजा उत्सव में श्रद्धालु अब समुद्र और तालाब के किनारे सुरक्षित और पर्यावरण और परंपरा के अनुरूप पूजा कर सकेंगे। वसई की विधायक स्नेहा दुबे पंडित और नालासोपारा के विधायक राजन नाईक की पहल से यह संभव हुआ है। पर्यावरण संरक्षण के लिए जारी उच्च न्यायालय के आदेशों के तहत प्राकृतिक तालाबों और समुद्र में निर्माल्य विसर्जन पर रोक है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44955/vasai-permission-for-worship-in-natural-ponds-under-necessary-conditions"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-10/download---2025-10-25t175405.423.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वसई : </strong>वसई-विरार में रहने वाले छठ व्रतियों के लिए बड़ी खबर है। आगामी 27 और 28 अक्टूबर को मनाए जाने वाले छठ पूजा उत्सव में श्रद्धालु अब समुद्र और तालाब के किनारे सुरक्षित और पर्यावरण और परंपरा के अनुरूप पूजा कर सकेंगे। वसई की विधायक स्नेहा दुबे पंडित और नालासोपारा के विधायक राजन नाईक की पहल से यह संभव हुआ है। पर्यावरण संरक्षण के लिए जारी उच्च न्यायालय के आदेशों के तहत प्राकृतिक तालाबों और समुद्र में निर्माल्य विसर्जन पर रोक है। इस परिप्रेक्ष्य में दोनों भाजपा विधायकों ने पालघर जिले के पालक मंत्री गणेश नाईक और वसई-विरार मनपा आयुक्त मनोज कुमार सूर्यवंशी से विस्तृत चर्चा कर सुझाव दिया था कि छठ पूजा के दौरान श्रद्धालु केवल अर्घ्य दें। मूर्ति या पूजा सामग्री का विसर्जन न करें। इस पर गौर करते हुए वसई-विरार मनपा के विभिन्न प्रभागों में छठ पूजा को लेकर सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। जिसमें जरूरी शर्तों के तहत प्राकृतिक तालाबों में पूजा की अनुमति दी गई है।</p>
<p> </p>
<p>मनपा आयुक्त मनोजकुमार सूर्यवंशी ने बताया कि शहर के विभिन्न प्रभागों में कृत्रिम तालाब तैयार किए जा रहे हैं, ताकि प्राकृतिक जलस्रोतों में निर्माल्य विसर्जन से होने वाले प्रदूषण को रोका जा सके। इस पहल के तहत समुद्र और तालाब के किनारे विशाल कलश स्थापित किए जाएंगे, जहां श्रद्धालु अपने निर्माल्य और पूजा सामग्री डाल सकते हैं। स्वयंसेवकों की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि जल प्रदूषण न हो और पूजा पारंपरिक तरीके से संपन्न हो।</p>
<p>आयुक्त ने बैठक में स्पष्ट किया कि इस वर्ष शहर में गणेशोत्सव और नवरात्रोत्सव की तरह ही छठ पूजा भी पर्यावरण अनुरूप और अनुशासित तरीके से मनाई जाएगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि दोनों विधायकों के सुझाए गए मार्गदर्शन पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। शहरवासियों और श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे इस वर्ष छठ पूजा में पर्यावरण की सुरक्षा और मनपा के निर्देशों का पालन करते हुए उत्सव में हिस्सा लें। इधर, परंपरागत, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुरूप छठ पूजा की अनुमति मिलने पर समस्त उत्तर भारतीय समुदाय ने दोनों विधायकों का आभार व्यक्त किया है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 25 Oct 2025 17:55:16 +0530</pubDate>
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