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                <title>मुंबई : देवदूत बने RPF जवान ने 22 वर्षीय युवक की बचाई जान, लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन पर टला बड़ा हादसा</title>
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                        <![CDATA[<p>लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल की सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया. रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने ‘ऑपरेशन यात्री सुरक्षा’ के तहत ड्यूटी के दौरान अद्भुत साहस और तत्परता का परिचय देते हुए एक 22 वर्षीय युवक की जान बचा ली. युवक अचानक पटरी और प्लेटफॉर्म के बीच गिर गया था, जिससे उसकी जान खतरे में पड़ गई थी. बिना समय गंवाए RPF जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया.</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47773/rpf-jawan-becomes-mumbai-angel-saves-life-of-22-year"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-16t180727.558.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल की सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया. रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने ‘ऑपरेशन यात्री सुरक्षा’ के तहत ड्यूटी के दौरान अद्भुत साहस और तत्परता का परिचय देते हुए एक 22 वर्षीय युवक की जान बचा ली. युवक अचानक पटरी और प्लेटफॉर्म के बीच गिर गया था, जिससे उसकी जान खतरे में पड़ गई थी. बिना समय गंवाए RPF जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. इस साहसिक कार्रवाई के बाद स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने राहत की सांस ली और जवानों की बहादुरी की जमकर सराहना की. </p>
<p> </p>
<p><strong>प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच जा गिरा युवक</strong><br />जानकारी के अनुसार, घटना उस समय की है जब ट्रेन संख्या 12546 रक्सौल एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म नंबर 01 पर प्लेस हो रही थी. दोपहर लगभग 03:38 बजे, बिहार के मधुबनी जिले का निवासी कुंदन कुमार (22) चलती ट्रेन के गेट पर चढ़ने का प्रयास कर रहा था. इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच बने खतरनाक गैप (Gap) में जा गिरा. </p>
<p><strong>जवानों की सूझबूझ से बची युवक की जान</strong><br />साथ ही, मौके पर तैनात उप निरीक्षक आरपी वंजारी और प्रधान आरक्षक सचिन साबने ने जैसे ही यात्री को गिरते देखा. उन्होंने बिना एक पल गंवाए फुर्ती दिखाई और उसे खींचकर बाहर निकाला. जवानों की इस सूझबूझ और तत्परता की वजह से युवक की जान बच गई. वरना वह ट्रेन के पहियों के नीचे आ सकता था. हादसे के बाद युवक काफी घबरा गया था. RPF स्टाफ उसे तुरंत थाने लेकर गया, जहां उसे प्राथमिक उपचार दिया गया. गनीमत रही कि उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई थी. यात्री ने अपनी जान बचाने के लिए RPF के जवानों का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया. जरूरी जांच और आराम के बाद जवानों ने युवक को सुरक्षित रूप से दोबारा रक्सौल एक्सप्रेस में बैठाकर उसके गंतव्य के लिए रवाना किया. RPF के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त और सहायक सुरक्षा आयुक्त दादर के मार्गदर्शन में किए गए इस साहसी कार्य की विभाग में काफी सराहना हो रही है. रेलवे प्रशासन ने एक बार फिर यात्रियों से अपील की है कि वे चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने का जोखिम न उठाएं.</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 13:17:55 +0530</pubDate>
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                <title>नंदुरबार: दुख के आंसू खुशी में बदल गए; डॉक्टर बन गए देवदूत</title>
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                        <![CDATA[<p>कहा जाता है कि जिस व्यक्ति के जीवन की डोर मजबूत होती है, उसे किसी भी तरह से बचाया जा सकता है। महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के धडगांव तालुका के सूर्यपुर में एक ऐसी ही घटना घटी है। तालुका के तेलखेड़ी की रहने वाली एक महिला अपने दो महीने के बच्चे के साथ होली मनाने सूर्यपुर आई थी। तभी दो महीने का बच्चा उल्टी और अत्यधिक रोने के कारण बेहोश हो गया।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/38948/nandurbar--tears-of-sorrow-turned-into-happiness--doctor-became-an-angel"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-03/bbb-copyfd.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नंदुरबार: </strong>कहा जाता है कि जिस व्यक्ति के जीवन की डोर मजबूत होती है, उसे किसी भी तरह से बचाया जा सकता है। महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के धडगांव तालुका के सूर्यपुर में एक ऐसी ही घटना घटी है। तालुका के तेलखेड़ी की रहने वाली एक महिला अपने दो महीने के बच्चे के साथ होली मनाने सूर्यपुर आई थी। तभी दो महीने का बच्चा उल्टी और अत्यधिक रोने के कारण बेहोश हो गया। परिवार के सदस्यों को यह सोचकर घबराहट होने लगी कि बच्चा मर गया है। इस तरह पास के स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों को इसकी जानकारी मिली। उन्होंने एक एंबुलेंस भेजी। एक डॉक्टर ने रास्ते में एंबुलेंस रोकी और बच्चे की जांच की। उन्होंने हल्के से पैर में कुछ थपथपाया और बच्चे की सांस चलने लगी। बच्चा मौत के मुंह से वापस आ गया। इससे दुख के आंसू खुशी में बदल गए। <br />क्या है मामला?</p>
<p>धडगांव तालुका के तेलखेड़ी में रहने वाली मीनाबाई सचिन पवार होली के लिए अपने मायके सूर्यपुर गई हुई थी। उस समय उनका बच्चा बिल्कुल भी हरकत नहीं कर रहा था, इसलिए परिवार में हड़कंप मच गया। हालांकि, जब परिवार के रिश्तेदारों ने डॉ गणेश तड़वी को बुलाया, तो उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए बच्चे के पैर में सुई चुभोई। बच्चे ने सांस लेना और हिलना-डुलना शुरू कर दिया, तो डॉक्टर परिवार के लिए देवदूत बन गए।</p>
<p>पवार परिवार के पास आए डॉक्टर गणेश तड़वी ने बताया कि उल्टी के कारण बच्चे को पानी की कमी हो गई थी, इसलिए ज्यादा रोने के कारण बच्चे की सांसें थम गई थी। हालांकि, रिश्तेदारों के कहने पर मैं पहुंचा और स्थिति को देखते हुए परिवार को बताया कि बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ेगा। परिवार बच्चे को अपने गांव ले जाने के लिए कह रहा था। इसलिए, मैंने वहीं इलाज शुरू किया और पैर पर दबाव डाला। उसके बाद बच्चे ने सांस लेना और हिलना शुरू कर दिया। बच्चे को जीवन मिलने के बाद परिवार ने डॉक्टरों की प्रशंसा की। उसके बाद डॉक्टरों ने बच्चे को एक दिन के लिए सूर्यफूल स्वास्थ्य केंद्र में रखा। उसके बाद उसे आगे के इलाज के लिए शहादा भेज दिया गया और बच्चा अब ठीक है।</p>]]>
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                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Mar 2025 14:28:33 +0530</pubDate>
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