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                <title>CBI - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>CBI RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस: अबू सलेम ने TADA कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, ₹16.51 लाख जुर्माने पर मांगी स्पष्टता</title>
                                    <description><![CDATA[<p>1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी अबू सलेम ने ₹16.51 लाख के जुर्माने को लेकर स्पष्टता की मांग करते हुए TADA कोर्ट का रुख किया है। अदालत ने इस मामले में CBI से जवाब मांगा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50715/abu-salem-tada-court-fine-clarity"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/untitled-design-36.jpg" alt=""></a><br /><h1><strong style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">मुंबई:</strong><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;"> 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर </span><strong style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">अबू सलेम</strong><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;"> ने एक बार फिर विशेष TADA कोर्ट का रुख किया है। इस बार उसने अदालत से अपने ऊपर लगाए गए </span><strong style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">₹16.51 लाख के जुर्माने</strong><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;"> को लेकर स्पष्टता देने की मांग की है। अदालत ने इस याचिका पर </span><strong style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">CBI को जवाब दाखिल करने का निर्देश</strong><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;"> दिया है।</span></h1>
<p>याचिका में अबू सलेम ने कहा है कि जुर्माने की राशि, उसके भुगतान और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसी कारण उसने विशेष TADA कोर्ट से निर्देश जारी करने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई में CBI अपना पक्ष रखेगी।</p>
<p>अबू सलेम 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराया जा चुका है और फिलहाल जेल में सजा काट रहा है। इससे पहले भी वह अपनी रिहाई की तारीख, सजा की अवधि और पैरोल से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर अदालत का दरवाज़ा खटखटा चुका है। हाल के महीनों में उसकी समयपूर्व रिहाई और पैरोल संबंधी कई याचिकाएं अदालतों द्वारा खारिज की जा चुकी हैं।</p>
<p>अब इस नए आवेदन पर सभी की नजरें हैं कि विशेष TADA कोर्ट और CBI इस जुर्माने को लेकर क्या रुख अपनाते हैं। अदालत में CBI के जवाब के बाद मामले की आगे की सुनवाई होगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 16:40:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : RHFL बैंक धोखाधड़ी मामला: CBI ने पहली चार्जशीट दाखिल की, चार आरोपी नामजद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को मुंबई में सीबीआई मामलों के स्पेशल जज के सामने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की। ​​यह चार्जशीट चार आरोपियों के खिलाफ दाखिल की गई है। इनमें रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल), आरएचएफएल के दो पूर्व सीनियर एग्जीक्यूटिव रवींद्र सुधालकर (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीईओ) और कृष्णन गोपालकृष्णन अय्यर (चीफ रिस्क ऑफिसर) और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व सीनियर एग्जीक्यूटिव धनंजय भगवानप्रसाद तिवारी (चीफ क्रेडिट और रिस्क ऑफिसर) शामिल हैं। इन पर पब्लिक सेक्टर के बैंकों को भारी नुकसान पहुंचाने के इरादे से आपराधिक साजिश रचने और धोखाधड़ी करने का आरोप है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50652/mumbai-rhfl-bank-fraud-case-cbi-files-first-charge-sheet"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-10t140514.042.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong> केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को मुंबई में सीबीआई मामलों के स्पेशल जज के सामने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की। ​​यह चार्जशीट चार आरोपियों के खिलाफ दाखिल की गई है। इनमें रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल), आरएचएफएल के दो पूर्व सीनियर एग्जीक्यूटिव रवींद्र सुधालकर (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीईओ) और कृष्णन गोपालकृष्णन अय्यर (चीफ रिस्क ऑफिसर) और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व सीनियर एग्जीक्यूटिव धनंजय भगवानप्रसाद तिवारी (चीफ क्रेडिट और रिस्क ऑफिसर) शामिल हैं। इन पर पब्लिक सेक्टर के बैंकों को भारी नुकसान पहुंचाने के इरादे से आपराधिक साजिश रचने और धोखाधड़ी करने का आरोप है।</p>
<p> </p>
<p>दाखिल की गई चार्जशीट सीबीआई की जांच पर आधारित है। जांच से पता चला है कि रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड द्वारा लिए गए फंड को बिचौलियों और जरिया बनी कंपनियों के माध्यम से रिलायंस एडीए ग्रुप की विभिन्न कंपनियों में डायवर्ट किया गया। ऐसा करके कर्ज से जुड़ी शर्तों और नियमों का उल्लंघन किया गया, जिससे कर्ज देने वाले बैंकों को गलत तरीके से नुकसान हुआ और आरोपियों व संबंधित कंपनियों को गलत तरीके से फायदा हुआ। दरअसल, सीबीआई ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और कंसोर्टियम के अन्य पीएसयू बैंकों से मिली शिकायतों के आधार पर यह मामला दर्ज किया था। कंसोर्टियम के 10 पब्लिक सेक्टर बैंकों को कुल 3526.35 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।</p>
<p>पब्लिक सेक्टर के बैंकों को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाने में शामिल अन्य डायरेक्टरों, कंपनियों और सरकारी अधिकारियों की भूमिका का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी रखी गई है। उम्मीद है कि समय के साथ सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की जाएंगी। सीबीआई ने इस मामले में अब तक दो आरोपी आरएचएफएल के पूर्व सीईओ रवींद्र सुधालकर और पूर्व डायरेक्टर अमित बापना को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं।</p>
<p>बता दें कि सीबीआई ने विभिन्न पब्लिक सेक्टर बैंकों और एलआईसी से मिली शिकायतों के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल) के खिलाफ सात एफआईआर दर्ज की हैं। बीआई ने पहले आरकॉम मामले में 29 मई को 16 आरोपियों के खिलाफ अपनी पहली चार्जशीट और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) मामले में 7 जुलाई को 7 आरोपियों के खिलाफ दूसरी चार्जशीट दाखिल की थी। यह चार्जशीट रिलायंस एडीए ग्रुप के मामलों में दाखिल की गई तीसरी चार्जशीट है। इन मामलों की जांच चल रही है और सुप्रीम कोर्ट इसकी निगरानी कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 14:05:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : सीबीआई कोर्ट का फैसला, बैंक धोखाधड़ी मामले में आरोपियों को जेल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन ने बताया कि पुणे की एक स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में प्राइवेट कंपनियों के दो मालिकों को तीन साल की कड़ी सज़ा सुनाई है। इस मामले में स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद (जो अब दूसरे बैंक में मिल गया है) को 5.5 करोड़ रुपये से ज़्यादा का गलत तरीके से नुकसान हुआ था।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50610/mumbai-cbi-courts-decision-to-jail-the-accused-in-bank"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-08t125549.225.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन ने बताया कि पुणे की एक स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में प्राइवेट कंपनियों के दो मालिकों को तीन साल की कड़ी सज़ा सुनाई है। इस मामले में स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद (जो अब दूसरे बैंक में मिल गया है) को 5.5 करोड़ रुपये से ज़्यादा का गलत तरीके से नुकसान हुआ था। सीबीआई की प्रेस रिलीज़ के अनुसार, कोर्ट ने इस मामले में एम/एस चंद्रकांत एस. लोढ़ा एंड कंपनी के मालिक चंद्रकांत लोढ़ा और एम/एस  ठक्कर एंड संस के मालिक परेश ठक्कर को दोषी ठहराया।</p>
<p> </p>
<p>सीबीआई ने स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद की शिकायत के आधार पर 9 अक्टूबर, 2001 को यह मामला दर्ज किया था। यह मामला स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर बी.आर. दगड़े, तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर वी.एल. काले, चंद्रकांत लोढ़ा और परेश ठक्कर के खिलाफ़ दर्ज किया गया था।आरोप था कि आरोपियों ने बैंक को धोखा देने के मकसद से ज़्यादा कीमत वाले चेक जमा किए, जिन्हें बैंक अधिकारियों ने उनके क्लियर होने का इंतज़ार किए बिना ही मंज़ूरी दे दी।जांच में पता चला कि आपराधिक साज़िश के तहत, आरोपी चंद्रकांत लोढ़ा (जो एम/एस  चंद्रकांत एस. लोढ़ा एंड कंपनी के मालिक थे) ने 6.75 करोड़ रुपये कीमत के 18 'अकोमोडेटिव चेक' (बिना वास्तविक लेन-देन के जारी किए गए चेक) जमा किए। ये चेक आरोपी परेश ठक्कर ने नासिक पीपल्स कोऑपरेटिव बैंक में अपने मालिकाना हक वाले खाते से जारी किए थे और बैंक अधिकारियों ने इन्हें पास कर दिया था।</p>
<p>इसके बाद, विनोद काले ने बी.आर. दगड़े की मंज़ूरी से चंद्रकांत लोढ़ा को उनके करंट अकाउंट से ज़्यादा कीमत वाले चेक जारी करने की इजाज़त दी, जबकि उन चेक का नतीजा (क्लियरेंस) अभी पता भी नहीं चला था। इस तरह, चंद्रकांत लोढ़ा ने अपने और अपनी सहयोगी कंपनियों (जैसे एम/एस  ए.सी. एंटरप्राइजेज़, एम/एस  अक्षय ट्रेडर्स) के नाम से चेक जारी किए और इस वजह से बैंक को 5.58 करोड़ रुपये का गलत तरीके से नुकसान पहुँचाया।जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 28 अगस्त, 2003 को बी.आर. दगड़े और अन्य के खिलाफ़ चार्जशीट दाखिल की।</p>
<p>डागडे (तत्कालीन ब्रांच मैनेजर), वी.एल. काले (तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर), चंद्रकांत लोढ़ा और परेश ठक्कर।महाराष्ट्र राज्य में सीबीआई अदालतों के अधिकार क्षेत्र के पुनर्गठन के कारण, 2025 में इस मामले को नासिक से पुणे कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।ट्रायल के बाद, कोर्ट ने आरोपियों और दो प्राइवेट व्यक्तियों को दोषी ठहराया और सज़ा सुनाई। स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर बी.आर. डागडे और तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर वी.एल. काले को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 12:56:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>NEET UG 2026 पेपर लीक केस में CBI की बड़ी कार्रवाई, कथित मास्टरमाइंड PV कुलकर्णी पुणे से गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI ने कथित मास्टरमाइंड PV कुलकर्णी को पुणे से गिरफ्तार किया। अब तक 7 आरोपी गिरफ्तार।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49860/neet-ug-2026-paper-leak-pv-kulkarni-arrested-cbi"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/screenshot_2026-05-15-19-38-28-513_com.android.chrome-edit.jpg" alt=""></a><br /><p>देशभर में चर्चा का विषय बने NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में Central Bureau of Investigation ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित मास्टरमाइंड PV कुलकर्णी को पुणे से गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में अब तक कुल 7 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।</p>
<p><br />रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसी को लंबे समय से PV कुलकर्णी की तलाश थी। आरोप है कि उसने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक कराने और नेटवर्क के जरिए छात्रों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। CBI ने तकनीकी जांच, कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई।</p>
<p><br />जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी पुणे में छिपकर रह रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद CBI टीम ने छापेमारी कर उसे हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। इस मामले में पहले भी कई राज्यों से गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। एजेंसियों का दावा है कि पेपर लीक नेटवर्क देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय था और इसमें एजेंट, कोचिंग से जुड़े लोग तथा तकनीकी सहयोगी शामिल हो सकते हैं।</p>
<p><br />CBI अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रश्नपत्र लीक कैसे हुआ और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े थे। जांच एजेंसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल चैट्स की भी जांच कर रही है।</p>
<p><br />NEET UG 2026 परीक्षा को लेकर देशभर में विवाद बढ़ने के बाद कई छात्र संगठनों और अभिभावकों ने निष्पक्ष जांच की मांग की थी। पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर भी सवाल उठे हैं।<br />फिलहाल CBI मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 19:39:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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