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                <title>Coal - Rokthok Lekhani</title>
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                <description>Coal RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नई दिल्ली : बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन और चोरी की चल रही जांच के संबंध में 159.51 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुख्यालय कार्यालय ने पूर्वी कोयला क्षेत्र लिमिटेड (ईसीएल) के पट्टे वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन और चोरी की चल रही जांच के संबंध में 159.51 करोड़ रुपये की संपत्ति, अस्थायी रूप से जब्त कर ली है। जांच में सामने आया है कि पश्चिम बंगाल का 'लाला', जो अवैध माइनिंग के धंधे में लिप्त था, उसके नकली 'पैड' की खूब तूती बोलती थी। पुलिस व आरटीओ, 'लाला' के पैड को देखकर अवैध माइनिंग के ट्रकों को ग्रीन सिग्नल दे देते थे। सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 'लाला' का गिरोह, पश्चिम बंगाल की कई फैक्ट्रियों में कोयले की आपूर्ति करता था। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49237/new-delhi-assets-worth-rs-15951-crore-seized-in-connection"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-15t170759.147.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुख्यालय कार्यालय ने पूर्वी कोयला क्षेत्र लिमिटेड (ईसीएल) के पट्टे वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन और चोरी की चल रही जांच के संबंध में 159.51 करोड़ रुपये की संपत्ति, अस्थायी रूप से जब्त कर ली है। जांच में सामने आया है कि पश्चिम बंगाल का 'लाला', जो अवैध माइनिंग के धंधे में लिप्त था, उसके नकली 'पैड' की खूब तूती बोलती थी। पुलिस व आरटीओ, 'लाला' के पैड को देखकर अवैध माइनिंग के ट्रकों को ग्रीन सिग्नल दे देते थे। सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 'लाला' का गिरोह, पश्चिम बंगाल की कई फैक्ट्रियों में कोयले की आपूर्ति करता था। </p>
<p> </p>
<p><strong>जब्त संपत्ति में कॉर्पोरेट बॉन्ड व निवेश फंड ... </strong><br />ईडी की जांच में पता चला है कि अवैध खनन कार्य अनुप मजी उर्फ 'लाला' के नेतृत्व वाले एक गिरोह द्वारा किया जा रहा था। उसे पश्चिम बंगाल की कुछ लाभार्थी कंपनियों के लिए अवैध रूप से निकाले गए कोयले को नकद में खरीदने का दोषी पाया गया। इससे 'अपराध की आय' को वैध दिखाने और उसे छिपाने में मदद मिली। जब्त की गई संपत्तियों में चल वित्तीय साधनों में निवेश शामिल है, जैसे कि कॉर्पोरेट बॉन्ड और वैकल्पिक निवेश फंड, जो लाभार्थी संस्थाओं के नाम पर हैं। इनमें श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड और श्याम फेरो अलॉयज लिमिटेड शामिल हैं, जो संजय अग्रवाल और बृज भूषण अग्रवाल द्वारा प्रबंधित और नियंत्रित श्याम समूह का हिस्सा हैं।</p>
<p><strong>यूं चलती थी 'लाला पैड' अवैध चालान प्रणाली ...  </strong><br />जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अवैध रूप से कोयले की खुदाई और बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी में लिप्त था। स्थानीय प्रशासनिक तत्वों की सक्रिय मिलीभगत से पश्चिम बंगाल की कई फैक्ट्रियों में कोयले की आपूर्ति होती थी। वह 'लाला पैड' नामक एक अवैध परिवहन चालान प्रणाली का उपयोग करता था। ये काल्पनिक संस्थाओं के नाम पर जारी किए गए फर्जी कर चालान होते थे। </p>
<p><strong>ट्रांसपोर्टर को थमाते थे 10-20 रुपये का नोट ...  </strong><br />फर्जी परिवहन चालान के साथ, ट्रांसपोर्टर को 10 या 20 रुपये का एक नोट दिया जाता था। ट्रांसपोर्टर अवैध कोयले से भरे ट्रक, डम्पर या टिपर की नंबर प्लेट के पास नोट को पकड़कर उसकी तस्वीर लेता था। उसके बाद वह तस्वीर कोयला गिरोह के संचालक को भेजी जाती थी। संचालक फिर उस तस्वीर को व्हाट्सएप के माध्यम से वाहन के मार्ग में स्थित संबंधित पुलिस अधिकारियों और अन्य सरकारी अधिकारियों को भेजता था। यह इसलिए किया जाता ताकि ट्रक को रोका न जाए। यदि रोका भी जाए तो उसे तुरंत छोड़ दिया जाए।</p>
<p><strong>भूमिगत हवाला नेटवर्क का उपयोग ... </strong><br />जांच में यह भी पता चला है कि अपराध से प्राप्त धन को नकद में स्थानांतरित करने के लिए एक भूमिगत हवाला नेटवर्क का उपयोग किया जा रहा था। इसके जरिए औपचारिक बैंकिंग चैनलों को दरकिनार किया जाता था। लेन-देन को विशिष्ट पहचानकर्ताओं, आमतौर पर प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच साझा किए गए करेंसी नोट के सीरियल नंबर, के माध्यम से प्रमाणित किया जाता था। नोट के मिलान के सत्यापन के बाद, बिना किसी औपचारिक दस्तावेजीकरण के नकद राशि सौंप दी जाती थी। इससे धन का निर्बाध और पता न चलने योग्य हस्तांतरण संभव हो जाता था।</p>
<p><strong>अभी तक 482.22 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच ... </strong><br />इस मामले में अभी तक कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 482.22 करोड़ रुपये हो गया है। इस अपराध में अवैध धन के स्रोत और स्वामित्व को छिपाने के लिए डिज़ाइन किए गए जटिल वित्तीय लेन-देन की कई परतें शामिल हैं। ईडी, अंतिम लाभार्थियों की पहचान करने, अपराध से प्राप्त अतिरिक्त धन का पता लगाने और मनी लॉन्ड्रिंग प्रक्रिया में शामिल सभी व्यक्तियों का पता लगाने के लिए इन परतों को व्यवस्थित रूप से उजागर करना जारी रखे हुए है। ईडी, आर्थिक अपराधों, विशेष रूप से अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है, जो सार्वजनिक संसाधनों और आर्थिक अखंडता को कमजोर करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 17:08:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने खदानों में कोयले की खोज में निजी कंपनियों को दी एंट्री</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्र सरकार ने खदानों में कोयले की खोज में निजी कंपनियों को एंट्री दे दी है। इस पहल का उद्देश्य कोयला खदानों के संचालन में तेजी लाना और उत्पादन को बढ़ाना है। यह जानकारी सरकार की ओर से शुक्रवार को दी गई। कोयला मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, "खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 4 की उप-धारा (1) के दूसरे प्रावधान के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारतीय गुणवत्ता परिषद-राष्ट्रीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रत्यायन बोर्ड द्वारा विधिवत मान्यता प्राप्त निजी संस्थाओं को 26 नवंबर 2025 को मान्यता प्राप्त पूर्वेक्षण एजेंसियों के रूप में अधिसूचित किया गया है।"</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45835/new-delhi-central-government-gave-entry-to-private-companies-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/download---2025-11-28t174429.677.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली: </strong>केंद्र सरकार ने खदानों में कोयले की खोज में निजी कंपनियों को एंट्री दे दी है। इस पहल का उद्देश्य कोयला खदानों के संचालन में तेजी लाना और उत्पादन को बढ़ाना है। यह जानकारी सरकार की ओर से शुक्रवार को दी गई। कोयला मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, "खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 4 की उप-धारा (1) के दूसरे प्रावधान के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारतीय गुणवत्ता परिषद-राष्ट्रीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रत्यायन बोर्ड द्वारा विधिवत मान्यता प्राप्त निजी संस्थाओं को 26 नवंबर 2025 को मान्यता प्राप्त पूर्वेक्षण एजेंसियों के रूप में अधिसूचित किया गया है।"</p>
<p> </p>
<p>सरकार ने कहा कि इससे कोयला और लिग्नाइट की खोज के लिए 18 और एजेंसियां जुड़ जाएंगी, जिससे कोयला ब्लॉक आवंटियों को कोयला और लिग्नाइट की खोज के लिए इन एजेंसियों को नियुक्त करने में अधिक विकल्प मिलेगा। कोयला खदान के संचालन के लिए भूगर्भीय रिपोर्ट का अन्वेषण और तैयारी एक शर्त है। इन अन्वेषण एजेंसियों के जुड़ने से लगभग 6 महीने का समय बचेगा, जो पहले एजेंसी द्वारा लाइसेंस प्राप्त करने में लगता था। अधिकृत संभावित एजेंसियों के समूह का विस्तार करके, सरकार निजी क्षेत्र के संसाधनों का उपयोग करके और अन्वेषण में दक्षता, प्रतिस्पर्धात्मकता और इनोवेशन को बढ़ावा देना चाहती है।</p>
<p>कोयला मंत्रालय के मुताबिक,इस कदम से अन्वेषण की गति में काफी तेजी आएगी और खनन को जल्दी बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे संसाधन विकास में तेजी आएगी और देश के लिए कोयला और लिग्नाइट की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। मंत्रालय ने बयान में आगे कहा, "भारत सरकार एक पारदर्शी, कुशल और भविष्य के लिए तैयार खनिज अन्वेषण ढांचे को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है जो राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और आर्थिक विकास को गति देगा।" </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Nov 2025 17:45:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>चंद्रपुर: सीटीपीएस में उपयोग किया जाने वाला कोयला घटिया किस्म का; 10 किलोमीटर तक प्रदूषण फैल रहा है </title>
                                    <description><![CDATA[<p>चंद्रपुर थर्मल पावर स्टेशन एशिया का सबसे बड़ा थर्मल पावर स्टेशन है। इस पावर स्टेशन के रोपवे प्लांट में भारी मात्रा में कोयला संग्रहित किया जाता है, जिसे रोपवे के माध्यम से सीटीपीएस तक भेजा जाता है। हालांकि, इस प्रक्रिया से क्षेत्र में बहुत अधिक धूल और प्रदूषण फैल रहा है। इसके कारण ऊर्जानगर और आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों को सांस संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/38865/chandrapur--coal-used-in-ctps-is-of-inferior-quality--spreading-pollution-up-to-10-km"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-03/dark-air-coming-out-of-cspts-is-visible-from-around-areas.-photo-credit_-devanand-sakharkar.webp" alt=""></a><br /><p><strong>चंद्रपुर: </strong>चंद्रपुर थर्मल पावर स्टेशन एशिया का सबसे बड़ा थर्मल पावर स्टेशन है। इस पावर स्टेशन के रोपवे प्लांट में भारी मात्रा में कोयला संग्रहित किया जाता है, जिसे रोपवे के माध्यम से सीटीपीएस तक भेजा जाता है। हालांकि, इस प्रक्रिया से क्षेत्र में बहुत अधिक धूल और प्रदूषण फैल रहा है। इसके कारण ऊर्जानगर और आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों को सांस संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विधायक सुधाकर अडबाले ने विधान परिषद में तारांकित प्रश्न के माध्यम से आरोप लगाया कि प्रशासन से कई बार शिकायत करने के बावजूद ठोस उपाय न किए जाने से प्रदूषण का मुद्दा गंभीर हो गया है। </p>
<p>विधान परिषद सदन में बोलते हुए विधायक सुधाकर अडबाले ने कहा कि सीटीपीएस में उपयोग किया जाने वाला कोयला घटिया किस्म का है, जिसके कारण इकाइयों से बड़ी मात्रा में राख और धूल हवा में फैलती है। इसके कारण 10 किलोमीटर तक प्रदूषण फैल रहा है और नागरिकों के घरों में भी राख जमा हो रही है। इसका सीधा असर नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, कई लोग सांस और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। </p>
<p><strong>सीटीपीएस ने इराई नदी में केमिकल मिला पानी छोड़ा</strong><br />कुछ दिनों पहले सीटीपीएस ने इराई नदी में केमिकल मिला पानी छोड़ा था, जिससे जल प्रदूषण हुआ। इसके परिणामस्वरूप चंद्रपुर शहर की जलापूर्ति बाधित हुई और हजारों नागरिकों को स्वच्छ पानी मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बार-बार हो रहे प्रदूषण को प्रशासन नजरअंदाज कर रहा है, जिसके कारण नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। </p>
<p>क्या सीटीपीएस के अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी जो घटिया कोयले का उपयोग कर अनियमितताएं कर प्रदूषण बढ़ा रहे हैं और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी जो इसका समर्थन कर रहे हैं? यह सवाल विधायक सुधाकर अडबाले ने उठाया था। </p>
<p><strong>प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में बनाई जाएगी समिति</strong><br />इस पर जवाब देते हुए पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा, हमें शिकायत मिली है और इसकी जांच के बाद प्रदूषण रोकने के लिए सुधार करने के आदेश दिए गए हैं। यूनिट नंबर 8 की मरम्मत करने के निर्देश दिए गए हैं और इलेक्ट्रोस्टेटिक प्रीसिपिटेटर की जांच की जाएगी। इसके अलावा यूनिट नंबर 9 बंद है। प्रशासन को संबंधित मरम्मत करने के बाद यूनिट शुरू करने के लिए कहा गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Mar 2025 11:06:58 +0530</pubDate>
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