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                <title>मुंबई : मुस्लिम समुदाय को दिए गए 5 प्रतिशत आरक्षण के आदेश को रद्द; एआईएमआईएम का तंज- रमजान का मिला तोहफा</title>
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                        <![CDATA[<p>महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में मुस्लिम समुदाय को दिए गए 5 प्रतिशत आरक्षण के आदेश को रद्द कर दिया है। ताजा आदेश के अनुसार, पूर्ववर्ती कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस   गठबंधन सरकार के कार्यकाल के दौरान शुरू की गई इस आरक्षण प्रक्रिया पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। राज्य सरकार ने इस संबंध में एक संशोधित शासन निर्णय  जारी किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि अब से मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण का कोई प्रावधान लागू नहीं रहेगा। फडणवीस सरकार के इस फैसले पर एआईएमआईएम  के प्रदेश अध्यक्ष इम्तियाज जलील  ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। </p>
<p> </p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47810/5-reservation-order-given-to-mumbai-muslim-community-cancelled-aimims"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/images---2026-02-18t114310.394.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में मुस्लिम समुदाय को दिए गए 5 प्रतिशत आरक्षण के आदेश को रद्द कर दिया है। ताजा आदेश के अनुसार, पूर्ववर्ती कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस   गठबंधन सरकार के कार्यकाल के दौरान शुरू की गई इस आरक्षण प्रक्रिया पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। राज्य सरकार ने इस संबंध में एक संशोधित शासन निर्णय  जारी किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि अब से मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण का कोई प्रावधान लागू नहीं रहेगा। फडणवीस सरकार के इस फैसले पर एआईएमआईएम  के प्रदेश अध्यक्ष इम्तियाज जलील  ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। </p>
<p> </p>
<p><strong>फडणवीस सरकार ने जारी किया नया जीआर</strong><br />महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग ने मंगलवार को एक सरकारी आदेश जारी कर शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी एवं अर्ध-सरकारी नौकरियों में मुस्लिम समुदाय को 5 फीसदी आरक्षण देने वाले अपने पूर्व के सरकारी आदेश को रद्द कर दिया है। आरक्षण रद्द होने के बाद अब राज्य में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में मुस्लिम समुदाय का 5 फीसदी का विशेष कोटा नहीं लागू होगा। इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय के लिए अब तक जारी रहने वाली जाति प्रमाणपत्र वितरण और जाति वैधता की पूरी प्रक्रिया पर भी तत्काल प्रभाव से ब्रेक लग गया है। </p>
<p>एआईएमआईएम नेता इम्तियाज जलील ने ‘एक्स’ पर लिखा, “महाराष्ट्र सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय को दिया गया 5 प्रतिशत आरक्षण रद्द कर दिया है और इस तरह से रमजान का तोहफा दिया है।“ उन्होंने कहा कि यह आरक्षण उस समय दिया गया था, जब हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि मुस्लिम समुदाय में शिक्षा छोड़ने की दर सबसे अधिक है। इसके बावजूद मुस्लिम समुदाय के लड़कों और लड़कियों से अपील है कि वे पढ़ाई बीच में न छोड़ें। पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया।” </p>
<p>गौरतलब हो कि फडणवीस सरकार द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि मुस्लिम समुदाय को 5 प्रतिशत आरक्षण देने का 23 दिसंबर 2014 का निर्णय प्रभावी नहीं होगा। दरअसल 2014 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद महाराष्ट्र की कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए मराठा और मुस्लिम आरक्षण पर बड़ा फैसला लिया था। तब सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में मराठा समुदाय को 16% और मुस्लिम समुदाय को 5% आरक्षण देने की घोषणा की गई थी। जिससे राज्य में कुल आरक्षण का कोटा 73% तक पहुंच गया था। तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नसीम खान ने मंत्रिमंडल की बैठक में मुस्लिम समुदाय को 5% आरक्षण देने का प्रस्ताव रखा था, जिसे सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई थी। हालांकि, कानूनी पेचीदगियों और सत्ता परिवर्तन के बाद यह निर्णय अधर में लटका हुआ था।</p>]]>
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                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 11:44:23 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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            <item>
                <title>मुंबई : लवासा में एक हिल स्टेशन बनाने के लिए अवैध रूप से परमिशन देने के मामले में सीबीआई जांच की मांग </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p><strong> </strong>बॉम्बे हाई कोर्ट ने एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार, उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले, और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के खिलाफ 1994 में पुणे जिले के लवासा में एक हिल स्टेशन बनाने के लिए कथित तौर पर अवैध रूप से परमिशन देने के मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। वकील और किसान नानासाहेब वसंतराव जाधव द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्राइवेट हिल स्टेशन प्रोजेक्ट को राज्य सरकार ने आसपास के गांवों पर इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पर ठीक से विचार किए बिना और नियमों का उल्लंघन करते हुए मंजूरी दी थी।</p>]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46267/demand-for-cbi-inquiry-into-the-case-of-illegal-permission"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/download---2025-12-17t123819.308.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बॉम्बे हाई कोर्ट ने एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार, उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले, और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के खिलाफ 1994 में पुणे जिले के लवासा में एक हिल स्टेशन बनाने के लिए कथित तौर पर अवैध रूप से परमिशन देने के मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। वकील और किसान नानासाहेब वसंतराव जाधव द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्राइवेट हिल स्टेशन प्रोजेक्ट को राज्य सरकार ने आसपास के गांवों पर इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पर ठीक से विचार किए बिना और नियमों का उल्लंघन करते हुए मंजूरी दी थी।</p>
<p> </p>
<p>सुनवाई के दौरान, जाधव ने कहा कि यह प्रोजेक्ट एक दशक से ज़्यादा समय से अटका हुआ है, जिसके दौरान प्रभावित इलाकों के किसानों की आजीविका छिन गई क्योंकि खेती की ज़मीन खेती के लायक नहीं रही। उन्होंने तर्क दिया कि किसानों को दिया गया मुआवज़ा अपर्याप्त था, जिससे कमज़ोर ज़मीन मालिकों के पास बहुत कम कानूनी रास्ता बचा था।</p>
<p>चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड की डिवीज़न बेंच ने कहा कि जाधव, एक वकील होने के नाते, अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त सबूत देने की उम्मीद थी, ताकि कोर्ट उनकी याचिका स्वीकार कर सके, लेकिन वह ऐसा करने में नाकाम रहे।जाधव ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र टेनेंसी एंड एग्रीकल्चरल लैंड्स एक्ट के तहत परमिशन में 2005 में संशोधन किया गया था, और प्रोजेक्ट को 2002 में खेती की ज़मीन खरीदने के लिए मंज़ूरी दी गई थी, जबकि उस समय हिल स्टेशन डेवलपमेंट के लिए कोई प्रावधान नहीं था। याचिका में यह भी कहा गया है कि विलय के बाद सुप्रिया सुले और उनके पति सदानंद सुले को लवासा में शेयर मिले, जबकि अजीत पवार ने सिंचाई मंत्री और महाराष्ट्र कृष्णा वैली डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन के तौर पर ऐसे लीज़ और परमिशन को मंज़ूरी दी जो कानूनी नियमों का उल्लंघन करते थे।</p>
<p>याचिकाकर्ता ने आगे दावा किया कि 2020 से पुणे शहर पुलिस, पुणे ग्रामीण पुलिस और पुलिस अधीक्षक के पास कई शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मुलशी तालुका के 18 गांवों में लगभग 5,000 एकड़ ज़मीन इस प्रोजेक्ट में शामिल थी। कोर्ट ने कहा कि जाधव ने 2018 में भी इसी तरह की याचिका दायर की थी, जिसे फरवरी 2022 में देरी के आधार पर खारिज कर दिया गया था, क्योंकि यह प्रोजेक्ट शुरू होने के लगभग एक दशक बाद दायर की गई थी।</p>
<p>2023 में सीबीआई जांच की मांग करते हुए दायर की गई एक नई जनहित याचिका में, जाधव ने कहा कि उन्होंने दिसंबर 2018 में पुणे पुलिस कमिश्नर के पास पवार और अन्य लोगों के खिलाफ जांच की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।</p>]]>
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                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 12:39:07 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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            <item>
                <title>नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने दो व्यक्तियों को जमानत देने के राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को कर दिया रद्द</title>
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                        <![CDATA[<p><strong> </strong>सुप्रीम कोर्ट ने अपनी एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि देश में सरकारी नौकरियों की चाह रखने वालों की संख्या उपलब्ध नौकरियों से कहीं अधिक है। कोर्ट ने सिविल भर्ती परीक्षा की 'पवित्रता से खिलवाड़' करने के आरोपी दो व्यक्तियों को जमानत देने के राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/38757/new-delhi--the-supreme-court-cancelled-the-rajasthan-high-court-s-order-granting-bail-to-two-persons"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-03/images---2025-03-08t195405.630.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>सुप्रीम कोर्ट ने अपनी एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि देश में सरकारी नौकरियों की चाह रखने वालों की संख्या उपलब्ध नौकरियों से कहीं अधिक है। कोर्ट ने सिविल भर्ती परीक्षा की 'पवित्रता से खिलवाड़' करने के आरोपी दो व्यक्तियों को जमानत देने के राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। इसने कहा कि इस कृत्य से संभवत: कई अन्य लोग भी प्रभावित हुए, जिन्होंने नौकरी पाने की उम्मीद में ईमानदारी से प्रयास किया था। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कहा कि इस तरह के कृत्य से लोक प्रशासन और कार्यपालिका में लोगों का विश्वास संभवत: कम होता है।</p>
<p><strong>अदालत ने की अहम टिप्पणी</strong><br />पीठ ने कहा, 'वास्तविकता यह है कि भारत में सरकारी नौकरियों की चाह रखने वालों की संख्या उपलब्ध नौकरियों से कहीं अधिक है। चाहे जो भी हो, प्रत्येक नौकरी जिसमें निर्धारित परीक्षा और/या साक्षात्कार प्रक्रिया के साथ स्पष्ट रूप से परिभाषित प्रवेश प्रक्रिया है, उसे केवल उसी के अनुसार भरा जाना चाहिए।'<br />पीठ ने यह भी कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण ईमानदारी लोगों में इस तथ्य के प्रति विश्वास पैदा करती है कि कतिपय पदों के वास्तविक हकदार ही ऐसे पदों पर नियुक्त किए गए हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार द्वारा प्रदेश के हाईकोर्ट के पिछले साल मई के आदेश को चुनौती देने वाली अपीलों पर अपना फैसला सुनाया।</p>
<p><strong>हाईकोर्ट ने दी थी जमानत</strong><br />हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और राजस्थान लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2022 के प्रविधानों के तहत कथित अपराधों के लिए दर्ज एफआईआर के संबंध में दो आरोपियों को जमानत दे दी थी।</p>
<p>एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने सहायक अभियंता सिविल (स्वायत्त शासन विभाग) प्रतियोगी परीक्षा-2022 की 'पवित्रता' के साथ खिलवाड़ किया था। एफआईआर में दावा किया गया है कि उनमें से एक अभ्यर्थी की जगह एक अन्य व्यक्ति कथित तौर पर डमी कैंडिडेट के रूप में परीक्षा में उपस्थित हुआ था।</p>
<p>इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि अटेंडेंस शीट के साथ छेड़छाड़ की गई थी और मूल प्रवेश पत्र पर किसी अन्य व्यक्ति की फोटो चिपका दी गई थी। सात मार्च को दिए गए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने उल्लेख किया कि दोनों आरोपियों ने पहले ट्रायल कोर्ट का रुख किया था, जिसने उनकी संबंधित जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था।</p>]]>
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                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 19:55:00 +0530</pubDate>
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