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                <title>smaller - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>इंदौर : चाय आधी, छोटे हुए समोसे और तवा रोटी गायब… गैस किल्लत में सिकुड़ा ‘स्वाद’ का शहर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कमर्शियल गैस टंकी की किल्लत का असर अब स्वाद पर नजर आने लगा है। खाने-पीने के लिए मशहूर इंदौर के मैन्यू कम हो चले हैं। कहीं ग्लास में चाय कम हो गई, समोसे-आलूबड़े के आकार छोटे कर दिए गए हैं तो कहीं दाम ज्यादा हो चुके हैं। वैकल्पिक डीजल भट्टी गैस के मुकाबले महंगी पड़ रही है। कई दुकानों और स्टॉल पर तो ताले डल गए हैं। दुकानदार आइटम भी कम बना रहे हैं। गैस के कारण स्वाद से लेकर आर्थिक तौर पर भी प्रभाव पड़ रहा है। हालात कब सामान्य होंगे इस बारे में जिम्मेदार कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48851/indore-tea-reduced-to-half-samosas-and-tawa-rotis-missing%E2%80%A6"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-31t133415.664.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>इंदौर : </strong>कमर्शियल गैस टंकी की किल्लत का असर अब स्वाद पर नजर आने लगा है। खाने-पीने के लिए मशहूर इंदौर के मैन्यू कम हो चले हैं। कहीं ग्लास में चाय कम हो गई, समोसे-आलूबड़े के आकार छोटे कर दिए गए हैं तो कहीं दाम ज्यादा हो चुके हैं। वैकल्पिक डीजल भट्टी गैस के मुकाबले महंगी पड़ रही है। कई दुकानों और स्टॉल पर तो ताले डल गए हैं। दुकानदार आइटम भी कम बना रहे हैं। गैस के कारण स्वाद से लेकर आर्थिक तौर पर भी प्रभाव पड़ रहा है। हालात कब सामान्य होंगे इस बारे में जिम्मेदार कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है। </p>
<p> </p>
<p><strong>कई रेस्टोरेंट, चाय-नाश्ते स्टॉल पर लगा ताला</strong><br />एमजी रोड प्रेस क्लब के पास स्थित एक रेस्टोरेंट करीब 15 दिन से बंद है। राजा प्रजापत ने बताया, गैस टंकी नहीं मिलने से रेस्टोरेंट बंद करना पड़ा। राजा का पाटनीपुरा में एक रेस्टोरेंट और है। कुछ दिन पहले तक यहां टंकी मिली, लेकिन अब बंद हो गई। यहां डीजल भट्टी से जैसे-तैसे काम किया जा रहा है। कृष्णपुरा छत्री पर पोहे, आलूबड़ा, जलेबी का स्टॉल लगाने वाले अनिल राजपाल ने भी अपना काम 15 दिन से बंद कर रखा है। अनिल का कहना है कि मेरे पास कमर्शियल गैस कनेक्शन है, उसके बाद भी टंकी नहीं मिल रही है। चंदननगर डी सेक्टर में सूरज ने अपनी चाय-नाश्ते की दुकान बंद कर रखी है।</p>
<p><strong>किसी ने बढ़ाए दाम तो किसी ने की चाय कम</strong><br />कमर्शियल गैस टंकी से सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे दुकानदार और चाय नाश्ते की दुकानें हो रहे हैं। सिरपुर के गणेश त्रिवेेदी ने बताया, हमने चाय, समोसा, कचोरी के रेट तो नहीं बढ़ाए हैं, लेकिन चाय की मात्रा कम कर दी है। समोसा-कचोरी को थोड़ा छोटा किया है। नृसिंह बाजार के एक दुकानदार ने समोसा, कचोरी और पोहा के दाम बढ़ा दिए हैं। </p>
<p><strong>वैकल्पिक ईंधन महंगा, कई आइटम बंद किए</strong><br />कोठारी मार्केट के कचोरी दुकानदार दीपक भोजावत ने बताया, उनकी दुकान पर कई तरह के नाश्ते के आइटम मिलते हैं। कचोरी के लिए डीजल भट्टी लगाई है जो गैस से महंगी पड़ रही है। हर दिन 1700 रुपए की दो टंकी से काम चल जाता था, अब डीजल भट्टी में 5 से 7 हजार रुपए तक रोज डीजल का खर्च आ रहा हैं। इस वजह से चाय, भजिए, खमण जैसे आइटम बंद कर दिए हैं। प्रकाश राठौर ने बताया, हम भट्टी, इंडक्शन, तंदूर का उपयोग कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 13:35:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : देश की बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां कर रही है अब छोटे शहरों का रुख </title>
                                    <description><![CDATA[<p>रियल एस्टेट खासकर मॉल मार्केट की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे पारंपरिक मेट्रो सिटीज से हटकर, देश की बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां अब छोटे शहरों का रुख कर रही है. प्रॉपर्ट कंसल्टेंट एनारॉक की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, फीनिक्स मिल्स, प्रेस्टीज एस्टेट्स और नेक्सस मॉल जैसे दिग्गज डेवलपर्स अब इंदौर, सूरत, चंडीगढ़, कोयंबटूर और भुवनेश्वर जैसे टियर 2 शहरों में आक्रमक तौर से विस्तार कर रहे हैं. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44788/mumbai-big-real-estate-companies-of-the-country-are-now"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-10/download---2025-10-19t121448.805.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> रियल एस्टेट खासकर मॉल मार्केट की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे पारंपरिक मेट्रो सिटीज से हटकर, देश की बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां अब छोटे शहरों का रुख कर रही है. प्रॉपर्ट कंसल्टेंट एनारॉक की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, फीनिक्स मिल्स, प्रेस्टीज एस्टेट्स और नेक्सस मॉल जैसे दिग्गज डेवलपर्स अब इंदौर, सूरत, चंडीगढ़, कोयंबटूर और भुवनेश्वर जैसे टियर 2 शहरों में आक्रमक तौर से विस्तार कर रहे हैं. </p>
<p> </p>
<p><strong>डेस्टिनेशन मॉल पर फोकस</strong><br />ताजा रिपोर्ट के मुताबिक यह बदलाव इन छोटे शहरों में बढ़ती इनकम और खर्च करने की क्षमता के कारण आ रहा है. कंपनियां इन शहरों में सिर्फ शॉपिंग सेंटर नहीं, बल्कि बड़े और भव्य डेस्टिनेशन मॉल बना रही है. रिपोर्ट के मुताबिक नए मॉल्स का औसत साइज 10 से 12 लाख वर्ग फुट तक है, जो इन्हें मेट्रो शहरों के बड़े मॉल्स के बराबर खड़ा करता है. रिपोर्ट में कहा है कि, इन नए मॉल्स में लगभग आधा हिस्सा मनोरंजन, फूड एंड बेवरेज और लाइफस्टाइल रिटेल को दिया जा रहा है. ऐसे में मॉल केवल खरीदारी की जगह नहीं, बल्कि लोगों के घूमने-फिरने और समय बिताने का केंद्र बनेंगे.</p>
<p><strong>कमर्शियल रियल एस्टेट में भी तेजी</strong><br />एक्सपर्ट के मुताबिक बड़े इंस्टीट्यूशन प्लेयर्स के आने से न केवल ऑर्गनाइज्ड रिटेल सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही इन शहरों के कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट में भी जबरदस्त तेजी आने की संभावना है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Oct 2025 12:18:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: 125 वर्ग मीटर से छोटे भूखंडों को 30 साल की अवधि के लिए लीजहोल्ड संपत्तियों में परिवर्तित करने की अनुमति</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बृहन्मुंबई नगर निगम ने अपनी खाली भूमि किरायेदारी नीति में संशोधन किया है, जिसके तहत अब 125 वर्ग मीटर से छोटे भूखंडों को 30 साल की अवधि के लिए लीजहोल्ड संपत्तियों में परिवर्तित करने की अनुमति दी गई है। यह परिवर्तन मार्च 2020 के संशोधन से एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जिसमें पट्टे को बड़े भूखंडों तक सीमित कर दिया गया था। अद्यतन नीति से इन भूमियों से BMC के राजस्व में वृद्धि होने और पट्टेदारों के लिए अधिक विकास के अवसर प्रदान करने की उम्मीद है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/38671/mumbai--plots-smaller-than-125-sq-m-allowed-to-be-converted-into-leasehold-properties-for-a-period-of-30-years"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-03/freehold-vs-leasehold-blog.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>बृहन्मुंबई नगर निगम ने अपनी खाली भूमि किरायेदारी नीति में संशोधन किया है, जिसके तहत अब 125 वर्ग मीटर से छोटे भूखंडों को 30 साल की अवधि के लिए लीजहोल्ड संपत्तियों में परिवर्तित करने की अनुमति दी गई है। यह परिवर्तन मार्च 2020 के संशोधन से एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जिसमें पट्टे को बड़े भूखंडों तक सीमित कर दिया गया था। अद्यतन नीति से इन भूमियों से BMC के राजस्व में वृद्धि होने और पट्टेदारों के लिए अधिक विकास के अवसर प्रदान करने की उम्मीद है।</p>
<p>वर्तमान में, मुंबई में 3,472 VLT भूखंड हैं, लेकिन नई नीति के तहत केवल 610 ही रूपांतरण के योग्य हैं, जिनका अनुमानित संभावित मूल्य ₹2,000 करोड़ से अधिक है। BMC का लक्ष्य एकमुश्त प्रीमियम के माध्यम से यह राजस्व उत्पन्न करना है, जैसा कि 4 फरवरी के अपने बजट दस्तावेज़ में उल्लेख किया गया है। </p>
<p>इन भूखंडों के किरायेदार वर्तमान में नाममात्र किराया देते हैं, जो ₹30 से ₹100 मासिक तक हो सकता है। नई नीति के तहत, बीएमसी भूमि के मूल्य के आधार पर प्रीमियम वसूलेगी, जो कि रेडी रेकनर दर को 1.33 के जोनल फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) से गुणा करके तय किया जाएगा। इन भूखंडों को लीजहोल्ड संपत्तियों में परिवर्तित करके, पट्टेदार पुनर्विकास के लिए भूमि की क्षमता को अधिकतम करने में सक्षम होंगे, जो कि बीएमसी की मंजूरी के अधीन है। बीएमसी इस रूपांतरण के लिए भूमि के मूल्य का 62.5% प्रीमियम वसूलने का इरादा रखती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Mar 2025 19:02:12 +0530</pubDate>
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