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                <title>Rao - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Rao RSS Feed</description>
                
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                <title>मुंबई : पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व कार्यकारी अधिकारी के वी ब्रह्माजी राव सात साल बाद बरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>विशेष अदालत मुंबई ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के पूर्व कार्यकारी अधिकारी के वी ब्रह्माजी राव को सात साल बाद बरी कर दिया है। उन पर भगोड़े आभूषण व्यवसायी नीरव मोदी से जुड़े 23,000 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में पहली बार आरोप लगाया गया था। विशेष अदालत ने इस मामले में सीबीआई की चुन-चुनकर काम करने की नीति पर सवाल उठाए। इस मामले में व्यक्तियों और कंपनियों समेत 25 आरोपी हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43776/mumbai--former-punjab-national-bank-executive-kv-brahmaji-rao-acquitted-after-seven-years"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/download---2025-09-10t124238.661.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> विशेष अदालत मुंबई ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के पूर्व कार्यकारी अधिकारी के वी ब्रह्माजी राव को सात साल बाद बरी कर दिया है। उन पर भगोड़े आभूषण व्यवसायी नीरव मोदी से जुड़े 23,000 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले में पहली बार आरोप लगाया गया था। विशेष अदालत ने इस मामले में सीबीआई की चुन-चुनकर काम करने की नीति पर सवाल उठाए। इस मामले में व्यक्तियों और कंपनियों समेत 25 आरोपी हैं। केवी ब्रह्मजी राव इस मामले से बरी होने वाले पहले शख्स हैं। विशेष सीबीआई न्यायाधीश ने कहा कि राव को अलग-थलग करके उन पर आपराधिक दायित्व का बोझ नहीं डाला जा सकता। विशेष न्यायाधीश ए वी गुजराती ने कहा कि यह ध्यान देने योग्य है कि अभियोजन पक्ष ने अधिकारियों के खिलाफ चुन-चुनकर काम किया था...। दस्तावेजों से पता चलता है कि अभियोजन पक्ष ने केवल कुछ लोगों को ही फंसाने का फैसला किया है, जबकि निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान स्तर पर खड़े अन्य लोगों को छोड़ दिया है।</p>
<p> </p>
<p><strong>कोर्ट ने क्या कहा</strong><br />न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी तरह से यह नहीं कहा जा सकता कि राव ने कोई आर्थिक लाभ प्राप्त किया या जनहित की रक्षा के उपायों की अवहेलना की। जज ने कहा, कि केवल पीएनबी का कार्यकारी निदेशक होना, यह तथ्य कि आरबीआई के निर्देशों के कार्यान्वयन में आयकर विभाग के एकतरफा फैसले और एमडी- सीईओ के विधिवत अनुमोदन के कारण देरी हुई, बिना किसी अन्य आरोप के, साजिश और धोखाधड़ी का अपराध नहीं बनता। इसलिए, इस अदालत का मानना है कि आरोपपत्र में उल्लिखित किसी भी प्रावधान के तहत आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता। </p>
<p><strong>पहले नहीं थे आरोप</strong><br />न्यायाधीश ने कहा कि आरबीआई ने 2018 में नई दिल्ली की एक मजिस्ट्रेट अदालत में की गई अपनी शिकायत में राव को शामिल नहीं किया गया था। पीएनबी के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों- पूर्व एमडी एवं सीईओ उषा अनंतसुब्रमण्यम, कार्यकारी निदेशक संजीव शरण और अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग प्रभाग के महाप्रबंधक नेहल अहद - को आरोपी बनाया गया था। तीनों को सीबीआई मामले में भी आरोपी बनाया गया है। </p>
<p><strong>'हर शाखा पर नजर रखना संभव नहीं'</strong><br />न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी (राव) उस शाखा में सीधे तौर पर काम नहीं कर रहा था, जहां बैंक के कर्मचारियों ने धोखाधड़ी की। वह पर्यवेक्षक के रूप में काम कर रहा था। 7,000 से ज़्यादा शाखाएं उसके नियंत्रण में थीं। इन परिस्थितियों में, हर शाखा में हो रहे लेन-देन पर नज़र रखना मानवीय रूप से असंभव है। राव के खिलाफ आरोप अस्पष्ट और सबूतों से समर्थित नहीं हैं और कार्यवाही जारी रखने की अनुमति देने से उन्हें अनुचित उत्पीड़न का सामना करना पड़ेगा, जो निष्पक्ष प्रक्रिया की संवैधानिक गारंटी के विपरीत है। </p>
<p><strong>साजिश में शामिल होने के सबूत नहीं</strong><br />आपराधिक षड्यंत्र में राव की भूमिका के आरोपों का खंडन करते हुए, न्यायाधीश ने कहा कि कुशासन या कानून-व्यवस्था का एक क्षणिक उल्लंघन, ठोस प्रयास और विचारों के मेल के स्पष्ट प्रमाण के बिना उच्चतम स्तर पर आपराधिक षड्यंत्र के बराबर नहीं है। धोखाधड़ी एक ही शाखा का एक स्थानीय मामला था, और बैंक की पदानुक्रमिक संरचना के कारण, दिल्ली में नीति-निर्माण की भूमिका में एक वरिष्ठ अधिकारी को ऐसे स्थानीय मामले की जानकारी तब तक नहीं होती जब तक कि इसे आगे नहीं बढ़ाया जाता। न्यायाधीश को इस बात का भी कोई सबूत नहीं मिला कि राव ने आंतरिक दिशानिर्देशों की अवहेलना की हो या अधीनस्थों पर बैंक की प्रक्रियाओं से विचलित होने का दबाव डाला हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/43776/mumbai--former-punjab-national-bank-executive-kv-brahmaji-rao-acquitted-after-seven-years</link>
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                <pubDate>Wed, 10 Sep 2025 12:43:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली :  सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व जज एल. नागेश्वर राव को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की चुनाव सुधार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व जज एल. नागेश्वर राव को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की चुनाव सुधार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति राव ने इस समिति की अध्यक्षता करने के लिए सहमति दी है। समिति एससीबीए की कार्यकारी समिति के चुनाव में उम्मीदवारों के लिए पात्रता मानदंडों का सुझाव भी देगी।</strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/38490/new-delhi--the-supreme-court-appointed-former-judge-l--nageswara-rao-as-the-chairman-of-the-election-reforms-committee-of-the-supreme-court-bar-association--scba"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-02/supreme-court-pro-tem-spea1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व जज एल. नागेश्वर राव को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की चुनाव सुधार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति राव ने इस समिति की अध्यक्षता करने के लिए सहमति दी है। समिति एससीबीए की कार्यकारी समिति के चुनाव में उम्मीदवारों के लिए पात्रता मानदंडों का सुझाव भी देगी। पीठ ने जारी आदेश में कहा, पूर्व में किए गए विचार-विमर्श और समय-समय पर जारी आदेशों के क्रम में इस अदालत के पूर्व जज न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव ने एससीबीए की कार्यकारी समिति  के चुनाव के लिए नियमों/दिशानिर्देशों/मानदंडों में सुधार के लिए समिति की अध्यक्षता करने पर विनम्रतापूर्व सहमति दी है। </p>
<p><strong>समिति में होंगे कभी चुनाव न लड़ने वाले अनुभवी वकील</strong><br />पीठ ने आगे कहा, प्रस्तावित सुधारों में चुनावों में भाग लेने के लिए पात्रता शर्तें तय हो सकती हैं। इस समिति में कुछ वरिष्ठ वकील/अनुभवी वकील (लॉय-ऑन-रिकॉर्ड और नॉन-लॉयर-ऑन-रिकॉर्ड दोनों श्रेणी से) होंगे, जिन्होंने कभी एससीबीए के पदाधिकारियों के रूप में चुनाव नहीं लड़ा है। उच्चतम न्यायालय ने बार के सदस्यों को दो हफ्ते के भीतर समिति के लिए नाम का सुझाव देने को भी कहा है। <br />सात अप्रैल को मामले में अगली सुनवाई<br />पीठ ने यह भी कहा, हम न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव को राव को पूरी स्वतंत्रता देते हैं कि वह इस सूची से नामों का चयन करें। यह समिति बार के सदस्यों या अन्य धारकों से सुझाव प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र होगी। इस मामले में अगली सुनवाई सात अप्रैल को होगी। सर्वोच्च न्यायालय ने पहले वरिष्ठ वकील विकास सिंह और कपिल सिब्बल से समिति के अध्यक्ष के बारे में सुझाव मांगे थे। शीर्ष कोर्ट ने मई 2024 में एससीबीए की कार्यकारी समिति में महिलाओं के लिए 33 फीसदी पदों को आरक्षित करने का भी आदेश दिया था।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 21:29:29 +0530</pubDate>
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