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                <title>Bombay High Court acquits Crime Branch police officer Kailas Ramdas Sangale in bribery case - Rokthok Lekhani</title>
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                <description>Bombay High Court acquits Crime Branch police officer Kailas Ramdas Sangale in bribery case RSS Feed</description>
                
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                <title>बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्राइम ब्रांच पुलिस अधिकारी कैलास रामदास सांगले को रिश्वतखोरी के मामले में बरी कर दिया</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:left;">बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई क्राइम ब्रांच पुलिस अधिकारी कैलास रामदास सांगले को रिश्वतखोरी के मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता सहायक पुलिस निरीक्षक के रूप में कार्यरत था। उस पर कार्रवाई से पहले मंजूरी आदेश पुलिस आयुक्त से लिया गया था, जो पुलिस महानिदेशक के पद से नीचे था। वह मंजूरी देने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं था। इसलिए अदालत ने सांगले के खिलाफ विशेष एसीबी न्यायालय के दो वर्ष की कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माना की सजा को रद्द कर दिया।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/38190/bombay-high-court-acquits-crime-branch-police-officer-kailas-ramdas-sangale-in-bribery-case"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-02/images---2025-02-15t102829.869.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई क्राइम ब्रांच पुलिस अधिकारी कैलास रामदास सांगले को रिश्वतखोरी के मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता सहायक पुलिस निरीक्षक के रूप में कार्यरत था। उस पर कार्रवाई से पहले मंजूरी आदेश पुलिस आयुक्त से लिया गया था, जो पुलिस महानिदेशक के पद से नीचे था। वह मंजूरी देने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं था। इसलिए अदालत ने सांगले के खिलाफ विशेष एसीबी न्यायालय के दो वर्ष की कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माना की सजा को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की एकलपीठ ने पुलिस निरीक्षक कैलास सांगले की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता और गवाह के साक्ष्य को एफआईआर के साथ पढ़ने से पता चलता है कि भौतिक विसंगतियां हैं।</p>
<p>आरोपी द्वारा उठाई गई प्रारंभिक मांग के बारे में उचित संदेह पैदा होता है। पुलिस अधिकारी के पास से केवल करेंसी नोटों की बरामदगी अपराध स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। एसीबी ने न तो मांग का सत्यापन किया है और न ही मांग की बातचीत रिकॉर्ड की है। पीठ ने याचिकाकर्ता को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1)(डी) के साथ 13(2) के अंतर्गत दंडनीय अपराधों से बरी किया जाता है। यह भी पढ़े -आजकल तो भिखारी भी एक रुपया नहीं लेता, हमने किसानों को एक रुपए में फसल बीमा दिया- कोकाटे</p>
<p>शिकायतकर्ता रिजवान खान का ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय है। वह ट्रक किराए पर लेकर सूरत से मुंबई सामान की ढुलाई करता है। 20 फरवरी 2014 को उसके चार ट्रकों को चुंगी चोरी और प्रतिबंधित गुटखा लाने के लिए येलो गेट पुलिस स्टेशन के अंतर्गत पकड़ा गए थे। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच में कार्यरत सहायक पुलिस निरीक्षक कैलास सांगले ने रिजवान को गिरफ्तार किया था।</p>
<p>आरोप है कि सांगले ने उसके ट्रक छोड़ने के लिए 2 लाख रुपए की रिश्वत की मांग की। उसने 1 लाख रूपए अपने दोस्त के जरिए दिए और 1 लाख रुपए जेल से छुटने के बाद देने का वादा किया। रिजवान जेल से छुटने के बाद रिश्वत की बकाया रकम देने के बजाय पुलिस अधिकारी सांगले के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में शिकायत करने का निश्चय किया। रिजवान की शिकायत पर एसीबी ने ट्रैप लगाकर रिश्वत लेते हुए पुलिस अधिकारी सांगले को गिरफ्तार किया था।<br /> </p>]]>
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                <pubDate>Sat, 15 Feb 2025 10:29:21 +0530</pubDate>
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