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                <title>New Delhi: Pollution levels have increased in most parts of the capital in winters as compared to earlier - Rokthok Lekhani</title>
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                <title>नई दिल्ली : सर्दियों में राजधानी के अधिकांश इलाकों में प्रदूषण का स्तर पहले की तुलना में बढ़ा </title>
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                        <![CDATA[<p>प्रदूषण की रोकथाम को लेकर आप सरकार के तमाम दावों के बावजूद इस बार सर्दियों में राजधानी के अधिकांश इलाकों में प्रदूषण का स्तर पहले की तुलना में बढ़ा रहा। साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) के अध्ययन के मुताबिक राजधानी के 37 में से 29 निगरानी केंद्रों पर 2023 के बनिस्पत 2024 में अक्टूबर से दिसंबर के बीच प्रदूषण बढ़ा रहा। सिर्फ आठ निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण के स्तर में पहले की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/38187/new-delhi--pollution-levels-have-increased-in-most-parts-of-the-capital-in-winters-as-compared-to-earlier"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-02/images---2025-02-14t191023.277.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली। </strong>प्रदूषण की रोकथाम को लेकर आप सरकार के तमाम दावों के बावजूद इस बार सर्दियों में राजधानी के अधिकांश इलाकों में प्रदूषण का स्तर पहले की तुलना में बढ़ा रहा। साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) के अध्ययन के मुताबिक राजधानी के 37 में से 29 निगरानी केंद्रों पर 2023 के बनिस्पत 2024 में अक्टूबर से दिसंबर के बीच प्रदूषण बढ़ा रहा। सिर्फ आठ निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण के स्तर में पहले की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी में हर साल ही सर्दियों के दिनों में प्रदूषण का स्तर सामान्य से ज्यादा रहता है। इसलिए खासतौर पर अक्टूबर लेकर से फरवरी तक प्रदूषण की रोकथाम के लिए तमाम कदम उठाए जाते हैं। इसमें पंजाब और हरियाणा के खेतों में पराली जलाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के साथ साथ दिल्ली में कूड़ा-कचरा जलाने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम तक शामिल है। हालांकि, इन तमाम उपायों का बहुत ज्यादा असर देखने नहीं मिल रहा है।</p>
<p><strong>पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी</strong><br />सीएसई की रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर से दिसंबर 2024 में पराली जलाने के मामलों में पिछले साल की तुलना में 71 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। लेकिन दिल्ली के विभिन्न इलाकों में प्रदूषण के स्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले तीन सालों में प्रदूषक कण पीएम 2.5 के स्तर के औसत के आधार पर तैयार रिपोर्ट के मुताबिक इस जाड़े में सीआरआरआई मथुरा रोड निगरानी केंद्र में पहले की तुलना में प्रदूषण के स्तर में 22 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। आयानगर में यह वृद्धि 17 प्रतिशत और अशोक विहार व विवेक विहार में 15-15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।<br />रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के 37 में से आठ निगरानी केंद्रों में प्रदूषण के स्तर में सुधार भी दर्ज किया गया है। सबसे ज्यादा सुधार डीटीयू स्थित निगरानी केंद्र में दर्ज किया गया है। यहां पर प्रदूषण के स्तर में 26 प्रतिशत का सुधार हुआ है। एनएसआइटी द्वारका में 22 प्रतिशत का सुधार हुआ है। जबकि, नार्थ कैंपस, ओखला फेस-2 और जहांगीर पुरी जैसे निगरानी केंद्रों में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है।</p>
<p><strong>प्रभावी उपायों पर दिया जाना चाहिए जोर</strong><br />दिल्ली में प्रदूषण की रोकथाम के लिए तात्कालिक उपायों के साथ ही दीर्घकालिक प्रभावी उपायों को लागू किए जाने की जरूरत पर विशेषज्ञ जोर देते हैं। सीएसई में कार्यकारी निदेशक (शोध व परामर्श) अनुमिता रायचौधरी कहती हैं, ऐसा लगता है कि वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए पहले उठाए गए कदमों से मिले फायदे भी दिल्ली खोती जा रही है। वाहनों और उद्यमों से होने वाले प्रदूषण, कूड़ा-कचरा जलाने, ठोस ईंधन का उपयोग करने, निर्माण स्थलों से उठने वाली धूल आदि को लेकर स्थानीय के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में ही प्रभावी उपाय किए जाने चाहिए।</p>]]>
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                <pubDate>Fri, 14 Feb 2025 19:10:51 +0530</pubDate>
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