<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.rokthoklekhani.com/tag/23153/educated" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Rokthok Lekhani News  RSS Feed Generator</generator>
                <title>educated - Rokthok Lekhani News </title>
                <link>https://www.rokthoklekhani.com/tag/23153/rss</link>
                <description>educated RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई: 'अगर हम पढ़े-लिखे होते तो ऑफिस में बैठते', मराठी नियम पर मुंबई के ऑटो ड्राइवरों की 3 दिन की हड़ताल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्सा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फैसले ने राज्यभर की सियासत में गर्माहट तेज कर दी है। इसी बीच मुंबई में राज्य सरकार के इस फैसले के विरोध में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों का एक वर्ग सड़क पर उतर आया है। इन चालकों ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार से तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे यात्रियों को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51539/mumbai-if-we-were-educated-we-would-have-sat-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/mumbai-autorickshaw-strike-244942980-3x4.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्सा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फैसले ने राज्यभर की सियासत में गर्माहट तेज कर दी है। इसी बीच मुंबई में राज्य सरकार के इस फैसले के विरोध में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों का एक वर्ग सड़क पर उतर आया है। इन चालकों ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार से तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे यात्रियों को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि चालकों का विरोध ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के लिए मराठी भाषा जानने के अनिवार्य नियम को लेकर है।</p>
<p> </p>
<p><strong>क्या कहना है कि गौर-मराठी भाषी चालकों का?</strong><br />सरकार के फैसले के विरोध में सड़क पर उतरे गैर-मराठी भाषी चालकों का कहना है कि इस नियम से उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ और भारी-भरकम जुर्माने का खतरा बढ़ गया है।</p>
<p><strong>मराठी सीखना मुश्किल- चालक</strong><br />हड़ताल में शामिल कई चालकों की उम्र 55 से 60 साल के बीच है। उनका कहना है कि वे कभी स्कूल नहीं गए, इसलिए उनके लिए अचानक मराठी बोलना और सीखना बहुत मुश्किल है।</p>
<p>मामले में मुंबई कंदिवली लिंक रोड पर सड़क जाम कर प्रदर्शन कर रहे एक ऑटो चालक ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि हम 55-60 साल के हैं। हम कभी स्कूल नहीं गए। हम मराठी कैसे बोल सकते हैं? अगर हम पढ़े-लिखे होते, तो किसी दफ्तर में बैठकर काम कर रहे होते।</p>
<p><strong>चालकों ने जुर्माना को लेकर उठाए सवाल</strong><br />इतना ही नहीं विरोध कर रहे चालकों का दावा है कि वे जैसे-तैसे टूटी-फूट मराठी सीखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सहूलियत या समय देने के बजाय अधिकारियों द्वारा दंडित किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि वे 15000 से 20000 रुपये तक का जुर्माना कैसे भर सकते हैं? चालकों का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक यह तीन दिन की हड़ताल जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/51539/mumbai-if-we-were-educated-we-would-have-sat-in</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/51539/mumbai-if-we-were-educated-we-would-have-sat-in</guid>
                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 11:35:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2026-08/mumbai-autorickshaw-strike-244942980-3x4.webp"                         length="72522"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : पढ़े लिखे वर्ग को देश के प्रति अपने लगाव और जिम्मेदारी की भावना फिर से जगानी चाहिए - चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जोहो के फाउंडर और चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने कहा कि भारत के पढ़े लिखे वर्ग को देश के प्रति अपने लगाव और जिम्मेदारी की भावना फिर से जगानी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सच्चे राष्ट्रवाद के रूप में अपनी स्थानीय भाषाओं और क्षेत्रीय पहचान को अपनाएं। उन्होंने कहा कि भारत का विकास सिर्फ आर्थिक प्रगति पर नहीं, बल्कि देशभक्ति की भावना पर भी निर्भर करता है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44662/mumbai-the-educated-class-should-rekindle-their-sense-of-attachment"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-10/download---2025-10-14t160123.426.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>जोहो के फाउंडर और चीफ साइंटिस्ट श्रीधर वेम्बू ने कहा कि भारत के पढ़े लिखे वर्ग को देश के प्रति अपने लगाव और जिम्मेदारी की भावना फिर से जगानी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सच्चे राष्ट्रवाद के रूप में अपनी स्थानीय भाषाओं और क्षेत्रीय पहचान को अपनाएं। उन्होंने कहा कि भारत का विकास सिर्फ आर्थिक प्रगति पर नहीं, बल्कि देशभक्ति की भावना पर भी निर्भर करता है। </p>
<p> </p>
<p>वेम्बू ने कहा, "हमें, खासकर हमारे शिक्षित वर्ग में, यह भावना पैदा करनी होगी कि हम इस देश के हैं। यह देशभक्ति की भावना जरूरी है। इस भावना के बिना विकास का कोई मतलब नहीं है।" उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि वैश्वीकरण के कारण कई शहर में रहने वाले भारतीय खुद को अपनी जड़ों से अलग होकर "वैश्विक नागरिक" के रूप में देखने लगे हैं। उन्होंने सांस्कृतिक और भाषाई गौरव को फिर से जिंदा करने की मांग की और लोगों से आग्रह किया कि वे राज्यों के बीच आते-जाते वक्त क्षेत्रीय भाषाएं सीखें और उनका इस्तेमाल करें।</p>
<p>उन्होंने कहा, "तमिलनाडु में, मैं जितना हो सके तमिल बोलता हूं। और मैं लोगों से कहता हूं, अगर आप बेंगलुरु जा रहे हैं, तो कन्नड़ सीखें। अगर आप मुंबई जा रहे हैं, तो मराठी सीखें। हमारी सभी भाषाएं महत्वपूर्ण हैं।" ग्रामीण और शहरी भारत के बीच तेज अंतर को उजागर करते हुए वेम्बू ने कहा कि भारत के गांवों और छोटे शहरों में अपनेपन की भावना मजबूत बनी हुई है, लेकिन शहर के एलीट क्लास में यह भावना गायब हो रही है। उन्होंने कहा, "अगर आप ग्रामीण भारत को देखें, अगर आप हमारे छोटे शहरों को देखें, तो आपको राष्ट्र के प्रति अपनेपन का एहसास होता है। दुर्भाग्य से, हमारे अति-शिक्षित अभिजात वर्ग में यह भावना लुप्त हो गई है। इस तरह के संपर्क के कारण, हम सोचते हैं, 'मैं एक वैश्विक नागरिक हूं। मैं कहीं भी रह लूंगा।' इस नजरिए को बदलना होगा।"</p>
<p>वेम्बू ने इस राष्ट्रवादी भावना को सीधे तौर पर जोहो की फिलॉसफी और विकास से जोड़ा। तमिलनाडु में हेडक्वार्टर वाली इस कंपनी ने ग्रामीण इलाकों में अपने दफ्तर और ट्रेनिंग सेंटर बनाए हैं, ताकि अवसरों को बड़े शहरों तक सीमित न रखकर लोकल टैलेंट को भी जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा, “जोहो इसलिए नहीं चल रही है क्योंकि मैं कोई जीनियस हूं, बल्कि इसलिए क्योंकि हमारे हर कर्मचारी में देशभक्ति की भावना है। उन्हें लगता है कि हमें अपने देश के लिए, अपने देश में कुछ बनाना है। यही भावना ही जोहो की असली ताकत है।”</p>
<p>उन्होंने जापान, कोरिया और चीन जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों ने इसलिए तेजी से विकास किया, क्योंकि उनमें राष्ट्रीय गर्व और आत्मनिर्भरता की भावना थी। उन्होंने आगे कहा, “अगर यह भावना न हो, तो विकास या ब्रेन ड्रेन जैसे मुद्दों पर बात करने का कोई मतलब नहीं रह जाता।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/44662/mumbai-the-educated-class-should-rekindle-their-sense-of-attachment</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/44662/mumbai-the-educated-class-should-rekindle-their-sense-of-attachment</guid>
                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 16:01:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2025-10/download---2025-10-14t160123.426.jpg"                         length="5147"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : राज्यभर से २३ हजार शिक्षित बेरोजगार डॉक्टरों ने आवेदन किए...  नौकरी केवल २८३ डॉक्टरों को ही मिली</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">रिक्त सरकारी पद के लिए हजारों की संख्या में युवा आवेदन करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसका उदाहरण कई बार देखा भी जा चुका है। कुछ इसी तरह की स्थिति स्वास्थ्य विभाग में ग्रुप ए के अंतर्गत चिकित्सा अधिकारी के रिक्त २८३ पदों की भर्ती प्रक्रिया में भी दिखाई दी। इस पद के लिए राज्यभर से २३ हजार शिक्षित बेरोजगार डॉक्टरों ने आवेदन किए थे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/34805/mumbai--23-thousand-educated-unemployed-doctors-applied-from-across-the-state-only-283-doctors-got-the-job"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-10/fgf.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई : </strong>रिक्त सरकारी पद के लिए हजारों की संख्या में युवा आवेदन करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसका उदाहरण कई बार देखा भी जा चुका है। कुछ इसी तरह की स्थिति स्वास्थ्य विभाग में ग्रुप ए के अंतर्गत चिकित्सा अधिकारी के रिक्त २८३ पदों की भर्ती प्रक्रिया में भी दिखाई दी। इस पद के लिए राज्यभर से २३ हजार शिक्षित बेरोजगार डॉक्टरों ने आवेदन किए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन नौकरी केवल २८३ डॉक्टरों को ही मिली है। फिलहाल सभी को ऑनलाइन नियुक्ति पत्र मुहैया करा दिया गया है। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में शिंदे-भाजपा सरकार में आम से लेकर खास हर कोई परेशान हो चुका है। राज्य सरकार की डोर दिल्ली के हाथ में होने से नौकरी के अवसर पैदा करनेवाली कई कंपनियां गुजरात समेत अन्य राज्यों में भेजी जा चुकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी के साथ ही कई कंपनियां इस सरकार की गलत नीतियों और सुविधाएं न दे सकने की वजह से बाहरी राज्यों में जाने की तैयारी कर रही हैं। इससे राज्य में लाखों बेरोजगारों के लिए सृजित होनेवाले रोजगार हमेशा के लिए खत्म हो रहे हैं। राज्य सरकार ने भी स्वास्थ्य विभाग समेत कई विभागों के कामकाजों को ठेके (कॉन्ट्रेक्ट) पर कराने का निर्णय लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के इस पैâसले ने सरकारी नौकरी की चाह रखनेवालों की रही-सही आस को भी समाप्त कर दिया है। ऐसे में अनुमान है कि इस पर उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो आनेवाले समय में राज्य में बेरोजगारी की स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी, जिस पर ध्यान देने की बजाय सरकार चुनाव और दिल्लीश्वरों की जी हूजूरी में मस्त है। इसी का नजीता है कि चिकित्साधिकारी के २८३ रिक्त पदों के लिए २२,९८१ बीएएमएस धारी डॉक्टरों ने आवेदन किए, लेकिन केवल २८३ को ही नौकरी मिली है।<br /><br />मुंबई में बेरोजगारी की ऐसी तस्वीर चार महीने पहले भी दिखाई दी थी, जब एयर इंडिया एयरपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड ने लोडर स्टाफ के ६०० पदों के लिए वॉक-इन इंटरव्यू रखा था। इसके लिए दूर-दूर से लोग आए थे। यहां नौकरी के लिए २५ हजार लोग पहुंच गए। </p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में हालात बेकाबू होता देख आवेदकों से सिर्फ रिज्यूम जमा करवाकर वापस चले जाने को कहा गया। इंटरव्यू वाली जगह पर उमड़ी उम्मीदवारों की भारी भीड़ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। बेरोजगारी की सबसे दयनीय स्थिति महाराष्ट्र पुलिस भर्ती प्रक्रिया के दौरान दिखाई दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">मार्च महीने में १७ हजार ४७१ कांस्टेबल की भर्ती का एलान किया था। पुलिस के भर्ती विभाग को १७ हजार ४७१ पदों के लिए १७ लाख ७६ हजार आवेदन प्राप्त हुए थे। उस समय औसतन एक पद के लिए १०१ दावेदार सामने आए थे। इनमें आश्चर्यजनक तौर पर इंजीनियर, डॉक्टर समेत उच्च शिक्षित युवा भी शामिल थे। इन्होंने इंजीनियर, डॉक्टर, बी-टेक और एमबीए की डिग्रियां ले रखी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/34805/mumbai--23-thousand-educated-unemployed-doctors-applied-from-across-the-state-only-283-doctors-got-the-job</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/34805/mumbai--23-thousand-educated-unemployed-doctors-applied-from-across-the-state-only-283-doctors-got-the-job</guid>
                <pubDate>Wed, 09 Oct 2024 14:38:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2024-10/fgf.jpg"                         length="18162"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        