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                <title>raised - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>raised RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : बीएमसी मुख्यालय में ‘हाथ की सफाई’: बीजेपी (यूबीटी) नगरसेविका के पर्स से 20,000 रुपए चोरी, सुरक्षा पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश की सबसे अमीर महानगरपालिका कही जाने वाली मुंबई महानगरपालिका का मुख्यालय, जो अपनी चाक-चौबंद सुरक्षा के लिए जाना जाता है, वहां से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। भारी सुरक्षा घेरे और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के बावजूद, मुख्यालय के भीतर ही 'हाथ की सफाई' का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। ताजा घटनाक्रम में, शिवसेना (यूबीटी) की नगरसेविका लक्ष्मी भाटिया चोरों का निशाना बनीं, जिनके पर्स से अज्ञात शातिर ने हजारों की नकदी पर हाथ साफ कर दिया।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49274/clean-sleight-of-hand-in-mumbai-bmc-headquarters-rs-20000"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-17t115021.939.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>देश की सबसे अमीर महानगरपालिका कही जाने वाली मुंबई महानगरपालिका का मुख्यालय, जो अपनी चाक-चौबंद सुरक्षा के लिए जाना जाता है, वहां से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। भारी सुरक्षा घेरे और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के बावजूद, मुख्यालय के भीतर ही 'हाथ की सफाई' का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। ताजा घटनाक्रम में, शिवसेना (यूबीटी) की नगरसेविका लक्ष्मी भाटिया चोरों का निशाना बनीं, जिनके पर्स से अज्ञात शातिर ने हजारों की नकदी पर हाथ साफ कर दिया।</p>
<p> </p>
<p>आपको बता दें कि यह घटना तब हुई जब बुधवार को पहली मंजिल पर स्थायी समिति की अहम बैठक खत्म होने के ठीक बाद सभी सदस्य लंच के लिए एकत्र हुए थे। मिली जानकारी के अनुसार, दोपहर 12 बजे स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हुई थी, जो करीब एक घंटे तक चली। बैठक समाप्त होने के बाद सभी नगरसेवक बगल में स्थित पेंट्री में लंच के लिए गए थे। लक्ष्मी भाटिया ने बताया कि जब वह लंच के बाद वापस लौटीं, तो उन्होंने देखा कि उनके पर्स की चेन खुली हुई थी और उसमें रखे 20,000 रुपये गायब थे।</p>
<p><strong>सीसीटीवी की कमी का फायदा?</strong><br />हैरानी की बात यह है कि बीएमसी मुख्यालय में कड़ी सुरक्षा और गलियारों में सीसीटीवी कैमरे होने के बावजूद, स्थायी समिति हॉल के भीतर कोई कैमरा नहीं लगा है। अधिकारियों का कहना है कि निजता और सुरक्षा नियमों के कारण निर्वाचित प्रतिनिधियों के बैठक हॉल या कक्षों के भीतर कैमरे नहीं लगाए जाते हैं। इसी का फायदा उठाकर किसी ने इस वारदात को अंजाम दिया।</p>
<p><strong>सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल</strong><br />नगरसेविका लक्ष्मी भाटिया ने इस घटना की जानकारी विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर, स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे और मेयर रितु तावड़े को दी है। भाटिया ने इसे सुरक्षा में बड़ी चूक बताते हुए कहा, 'जब नागरिक मुख्यालय में ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा?'</p>
<p><strong>जांच के आदेश</strong><br />इस घटना के बाद स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने नागरिक अधिकारियों को मामले की गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं। लक्ष्मी भाटिया ने इस संबंध में पुलिस में औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49274/clean-sleight-of-hand-in-mumbai-bmc-headquarters-rs-20000</link>
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 11:51:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मुर्शिदाबाद : मीर जाफर के वंशजों की अनदेखी?: SIR में 346 लोगों के नाम कटे, प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुर्शिदाबाद में चुनाव आयोग ने मीर जाफर के वंश से जुड़े करीब 346 लोगों के नाम वोटर सूची से हटा दिए हैं। इस घटनाक्रम के बाद अब इस पूर्व शाही परिवार के सदस्यों पर अपनी नागरिकता साबित करनी होगी। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से सामने आया एक मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। बंगाल के पूर्व नवाब मीर जाफर के वंशजों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48882/names-of-346-people-deleted-from-murshidabad-mir-jafars-descendants"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-01t172009.550.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुर्शिदाबाद : </strong>मुर्शिदाबाद में चुनाव आयोग ने मीर जाफर के वंश से जुड़े करीब 346 लोगों के नाम वोटर सूची से हटा दिए हैं। इस घटनाक्रम के बाद अब इस पूर्व शाही परिवार के सदस्यों पर अपनी नागरिकता साबित करनी होगी। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से सामने आया एक मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। बंगाल के पूर्व नवाब मीर जाफर के वंशजों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।</p>
<p> </p>
<p>सूत्रों के मुताबिक विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत की गई कार्रवाई में नवाबी खानदान के करीब 346 सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इस घटनाक्रम ने न केवल राज्य की राजनीति में हलचल मचाई है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मतदाता अधिकारों और पहचान से जुड़े मुद्दों को लेकर बहस तेज कर दी है।</p>
<p><strong>परिवार के कई सदस्यों के नाम गायब</strong><br />प्रभावित परिवार 15वीं और 16वीं पीढ़ी से संबंधित बताया जा रहा है, जिससे यह मामला ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टि से भी अहम हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि लंबे समय से सूची में शामिल लोगों के नाम अचानक कैसे हटाए गए और इसके पीछे क्या प्रक्रिया अपनाई गई। मुर्शिदाबाद के लालबाग क्षेत्र में स्थित नव आदर्श हाई स्कूल के बूथ संख्या 121 से नवाबी परिवार के कई सदस्यों के नाम गायब पाए गए हैं। इनमें 82 वर्षीय सैयद रजा अली मिर्जा (छोटे नवाब) और उनके पुत्र सैयद मोहम्मद फहीम मिर्जा शामिल हैं। फहीम मिर्जा तृणमूल कांग्रेस से जुड़े पार्षद हैं।</p>
<p>फहीम मिर्जा ने दावा किया कि उनका नाम वर्ष 2002 से मतदाता सूची में था, लेकिन इस बार सुनवाई के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया। नवाब परिवार ने इस पूरे घटनाक्रम को “ऐतिहासिक विडंबना” बताते हुए नाराजगी जताई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, इस मुद्दे ने देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया, पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 17:21:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : कौन हैं आईपीएस तुषार दोशी? जिन्हें सस्पेंड करने के आदेश पर चढ़ा महाराष्ट्र में सियासी पारा, BJP-शिवसेना में ठनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के चर्चित आईपीएस अधिकारी तुषार दोशी को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के कोटे से फडणवीस सरकार में मंत्री शंभूराज देसाई ने जिला पंचायत चुनावों में सतारा पुलिस की भूमिका और खुद के साथ हुए दुर्व्यवहार के मुद्दे को विधानपरिषद में उठाया तो उस वक्त पर सभापति की कुर्सी पर विराजमान उपसभापति नीलम गोरहे ने एसपी को निलंबित करने का आदेश दिए है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48684/mumbai-who-is-ips-tushar-doshi-who-got-the-order"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-24t192426.734.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र के चर्चित आईपीएस अधिकारी तुषार दोशी को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के कोटे से फडणवीस सरकार में मंत्री शंभूराज देसाई ने जिला पंचायत चुनावों में सतारा पुलिस की भूमिका और खुद के साथ हुए दुर्व्यवहार के मुद्दे को विधानपरिषद में उठाया तो उस वक्त पर सभापति की कुर्सी पर विराजमान उपसभापति नीलम गोरहे ने एसपी को निलंबित करने का आदेश दिए है। नीलम गोरहे के आदेश पर बीजेपी से मंत्री जयकुमार गोरे ने आपत्ति की और कहा कि सीनियर अधिकारी के खिलाफ बिना जांच के ऐसा आदेश देना गलत है। दरसअल, शिंदे की अगुवाई वाल शिवसेना-एनसीसी (अजित पवार) के साथ गठबंधन के बाद भी बहुमत में थी लेकिन जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव में एक वोट से हार गई। बीजेपी जीती। शिंदे की शिवसेना का आरोप है कि ऐसा पुलिस की तौर-तरीकों से हुआ।</p>
<p> </p>
<p><strong>मराठा आंदोलन में झेल चुके हैं कार्रवाई</strong><br />सातारा के पालक मंत्री शंभूराज देसाई ने आरोप लगाया कि जिला ने उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया। एक सोची समझी रणनीति के तहत मुझे और अन्य नेताओं को मतदान प्रक्रिया में शामिल होने से रोका गया। इसे मुद्दे पर बीजेपी और शिवसेना के आमने-सामने आने पर महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि इस पूरे मामले की उचित जांच कराई जाएगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गृह विभाग सीएम के पास है।</p>
<p>ऐसे में 2001 में पुलिस सेवा में आए आईपीएस तुषार दोशी सुर्खियों में आ गए हैं। यह पहला मौका नहीं है जब तुषार दोशी चर्चा में आए हैं। महाराष्ट्र में साल 2023 मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज करने के बाद आईपीएस तुषार दोशी सरकार ने लंबी छुट्‌टी पर भेज दिया था। राज्य सरकार ने बाद में तुषार जोशी को वापस ड्यूटी पर लिया था। वह अभी सतारा के पुलिस अधीक्षक का दायित्व संभाल रहे थे। ताजा टकराव ने एक बार फिर से उनके सुर्खियों में ला दिया है।<br />कौन हैं तुषार दोशी ?<br />तुषार दोशी 2001 में महाराष्ट्र पुलिस में शामिल हुए थे। वह अभी तक कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। इनमें नवी मुंबई में पुलिस उपायुक्त (क्राइम) का पद और पुणे, सोलापुर तथा जालना में मिली जिम्मेदारियां शामिल हैं। उन्होंने राज्य के आतंकवाद निरोधक दस्ते  के साथ भी काम किया है। तुषार दोशी करियर की शुरुआत में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों (चंद्रपुर और गढ़चिरौली) में तैनात रह चुके हैं। वह पुलिस सेवा में महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग की परीक्षा पास करके आए थे। इसके बाद आईपीएस पर प्रोन्नत हुए हैं। सतारा के एसपी रहते हुए पिछले साल फलटन महिला डॉक्टर सुसाइड केस की जांच भी तुषार दोशी ने संभाली थी। तुषार दोशी महाराष्ट्र के ही रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा (चौथी कक्षा तक) रायगढ़ में पूरी की, जिसके बाद वे छात्रवृत्ति पर धुले के एक सरकारी विद्यानिकेतन में पढ़ने चले गए। बाद में, वे उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए पुणे चले गए और उनके पास भौतिकी में स्नातक की डिग्री है। दोशी के पिता रायगढ़ जिला परिषद में कार्यरत थे। तुषार अपने पिता से प्रेरित होकर ही पुलिस बल में आए। उन्होंने एमपीएससी (महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग) की परीक्षा उत्तीर्ण की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 19:25:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : जिस बच्ची का पालन-पोषण केवल उसकी मां ने किया हो, उसे पिता का उपनाम और जाति धारण करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता - हाई कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई हाई कोर्ट ने सिंगल मदर केस में एक अहम फैसला दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि जिस बच्ची का पालन-पोषण केवल उसकी मां ने किया हो, उसे केवल इसलिए अपने पिता का उपनाम और जाति धारण करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, क्योंकि पहले ऐसा करना अनिवार्य है। यह आदेश १२ वर्षीय बच्ची की ओर से दायर याचिका के जवाब में आया है, जिसमें उसने स्कूल रिकॉर्ड में अपना नाम और जाति प्रविष्टि ‘मराठा’ से ‘अनुसूचित जाति’ में बदलने की मांग की थी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47866/mumbai-a-child-brought-up-only-by-her-mother-cannot"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-19t122729.5311.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> मुंबई हाई कोर्ट ने सिंगल मदर केस में एक अहम फैसला दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि जिस बच्ची का पालन-पोषण केवल उसकी मां ने किया हो, उसे केवल इसलिए अपने पिता का उपनाम और जाति धारण करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, क्योंकि पहले ऐसा करना अनिवार्य है। यह आदेश १२ वर्षीय बच्ची की ओर से दायर याचिका के जवाब में आया है, जिसमें उसने स्कूल रिकॉर्ड में अपना नाम और जाति प्रविष्टि ‘मराठा’ से ‘अनुसूचित जाति’ में बदलने की मांग की थी।</p>
<p> </p>
<p>माध्यमिक विद्यालय संहिता का हवाला देते हुए स्कूल अधिकारियों ने पिछले वर्ष बच्ची के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था। बुधवार को जारी हाई कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि किसी बच्चे की नागरिक पहचान के लिए एकल मां को पूर्ण अभिभावक के रूप में मान्यता देना कोई दान नहीं है; यह संवैधानिक निष्ठा है। यह पितृसत्तात्मक बाध्यता से संवैधानिक विकल्प की ओर, वंश को भाग्य मानने से गरिमा को अधिकार मानने की ओर बदलाव को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:43:52 +0530</pubDate>
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