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                <title>मुंबई :  झूठे बयान के आरोप पर अलग सुनवाई का निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>हाउसिंग सोसाइटी में कथित तौर पर बिना अनुमति बनाए गए गैराज को लेकर चल रहे विवाद में मुंबई सिटी सिविल कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि प्रतिवादी पर झूठे बयान देने के आरोप से जुड़ी याचिका पर अलग से न्यायिक जांच के तौर पर सुनवाई की जाएगी। यह आदेश जज शिल्पा तोडकर ने 29 अप्रैल को दिया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49644/mumbai-directs-separate-hearing-on-false-statement-charge"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/shutterstock_2278271517.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>हाउसिंग सोसाइटी में कथित तौर पर बिना अनुमति बनाए गए गैराज को लेकर चल रहे विवाद में मुंबई सिटी सिविल कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि प्रतिवादी पर झूठे बयान देने के आरोप से जुड़ी याचिका पर अलग से न्यायिक जांच के तौर पर सुनवाई की जाएगी। यह आदेश जज शिल्पा तोडकर ने 29 अप्रैल को दिया। मामला मेसर्स सेलीन मारिया फर्नांडीस द्वारा दायर सिविल मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें प्रतिवादी नंबर 2 होम्यार एच. लिम्बुवाला शामिल हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि झूठे बयान देने के आरोप से संबंधित आवेदन को मुख्य सिविल मुकदमे के साथ नहीं सुना जा सकता, बल्कि इसे एक अलग विविध याचिका के रूप में दर्ज किया जाना चाहिए।</p>
<p> </p>
<p>यह मूल मामला वर्ष 2020 में दायर किया गया था। इसमें आरोप लगाया गया है कि कल्याण के कोले क्षेत्र स्थित होशंग बाग हाउसिंग सोसाइटी में एक बंद गैराज को सोसाइटी की साझा खुली जगह पर अवैध रूप से बनाया गया था। इस निर्माण को लेकर सोसाइटी में लंबे समय से विवाद चल रहा है। सुनवाई के दौरान वादी पक्ष ने आरोप लगाया कि प्रतिवादी होम्यार एच. लिम्बुवाला ने शपथ लेकर अदालत में झूठे बयान दिए और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश की। याचिका में यह भी मांग की गई कि उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए।</p>
<p>कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस प्रकार के गंभीर आरोपों की जांच अलग से की जानी चाहिए, ताकि मुख्य मुकदमे की कार्यवाही प्रभावित न हो। इसलिए झूठे बयान से संबंधित आवेदन को एक स्वतंत्र प्रक्रिया के रूप में सुना जाएगा। जज शिल्पा तोडकर ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्य सिविल विवाद और झूठे बयान के आरोप दोनों अलग-अलग कानूनी पहलू हैं, जिनकी सुनवाई अलग स्तर पर की जाएगी। इस आदेश के बाद अब यह मामला दो अलग-अलग प्रक्रियाओं में आगे बढ़ेगा—एक ओर हाउसिंग सोसाइटी में कथित अवैध निर्माण का विवाद और दूसरी ओर अदालत को गुमराह करने के आरोपों की जांच। स्थानीय स्तर पर यह मामला हाउसिंग सोसाइटी में निर्माण और कानूनी प्रक्रिया के पालन को लेकर चर्चा में बना हुआ है। अब सभी की नजर आगे की न्यायिक कार्यवाही पर टिकी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 13:37:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई : बहुत सावधान रहें;  झूठे वादों या ऑनलाइन लालच में न पड़ें - पूर्व ब्रह्मोस वैज्ञानिक </title>
                                    <description><![CDATA[<p>रिहा हुए पूर्व ब्रह्मोस वैज्ञानिक ने नौकरी ढूंढने वालों को चेतावनी दी: ऑनलाइन धोखेबाजों से सावधान रहें। “बहुत सावधान रहें। झूठे वादों या ऑनलाइन लालच में न पड़ें।” 34 साल के इस अवॉर्ड विजेता वैज्ञानिक ने यह बात अपने कड़वे अनुभव से कही है। भारत के ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल प्रोग्राम के पूर्व वैज्ञानिक निशांत को मंगलवार शाम को नागपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया, जब उन्हें पाकिस्तान के लिए जासूसी और "साइबर आतंकवाद" के आरोपों से बरी कर दिया गया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46006/mumbai--be-very-careful--don-t-fall-for-false-promises-or-online-lure---former-brahmos-scientist"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/images---2025-08-28t120326.898.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>रिहा हुए पूर्व ब्रह्मोस वैज्ञानिक ने नौकरी ढूंढने वालों को चेतावनी दी: ऑनलाइन धोखेबाजों से सावधान रहें। “बहुत सावधान रहें। झूठे वादों या ऑनलाइन लालच में न पड़ें।” 34 साल के इस अवॉर्ड विजेता वैज्ञानिक ने यह बात अपने कड़वे अनुभव से कही है। भारत के ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल प्रोग्राम के पूर्व वैज्ञानिक निशांत को मंगलवार शाम को नागपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया, जब उन्हें पाकिस्तान के लिए जासूसी और "साइबर आतंकवाद" के आरोपों से बरी कर दिया गया।</p>
<p> </p>
<p>2018 में पहली बार गिरफ्तार हुए निशांत पर गंभीर आरोप थे: उन पर हैदराबाद में पोस्टिंग के दौरान ब्रह्मोस कंप्यूटर सिस्टम से संवेदनशील जानकारी अपने पर्सनल लैपटॉप में ट्रांसफर करने का आरोप था, जिसके लिए उन पर ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धारा 5(1)(d) के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद उन पर ऑनलाइन जॉब पोर्टल, लिंक्डइन के ज़रिए हनीट्रैप में फंसने का आरोप लगा, जिसमें एक यूज़र ने कथित तौर पर उनके पर्सनल लैपटॉप में मैलवेयर डाल दिया था। इस वजह से उन पर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 66F के तहत "साइबर आतंकवाद" का आरोप लगा।लेकिन मंगलवार को निशांत आज़ाद थे, जेल के दरवाज़े पर थोड़ी देर झुके और फिर बाहर निकल गए। एक दिन पहले, बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने 2024 में एक ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सज़ा को रद्द कर दिया था। तब तक, निशांत 2018 में नागपुर में ब्रह्मोस सेंटर से गिरफ्तारी के बाद सात साल जेल में बिता चुके थे - सिवाय 14 महीने की उस अवधि के जब उन्हें ज़मानत पर रिहा किया गया था।निशांत की पत्नी, क्षितिजा, 30, ने कहा, “इस सारे अंधेरे के बीच, सामाजिक अलगाव के लगातार डर के अलावा, एक चीज़ थी जो कभी नहीं मरी, और वह थी उम्मीद।”</p>
<p>“हमें हर तरह की भावनात्मक और वित्तीय परेशानी का सामना करना पड़ा लेकिन हमने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी।”जब 3 जून, 2024 को ट्रायल कोर्ट ने उनके पति को दोषी ठहराया, तब क्षितिजा नौ महीने की गर्भवती थीं। उनका बेटा फैसले के ठीक दो हफ्ते बाद पैदा हुआ, जबकि निशांत छह साल हिरासत में बिताने के बाद भी जेल में ही थे।क्षितिजा ने कहा, “मैंने अपने बेटे से कहा कि पापा जल्द ही घर आ जाएंगे,” उनकी आँखों में आँसू आ गए। <br />वह अभी इतना छोटा है कि समझ नहीं पाएगा कि हम किस दौर से गुज़रे हैं, लेकिन हम हर दिन इस पल का इंतज़ार कर रहे थे।”निशांत को अभी भी अपनी नई सच्चाई पर यकीन नहीं हो रहा है। अपने ससुर रमेश गुप्ता के साथ, इस युवा वैज्ञानिक ने बुधवार शाम को नागपुर प्रेस क्लब में कुछ चुनिंदा लोगों से धीरे से लेकिन पक्के इरादे से बात की। “आखिरकार, मुझे और मेरे परिवार को इंसाफ मिल गया है।” वह रुके, और आगे कहा, “मेरे अंदर की आवाज़ हमेशा कहती थी कि मैं बेगुनाह हूँ।”उत्तराखंड के रुड़की के रहने वाले निशांत ने अपनी पूरी पढ़ाई में गोल्ड मेडल हासिल किया था। उन्होंने NIT-कुरुक्षेत्र से B Tech की डिग्री ली है और वह IIM से MBA हैं और IIT-रुड़की से रिसर्च ट्रेनिंग भी की है।</p>
<p>युवा, महत्वाकांक्षी और दुनिया जीतने का जज्बा रखने वाले निशांत को जर्मनी में DAAD-WISE स्कॉलरशिप मिली, और उन्होंने 2013 में ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड जॉइन किया। उनकी सालाना रिपोर्ट लगातार “बहुत अच्छी” या “उत्कृष्ट” आती थीं।निशांत के ससुर, रमेश गुप्ता, जो मध्य प्रदेश कृषि विभाग से रिटायर्ड जॉइंट डायरेक्टर हैं, मंगलवार को उन्हें लेने जेल के गेट पर मौजूद थे। “अब, कम से कम, मैं चैन से सो पाऊँगा। पिछले सात सालों से मैं ठीक से सो नहीं पाया था,” 70 साल के गुप्ता ने कहा, दोनों के गले मिलने के बाद उनकी आवाज़ कांप रही थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Dec 2025 18:11:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : विपक्ष के नेताओं द्वारा झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं - मोहित कंबोज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी माने जाने वाले बीजेपी नेता मोहित कंबोज ने अब उन दावों का खंडन किया है। जिसमें यह कहा गया था कि उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया है। मुंबई में बीजेपी के उभरते चेहरों में शामिल कंबोज को लेकर पिछले 10 दिनों से सोशल मीडिया में चर्चा छिड़ी हुई थी कि उनकी पत्नी के स्वामित्व वाली कंपनी को एसआरए के काफी प्रोजेक्ट मिल गए हैं। अब सोशल मीडिया पर मोहित कंबोज का एक वीडियो सामने आया है। इसमें उन्होंने इस तरह के दावों का खंडन किया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43941/mumbai--false-allegations-are-being-made-by-opposition-leaders---mohit-kamboj"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/download---2025-09-16t125908.328.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी माने जाने वाले बीजेपी नेता मोहित कंबोज ने अब उन दावों का खंडन किया है। जिसमें यह कहा गया था कि उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया है। मुंबई में बीजेपी के उभरते चेहरों में शामिल कंबोज को लेकर पिछले 10 दिनों से सोशल मीडिया में चर्चा छिड़ी हुई थी कि उनकी पत्नी के स्वामित्व वाली कंपनी को एसआरए के काफी प्रोजेक्ट मिल गए हैं। अब सोशल मीडिया पर मोहित कंबोज का एक वीडियो सामने आया है। इसमें उन्होंने इस तरह के दावों का खंडन किया है। मोहित कंबाेज ने कहा है कि विपक्ष के नेताओं द्वारा झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div><strong>वर्षा गायकवाड़ पर भड़के कंबोज</strong></div>
<div>मोहित कंबोज ने वीडियो में मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा है कि वह पूर्व में मंत्री, विधायक और अब सांसद हैं। उन्होंने कहा है कि मुझे 30 SRA प्रोजेक्ट सरकार ने दिए हैं। कंबोज ने कहा है कि उनकी चुनौती है कि वह पांच प्रोजेक्ट की भी लिस्ट दे दें। कंबाेज ने उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत, वर्षा गायकवाड़ और नवाब मलिक पर टीआरपी और मीडिया अटेंशन के लिए इस तरह के आरोप लगाने की बात कही है। गौरतलब हो कि मोहित कंबोज (41) को बीजेपी 2013 में बीजेपी ने उपाध्यक्ष नियुक्त किया था। वे इसके बाद गोरेगांव (पूर्व) के डिंडोशी से विधानसभा चुनाव भी लड़े थे, हालांकि सुनील प्रभु के सामने वह हार गए थे। </div>
<div> </div>
<div><strong>संजय पांडेय को दी थी चुनौती</strong></div>
<div>पिछले साल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले मोहित कंबोज उस वक्त पर सुर्खियों में आए थे जब महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी और पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त संजय पांडेय कांग्रेस में शामिल हुए थे। तब मोहित कंबोज ने ऐलान कर दिया था कि अगर पांडेय जहां से भी चुनाव लड़ेंगे। वह उनके खिलाफ मैदान में उतरेंगे, हालांकि बाद में संजय पांडेय चुनाव नहीं लड़े थे। अब मोहित कंबोज के सक्रिय राजनीति से हटने और संन्यास की रिपोर्ट्स का खंडन किया है। इन दावों के बाद पत्नी अक्षा कंबोज काफी सुर्खियों में आ गई थीं। उनकी कंपनी को मुंबई में बड़े प्रोजेक्ट मिलने की चर्चा भी सोशल मीडिया में होने लगी थी।</div>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Sep 2025 13:00:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>  यवतमाल : किसान का दावा बड़े विवाद का कारण बन गया; 5 करोड़ का दावा निकला झूठा </title>
                                    <description><![CDATA[<p>जिले के पुसद तालुका के खारशी गांव में एक किसान का दावा बड़े विवाद का कारण बन गया। किसान केशव शिंदे ने कहा था कि उसकी ज़मीन पर खड़ा एक पेड़ लाल चंदन का है और उसकी कीमत लगभग पांच करोड़ रुपये है। लेकिन जांच के बाद सामने आया कि यह पेड़ लाल चंदन का नहीं बल्कि टेरोकार्पस मार्सुपियम प्रजाति का है, जिसकी वास्तविक कीमत मात्र 11,000 रुपये आंकी गई। यह मामला तब सामने आया जब वर्धा-यवतमाल-पुसद-नांदेड़ रेलवे परियोजना के लिए केशव शिंदे की ज़मीन अधिग्रहित की गई। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43667/yavatmal--farmer-s-claim-becomes-the-reason-for-big-controversy--5-crore-claim-turned-out-to-be-false"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/images---2025-09-06t102610.094.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>यवतमाल : </strong>जिले के पुसद तालुका के खारशी गांव में एक किसान का दावा बड़े विवाद का कारण बन गया। किसान केशव शिंदे ने कहा था कि उसकी ज़मीन पर खड़ा एक पेड़ लाल चंदन का है और उसकी कीमत लगभग पांच करोड़ रुपये है। लेकिन जांच के बाद सामने आया कि यह पेड़ लाल चंदन का नहीं बल्कि टेरोकार्पस मार्सुपियम प्रजाति का है, जिसकी वास्तविक कीमत मात्र 11,000 रुपये आंकी गई। यह मामला तब सामने आया जब वर्धा-यवतमाल-पुसद-नांदेड़ रेलवे परियोजना के लिए केशव शिंदे की ज़मीन अधिग्रहित की गई। </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>अधिग्रहण के दौरान उन्हें ज़मीन का मुआवजा तो दे दिया गया, लेकिन पेड़ों और भूमिगत पाइपलाइन के नुकसान के लिए मुआवजा नहीं मिला। इससे नाराज होकर शिंदे ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में याचिका दाखिल की। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए रेलवे को आदेश दिया कि शिंदे को एक करोड़ रुपये मुआवज़े के रूप में दिए जाएं। इस आदेश के बाद शिंदे को 50 लाख रुपये की राशि तत्काल दे दी गई, जबकि शेष 50 लाख रुपये का भुगतान पेड़ के मूल्यांकन रिपोर्ट आने के बाद करने का निर्णय लिया गया।</div>
<div> </div>
<div>कोर्ट के निर्देश पर बैंगलोर से एक विशेषज्ञ संस्था को बुलाया गया, जिसने पेड़ का निरीक्षण किया। जांच रिपोर्ट में साफ हुआ कि पेड़ लाल चंदन का नहीं है। संस्था ने बताया कि यह पेड़ टेरोकार्पस मार्सुपियम प्रजाति का है, जिसे आमतौर पर "इंडियन कीनो ट्री" कहा जाता है। इस प्रजाति के पेड़ की बाजार में कोई विशेष मांग नहीं होती और इसकी कीमत केवल 11,000 रुपये आंकी गई। इस खुलासे के बाद अदालत में शिंदे का दावा गलत साबित हो गया। अब आगे की सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि शेष 50 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा या नहीं।</div>
<div> </div>
<div>मामला फिलहाल अदालत की निगरानी में है और रेलवे विभाग ने भी राहत की सांस ली है, क्योंकि लाल चंदन की पहचान होने पर उन्हें करोड़ों रुपये का मुआवज़ा देना पड़ सकता था। विशेषज्ञों का कहना है कि लाल चंदन (रेड सैंडलवुड) और टेरोकार्पस मार्सुपियम पेड़ में बाहरी समानता होती है, लेकिन वैज्ञानिक जांच से ही सही प्रजाति की पहचान हो पाती है। लाल चंदन अपनी दुर्लभता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमत के कारण अत्यधिक मूल्यवान होता है, जबकि टेरोकार्पस मार्सुपियम का उपयोग मुख्य रूप से औषधीय और स्थानीय लकड़ी के कामों में होता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Sep 2025 10:27:29 +0530</pubDate>
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