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                <title>SC-ST Act - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>SC-ST Act RSS Feed</description>
                
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                <title>एनसीबी अधिकारी समीर वानखेडे ने राकांपा नेता नवाब मलिक पर किया केस, एससी-एसटी एक्ट की धाराएं लगाईं...</title>
                                    <description><![CDATA[ नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के मुंबई मंडल के पूर्व निदेशक समीर वानखेड़े ने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री नवाब मलिक के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई. एक अधिकारी ने बताया कि इस शिकायत के आधार पर शहर की पुलिस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता मलिक के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है. ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/13019/ncb-officer-sameer-wankhede-filed-a-case-against-ncp-leader-nawab-malik--imposed-sections-of-sc-st-act--"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2022-08/sameer-wankhere-nawab-malik-sixteen_nine.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई:</strong> नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के मुंबई मंडल के पूर्व निदेशक समीर वानखेड़े ने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री नवाब मलिक के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई. एक अधिकारी ने बताया कि इस शिकायत के आधार पर शहर की पुलिस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता मलिक के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है. यह मामला आईपीसी की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी लगाई गई हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">वानखेड़े ने रविवार को महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय विभाग की मुंबई जिला जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति से ‘क्लीन चिट’ मिलने के बाद यह शिकायत दर्ज कराई है. समिति ने सरकारी नौकरी पाने के लिए वानखेड़े द्वारा फर्जी जाति प्रमाणपत्र जमा कराने के आरोपों की जांच की थी. मलिक ने आरोप लगाया था कि वानखेड़े ने सरकारी नौकरी पाने के लिए फर्जी जाति प्रमाणपत्र जमा कराया था.</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारी ने रविवार के कहा, ''समीर वानखेड़े ने गोरेगांव पुलिस थाने में नवाब मलिक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, जो धन शोधन के कथित मामले में जेल में बंद हैं.'' उन्होंने कहा, ''पुलिस ने रविवार को एनसीबी के पूर्व अधिकारी की शिकायत पर मलिक के खिलाफ मानहानि के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की.''</p>
<p style="text-align:justify;">जिला जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा था, ''भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी वानखेड़े जन्म से मुस्लिम नहीं थे. यह साबित हो गया है कि वह महार जाति से हैं, जो अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी में आती है.'' समिति का आदेश मिलने के बाद वानखेड़े पुलिस थाने गए और मलिक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई.</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर एनसीपी नेता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 500 (मानहानि के लिए सजा), 501 (मानहानि कारक सामग्री का मुद्रण) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) कानून के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने कहा, ''गोरेगांव के मंडलीय एसीपी (सहायक पुलिस आयुक्त) मामले की जांच करेंगे.'' </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Aug 2022 15:39:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>एससी-एसटी एक्ट और सर्वोच्च न्यायालय</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span style="color:rgb(0,0,0);font-family:'-apple-system', HelveticaNeue;font-size:16px;font-style:normal;font-weight:400;letter-spacing:normal;text-transform:none;white-space:normal;word-spacing:0px;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;float:none;text-align:left;">कुलिन्दर सिंह यादव</span></p> <div>सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एससी-एसटी एक्ट में अपने पूर्व के ही फैसले को बदल दिया है | अब एससी-एसटी प्रावधानों के तहत बिना जांच के एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान लागू हो जाएगा | सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सुनाया है | पिछले<span> </span>फैसले में यदि किसी सरकारी कर्मचारी या सामान्य नागरिक के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई जाती थी | तो सरकारी कर्मचारी के मामले में सीनियर अधिकारी की राय लेकर और सामान्य नागरिक के मामले में एसएसपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/2025/sc-st-act-and-supreme-court"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2019-10/save_20191009_033440.jpg" alt=""></a><br /><p><span style="color:rgb(0,0,0);font-family:'-apple-system', HelveticaNeue;font-size:16px;font-style:normal;font-weight:400;letter-spacing:normal;text-transform:none;white-space:normal;word-spacing:0px;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;float:none;text-align:left;">कुलिन्दर सिंह यादव</span></p> <div>सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एससी-एसटी एक्ट में अपने पूर्व के ही फैसले को बदल दिया है | अब एससी-एसटी प्रावधानों के तहत बिना जांच के एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान लागू हो जाएगा | सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सुनाया है | पिछले<span> </span>फैसले में यदि किसी सरकारी कर्मचारी या सामान्य नागरिक के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई जाती थी | तो सरकारी कर्मचारी के मामले में सीनियर अधिकारी की राय लेकर और सामान्य नागरिक के मामले में एसएसपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही मुकदमा दर्ज किया जा<span> </span>सकता था | गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सीआरपीसी से हटकर एससी-एसटी एक्ट में व्यवस्था की थी | अब पिछले फैसलों के पांच प्रावधानों में से 3 को वापस ले लिया गया है | जिनमें सरकारी कर्मचारी होने की स्थिति में सीनियर अधिकारी की राय के बाद गिरफ्तारी और सामान्य<span> </span>नागरिक होने की स्थिति में एक जांच के बाद गिरफ्तारी के प्रावधानो को वापस ले लिया गया है | इसके अतिरिक्त पहले यह भी कानून था कि उपरोक्त प्रक्रियाओं के उल्लंघन को न्यायालय की अवमानना समझा जाएगा इस प्रावधान को भी हटा दिया गया है | </div> <div>अब यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत शिकायत की जाती है | तो तुरंत मुकदमा दर्ज किया जा सकेगा इसके लिए किसी भी विवेचना या किसी के राय की आवश्यकता नहीं होगी | मौजूदा परिस्थिति में एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा जिस व्यक्ति पर दर्ज होगा<span> </span>उसकी तुरंत गिरफ्तारी की जा सकेगी | लेकिन उसके पास यह विकल्प भी होगा कि वह अग्रिम जमानत के लिए अपील कर सकें | हालांकि अग्रिम जमानत की स्वीकृति देना जिला न्यायधीश के स्वविवेक पर होगा |</div> <div>स्वतंत्रता मिलने के बाद से ही लगातार सदियों से पीड़ित रहे एससी-एसटी वर्ग के उत्थान के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए थे | संविधान के अनुच्छेद 17 के अंतर्गत अस्पृश्यता के अंत की बात की गई है | वहीं अनुच्छेद 46 में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों<span> </span><span>और अन्य दुर्बल वर्गों के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की रक्षा के लिए और उनको शोषण से बचाने के लिए राज्यों को निर्देश दिए गए हैं | जिस को ध्यान में रखते हुए वर्ष<span> </span><a href="tel:+441955" style="color:rgb(0,120,215);">1955</a><span> </span>में और<span> </span><a href="tel:+441976" style="color:rgb(0,120,215);">1976</a><span> </span>में महत्वपूर्ण कानूनों को बनाया गया | लेकिन पाया गया कि यह कानून ज्यादा प्रभावशाली</span><span> </span><span>नहीं है उसी के बाद वर्ष<span> </span><a href="tel:+441989" style="color:rgb(0,120,215);">1989</a><span> </span>में एससी-एसटी एक्ट लाया गया जो वर्तमान समय में सक्रिय है | इसी एक्ट के सेक्शन अट्ठारह के अंतर्गत गिरफ्तारी की बात की गई थी और इसका दुरुपयोग भी बढ़ चला था | जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा था और सुप्रीम कोर्ट के दो जजों</span><span> </span>की पीठ ने एससी-एसटी एक्ट के लिए एक गाइडलाइन तैयार की थी | जिसके बाद देश में विरोध प्रदर्शन हुए और अंततः केंद्र सरकार को एक रिव्यू फाइल करना पड़ा | नए सुधार इसी फैसले पर आधारित हैं | संविधान विशेषज्ञों का मानना था कि गाइडलाइन के बाद से समाज के दो वर्गों के<span> </span>बीच भेद-भाव बढ़ गए हैं | क्योंकि यदि सामान्य वर्ग के किसी व्यक्ति के साथ कोई आपराधिक घटना घटती है तो उसका तुरंत एफआईआर दर्ज किया जाता है | लेकिन यदि यही समान घटना किसी एससी-एसटी व्यक्ति के खिलाफ होती है | तो प्रारंभिक जांच के बाद ही एफआईआर दर्ज किया जाता था<span> </span>जिसमें समय लगता था | इसी तरह से सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार को चुनौती दे रही थी | जिसको हालिया तीन जजों की पीठ ने समाप्त कर दिया | </div> <div>सदियों से एससी-एसटी समाज पीड़ित रहा है | स्वतंत्रता मिलने के बाद से लगातार एससी-एसटी वर्ग के सामाजिक उत्थान के लिए विभिन्न प्रकार के कानूनों को क्रियान्वित किया गया | लेकिन मौजूदा स्थिति में भी उनकी हालत जस की तस बनी हुई है | इसलिए उनको मुख्यधारा<span> </span>से जोड़ने के लिए और उनके भी अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए कुछ अतिरिक्त नियमों को बनाए जाने की आवश्यकता है | आज भी एससी-एसटी समाज के खिलाफ लगातार अपराधों में वृद्धि हो रही है | जिस पर लगाम लगाने की नितांत आवश्यकता है | भारतीय संविधान निर्माता जिस जाति विहीन<span> </span>समाज की कल्पना करते थे | वह अभी भी स्थापित नहीं हुआ है | आदर्श स्थिति यह होगी कि इन सब कानूनों के बाद एक ऐसा समाज बने जहां जाति की अहमियत ना हो | सभी बराबर हो और सभी को गरिमा पूर्ण जीवन जीने का अधिकार मिले | जब तक इस तरह की स्थिति हासिल नहीं होती है | तब तक<span> </span>ऐसे कानूनों की आवश्यकता से अधिक विवशता है | <p>एससी-एसटी कानूनों के दुरूपयोग की बात में भी कुछ सच्चाई है | लेकिन इसके लिए पीड़ित व्यक्ति को संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय तक अपील करने का भी अधिकार दिया गया है | समय की आवश्यकता है कि एससी-एसटी वर्ग के लोगों को भी जागरूक किया जाए और जो संस्थाएं एससी-एसटी<span> </span>वर्गों के हितों के लिए कार्य कर रही हैं | उनके माध्यम से यह प्रसारित किया जाए कि यदि इस कानून का दुरुपयोग होता रहेगा तो निश्चित है कि भविष्य में भी इसको हटाने की मांग उठती रहेगी | जिससे अंततः नुकसान एससी-एसटी वर्ग का ही होगा | कानूनों की भी अपनी कुछ सीमा होती<span> </span>है | जब तक समाज से जाति आधारित भेदभाव को खत्म करने की आवाज नहीं उठेगी तब तक इस तरह के मामले सामने आते रहेंगे | इन कदमोंं के अतिरिक्त राज्य सरकारों को चाहिए की प्राथमिक स्कूलों के पाठ्यक्रमों में मानवता आधारित विषय-वस्तु को सम्मिलित किया जाए | जिससे बचपन से<span> </span>ही आगामी पीढ़ी को मानवता का बोध कराया जा सके |</p> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Oct 2019 03:35:38 +0530</pubDate>
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