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                <title>​Manoj Jarange Patil - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>​Manoj Jarange Patil RSS Feed</description>
                
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                <title>मनोज जरांगे यांच्या बैठकीत मोठी घोषणा? प्रसाद लाड यांच्या अंतरवाली दौऱ्याने राजकीय चर्चांना उधाण</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मनोज जरांगे आणि प्रसाद लाड यांच्या अंतरवाली सराटी येथील बैठकीनंतर मराठा आरक्षण आंदोलनाबाबत मोठ्या घोषणेची चर्चा सुरू झाली आहे. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49937/big-announcement-in-manoj-jaranges-meeting-prasad-lads-intervening-visit"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/mumbai-10.jpg" alt=""></a><br /><p>मराठा आरक्षण आंदोलनाचे प्रमुख नेते Manoj Jarange Patil यांच्या बैठकीनंतर राज्याच्या राजकारणात पुन्हा एकदा मोठी चर्चा सुरू झाली आहे. भाजप आमदार Prasad Lad यांनी अंतरवाली सराटी येथे जरांगे यांची भेट घेतल्यानंतर “मोठी घोषणा” होण्याची चर्चा रंगली आहे. <br /><br />मिळालेल्या माहितीनुसार, मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis यांच्या वतीने शिष्टमंडळ म्हणून प्रसाद लाड यांनी जरांगे यांची भेट घेतली. मराठा आरक्षण, आंदोलनाची पुढील दिशा आणि संभाव्य उपोषण या मुद्द्यांवर दोघांमध्ये चर्चा झाल्याचे सांगितले जात आहे. <br /><br />प्रसाद लाड यांनी माध्यमांशी बोलताना मनोज जरांगे यांनी उपोषण करू नये, असे आवाहन केले. त्यांनी सांगितले की राज्य सरकार संवादाच्या माध्यमातून तोडगा काढण्याचा प्रयत्न करत आहे. तसेच अनेक वर्षांपासून धमकीचे फोन येत असल्याचाही दावा त्यांनी केला. <br /><br />दरम्यान, मनोज जरांगे यांनी सरकारवर पुन्हा दबाव वाढवत मराठा समाजाला आरक्षणाचा निर्णय तातडीने जाहीर करण्याची मागणी केली आहे. त्यांनी स्पष्ट केले की समाजाची सहनशक्ती संपत चालली असून सरकारने वेळकाढूपणा करू नये. <br /><br />राजकीय वर्तुळात या भेटीला विशेष महत्त्व दिले जात आहे. आगामी आंदोलन, मुंबईतील संभाव्य मोर्चा आणि मराठा आरक्षणाच्या पार्श्वभूमीवर ही बैठक निर्णायक ठरू शकते, अशी चर्चा आहे. काही सूत्रांच्या मते, पुढील काही दिवसांत आंदोलनाबाबत मोठा निर्णय जाहीर होऊ शकतो. �<br /><br />सोशल मीडियावरही “अंतरवाली बैठक” चर्चेचा विषय ठरली आहे. अनेकांनी सरकार आणि जरांगे यांच्यातील संवादाला सकारात्मक पाऊल म्हटले, तर काहींनी आरक्षणाबाबत ठोस निर्णयाची मागणी केली आहे.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 17:00:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
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                <title>मनोज जरांगे पाटील का बड़ा ऐलान...  मराठा समाज विधानसभा चुनाव लड़ेगा </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मराठा बहुल सीटों पर उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने का नुकसान महायुति और महा विकास आघाडी दोनों को हो सकता है। वैसे, जरांगे का गुस्सा आघाडी से ज्यादा देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी पर रहा है, इसलिए कुछ लोगों का मानना है कि बीजेपी को ज्यादा नुकसान होगा। वहीं, कुछ जानकार यह भी दावा कर रहे हैं कि मराठा उम्मीदवार चुनाव मैदान में होने से ओबीसी वोटर्स का ध्रुवीकरण होगा। ऐसे में, अगर महा विकास आघाडी और महायुति ने ओबीसी उम्मीदवार दिए, तो दोनों के बीच वोटों का विभाजन होगा और दोनों को नुकसान झेलना पड़ सकता है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/35101/manoj-jarange-patil-s-big-announcementmaratha-community-will-contest-the-assembly-elections"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-10/download-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई:</strong> मराठा आरक्षण आंदोलन के नायक मनोज जरांगे पाटील ने ऐलान किया है कि मराठा समाज विधानसभा चुनाव लड़ेगा। मनोज जरांगे ने कहा कि समय कम है, ऐसे में चुनाव लड़ने के इच्छुक मराठा उम्मीदवार नामांकन फॉर्म भर दें, लेकिन सूचित किए जाने पर नाम वापस लेने की भी तैयारी रखें। अपने गांव अंतरवाली सराटी में पिछले 2 दिन से चल रही सकल मराठा समाज की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।</p>
<p style="text-align:justify;">जरांगे की 3 प्रमुख घोषणाएं<br />1. जिस सीट पर मराठा उम्मीदवार के जीतने की गारंटी है, वहां चुनाव लड़ेंगे।<br />2. एससी/एसटी के लिए रिजर्व सीटों पर चुनाव लड़ रहे एससी/एसटी उम्मीदवारों में जो मराठा समाज के विचारों से सहमत है, उसे हम सपोर्ट करेंगे।<br />3. जहां मराठा समाज का उम्मीदवार नहीं होगा, उस सीट पर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में से जो 500 रुपये के बॉन्ड पेपर पर यह लिखकर देगा कि मराठा समाज की सभी मांगों से सहमत है, उसे समर्थन दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">मराठा उम्मीदवारों से फॉर्म भरने की अपील<br />जरांगे ने कहा कि मराठा समाज का जो उम्मीदवार कहने के बावजूद नाम वापस नहीं लेगा, समाज समझेगा कि उसने पैसा खाया है। उन्होंने कहा कि मराठवाडा की कई सीटों पर मराठा वोटिंग 1 लाख से ज्यादा है। इतने बहुमत को तोड़ना किसी के लिए भी संभव नहीं है। कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में अन्य समीकरण महत्वपूर्ण हैं। वह उन समीकरणों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। अगर समीकरण जुड़ गए तो ठीक है, लेकिन अगर नहीं जुड़े, तो सबके लिए मुश्किल होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मराठा बहुल सीटों पर उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने का नुकसान महायुति और महा विकास आघाडी दोनों को हो सकता है। वैसे, जरांगे का गुस्सा आघाडी से ज्यादा देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी पर रहा है, इसलिए कुछ लोगों का मानना है कि बीजेपी को ज्यादा नुकसान होगा। वहीं, कुछ जानकार यह भी दावा कर रहे हैं कि मराठा उम्मीदवार चुनाव मैदान में होने से ओबीसी वोटर्स का ध्रुवीकरण होगा। ऐसे में, अगर महा विकास आघाडी और महायुति ने ओबीसी उम्मीदवार दिए, तो दोनों के बीच वोटों का विभाजन होगा और दोनों को नुकसान झेलना पड़ सकता है।<br /><br />हालांकि, यह भी एक सचाई है कि महाराष्ट्र में ओबीसी और मराठों की जनसंख्या लगभग समान है। ज्यादा से ज्यादा एक या दो पर्सेंट का अंतर है। इस समय ओबीसी बीजेपी के करीब है, जबकि मराठा समाज राजनीतिक रूप से बिखरा हुआ है। इसका एक बड़ा कारण आर्थिक विषमता है। यही वजह है कि मनोज जरांगे पाटील मराठों को ओबीसी में शामिल कर आरक्षण की मांग कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Oct 2024 10:17:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मनोज जारांगे-पाटिल ने 4 जून से जालना में आमरण अनशन की घोषणा की </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई: मराठा आरक्षण का विवादास्पद मुद्दा फिर से उभर आया है, जिससे तनाव फिर से बढ़ने की आशंका है क्योंकि कार्यकर्ता मनोज जारांगे-पाटिल ने आंदोलन को फिर से शुरू करने की कसम खाई है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जारांगे-पाटिल अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और इसलिए 4 जून से जालना में आमरण अनशन शुरू करने वाले हैं और 8 जून को बीड में एक विशाल रैली भी आयोजित करेंगे।</p>
<p>उनके आंदोलन के केंद्र में मराठों को कुनबियों के बराबर करने वाले कानून का आह्वान है, जिससे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटा के तहत आरक्षण का लाभ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/31223/manoj-jarange-patil-announced-fast-unto-death-in-jalna-from-june"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-05/images---2024-05-15t203418.186.jpeg" alt=""></a><br /><p>मुंबई: मराठा आरक्षण का विवादास्पद मुद्दा फिर से उभर आया है, जिससे तनाव फिर से बढ़ने की आशंका है क्योंकि कार्यकर्ता मनोज जारांगे-पाटिल ने आंदोलन को फिर से शुरू करने की कसम खाई है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जारांगे-पाटिल अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और इसलिए 4 जून से जालना में आमरण अनशन शुरू करने वाले हैं और 8 जून को बीड में एक विशाल रैली भी आयोजित करेंगे।</p>
<p>उनके आंदोलन के केंद्र में मराठों को कुनबियों के बराबर करने वाले कानून का आह्वान है, जिससे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटा के तहत आरक्षण का लाभ पूरे मराठा समुदाय को दिया जा सके। वर्तमान में, मराठों के एक उपसमूह कुनबी को महाराष्ट्र में ओबीसी आरक्षण का दर्जा प्राप्त है। इसके अतिरिक्त, जारांगे-पाटिल ने कुनबी वंश के हलफनामों के आधार पर मराठों के रक्त संबंधियों के लिए आरक्षण की अनुमति देने वाले एक लंबित मसौदा अधिसूचना को लागू करने के लिए दबाव डाला।</p>
<p>राज्य सरकार को जारांगे-पाटिल के अल्टीमेटम में उनकी मांगें पूरी नहीं होने पर सभी 288 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने की धमकी भी शामिल है।रक्त और वैवाहिक संबंधों को इंगित करने वाले 'सेज-सोयारे' नियम पर जोर देते हुए, वह आंदोलन से संबंधित मामलों को वापस लेने के सरकार के आश्वासन का हवाला देते हैं और वादों को पूरा करने का आग्रह करते हैं।कार्यकर्ता का पुनरुत्थान अपेक्षाकृत शांति की अवधि के बाद हुआ है, जो पिछले मराठा विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की जांच के लिए सरकार द्वारा एक विशेष जांच दल (एसआईटी) की स्थापना द्वारा चिह्नित है।</p>
<p>राज्य सरकार ने पहले मराठा समुदाय को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से वंचित मानते हुए उन्हें 10% कोटा देने वाला कानून पारित किया था।मीडिया को अपने संबोधन में, जारंगे-पाटिल ने मराठों के उचित अधिकारों से इनकार के रूप में जो कुछ भी माना है उसे सुधारने की तात्कालिकता पर जोर दिया। उन्होंने राजनीतिक हस्तियों को भी अपना संदेश दिया और उनसे अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने और शिकायतों का निवारण करने का आग्रह किया, साथ ही आश्वासनों के अधूरे रहने पर चुनावी नतीजों की परोक्ष चेतावनी भी जारी की।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 May 2024 20:34:45 +0530</pubDate>
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