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                <title>decades - Rokthok Lekhani</title>
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                <title>मुंबई: तीन दशक की मुकदमेबाजी के बाद जोगेश्वरी की संपत्ति पर तत्काल कब्जा देने का आदेश</title>
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                        <![CDATA[<p><strong> </strong>करीब तीन दशक की मुकदमेबाजी के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने किरायेदारी विवाद का पटाक्षेप करते हुए मूल वादी ज्ञान प्रकाश शुक्ला के पक्ष में जोगेश्वरी की एक संपत्ति पर तत्काल कब्जा देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति माधव जामदार ने 9 अप्रैल को मूल निर्णय ऋणी के बेटे बल्लम त्रिफला सिंह द्वारा दायर एक आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें 2016 में पारित बेदखली के आदेश के निष्पादन में बाधा डालने की मांग की गई थी।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/39743/mumbai--order-for-immediate-possession-of-jogeshwari-property-after-three-decades-of-litigation"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-04/proasd.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>करीब तीन दशक की मुकदमेबाजी के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने किरायेदारी विवाद का पटाक्षेप करते हुए मूल वादी ज्ञान प्रकाश शुक्ला के पक्ष में जोगेश्वरी की एक संपत्ति पर तत्काल कब्जा देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति माधव जामदार ने 9 अप्रैल को मूल निर्णय ऋणी के बेटे बल्लम त्रिफला सिंह द्वारा दायर एक आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें 2016 में पारित बेदखली के आदेश के निष्पादन में बाधा डालने की मांग की गई थी। अदालत ने पाया कि सिंह ने "हेरफेर किए गए और मनगढ़ंत दस्तावेजों" पर भरोसा किया था और अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के लिए 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।</p>
<p> </p>
<p>यह विवाद 1996 का है जब शुक्ला ने होटल लिंकवे में किरायेदारों को बेदखल करने के लिए मुकदमा दायर किया था। उन्होंने 2016 में एक आदेश प्राप्त किया, लेकिन सिंह ने अपने वकील रंजीत थोराट के माध्यम से 1990 के बिक्री विलेख के आधार पर स्वामित्व का दावा करते हुए बाधा डालने वाली कार्यवाही शुरू की। न्यायमूर्ति जामदार ने निचली अदालतों के साथ सहमति जताते हुए दावे को खारिज कर दिया कि विलेख संदिग्ध और अविश्वसनीय था। दस्तावेज़ में विसंगतियों में मूल और फोटोकॉपी के बीच बेमेल सीटीएस संख्याएँ और 1996 में बीएमसी को सौंपे गए हलफनामे में सिंह द्वारा दिए गए विरोधाभासी बयान शामिल थे, जिसमें एक अलग खरीद तिथि और विक्रेता का हवाला दिया गया था। </p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Apr 2025 10:37:35 +0530</pubDate>
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                <title>कई दशकों से चल रहा है लगान वसूली... हम बजट सत्र में ये खड़ा करेंगे सवाल -  नाना पटोले </title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">नाना पटोले ने तीखा हमला बोला है. उन्होंने पूछा कि ये स्टेट इन्वेस्टमेंट कंकिसका दामाद है, सरकारी जमीन बेचने का, उससे आम जनता को लूटने का सरकार को जवाब देना होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि मीरा भयंदर में जो स्थिति है वो सरकार के सपोर्ट के आधार पर चल रही है. असल में नाना पटोले ने आरोप लगते हुए कहा कि 5000 एकड़ जमीन कंपनी के पास है और वो जमीन के ऊपर किसी को भी मकान बनाना है तो टोल देना पड़ता है.</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/30019/rent-collection-has-been-going-on-for-many-decades--we-will-raise-this-question-in-the-budget-session---nana-patole"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-04/download-(3)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई :</strong> महाराष्ट्र का 'लगान-वसूली' केस का मामला बढ़ता ही जा रहा है. हुआ यह था कि ठाणे की एक प्राइवेट कंपनी लोगों से अपनी ही जमीन पर घर बनाने के लिए लगान वसूल करती रही. मीरा-भयंदर इलाके में जितनी भी जमीन है, उस पर इसी प्राइवेट कंपनी का मालिकाना हक बताया गया. हैरानी की बात रही कि अवैध लगान वसूली का ये धंधा कई दशकों से चल रहा है. अब कांग्रेस भी इस पर हमलावर हो गई है. महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले न कहा कि हम बजट सत्र में ये सवाल खड़ा करेंगे. </p>
<p style="text-align:justify;">यह पूरा इलाका ठाणे जिले में आता है. इस इलाके का अपना पुलिस कमिश्नरेट है. इस इलाके का अपना अलग नगर निगम भी है, लेकिन इस पूरे इलाके में आज भी अंग्रेजों का बनाया एक कानून चलता है. आज भी इस इलाके में रहने वाले लोगों को अगर कोई जमीन खरीदनी होती है, किसी प्लॉट पर घर बनाना होता है या किसी पुरानी इमारत की जगह Reconstruction करवाना होता है तो उन्हें इसके लिए The एस्टेट Investment Company नाम की कंपनी को लगान चुकाना होता है. और लगान भी कोई छोटा मोटा नहीं डेढ़ सौ रुपये Square Feet से लेकर पांच सौ रुपये Square Feet के हिसाब से ये जबरन वसूली की जाती है.</p>
<p style="text-align:justify;">नाना पटोले ने तीखा हमला बोला है. उन्होंने पूछा कि ये स्टेट इन्वेस्टमेंट कंकिसका दामाद है, सरकारी जमीन बेचने का, उससे आम जनता को लूटने का सरकार को जवाब देना होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि मीरा भयंदर में जो स्थिति है वो सरकार के सपोर्ट के आधार पर चल रही है. असल में नाना पटोले ने आरोप लगते हुए कहा कि 5000 एकड़ जमीन कंपनी के पास है और वो जमीन के ऊपर किसी को भी मकान बनाना है तो टोल देना पड़ता है.</p>
<p style="text-align:justify;">अभी ये जमीन सरकार की है, सरकार की तिजोरी में पैसा आना चाहिए, वो आम जनता के पास है. हमने विधानसभा में ये सवाल उठाया था. उसकी जांच शुरू है ऐसा मुझे बताया गया था. हम कार्रवाई करेंगे ऐसा बताया गया था.  आरोप है कि इस माध्यम से राज्य की संपत्ति को लूट रही है यही स्पष्ट हो रहा है. हम बजट सत्र में ये सवाल हम खड़ा करेंगे. क्या ये स्टेट इन्वेस्टमेंट कंपनी तुम्हारा दामाद है, सरकारी जमीन बेचने का, उससे आम जनता को लूटने का सरकार को जवाब देना होगा.</p>]]>
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                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Apr 2024 11:35:33 +0530</pubDate>
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