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                <title>decades - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>decades RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई: तीन दशक बाद पुलिस के हत्थे चढ़े दो फरार आरोपी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पुलिस ने करीब तीन दशक पुराने दो अलग-अलग गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। समता नगर पुलिस ने 53 वर्षीय सुकेन शिवसागर विश्वकर्मा को कांदिवली ईस्ट से पकड़ा, जबकि डिंडोशी पुलिस ने 48 वर्षीय मोहम्मद मुस्तफा सैयद को बांद्रा ईस्ट से हिरासत में लिया। दोनों आरोपी वर्षों से पुलिस और अदालत की कानूनी प्रक्रिया से बच रहे थे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51843/mumbai-two-absconding-accused-caught-by-police-after-three-decades"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/samta-nagar-police-station-kandivali-east-mumbai-police-24e4lt8.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>पुलिस ने करीब तीन दशक पुराने दो अलग-अलग गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। समता नगर पुलिस ने 53 वर्षीय सुकेन शिवसागर विश्वकर्मा को कांदिवली ईस्ट से पकड़ा, जबकि डिंडोशी पुलिस ने 48 वर्षीय मोहम्मद मुस्तफा सैयद को बांद्रा ईस्ट से हिरासत में लिया। दोनों आरोपी वर्षों से पुलिस और अदालत की कानूनी प्रक्रिया से बच रहे थे। पुराने अभिलेख, स्थानीय लोगों से पूछताछ, मुखबिरों से मिली सूचना और उपलब्ध तकनीकी जानकारी की मदद से पुलिस उन तक पहुंची।</p>
<p> </p>
<p>दोनों गिरफ्तारियां अलग-अलग मामलों में हुई हैं। सुकेन विश्वकर्मा वर्ष 1997 में दर्ज नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में वांछित था। वहीं मोहम्मद मुस्तफा सैयद के खिलाफ वर्ष 1995 में दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार विश्वकर्मा करीब 29 साल और सैयद लगभग 30 साल से कानूनी कार्रवाई से बच रहा था। यहां तथ्यात्मक सुधार जरूरी है कि सुकेन विश्वकर्मा के खिलाफ मामला वर्ष 1995 में नहीं, बल्कि 1997 में समता नगर थाने में दर्ज हुआ था। वर्ष 1995 का मामला मोहम्मद मुस्तफा सैयद से जुड़ा है। दोनों के खिलाफ आरोप अदालत में विचाराधीन हैं, इसलिए उन्हें दोषी के बजाय संबंधित मामलों में आरोपी ही लिखा जाना कानूनी रूप से उचित है।</p>
<p>समता नगर पुलिस के अनुसार विश्वकर्मा के खिलाफ अपराध क्रमांक 347/1997 के तहत भारतीय दंड संहिता की तत्कालीन धारा 363, 366 और 376 के तहत मामला दर्ज किया गया था। इन धाराओं में नाबालिग का अपहरण, विवाह या अवैध संबंध के लिए जबरन ले जाने और दुष्कर्म जैसे आरोप शामिल थे। आरोपी के लंबे समय तक अदालत में उपस्थित नहीं होने के बाद उसे फरार घोषित किया गया था।</p>
<p>पुराना मामला होने के कारण आरोपी का पता लगाना पुलिस के लिए आसान नहीं था। इस अवधि में कई पते बदल चुके थे और उस समय उपलब्ध दस्तावेजों में दर्ज जानकारी भी वर्तमान स्थिति से मेल नहीं खा रही थी। पुलिस ने सबसे पहले विश्वकर्मा के पुराने पते और परिचितों का विवरण निकाला। इसके बाद संभावित ठिकानों पर स्थानीय स्तर पर पूछताछ की गई और मुखबिरों के नेटवर्क को सक्रिय किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 11:16:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कमाठीपुरा की नई तस्वीर, जर्जर इमारतों की जगह लेंगे आलीशान टावर; मिटेगा दशकों पुराना 'कलंक'</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कमाठीपुरा के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। इस इलाके की मशहूर 15 गलियां (लेन) अब सिमटकर छह से आठ चौड़ी गलियों में बदल जाएंगी, और ज्यादातर गलियों के नाम भी बदल जाएंगे। यहां सिर्फ कुछ ही जगहों पर 'कमाठीपुरा' नाम दिखाई देगा, जबकि एक बगीचा और एक म्यूरल इसकी कहानी को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजकर रखेंगे। यह कहानी मुंबई की पहचान का एक जटिल, फिर भी अहम हिस्सा है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49369/new-picture-of-kamathipura-luxurious-towers-will-replace-dilapidated-buildings"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-21t130259.576.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> कमाठीपुरा के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। इस इलाके की मशहूर 15 गलियां (लेन) अब सिमटकर छह से आठ चौड़ी गलियों में बदल जाएंगी, और ज्यादातर गलियों के नाम भी बदल जाएंगे। यहां सिर्फ कुछ ही जगहों पर 'कमाठीपुरा' नाम दिखाई देगा, जबकि एक बगीचा और एक म्यूरल इसकी कहानी को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजकर रखेंगे। यह कहानी मुंबई की पहचान का एक जटिल, फिर भी अहम हिस्सा है। </p>
<p> </p>
<p>अपने विवादित अतीत को देखते हुए, कई निवासी चाहते हैं कि कमाठीपुरा अपनी पुरानी 'रेड-लाइट डिस्ट्रिक्ट' वाली पहचान को पीछे छोड़ दे। जैसे-जैसे यहां पुनर्निर्माण का काम आगे बढ़ रहा है, स्थानीय लोग अपने विधायक अमीन पटेल से मिलकर यह गुजारिश कर रहे हैं कि, इस इलाके के नाम और इसकी छवि को बदला जाए। हालांकि, नागरिकों का एक तबका यह भी मानता है कि मुंबई के इतिहास में इस इलाके की जो जगह है, उसे सुरक्षित रखा जाना चाहिए।</p>
<p><strong>34 एकड़ में फैली है 15 संकरी गलियां</strong><br />दरअसल, ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण इस इलाके का बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण होने जा रहा है। 'मुंबई बिल्डिंग रिपेयर्स एंड रिकंस्ट्रक्शन बोर्ड' (MBRRB) ने लगभग 8000 निवासियों के लिए स्थायी और सुरक्षित घरों का निर्माण करने की योजना बनाई है, इसके साथ ही लगभग 800 जमीन मालिकों को मुआवजा देने का भी प्रस्ताव रखा है।</p>
<p><strong>मजदूरी करने आए लोगों को सबसे पहले बसाया गया था</strong><br />इतिहासकारों की माने तो कमाठीपुरा को पुराने 'फोर्ट' इलाके के उत्तरी छोर के पास स्थित एक दलदली जमीन पर बसाया गया था। यहां सबसे पहले तेलुगू भाषी प्रवासी आकर बसे थे, जिन्हें 'कामाठी' कहा जाता था; ये लोग निर्माण-कार्य में मजदूरों के तौर पर काम करते थे। बाद में, जैसे-जैसे मिलों और बंदरगाह से जुड़ी गतिविधियों में तेजी आई, यहां के कई निवासी औद्योगिक क्षेत्र में काम करने लगे। समय के साथ, यहां यौन-कर्म का धंधा भी पनपने लगा, और कमाठीपुरा मुंबई के सबसे बड़े 'रेड-लाइट डिस्ट्रिक्ट' के तौर पर जाना जाने लगा। </p>
<p><strong>विधायक ने संतुलन बनाने की बात कही</strong><br />क्षेत्र के विधायक अमीन पटेल की माने तो, जैसे ही पुनर्निर्माण का डिजाइन और लेआउट (नक्शा) पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। वह सभी जन-प्रतिनिधियों जिनमें नगर निगम के पार्षद भी शामिल हैं, उनको विश्वास में लेंगे। इसके अलावा, वह स्थानीय विशेषज्ञों से भी सलाह-मशविरा करेंगे; इन विशेषज्ञों ने इस इलाके का बारीकी से अध्ययन किया है। उन लोगों की पहचान की है, जिन्होंने इस इलाके के विकास में अपना योगदान दिया है, ताकि गलियों के नाम उन्हीं लोगों के नाम पर रखे जा सकें।</p>
<p>इसके साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि यहां एक बगीचा भी विकसित किया जाएगा। जिसमें कमाठीपुरा के इतिहास को दर्शाने वाले म्यूरल और लिखित विवरण मौजूद होंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस इलाके के महत्व को भली-भांति समझ सकें। हालांकि, कांग्रेस विधायक ने ज़ोर देकर कहा कि इस इलाके की उत्तर और दक्षिण दिशा वाली मुख्य सड़कों के नाम वही रहेंगे, और अगर कोई नाम बदला जाएगा, तो वह सिर्फ अंदरूनी गलियों का ही होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 14:55:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: तीन दशक की मुकदमेबाजी के बाद जोगेश्वरी की संपत्ति पर तत्काल कब्जा देने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>करीब तीन दशक की मुकदमेबाजी के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने किरायेदारी विवाद का पटाक्षेप करते हुए मूल वादी ज्ञान प्रकाश शुक्ला के पक्ष में जोगेश्वरी की एक संपत्ति पर तत्काल कब्जा देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति माधव जामदार ने 9 अप्रैल को मूल निर्णय ऋणी के बेटे बल्लम त्रिफला सिंह द्वारा दायर एक आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें 2016 में पारित बेदखली के आदेश के निष्पादन में बाधा डालने की मांग की गई थी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/39743/mumbai--order-for-immediate-possession-of-jogeshwari-property-after-three-decades-of-litigation"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-04/proasd.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>करीब तीन दशक की मुकदमेबाजी के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने किरायेदारी विवाद का पटाक्षेप करते हुए मूल वादी ज्ञान प्रकाश शुक्ला के पक्ष में जोगेश्वरी की एक संपत्ति पर तत्काल कब्जा देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति माधव जामदार ने 9 अप्रैल को मूल निर्णय ऋणी के बेटे बल्लम त्रिफला सिंह द्वारा दायर एक आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें 2016 में पारित बेदखली के आदेश के निष्पादन में बाधा डालने की मांग की गई थी। अदालत ने पाया कि सिंह ने "हेरफेर किए गए और मनगढ़ंत दस्तावेजों" पर भरोसा किया था और अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के लिए 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।</p>
<p> </p>
<p>यह विवाद 1996 का है जब शुक्ला ने होटल लिंकवे में किरायेदारों को बेदखल करने के लिए मुकदमा दायर किया था। उन्होंने 2016 में एक आदेश प्राप्त किया, लेकिन सिंह ने अपने वकील रंजीत थोराट के माध्यम से 1990 के बिक्री विलेख के आधार पर स्वामित्व का दावा करते हुए बाधा डालने वाली कार्यवाही शुरू की। न्यायमूर्ति जामदार ने निचली अदालतों के साथ सहमति जताते हुए दावे को खारिज कर दिया कि विलेख संदिग्ध और अविश्वसनीय था। दस्तावेज़ में विसंगतियों में मूल और फोटोकॉपी के बीच बेमेल सीटीएस संख्याएँ और 1996 में बीएमसी को सौंपे गए हलफनामे में सिंह द्वारा दिए गए विरोधाभासी बयान शामिल थे, जिसमें एक अलग खरीद तिथि और विक्रेता का हवाला दिया गया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Apr 2025 10:37:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कई दशकों से चल रहा है लगान वसूली... हम बजट सत्र में ये खड़ा करेंगे सवाल -  नाना पटोले </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">नाना पटोले ने तीखा हमला बोला है. उन्होंने पूछा कि ये स्टेट इन्वेस्टमेंट कंकिसका दामाद है, सरकारी जमीन बेचने का, उससे आम जनता को लूटने का सरकार को जवाब देना होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि मीरा भयंदर में जो स्थिति है वो सरकार के सपोर्ट के आधार पर चल रही है. असल में नाना पटोले ने आरोप लगते हुए कहा कि 5000 एकड़ जमीन कंपनी के पास है और वो जमीन के ऊपर किसी को भी मकान बनाना है तो टोल देना पड़ता है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/30019/rent-collection-has-been-going-on-for-many-decades--we-will-raise-this-question-in-the-budget-session---nana-patole"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-04/download-(3)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई :</strong> महाराष्ट्र का 'लगान-वसूली' केस का मामला बढ़ता ही जा रहा है. हुआ यह था कि ठाणे की एक प्राइवेट कंपनी लोगों से अपनी ही जमीन पर घर बनाने के लिए लगान वसूल करती रही. मीरा-भयंदर इलाके में जितनी भी जमीन है, उस पर इसी प्राइवेट कंपनी का मालिकाना हक बताया गया. हैरानी की बात रही कि अवैध लगान वसूली का ये धंधा कई दशकों से चल रहा है. अब कांग्रेस भी इस पर हमलावर हो गई है. महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले न कहा कि हम बजट सत्र में ये सवाल खड़ा करेंगे. </p>
<p style="text-align:justify;">यह पूरा इलाका ठाणे जिले में आता है. इस इलाके का अपना पुलिस कमिश्नरेट है. इस इलाके का अपना अलग नगर निगम भी है, लेकिन इस पूरे इलाके में आज भी अंग्रेजों का बनाया एक कानून चलता है. आज भी इस इलाके में रहने वाले लोगों को अगर कोई जमीन खरीदनी होती है, किसी प्लॉट पर घर बनाना होता है या किसी पुरानी इमारत की जगह Reconstruction करवाना होता है तो उन्हें इसके लिए The एस्टेट Investment Company नाम की कंपनी को लगान चुकाना होता है. और लगान भी कोई छोटा मोटा नहीं डेढ़ सौ रुपये Square Feet से लेकर पांच सौ रुपये Square Feet के हिसाब से ये जबरन वसूली की जाती है.</p>
<p style="text-align:justify;">नाना पटोले ने तीखा हमला बोला है. उन्होंने पूछा कि ये स्टेट इन्वेस्टमेंट कंकिसका दामाद है, सरकारी जमीन बेचने का, उससे आम जनता को लूटने का सरकार को जवाब देना होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि मीरा भयंदर में जो स्थिति है वो सरकार के सपोर्ट के आधार पर चल रही है. असल में नाना पटोले ने आरोप लगते हुए कहा कि 5000 एकड़ जमीन कंपनी के पास है और वो जमीन के ऊपर किसी को भी मकान बनाना है तो टोल देना पड़ता है.</p>
<p style="text-align:justify;">अभी ये जमीन सरकार की है, सरकार की तिजोरी में पैसा आना चाहिए, वो आम जनता के पास है. हमने विधानसभा में ये सवाल उठाया था. उसकी जांच शुरू है ऐसा मुझे बताया गया था. हम कार्रवाई करेंगे ऐसा बताया गया था.  आरोप है कि इस माध्यम से राज्य की संपत्ति को लूट रही है यही स्पष्ट हो रहा है. हम बजट सत्र में ये सवाल हम खड़ा करेंगे. क्या ये स्टेट इन्वेस्टमेंट कंपनी तुम्हारा दामाद है, सरकारी जमीन बेचने का, उससे आम जनता को लूटने का सरकार को जवाब देना होगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Apr 2024 11:35:33 +0530</pubDate>
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