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                <title>accept - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>पुणे : रोहित तिलक ने कहा कि वह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा दी गई भूमिका स्वीकार करेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लोकमान्य तिलक के परपोते रोहित तिलक ने कांग्रेस का काम रोकने का फैसला किया है। शिंदे सेना की तरफ से मुझसे राज्यसभा की उम्मीदवारी के बारे में पूछा गया था, इसलिए मैं उस दिन फॉर्म भरने मुंबई गया था। लेकिन, महाविकास आघाड़ी की तरफ से पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार का नाम आया और बाकी सब रुक गया। लेकिन फिर भी, भविष्य में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे रोहित तिलक ने कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, वह खुशी-खुशी स्वीकार करेंगे।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48361/pune-rohit-tilak-said-he-will-accept-the-role-given"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-12t132309.728.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पुणे : </strong>लोकमान्य तिलक के परपोते रोहित तिलक ने कांग्रेस का काम रोकने का फैसला किया है। शिंदे सेना की तरफ से मुझसे राज्यसभा की उम्मीदवारी के बारे में पूछा गया था, इसलिए मैं उस दिन फॉर्म भरने मुंबई गया था। लेकिन, महाविकास आघाड़ी की तरफ से पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार का नाम आया और बाकी सब रुक गया। लेकिन फिर भी, भविष्य में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे रोहित तिलक ने कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, वह खुशी-खुशी स्वीकार करेंगे।</p>
<p> </p>
<p>आजादी से पहले से तिलक परिवार कांग्रेस के साथ लोकमान्य तिलक मूल रूप से कांग्रेस से थे। स्वर्गीय जयंतराव तिलक कांग्रेस के सांसद और विधान परिषद के सभापति थे। रोहित तिलक ने 2009 और 2014 का कस्बा विधानसभा चुनाव कांग्रेस से लड़ा था। रोहित तिलक राज्य कांग्रेस के महासचिव भी रह चुके हैं। चूंकि यह लोकमान्य तिलक की विरासत है, इसलिए पुरस्कार देते समय हमने कभी किसी पार्टी से जुड़ाव नहीं रखा; लेकिन इसी बीच हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तिलक अवॉर्ड दिया, तब से कांग्रेस लीडरशिप ने हमसे दूरी बनानी शुरू कर दी।</p>
<p>तिलक परिवार ने यह अवॉर्ड इंदिरा गांधी और प्रणब मुखर्जी को भी दिया है। असल में, तिलक ट्रस्ट कभी भी पॉलिटिकल पार्टी के आधार पर अवॉर्ड नहीं देता, बल्कि यह तिलक अवॉर्ड संबंधित डिग्निटी की अचीवमेंट्स के आधार पर देता है। तो फिर मोदी के समय ही एतराज़ क्यों उठाया गया। असल में, हमने सीधे कांग्रेस हाईकमान को अपना पक्ष समझाने की कोशिश की। लेकिन, इसका कोई फ़ायदा नहीं हुआ। इसीलिए हमने कांग्रेस का काम रोकने का फ़ैसला किया है, रोहित तिलक ने कहा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 13:26:36 +0530</pubDate>
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                <title>बांग्लादेशी मुसलमानों के लिए देश की नागरिकता चाहिए तो इन बातों को मानना होगा- असम CM सरमा </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">सीएम ने अपने बयान में कहा कि अगर बांग्ला-भाषी मुसलमानों को राज्य का मूल निवासी बनना है तो उन्हें बाल-विवाह और बहुविवाह जैसी प्रथाओं को छोड़ना होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो ही राज्य के मूल निवासी ‘खिलोंजिया’ माने जाएंगे।  साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इन लोगों को बच्चों को मदरसों की जगह स्कूल भेजना होगा ताकि वे डॉक्टर-इंजीनियर बनें।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/29742/if-bangladeshi-muslims-want-citizenship-of-the-country-then-they-will-have-to-accept-these-things---assam-cm-sarma"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-03/download-(1)32.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश की नागरिकता चाहिए तो इन बातों को मानना होगा, जानें असम CM सरमा ने बांग्लादेशी मुसलमानों के लिए कौन सी शर्तें रखीं<br />असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बांग्ला-भाषी मुसलमानों को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है।  उन्होंने बांग्ला-भाषी मुसलमानों के असम का मूल निवासी बनने के लिए कुछ शर्तें रखीं।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएम ने अपने बयान में कहा कि अगर बांग्ला-भाषी मुसलमानों को राज्य का मूल निवासी बनना है तो उन्हें बाल-विवाह और बहुविवाह जैसी प्रथाओं को छोड़ना होगा। अगर वे ऐसा करते हैं तो ही राज्य के मूल निवासी ‘खिलोंजिया’ माने जाएंगे।  साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इन लोगों को बच्चों को मदरसों की जगह स्कूल भेजना होगा ताकि वे डॉक्टर-इंजीनियर बनें।<br /><br />असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इससे पहले राज्य के बांग्ला-भाषी मुस्लिम समुदाय को सामाजिक कुरीतियों के लिए जिम्मेदार बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि मियां (बांग्ला-भाषी मुसलमान) मूल निवासी हैं या नहीं यह एक अलग मामला है। हम यह कह रहे हैं कि अगर वे ‘मूल निवासी’ बनना चाहते हैं, तो हमें कोई समस्या नहीं है लेकिन इसके लिए उन्हें बाल विवाह और बहुविवाह को छोड़कर महिलाओं को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना होगा। राज्य के मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर बांग्ला भाषी मुसलमान असमिया रीति-रिवाजों का पालन कर सकते हैं, तो उन्हें भी 'स्वदेशी' माना जाएगा।<br /><br />सीएम ने कहा कि असमिया लोगों की एक संस्कृति है जिसमें लड़कियों की तुलना 'शक्ति' (देवी) से की जाती है और दो-तीन बार शादी करना असमिया संस्कृति नहीं है। उन्होंने आगे कहा, “मैं उनसे हमेशा कहता हूं, 'मियां' के स्वदेशी होने में कोई समस्या नहीं है लेकिन वे दो-तीन पत्नियां नहीं रख सकते। यह असमिया संस्कृति नहीं है। कोई सत्र (वैष्णव मठ) भूमि का अतिक्रमण कर मूल निवासी कैसे बनना चाहता है?” <br /><br />सीएम ने कहा कि असम में मुसलमानों की आबादी महत्वपूर्ण है, 2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य की कुल आबादी में मुसलमानों का आंकड़ा 34 प्रतिशत से अधिक है। इस आबादी में दो अलग-अलग जातियां शामिल हैं-बंगाली भाषी और बांग्लादेश मूल के प्रवासी मुसलमान और असमिया भाषी स्वदेशी मुसलमान। </p>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/29742/if-bangladeshi-muslims-want-citizenship-of-the-country-then-they-will-have-to-accept-these-things---assam-cm-sarma</link>
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                <pubDate>Sun, 24 Mar 2024 21:16:27 +0530</pubDate>
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