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                <title>risking - Rokthok Lekhani</title>
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                <title>पालघर के डोल्हारी बुद्रुक गांव में 15 साल से पुल का इंतजार; ग्रामीण जान जोखिम में डालकर कर रहे नदी पार</title>
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                        <![CDATA[<p>पालघर जिले के विक्रमगड तहसील में स्थित डोल्हारी बुद्रुक गांव के लोग पिछले 15 सालों से एक पक्के पुल का इंतजार कर रहे हैं। गांव के पास बहने वाली नदी पर पुल न होने के कारण ग्रामीणों, खासकर स्कूली विद्यार्थियों और महिलाओं को हर साल बारिश के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर बांस और लकड़ियों से बने अस्थाई और खतरनाक पुल से नदी पार करनी पड़ती है। कई बार विद्यार्थी इस पुल से फिसलकर पानी में गिर चुके हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। डोल्हारी बुद्रुक ग्राम पंचायत के अंतर्गत खडकीपाडा, बार्हातपाड़ा और ठाकरपाडा ये तीन बस्तियां आती हैं। इन बस्तियों को जोड़ने के लिए नदी पर यही एकमात्र मार्ग है।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/41748/palghar-s-dolhari-budruk-village-has-been-waiting-for-a-bridge-for-15-years--villagers-are-crossing-the-river-risking-their-lives"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-06/download---2025-06-29t113803.756.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पालघर : </strong>पालघर जिले के विक्रमगड तहसील में स्थित डोल्हारी बुद्रुक गांव के लोग पिछले 15 सालों से एक पक्के पुल का इंतजार कर रहे हैं। गांव के पास बहने वाली नदी पर पुल न होने के कारण ग्रामीणों, खासकर स्कूली विद्यार्थियों और महिलाओं को हर साल बारिश के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर बांस और लकड़ियों से बने अस्थाई और खतरनाक पुल से नदी पार करनी पड़ती है। कई बार विद्यार्थी इस पुल से फिसलकर पानी में गिर चुके हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। डोल्हारी बुद्रुक ग्राम पंचायत के अंतर्गत खडकीपाडा, बार्हातपाड़ा और ठाकरपाडा ये तीन बस्तियां आती हैं। इन बस्तियों को जोड़ने के लिए नदी पर यही एकमात्र मार्ग है।</p>
<p> </p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने से गांव पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाता है। ऐसे में बाजार, राशन की दुकान, स्कूल, आंगनवाड़ी या अस्पताल जाने के लिए यही लकड़ी का पुल उनकी 'लाइफ लाइन' बन जाता है। हालांकि, इसकी जर्जर हालत अब एक गंभीर खतरा बन चुकी है। ग्रामीण खुद इकट्ठा करते हैं चंदा, बनाते हैं लकड़ी का पुल करीब 30 साल पहले एक पुल बनाया गया था, जो 15 साल पहले बाढ़ में बह गया था। इसके बाद से ग्रामीण लगातार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पक्के पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला है। हालात ये हैं कि ग्रामीण खुद चंदा इकट्ठा कर बारिश से पहले लकड़ी का अस्थाई पुल तैयार करते हैं। इस जानलेवा सफर को तय करने पर ग्रामीण मजबूर हैं, क्योंकि उनके पास कोई और विकल्प नहीं है।</p>
<p><strong>विकास से कोसों दूर गांव, प्रशासन पर उठ रहे सवाल</strong><br />बार्हातपाडा और ठाकरपाडा के किसान खेती के लिए खडकीपाडा में नदी पार करते हैं। इसी मार्ग पर श्मशानभूमि भी स्थित है, जिसके कारण बरसात में शवयात्रा को भी नदी पार कर ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों को जीवन और मृत्यु के बीच का यह संघर्ष झेलना पड़ता है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? डोल्हारी बुद्रुक जैसे गांव आज भी सरकारी अनदेखी और संसाधनों की कमी के कारण विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर हैं। ये तस्वीरें जिला प्रशासन और सरकार के तमाम विकास कार्यों के दावों की पोल खोलती नजर आ रही हैं।</p>]]>
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                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Jun 2025 11:39:47 +0530</pubDate>
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                <title> महाराष्ट्र के नासिक में जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे बच्चे...  इस तरह कर रहे नदी पार</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा, "यहां लगभग 20,000-25,000 लोग रहते हैं लेकिन बारिश में सभी गांवों का संपर्क टूट जाता है। ऐसी स्थिति में अस्पतालों और तालुका के स्थानों पर जाना मुश्किल हो जाता है। जब एएनआई ने दिखाया कि बच्चों को स्कूल जाने के लिए बड़े-बड़े बर्तनों में नदी पार करनी पड़ती है, बात सरकार तक पहुंची. सीएम एकनाथ शिंदे की सरकार ने कदम उठाया. आने वाले सालों में सभी गांव एक-दूसरे से जुड़ेंगे.''</p>]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/29437/children-going-to-school-are-risking-their-lives-in-nashik--maharashtra----crossing-the-river-like-this"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-03/download-(10)3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नासिक: </strong>महाराष्ट्र के नासिक में बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे हैं. इसका एक वीडियो भी सामने आया है. पुल के अभाव में, नासिक के पेठ तालुका में बच्चों का समूह स्कूल पहुंचने के लिए हर दिन नदी पार करता है. एक स्थानीय व्यक्ति का कहना है, "नदी गहरी है लेकिन बच्चों को स्कूल जाना पड़ता है, इसलिए हम उन्हें कंधों पर या बड़े बर्तनों में ले जाते हैं। हम प्रशासन से पुल बनाने का अनुरोध करते हैं।" इसपर एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे का बयान सामने आया है. </p>
<p style="text-align:justify;">शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा, "यहां लगभग 20,000-25,000 लोग रहते हैं लेकिन बारिश में सभी गांवों का संपर्क टूट जाता है। ऐसी स्थिति में अस्पतालों और तालुका के स्थानों पर जाना मुश्किल हो जाता है। जब एएनआई ने दिखाया कि बच्चों को स्कूल जाने के लिए बड़े-बड़े बर्तनों में नदी पार करनी पड़ती है, बात सरकार तक पहुंची. सीएम एकनाथ शिंदे की सरकार ने कदम उठाया. आने वाले सालों में सभी गांव एक-दूसरे से जुड़ेंगे.''</p>]]>
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                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Mar 2024 13:14:14 +0530</pubDate>
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