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                <title>approached - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई:  जमानत रद्द होते ही शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे पहुंचे पुलिस के पास</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के एक अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ कथित रूप से सरेआम मारपीट करने के मामले में आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे ने रविवार को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह कदम उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा उनकी जमानत रद्द किए जाने के एक दिन बाद उठाया। हाईकोर्ट ने आरोपी को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वह तय समय सीमा के भीतर पुलिस के सामने पेश हों, जिसके बाद म्हात्रे ने सरेंडर कर दिया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50842/mumbai-shiv-sena-councilor-ramesh-mhatre-reached-the-police-as"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-20t123953.798.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र के एक अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ कथित रूप से सरेआम मारपीट करने के मामले में आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे ने रविवार को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह कदम उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा उनकी जमानत रद्द किए जाने के एक दिन बाद उठाया। हाईकोर्ट ने आरोपी को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वह तय समय सीमा के भीतर पुलिस के सामने पेश हों, जिसके बाद म्हात्रे ने सरेंडर कर दिया।</p>
<p> </p>
<p>जानकारी के अनुसार, रमेश म्हात्रे पर अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ मारपीट करने का आरोप है। इस मामले में उन्हें पहले निचली अदालत से जमानत मिल गई थी, लेकिन बाद में इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए निचली अदालत के फैसले को पलट दिया और जमानत रद्द कर दी। बॉम्बे हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखद की खंडपीठ ने शनिवार को सुनवाई करते हुए रमेश म्हात्रे को रविवार शाम 5 बजे तक पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। अदालत के आदेश के बाद रविवार को म्हात्रे पुलिस के समक्ष पहुंचे और अपनी गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी कराई।</p>
<p>हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कल्याण मजिस्ट्रेट अदालत के फैसले पर भी सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि निचली अदालत ने आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या और उनकी प्रकृति को ध्यान में रखना जरूरी है, खासकर तब जब आरोप गंभीर अपराधों से जुड़े हों। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भले ही आरोपी को पहले दर्ज 17 मामलों में बरी किया जा चुका हो, लेकिन उसके खिलाफ कुल 18 आपराधिक मामले दर्ज होने की बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इनमें हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में आरोपी की पृष्ठभूमि और अपराधों की गंभीरता पर विचार करना आवश्यक है।</p>
<p>हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पुलिस प्रशासन भी सक्रिय हो गया था। अदालत के निर्देश के अनुसार आरोपी को निर्धारित समय के भीतर पेश होना था। रविवार को रमेश म्हात्रे ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। महिला डॉक्टर के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर लोगों में नाराजगी देखी गई थी। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी डॉक्टरों की सुरक्षा और अस्पतालों में बेहतर माहौल की मांग उठाई थी। फिलहाल पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है। मामले में जांच जारी है और पुलिस आरोपों से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इस प्रकरण में आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 12:41:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : 12 रेस्टोरेंट मालिकों के एक समूह ने पुलिस उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के 12 रेस्टोरेंट मालिकों के एक समूह ने हर्बल, तंबाकू-मुक्त हुक्का परोसने को लेकर कथित पुलिस उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका दावा है कि यह प्रथा पिछले अदालती आदेश के तहत पूरी तरह से वैध है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि पुलिस ने केवल तंबाकू-मुक्त हर्बल हुक्का परोसने की लंबे समय से चली आ रही न्यायिक अनुमति की अवहेलना करते हुए उनके प्रतिष्ठानों पर छापेमारी और धमकियाँ जारी रखी हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/42757/mumbai--12-restaurant-owners-approached-bombay-high-court-seeking-protection-from-police-harassment"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-08/download---2025-08-05t113947.706.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई के 12 रेस्टोरेंट मालिकों के एक समूह ने हर्बल, तंबाकू-मुक्त हुक्का परोसने को लेकर कथित पुलिस उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका दावा है कि यह प्रथा पिछले अदालती आदेश के तहत पूरी तरह से वैध है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि पुलिस ने केवल तंबाकू-मुक्त हर्बल हुक्का परोसने की लंबे समय से चली आ रही न्यायिक अनुमति की अवहेलना करते हुए उनके प्रतिष्ठानों पर छापेमारी और धमकियाँ जारी रखी हैं।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p>वकील राजेंद्र राठौड़ और ध्रुव जैन द्वारा प्रस्तुत याचिका में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि संबंधित रेस्टोरेंट 22 अगस्त, 2019 के हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए केवल हर्बल हुक्का परोसते हैं, जिसमें ऐसे उत्पादों की स्पष्ट रूप से अनुमति दी गई थी। इसके बावजूद, रेस्टोरेंट मालिकों का आरोप है कि अधिकारी, कथित तौर पर राज्य के गृह विभाग के निर्देश पर, इस गलत धारणा के तहत उनके कामकाज में बाधा डाल रहे हैं कि सभी प्रकार के हुक्का परोसे जाने पर प्रतिबंध है।</p>
<p>याचिका के अनुसार, रेस्टोरेंट मालिकों ने इस साल अप्रैल और मई में लिखित संचार के माध्यम से स्थानीय पुलिस को 2019 के आदेश का पालन करने की बार-बार सूचना दी है। उनके पत्राचार में उनकी वैध व्यावसायिक गतिविधियों में हस्तक्षेप न करने की अपील की गई है। फिर भी, जैसा कि एफपीजे ने उजागर किया है, याचिकाकर्ताओं का दावा है कि पुलिस लगातार औचक निरीक्षण कर रही है और उन्हें हर्बल हुक्का सेवाएं बंद करने के निर्देश दे रही है, जिससे भारी वित्तीय तनाव पैदा हो रहा है और कई कर्मचारियों की आजीविका को खतरा है।</p>
<p>एफपीजे की रिपोर्ट के अनुसार, इस विवाद के केंद्र में राज्य के गृह विभाग द्वारा 6 जून, 2025 को जारी एक परिपत्र है, जिसमें अवैध हुक्का पार्लरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आह्वान किया गया है और चेतावनी दी गई है कि कोई भी अधिकारी इस पर ध्यान न देने पर जवाबदेह होगा। हालाँकि, रेस्टोरेंट मालिकों ने अदालत के समक्ष तर्क दिया है कि उनके मामले में इस परिपत्र का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि उनके संचालन को छूट प्राप्त है, क्योंकि वे तंबाकू पर सख्त प्रतिबंध लगाते हैं और सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 (सीओटीपीए) के सभी प्रासंगिक प्रावधानों का पालन करते हैं।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Aug 2025 11:40:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नई दिल्ली : प्रधानमंत्री और आरएसएस पर आपत्तिजनक कार्टून; कार्टूनिस्ट ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री और आरएसएस पर आपत्तिजनक कार्टून फेसबुक पर पोस्ट करने के केस का सामना कर रहे इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हेमंत मालवीय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अग्रिम जमानत मांगी है। सुप्रीम कोर्ट याचिका पर 14 जुलाई को सुनवाई करने के लिए राजी हो गया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/42069/new-delhi--objectionable-cartoon-on-pm-and-rss--cartoonist-approached-supreme-court-for-relief"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-07/images---2025-07-11t190842.374.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली :</strong> प्रधानमंत्री और आरएसएस पर आपत्तिजनक कार्टून फेसबुक पर पोस्ट करने के केस का सामना कर रहे इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हेमंत मालवीय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अग्रिम जमानत मांगी है। सुप्रीम कोर्ट याचिका पर 14 जुलाई को सुनवाई करने के लिए राजी हो गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गत तीन जुलाई को हेमंत मालवीय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग है। हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद मालवीय अब राहत की गुहार लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।</p>
<p> </p>
<p><strong>जल्दी सुनवाई का किया था अनुरोध</strong><br />शुक्रवार को मालवीय की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बाग्ची की पीठ के समक्ष याचिका का जिक्र करते हुए जल्दी सुनवाई का अनुरोध किया। ग्रोवर ने कहा कि ये मामला एक कार्टून से जुड़ा है जिसे मालवीय ने 2021 में कोरोना महामारी के दौरान बनाया था। कहा आरोपित अपराध में बीएनएस के तहत तीन साल की सजा का प्रविधान है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कार्टूनिस्ट की निंदा की है। सुप्रीम कोर्ट ने ग्रोवर की दलीलें सुनने के बाद उनका अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले को 14 जुलाई को सुनवाई के लिए लगाने का निर्देश दिया।</p>
<p><strong>आरएसएस कार्यकर्ता ने की थी शिकायत</strong><br />इस मामले में आरएसएस कार्यकर्ता और स्थानीय वकील विनय जोशी ने मई में इंदौर के लसूडिया थाने में हेमंत मालवीय के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें कहा गया था कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और सांप्रदायिक सौहार्द खराब होता है। शिकायत में कई आपत्तिजनक पोस्टों का जिक्र किया गया था जिसमें भगवान शिव के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी और कार्टून, वीडियो, फोटो , और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और आरएसएस वर्कर के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी आदि शामिल थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Jul 2025 19:09:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट का हिमाचल प्रदेश के 6 बागी विधायकों ने किया रुख...  स्पीकर के फैसले को दी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सदस्य से अयोग्य घोषित हो चुके इन विधायकों का कहना है कि स्पीकर ने इन्हें अपना पक्ष रखने का समय नहीं दिया। इसके अलावा नोटिस भी सिर्फ एक ही विधायक को मिला, अन्य विधायकों को नोटिस भी नहीं दिया गया। विधायकों के वकील ने यह भी कहा कि स्पीकर ने इस तरह फैसला लिया कि मानो पिटीशन में लिखी गई हर बात सत्य हो। अब सुप्रीम कोर्ट से इन विधायकों को राहत की उम्मीद है। अगर इन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलती है, तो इन सभी 6 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होंगे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/29199/6-rebel-mlas-of-himachal-pradesh-approached-the-supreme-court---challenged-the-speaker-s-decision"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-03/download-(1)6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हिमाचल प्रदेश :</strong> हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान व्हिप का उल्लंघन करने पर स्पीकर ने छह कांग्रेस विधायकों को अयोग्य करार दिया है। अब इन 6 बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इन कांग्रेसी विधायकों ने स्पीकर के अयोग्य करार देने के फैसले को चुनौती दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पीकर ने विधानसभा में बजट के दौरान अनुपस्थित रहने के आधार पर इन विधायकों को अयोग्य करार दिया था। विधायकों ने स्पीकर के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। बागी विधायकों ने स्पीकर के फैसले को गलत ठहराते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। कांग्रेस के बागी सुधीर शर्मा, राजिंदर राणा, इंद्र दत्त लखनपाल, रवि ठाकुर, देवेंद्र भुट्टो और चैतन्य शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें उन्होंने इन सभी 6 कांग्रेस विधायकों को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया है। विधानसभा स्पीकर ने यह फैसला बतौर ट्रिब्यूनल चेयरमैन सुनाया है।<br /><br />दल बदल कानून के तहत सदस्यता गंवाने वाले इन विधायकों ने खुद को अयोग्य करार दिए जाने वाले फैसले को चुनौती दी है। हिमाचल प्रदेश सरकार में संसदीय कार्य मंत्री और कांग्रेस विधायक दल के चीफ व्हिप हर्षवर्धन चौहान ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को एक शिकायत सौंपी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस शिकायत में इन सभी 6 विधायकों के व्हिप जारी होने के बावजूद कटौती प्रस्ताव और बजट पारण के दौरान अनुपस्थित रहने की बात कही गई। इन विधायकों ने विधानसभा के अटेंडेंस रजिस्टर में अपनी हाजिरी तो लगाई, लेकिन यह सदन में उस समय मौजूद नहीं रहे। इसी पर फैसला सुनाते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने इन्हें अयोग्य करार दिया है।<br /><br />हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सदस्य से अयोग्य घोषित हो चुके इन विधायकों का कहना है कि स्पीकर ने इन्हें अपना पक्ष रखने का समय नहीं दिया। इसके अलावा नोटिस भी सिर्फ एक ही विधायक को मिला, अन्य विधायकों को नोटिस भी नहीं दिया गया। विधायकों के वकील ने यह भी कहा कि स्पीकर ने इस तरह फैसला लिया कि मानो पिटीशन में लिखी गई हर बात सत्य हो। अब सुप्रीम कोर्ट से इन विधायकों को राहत की उम्मीद है। अगर इन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलती है, तो इन सभी 6 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/29199/6-rebel-mlas-of-himachal-pradesh-approached-the-supreme-court---challenged-the-speaker-s-decision</link>
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                <pubDate>Tue, 05 Mar 2024 19:10:56 +0530</pubDate>
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