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                <title>Authority - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>नई दिल्ली : 'चुनाव आयोग को नियुक्ति के पूरे अधिकार, नए आदेश की जरूरत नहीं'; टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ झटका लगा है। चुनाव आयोग द्वारा वोटों की गिनती के लिए मुख्य रूप से केंद्र सरकार और पीएसयू के कर्मचारियों को तैनात करने के निर्देश के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस अहम मुद्दे को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आज टीएमसी की याचिका पर सुनवाई की।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49631/new-delhi-election-commission-has-full-powers-of-appointment-no"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-02t131314.131.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली :</strong> पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ झटका लगा है। चुनाव आयोग द्वारा वोटों की गिनती के लिए मुख्य रूप से केंद्र सरकार और पीएसयू के कर्मचारियों को तैनात करने के निर्देश के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस अहम मुद्दे को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आज टीएमसी की याचिका पर सुनवाई की। विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी नया आदेश पारित करने से साफ इनकार कर दिया है। दरअसल, चुनाव आयोग ने अदालत को आश्वासन दिया है कि वह अपने 13 अप्रैल के परिपत्र (सर्कुलर) का पूरी तरह से पालन करेगा।</p>
<p> </p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के मुताबिक, इस सर्कुलर में मतगणना प्रक्रिया में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य सरकार के कर्मचारियों की तैनाती का भी प्रावधान है। चुनाव आयोग के वकील के इस बयान के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने केवल यह दोहराया कि चुनौती दिए गए सर्कुलर को लागू किया जाएगा और मामले में आगे कोई अन्य आदेश देने से मना कर दिया। साथ ही यह भी कहा कि चुनाव आयोग को नियुक्ति के पूरे अधिकार हैं।</p>
<p><strong>फर्क नहीं पड़ता कि अधिकारी केंद्र का है- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी</strong><br />सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि मतगणना के दौरान वहां हर राजनीतिक दल के चुनाव एजेंट मौजूद रहेंगे। इसलिए, इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता कि पर्यवेक्षक केंद्र सरकार का नामित अधिकारी है या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की तैनाती पूरी तरह से चुनाव आयोग की अपनी संतुष्टि पर निर्भर करती है, क्योंकि वहां सभी पार्टियों के एजेंट मौजूद होंगे। <br />क्या है पूरा मामला?<br />यह पूरा मामला वोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है। चुनाव आयोग ने निर्देश दिया था कि बंगाल में वोटों की गिनती के लिए केंद्रीय कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) बनाया जाएगा। टीएमसी इस फैसले का विरोध कर रही है। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया में राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी बराबर शामिल किया जाना चाहिए। इसी आदेश को चुनौती देने के लिए टीएमसी ने अर्जी दी थी, जिस पर जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई की। </p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट के जजों ने नियमों को लेकर क्या स्पष्ट किया? </strong><br />मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने नियमों को लेकर स्थिति साफ की।<br />उन्होंने कहा कि नियमों में यह विकल्प पूरी तरह से खुला है कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट केंद्र सरकार के भी हो सकते हैं और राज्य सरकार के भी।<br />कोर्ट ने कहा कि जब यह विकल्प खुला हुआ है, तो हम यह बिल्कुल नहीं कह सकते कि चुनाव आयोग का यह नोटिफिकेशन नियमों के खिलाफ है।<br />जस्टिस बागची ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के पास यह अधिकार है कि वह कह सकता है कि दोनों अधिकारी केंद्र सरकार के ही होंगे। <br /> कपिल सिब्बल ने कोर्ट में क्या दलील दी? <br />टीएमसी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के सर्कुलर (परिपत्र) पर सवाल उठाए।<br />सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि चुनाव आयोग के सर्कुलर में खुद ऐसा स्पष्ट तौर पर नहीं कहा गया है कि केवल केंद्रीय कर्मचारी ही होंगे।<br />टीएमसी का तर्क है कि चुनाव आयोग का यह कदम जानबूझकर राज्य सरकार के कर्मचारियों को गिनती से दूर रखने के लिए उठाया गया है। <br />सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की दलीलों पर क्या जवाब दिया?<br />वकील सिब्बल की दलीलों पर जस्टिस बागची ने तुरंत अपना पक्ष रखा। उन्होंने ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने ऐसा कहा भी होता, तब भी हम उन्हें इस बात के लिए गलत नहीं ठहरा सकते थे। इसका मुख्य कारण यह है कि नियम साफ तौर पर कहते हैं कि मगणना के लिए केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधिकारियों को नियुक्त किया जा सकता है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 13:15:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : स्कूल बसों की मनमानी पर रोक; रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी बताएगी स्कूल बस का किराया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अब तक प्राइवेट बस ऑपरेटर और स्कूल मिलकर मनमाने तरीके से स्कूल बस का किराया तय करते थे और बच्चों के पेरेंट्स से पूरे साल की फीस एक साथ लेते थे, लेकिन अब इस व्यवस्था पर रोक लगने जा रही है। महाराष्ट्र सरकार स्कूल बस शुल्क को नियंत्रित करने के लिए नया नियम लागू करने की तैयारी में है। नए प्रावधानों के तहत अब स्कूल बस का किराया संबंधित रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी तय करेगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। इसके अलावा, पेरेंट्स को बड़ी राहत देते हुए अब बस का शुल्क केवल महीने के आधार पर ही लिया जाएगा। एकमुश्त वार्षिक वसूली पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49182/mumbai-regional-transport-authority-will-stop-the-arbitrariness-of-school"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-13t133528.928.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>अब तक प्राइवेट बस ऑपरेटर और स्कूल मिलकर मनमाने तरीके से स्कूल बस का किराया तय करते थे और बच्चों के पेरेंट्स से पूरे साल की फीस एक साथ लेते थे, लेकिन अब इस व्यवस्था पर रोक लगने जा रही है। महाराष्ट्र सरकार स्कूल बस शुल्क को नियंत्रित करने के लिए नया नियम लागू करने की तैयारी में है। नए प्रावधानों के तहत अब स्कूल बस का किराया संबंधित रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी तय करेगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। इसके अलावा, पेरेंट्स को बड़ी राहत देते हुए अब बस का शुल्क केवल महीने के आधार पर ही लिया जाएगा। एकमुश्त वार्षिक वसूली पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।</p>
<p> </p>
<p><strong>सरकार ने तैयार कर दिए कड़े नियम</strong><br />दरसल सरकार ने स्कूली छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्कूल बस और परिवहन व्यवस्था के लिए कड़े और व्यापक नियम लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। गृह विभाग द्वारा जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, “महाराष्ट्र मोटर वाहन (स्कूल बस विनियमन) (प्रथम संशोधन) नियम, 2026” लागू करने का प्रस्ताव है। सरकार ने इस मसौदे पर 15 दिनों के भीतर आम जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।<br />सरकार ने साफ की तस्वीर, जानें पूरे नियम</p>
<p>1. हर स्कूल में बनेगी ट्रांसपोर्ट कमिटी<br />हर स्कूल में ट्रांसपोर्ट कमेटी बनाई जाएगी, जो फीस, सुरक्षा और सेवा से जुड़ी शिकायतों का समाधान करेगी। तिमाही रिपोर्ट देना भी अनिवार्य होगा। शिक्षा और परिवहन विभाग मिलकर नियमित जांच करेंगे और रिपोर्ट जिला स्तर की समिति को सौंपेंगे।</p>
<p>2. सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक अनिवार्य<br />सभी स्कूल बसों और वैन में जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम, पैनिक बटन, सीसीटीवी, फायर सेफ्टी सिस्टम और सीट बेल्ट अनिवार्य होंगे।</p>
<p>3. डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू<br />वाहनों में डिजिटल सेफ्टी सिस्टम होगा, जिससे लाइव ट्रैकिंग, डिजिटल उपस्थिति और पेरेंट्स को तुरंत सूचना मिल सकेगी। यह सिस्टम राज्य स्तरीय प्लेटफॉर्म से जुड़ा होगा।</p>
<p>4.छोटे बच्चों के लिए विशेष प्रावधान<br />प्राथमिक कक्षा तक के बच्चों के लिए हर यात्रा में महिला अटेंडेंट या प्रशिक्षित कर्मचारी की मौजूदगी अनिवार्य होगी।</p>
<p>5.विशेष जरूरत वाले छात्रों के लिए सुविधा<br />दिव्यांग और विशेष जरूरत वाले छात्रों के लिए प्रशिक्षित स्टाफ, आसान प्रवेश और आवश्यकतानुसार पेरेंट्स /शिक्षक की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।</p>
<p>6.कर्मचारियों की सख्त जांच<br />ड्राइवर और अन्य स्टाफ की बैकग्राउंड जांच, मेडिकल फिटनेस और आधिकारिक नियुक्ति पत्र अनिवार्य होंगे।</p>
<p>7.उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई<br />नियम लागू होने के तीन महीने के भीतर सभी वाहनों को मानकों के अनुसार तैयार करना होगा, अन्यथा परमिट निलंबित या रद्द किए जा सकते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 13:36:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : कानूनी अधिकार के अभाव के बावजूद अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में सरकारी हस्तक्षेप</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कोई कानूनी अधिकार न होने के बावजूद, राज्य के शिक्षा अधिकारी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों की नियुक्ति में दखल दे रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसके चलते नागपुर हाई कोर्ट की बेंच ने शिक्षा अधिकारियों के प्रति अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48588/mumbai-government-interference-in-minority-educational-institutions-despite-lack-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-21t120136.883.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>कोई कानूनी अधिकार न होने के बावजूद, राज्य के शिक्षा अधिकारी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों की नियुक्ति में दखल दे रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसके चलते नागपुर हाई कोर्ट की बेंच ने शिक्षा अधिकारियों के प्रति अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है।</p>
<p> </p>
<p>कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इस फैसले की एक प्रति विदर्भ के सभी शिक्षा अधिकारियों को भेजी जाए, ताकि उनमें जागरूकता पैदा हो सके। यह प्रति सरकारी वकील के कार्यालय को सौंप दी गई है।</p>
<p>अकोला ज़िले के पातूर स्थित 'शाहबाबू उर्दू शिक्षण संस्थान' को 17 जून, 2005 को अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान किया गया था। संविधान के अनुच्छेद 30 (1) के अनुसार, सभी धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान स्थापित करने और उनका प्रबंधन करने का अधिकार है। इसी बीच, शिक्षा अधिकारियों ने शाहबाबू उर्दू शिक्षण संस्थान में तीन जूनियर क्लर्कों की नियुक्ति को मंज़ूरी देने और उन्हें 'शालार्थ आईडी' जारी करने से इनकार कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 12:02:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी कानून का हो रहा उल्लंघन, फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स का दावा- सालाना रिपोर्ट नहीं हो रही जारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलेपमेंट) एक्ट 2016 के तहत राज्य स्तरीय रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी नए घर खरीदने वाले लोगों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है। यह बिल्डर और ग्राहक के बीच पारदर्शिता लाने का काम करती है, लेकिन अब यह बॉडी खुद ही गंभीर आरोपों का सामना कर रही है। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47749/mumbai-real-estate-regulatory-authority-act-is-being-violated-forum"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-15t111504.591.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलेपमेंट) एक्ट 2016 के तहत राज्य स्तरीय रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी नए घर खरीदने वाले लोगों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है। यह बिल्डर और ग्राहक के बीच पारदर्शिता लाने का काम करती है, लेकिन अब यह बॉडी खुद ही गंभीर आरोपों का सामना कर रही है। </p>
<p> </p>
<p><strong>75 फीसदी राज्यों ने जारी नहीं की वार्षिक रिपोर्ट: फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स  </strong><br />घर खरीदने वाले लोगों के एक संगठन फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स  का दावा है कि देश के 75 फीसदी राज्यों में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने वार्षिक रिपोर्ट जारी नहीं की है। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट या तो आज तक जारी ही नहीं हुई, या सालों पर पहले इनके रिपोर्टों के प्रकाशनों को बंद कर दिया गया।</p>
<p><strong>वार्षिक रिपोर्ट जारी करना अनिवार्य</strong><br />फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स   की ओर से जारी एक स्टेटस रिपोर्ट (21 आरईआरए पर आधारित, 13 फरवरी 2026 तक) के अनुसार, रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट की धारा 78 के तहत वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करना अनिवार्य है। इसके बावजूद आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के बार-बार निर्देशों की अनदेखी की जा रही है। </p>
<p><strong>यहां कभी जारी नहीं की रिपोर्ट</strong><br />फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स  ने कहा कि देश के सात प्रमुख राज्य कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गोवा में रेरा लागू होने के बाद एक भी वार्षिक रिपोर्ट जारी नहीं की गई है, जबकि नौ ऐसे राज्य हैं जहां शुरुआत में तो रिपोर्ट जारी की गई, लेकिन अब वहां भी इसे बंद कर दिया गया है। 75% से अधिक राज्यों में रेरा ने अपने दायित्वों से पल्ला झाड़ लिया है।</p>
<p>फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स के अध्यक्ष अभय उपाध्याय ने कहा, "रेरा लागू होने के बाद सेक्टर में डिलीवरी, निष्पक्षता और वादों की पूर्ति में सुधार हुआ है, इसका विश्वसनीय डेटा उपलब्ध नहीं होने से हम अंधेरे में तीर चला रहे हैं। जब रेगुलेटर खुद कानून का पालन नहीं करते, तो वे अन्य पक्षों से अनुपालन की मांग करने का नैतिक और कानूनी अधिकार खो देते हैं। इससे बिल्डर उत्साहित होते हैं और पूरा सिस्टम कमजोर पड़ता है। निर्दोष गृहक्रेता अब भी ठगे जा रहे हैं। </p>
<p>उन्होंने कहा कि रेरा की रिपोर्ट बिल्डर की विश्वसनीयता जांचने में मदद करता है। साथ ही, राज्य व केंद्र सरकारों को प्रभावी नीतियां बनाने, प्रोत्साहन योजनाएं तैयार करने व टैक्स फ्रेमवर्क विकसित करने में मदद करता है। संगठन ने सुझाव दिया है कि एक्ट में नई धारा जोड़कर केंद्र सरकार को अधिकार दिया जाए कि यदि निर्देशों की अवहेलना हो तो अथॉरिटी या उसके सदस्यों को हटाया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/47749/mumbai-real-estate-regulatory-authority-act-is-being-violated-forum</link>
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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 11:17:03 +0530</pubDate>
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