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                <title>Regulatory - Rokthok Lekhani</title>
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                <description>Regulatory RSS Feed</description>
                
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                <title>मुंबई : रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी कानून का हो रहा उल्लंघन, फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स का दावा- सालाना रिपोर्ट नहीं हो रही जारी</title>
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                        <![CDATA[<p>रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलेपमेंट) एक्ट 2016 के तहत राज्य स्तरीय रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी नए घर खरीदने वाले लोगों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है। यह बिल्डर और ग्राहक के बीच पारदर्शिता लाने का काम करती है, लेकिन अब यह बॉडी खुद ही गंभीर आरोपों का सामना कर रही है। </p>
<p> </p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47749/mumbai-real-estate-regulatory-authority-act-is-being-violated-forum"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-15t111504.591.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलेपमेंट) एक्ट 2016 के तहत राज्य स्तरीय रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी नए घर खरीदने वाले लोगों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है। यह बिल्डर और ग्राहक के बीच पारदर्शिता लाने का काम करती है, लेकिन अब यह बॉडी खुद ही गंभीर आरोपों का सामना कर रही है। </p>
<p> </p>
<p><strong>75 फीसदी राज्यों ने जारी नहीं की वार्षिक रिपोर्ट: फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स  </strong><br />घर खरीदने वाले लोगों के एक संगठन फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स  का दावा है कि देश के 75 फीसदी राज्यों में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने वार्षिक रिपोर्ट जारी नहीं की है। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट या तो आज तक जारी ही नहीं हुई, या सालों पर पहले इनके रिपोर्टों के प्रकाशनों को बंद कर दिया गया।</p>
<p><strong>वार्षिक रिपोर्ट जारी करना अनिवार्य</strong><br />फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स   की ओर से जारी एक स्टेटस रिपोर्ट (21 आरईआरए पर आधारित, 13 फरवरी 2026 तक) के अनुसार, रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट की धारा 78 के तहत वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करना अनिवार्य है। इसके बावजूद आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के बार-बार निर्देशों की अनदेखी की जा रही है। </p>
<p><strong>यहां कभी जारी नहीं की रिपोर्ट</strong><br />फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स  ने कहा कि देश के सात प्रमुख राज्य कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और गोवा में रेरा लागू होने के बाद एक भी वार्षिक रिपोर्ट जारी नहीं की गई है, जबकि नौ ऐसे राज्य हैं जहां शुरुआत में तो रिपोर्ट जारी की गई, लेकिन अब वहां भी इसे बंद कर दिया गया है। 75% से अधिक राज्यों में रेरा ने अपने दायित्वों से पल्ला झाड़ लिया है।</p>
<p>फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स के अध्यक्ष अभय उपाध्याय ने कहा, "रेरा लागू होने के बाद सेक्टर में डिलीवरी, निष्पक्षता और वादों की पूर्ति में सुधार हुआ है, इसका विश्वसनीय डेटा उपलब्ध नहीं होने से हम अंधेरे में तीर चला रहे हैं। जब रेगुलेटर खुद कानून का पालन नहीं करते, तो वे अन्य पक्षों से अनुपालन की मांग करने का नैतिक और कानूनी अधिकार खो देते हैं। इससे बिल्डर उत्साहित होते हैं और पूरा सिस्टम कमजोर पड़ता है। निर्दोष गृहक्रेता अब भी ठगे जा रहे हैं। </p>
<p>उन्होंने कहा कि रेरा की रिपोर्ट बिल्डर की विश्वसनीयता जांचने में मदद करता है। साथ ही, राज्य व केंद्र सरकारों को प्रभावी नीतियां बनाने, प्रोत्साहन योजनाएं तैयार करने व टैक्स फ्रेमवर्क विकसित करने में मदद करता है। संगठन ने सुझाव दिया है कि एक्ट में नई धारा जोड़कर केंद्र सरकार को अधिकार दिया जाए कि यदि निर्देशों की अवहेलना हो तो अथॉरिटी या उसके सदस्यों को हटाया जा सके।</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 11:17:03 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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                <title>महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने परियोजना की समय सीमा बढ़ा दी</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">यदि कोई निश्चित आवास परियोजना एक वर्ष की विस्तारित समय सीमा को पूरा करने में विफल रहती है, तो डेवलपर को घर खरीदारों से 51% सहमति प्राप्त करने के बाद ही एक और अतिरिक्त समय के लिए फाइल करने की अनुमति दी जाती है।यद्यपि घर खरीदार अपनी सहमति प्रदान करते हैं, रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 के तहत उनके अधिकार कमजोर नहीं होते हैं।</p>]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/29179/maharashtra-real-estate-regulatory-authority-extends-project-deadline"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-03/images2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई:</strong> महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (महारेरा) केवल घर खरीदार के हितों की रक्षा के लिए और डेवलपर पर कुछ शर्तों के साथ किसी भी आवास परियोजना की समय सीमा बढ़ाने की अनुमति देता है।भले ही परियोजना की समय सीमा बढ़ा दी गई हो, घर खरीदार के अधिकार बरकरार रहेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि किसी फ्लैट खरीदार को निर्धारित समय सीमा के अनुसार कब्जा नहीं मिलता है, तो वह नियमों के अनुसार महारेरा में जा सकता है। यदि रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 का कोई उल्लंघन होता है, तो आवास नियामक के पास जाना घर खरीदार का अधिकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि कोई निश्चित आवास परियोजना एक वर्ष की विस्तारित समय सीमा को पूरा करने में विफल रहती है, तो डेवलपर को घर खरीदारों से 51% सहमति प्राप्त करने के बाद ही एक और अतिरिक्त समय के लिए फाइल करने की अनुमति दी जाती है।यद्यपि घर खरीदार अपनी सहमति प्रदान करते हैं, रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 के तहत उनके अधिकार कमजोर नहीं होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़ित फ्लैट खरीदार पहले से दायर याचिका पर निष्पक्ष सुनवाई जारी रख सकता है या परियोजना/डेवलपर के खिलाफ महारेरा में जाने का इरादा रखता है।ऐसे परिदृश्य में यदि कोई डेवलपर घर खरीदारों की 51% सहमति हासिल करने में विफल रहता है, तो महारेरा के पास परियोजना को सशर्त विस्तार देने का अधिकार है, जो एक वर्ष से अधिक समय से रुका हुआ था। महारेरा का एकमात्र उद्देश्य घर खरीदार के हितों की रक्षा करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">देरी के कारणों और विस्तारित समय के दौरान परियोजना को पूरा करने के लिए डेवलपर द्वारा किए गए प्रयासों की जांच करने के बाद विस्तार दिया जाता है। उचित सुनवाई के बाद और परियोजना के पूरा होने को सुनिश्चित करने के लिए शर्तें लगाकर विस्तार दिया गया है।घर खरीदने वाले आमतौर पर घर खरीदने के लिए अपने जीवन की सारी बचत लगा देते हैं और इसे लेकर वे भावुक भी होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ लोगों की शिकायत है कि महारेरा उनकी शिकायतों के बावजूद परियोजनाओं को विस्तार देता है। मैं स्पष्ट रूप से दोहराना चाहूंगा, महारेरा रुके हुए प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए ऐसे सभी प्रस्तावों और उचित शर्तों की सख्त जांच के बाद ही विस्तार देता है। महारेरा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवासीय परियोजना किसी भी परिस्थिति में पूरी हो और घर खरीदने वालों को उनका उचित आश्रय मिले। विस्तार की मंजूरी सशर्त है और घर खरीदारों के सभी अधिकार बरकरार रहेंगे।</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Mar 2024 10:34:16 +0530</pubDate>
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