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                <title>discovered - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title> कोलाबा : 108 साल पुराने ओलंपिया कॉफी हाउस का लाइसेंस सस्पेंड... किचन में यूरिनल, फ्रिज में मीट का खून और कॉकरोच भी मिले</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">कोलाबा स्थित रेस्टोरेंट की जांच में सफाई और खाने के रखरखाव से जुड़ी कई गंभीर कमियां मिलीं। FDA के मुताबिक, फूड स्टोरेज एरिया और किचन में यूरिनल मिला। यहां कॉकरोच और मक्खियां भी पाई गईं। फ्रिज में मांस का खून मिला। कच्चे वेज और नॉनवेज खाने को अलग रखने की उचित व्यवस्था भी नहीं थी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51873/colaba-license-of-108-year-old-olympia-coffee-house-suspended"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/1111.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई : </strong>मुंबई के मशहूर 108 साल पुराने ओलंपिया कॉफी हाउस का फूड लाइसेंस महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने सस्पेंड कर दिया है। 16 सितंबर को ग्राहक की शिकायत के बाद FDA की टीम ने ओलंपिया कॉफी हाउस का निरीक्षण किया। कोलाबा स्थित रेस्टोरेंट की जांच में सफाई और खाने के रखरखाव से जुड़ी कई गंभीर कमियां मिलीं। FDA के मुताबिक, फूड स्टोरेज एरिया और किचन में यूरिनल मिला। यहां कॉकरोच और मक्खियां भी पाई गईं। फ्रिज में मांस का खून मिला। कच्चे वेज और नॉनवेज खाने को अलग रखने की उचित व्यवस्था भी नहीं थी।<br /><br />जांच में खाना फर्श पर रखना, गंदे पानी का इस्तेमाल और अस्वच्छ तरीके से खाना बनाने जैसी कमियां मिलीं। बर्तन धोने की जगह गंदी थी और खाना काटने वाले लकड़ी के चॉपिंग बोर्ड भी खराब हालत में थे। कर्मचारियों के लिए जरूरी सुरक्षात्मक कपड़े भी नहीं मिले। FDA के मुताबिक, रेस्टोरेंट में 35 फूड हैंडलर काम करते हैं। इनमें 34 ने जरूरी फूड सेफ्टी ट्रेनिंग नहीं ली थी।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच में पानी की अनिवार्य रिपोर्ट और सैनिटेशन रिकॉर्ड भी नहीं मिले। इन कमियों के चलते FDA ने फूड लाइसेंस तत्काल सस्पेंड कर दिया। लाइसेंस बहाल होने तक रेस्टोरेंट खाना खरीद, बना, स्टोर, बेच या बांट नहीं सकता। कमियां दूर करने और FDA की दोबारा जांच के बाद ही आगे फैसला होगा।<br /><br />1918 में शुरू हुआ ओलंपिया कॉफी हाउस मुंबई के पुराने चर्चित कैफे में शामिल है। इस साल जुलाई में हॉलीवुड अभिनेता टॉम हॉलैंड और मैट डेमन के साथ फिल्ममेकर क्रिस्टोफर नोलन भी यहां पहुंचे थे।<br /><br />महाराष्ट्र FDA ने मुंबई के मिलन पंजाब, सद्गुरु स्वीट्स, विश्वास स्वीट्स एंड स्नैक्स, ब्लिंक कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड और ए-1 जनरल एंड ड्राय फ्रूट्स समेत कई प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किए हैं। पुणे के 4 और नागपुर के 2 रेस्टोरेंट पर भी कार्रवाई हुई है। FDA ने मुंबई सेंट्रल स्थित नायर अस्पताल की कैंटीन का लाइसेंस भी तत्काल सस्पेंड किया है। जांच में फूड सेफ्टी और हाइजीन नियमों का उल्लंघन मिला। FDA के अनुसार, मरीजों और आम लोगों की सुरक्षा को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। कैंटीन के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई जारी है।<br /><br />त्योहारों से पहले FDA ने खाद्य पदार्थों की जांच बढ़ा दी है। विभाग के अनुसार, राज्यभर में 2,813 किलो दूध और डेयरी उत्पाद जब्त किए गए, जिनकी कीमत करीब 7.38 लाख रुपए थी। मुंबई में 479 किलो खुला खोया और 958 किलो मीठा मावा जब्त किया गया। इन्हें अस्वच्छ हालत में ले जा रहे वाहन को भी जब्त किया गया। पालघर में 174 किलो मीठा मावा भी जब्त हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 11:46:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>टाटा इंस्टिट्यूट ने खोजा इलाज... दूसरी बार कैंसर होने से रोकेगी टैबलेट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">टाटा मेमोरियल सेंटर के पूर्व निदेशक डॉ. राजेंद्र बडवे ने बताया कि कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने की दिशा में अधिक शोध की जरूरत है। डॉ. मित्रा के शोध से दुनियाभर में कैंसर ट्रीटमेंट को और भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। टाटा मेमोरियल सेंटर के उपनिदेशक सेंटर फॉर कैंसर एपिडीमिलॉजी डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने बताया कि समस्या की जड़ का पता लगाने के साथ-साथ उसका निवारण भी उतना ही जरूरी है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/28995/tata-institute-discovered-the-cure----the-tablet-will-prevent-cancer-from-occurring-for-the-second-time"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-02/download-(8)7.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई:</strong> कैंसर के ट्रीटमेंट के बाद भी कई मरीजों में यह वापस फैल जाता है। टाटा अस्पताल के डॉक्टरों ने अध्ययन कर इसका कारण खोजा है। टाटा अस्पताल के खारघर स्थित एडवांस सेंटर फॉर ट्रीटमेंट, रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर (एक्ट्रेक) अस्पताल के डॉ. इंद्रनील मित्रा के नेतृत्व में शोध किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि हमने चूहों पर शोध किया है। चूहों में मनुष्य के कैंसर सेल डाले गए। जिसके बाद उनमें ट्यूमर निर्माण हुआ। हमने रेडिएशन थेरेपी, कीमो थेरेपी और सर्जरी के जरिए उनका इलाज किया। इसके बाद कैंसर सेल्स नष्ट होकर उनके बहुत छोटे-छोटे टुकड़े हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मरते हुए कैंसर सेल में से क्रोमेटिन कण (क्रोमोजोन के टुकड़े) रक्त वाहिनी के जरिए शरीर के दूसरे हिस्से में पहुंच जाते हैं। ये शरीर में मौजूद अच्छे सेल्स में मिल जाते हैं और उन्हें भी कैंसर सेल में तब्दील कर देते हैं। इस शोध से यह स्पष्ट हो गया है कि कैंसर सेल नष्ट होने बावजूद वापस आ जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">समस्या का हल खोजने के लिए डॉक्टरों ने चूहों को रेसवेरेट्रॉल और कॉपर (तांबा) के संयुक्त प्रो-ऑक्सिडेंट टैबलेट दी। यह टैबलेट क्रोमोजोन को बेअसर करने में असरदार रही। करीब एक दशक से टाटा के डॉक्टर्स इस पर शोध कर रहे हैं। इस टैबलेट को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया से मंजूरी का इंतजार है। <br /><br />टाटा मेमोरियल सेंटर के पूर्व निदेशक डॉ. राजेंद्र बडवे ने बताया कि कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने की दिशा में अधिक शोध की जरूरत है। डॉ. मित्रा के शोध से दुनियाभर में कैंसर ट्रीटमेंट को और भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। टाटा मेमोरियल सेंटर के उपनिदेशक सेंटर फॉर कैंसर एपिडीमिलॉजी डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने बताया कि समस्या की जड़ का पता लगाने के साथ-साथ उसका निवारण भी उतना ही जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कॉपर- रेसवेरेट्रॉल के एक घरेलू नुस्खा है। कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने और इलाज के दौरान होने वाले दुष्परिणामों को कम करने में भी मददगार साबित होता है। रेसवेरेट्रॉल अंगूर, बेरीज के छिलके सहित अन्य पदार्थों से मिलता है। कई खाद्य पदार्थों से भी कॉपर मिलता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>साइड इफेक्ट को कम करता है</strong></p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">टाटा के बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. नवीन खत्री के अनुसार इलाज के दौरान मरीज के मुंह में छाले पड़ जाते हैं, कॉपर- रेसवेरेट्रॉल के सेवन से इस तकलीफ से काफी राहत मिलती है।</li>
<li style="text-align:justify;">मुंह के कैंसर की कोशिकाओं की आक्रामकता को कॉपर- रेसवेरेट्रॉल का टैबलेट देने के बाद कैंसर सेल की तीव्रता कम हो गई।</li>
<li style="text-align:justify;">पेट से संबंधित कैंसर मरीजों के इलाज के दौरान हाथ और पांव की स्किन छूटने के साइड इफेक्ट को भी कम करने में इससे मदद मिलती है।</li>
<li style="text-align:justify;">ब्रेन ट्यूमर के मरीजों में भी कॉपर- रेसवेरेट्रॉल के सेवन से बेहतर परिणाम मिले हैं।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Feb 2024 10:40:53 +0530</pubDate>
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