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                <title>win - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>उत्तर प्रदेश की उन्नाव सदर विधानसभा सीट: बीजेपी और सपा का दबदबा...  क्या कांग्रेस कभी जीत पाएगी?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">सपा की बात करें तो सपा इस सीट से पांच बार चुनाव जीत चुकी है जिसमें 1993, 1996, 2000 फिर 2007 और 2012 में इस सीट से सपा के प्रत्याशी यहां से चुनाव जीतकर विधानसभा तक पहुंचे। बसपा की बात करें तो इस सीट पर वह मात्र एक बार ही चुनाव जीत पाई 2002 में बीएसपी के टिकट पर कुलदीप सिंह सेंगर पहली बार यहां से विधायक चुने गए। इस प्रकार देखा जाए तो इस सीट से चार बार कांग्रेस, पांच बार समाजवादी पार्टी और तीन बार बीजेपी यहां से चुनाव जीती।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49320/unnao-sadar-assembly-seat-of-uttar-pradesh-is-dominated-by"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/dfdsfe.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>उन्नाव:</strong> उत्तर प्रदेश की उन्नाव सदर एक ऐसी विधानसभा है, जहां पर कांग्रेस लंबे समय से हासिए पर है। हाल यह है की पिछले 6 दशक से उसका खाता नहीं खुल सका। कभी सपा का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर वर्तमान में बीजेपी का कब्जा है। यहां बता दें की इस विधानसभा के वोटरों ने किसी भी राजनैतिक दल को निराश नहीं किया है और लगभग सभी प्रमुख दलों को एक बार चुनाव जीतने का मौका दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्नाव जिले में विधानसभा की कुल 6 सीट है, उनमें से एक उन्नाव सदर विधानसभा है। इस विधानसभा से कांग्रेस के टिकट पर 1952 में लीलाधर अस्थाना पहली बार विधायक बने वह कांग्रेस पार्टी से ही थे।1957 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से खजान सिंह इसके बाद 1962 और 1967 में कांग्रेस के टिकट पर जियाउर रहमान विधायक बने।<br /><br />1967 के चुनाव के बाद से कांग्रेस का इस सीट से खाता नहीं खुला। इसके बाद यह सीट भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, जनता पार्टी सेकुलर, फिर लोक दल और जनता दल के खाते में गई।<br />चार बार बीजेपी के खाते में गई यह सीट<br />1991 में भारतीय जनता पार्टी के शिवपाल सिंह इस सीट से विधायक चुने गए और बीजेपी का खाता खुला। इसके बाद 24 साल बाद 2014 में हुआ उप चुनाव बीजेपी के खाते में गया फिर 2017 और 2022 में बीजेपी के उम्मीदवार यहां से चुनाव जीते।<br /><br />सपा की बात करें तो सपा इस सीट से पांच बार चुनाव जीत चुकी है जिसमें 1993, 1996, 2000 फिर 2007 और 2012 में इस सीट से सपा के प्रत्याशी यहां से चुनाव जीतकर विधानसभा तक पहुंचे।<br /><br />बसपा की बात करें तो इस सीट पर वह मात्र एक बार ही चुनाव जीत पाई 2002 में बीएसपी के टिकट पर कुलदीप सिंह सेंगर पहली बार यहां से विधायक चुने गए। इस प्रकार देखा जाए तो इस सीट से चार बार कांग्रेस, पांच बार समाजवादी पार्टी और तीन बार बीजेपी यहां से चुनाव जीती।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 13:51:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई-बेंगलुरु को पछाड़कर इस शहर के हवाईअड्डे ने जीता ‘बेस्ट एयरपोर्ट ऑफ द ईयर’ का खिताब, लिस्ट में बिहार भी शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>हैदराबाद में आयोजित विंग्स इंडिया 2026 ने इस बार भारतीय एविएशन सेक्टर की बदलती तस्वीर को पूरी तरह उजागर कर दिया। देश के सबसे बड़े और चर्चित महानगरों मुंबई और बेंगलुरु को पीछे छोड़ते हुए दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने ‘बेस्ट एयरपोर्ट ऑफ द ईयर’ का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम कर लिया। इस मंच से न सिर्फ बड़े एयरपोर्ट्स और एयरलाइंस को पहचान मिली, बल्कि उन राज्यों और क्षेत्रों को भी सम्मानित किया गया, जो अब तक एविएशन के मामले में पीछे माने जाते थे। खास बात यह रही कि बिहार का नाम भी अवॉर्ड पाने वाले राज्यों की लिस्ट में शामिल हुआ।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47344/this-citys-airport-won-the-title-of-best-airport-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-30t115622.683.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>हैदराबाद में आयोजित विंग्स इंडिया 2026 ने इस बार भारतीय एविएशन सेक्टर की बदलती तस्वीर को पूरी तरह उजागर कर दिया। देश के सबसे बड़े और चर्चित महानगरों मुंबई और बेंगलुरु को पीछे छोड़ते हुए दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने ‘बेस्ट एयरपोर्ट ऑफ द ईयर’ का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम कर लिया। इस मंच से न सिर्फ बड़े एयरपोर्ट्स और एयरलाइंस को पहचान मिली, बल्कि उन राज्यों और क्षेत्रों को भी सम्मानित किया गया, जो अब तक एविएशन के मामले में पीछे माने जाते थे। खास बात यह रही कि बिहार का नाम भी अवॉर्ड पाने वाले राज्यों की लिस्ट में शामिल हुआ।</p>
<p> </p>
<p><strong>दिल्ली एयरपोर्ट बना देश का सर्वश्रेष्ठ हवाईअड्डा</strong><br />विंग्स इंडिया 2026 के अवॉर्ड्स में दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड को ‘बेस्ट एयरपोर्ट ऑफ द ईयर’ चुना गया। बेहतर यात्री सुविधाएं, टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, सस्टेनेबिलिटी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के दम पर दिल्ली एयरपोर्ट ने यह उपलब्धि हासिल की। वहीं, सालाना 25 मिलियन से ज्यादा यात्रियों को संभालने वाली कैटेगरी में केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बेंगलुरु को बेस्ट एयरपोर्ट का खिताब मिला। </p>
<p><strong>अलग-अलग कैटेगरी में इन एयरपोर्ट्स ने मारी बाजी</strong><br />यात्रियों की संख्या के आधार पर भी कई एयरपोर्ट्स को सम्मान मिला।<br />10 से 25 मिलियन पैसेंजर प्रति वर्ष की कैटेगरी में पुणे एयरपोर्ट को टॉप अवॉर्ड मिला।<br />5 से 10 मिलियन पैसेंजर सेगमेंट में लखनऊ इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बेस्ट एयरपोर्ट चुना गया।<br />5 मिलियन से कम यात्रियों वाली कैटेगरी में वीर सावरकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पोर्ट ब्लेयर ने बाज़ी मारी।<br />वहीं, ईटानगर का होलांगी एयरपोर्ट RCS-UDAN स्कीम के तहत बेस्ट एयरपोर्ट बना।</p>
<p><strong>एयरलाइंस और कनेक्टिविटी को भी मिली पहचान</strong><br />एयरलाइंस की बात करें तो इंडिगो को बेस्ट एविएशन सर्विस प्रोवाइडर का अवॉर्ड मिला। एयर इंडिया एक्सप्रेस को डोमेस्टिक कनेक्टिविटी और स्टार एयर को रीजनल/UDAN कनेक्टिविटी के लिए सम्मानित किया गया। वहीं HAL को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए विशेष अवॉर्ड दिया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:57:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : मतदान से पहले नगर निगम चुनावों में भाजपा के 6 उम्मीदवार जीते</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के चुनावों के लिए नामांकन पत्रों की जांच पूरी हो गई। मतदान से पहले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को शुरुआती सफलता मिली, उसके छह उम्मीदवार बिना मुकाबले ही जीत गए। इससे भाजपा चुनाव में उतरने से पहले ही मजबूत स्थिति में पहुंच गई है। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में भाजपा ने बिना मुकाबले तीनों सीटों पर जीत हासिल कर हैट्रिक पूरी की। वार्ड 18-ए (ओबीसी आरक्षित) से रेखा चौधरी बिना मुकाबले चुनी गईं। वह भाजपा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष और अनुभवी पार्षद हैं और इस वार्ड से एकमात्र उम्मीदवार थीं। वार्ड 26-सी से पहली बार चुनाव लड़ रही आरएसएस से जुड़े परिवार की आसवरी नवरे भी बिना मुकाबले जीत गईं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46639/6-bjp-candidates-won-in-municipal-elections-before-mumbai-voting"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/images-(50).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के चुनावों के लिए नामांकन पत्रों की जांच पूरी हो गई। मतदान से पहले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को शुरुआती सफलता मिली, उसके छह उम्मीदवार बिना मुकाबले ही जीत गए। इससे भाजपा चुनाव में उतरने से पहले ही मजबूत स्थिति में पहुंच गई है। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में भाजपा ने बिना मुकाबले तीनों सीटों पर जीत हासिल कर हैट्रिक पूरी की। वार्ड 18-ए (ओबीसी आरक्षित) से रेखा चौधरी बिना मुकाबले चुनी गईं। वह भाजपा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष और अनुभवी पार्षद हैं और इस वार्ड से एकमात्र उम्मीदवार थीं। वार्ड 26-सी से पहली बार चुनाव लड़ रही आरएसएस से जुड़े परिवार की आसवरी नवरे भी बिना मुकाबले जीत गईं।</p>
<p> </p>
<p>वार्ड 26-बी से रंजना पेरकर भी बिना मुकाबले चुनी गईं, जिससे भाजपा कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में तीनों शुरुआती जीतों से मजबूत हो गई है। भाजपा के राज्य अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने विजेताओं को बधाई दी और कहा कि पार्टी का खाता महिला नेताओं ने खोला। उन्होंने तीनों बिना मुकाबले चुने गए उम्मीदवारों और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच वीडियो कॉल भी करवाई। पनवेल नगर निगम में भाजपा के नितिन पाटिल बिना मुकाबले चुने गए। उनके एकमात्र प्रतिद्वंद्वी, किसान और मजदूर पार्टी के रोहन गावंड का नामांकन जाति प्रमाण पत्र गलत होने के कारण रद्द कर दिया गया। धुले नगर निगम में भी भाजपा ने दो सीटें बिना मुकाबले जीत लीं। एनसीपी (शरद पवार समूह) के शहर जिला अध्यक्ष रंजीत भोसले की पत्नी उज्ज्वला भोसले दो दिन पहले ही भाजपा में शामिल हो गईं। उनके विरोधी उम्मीदवारों के नामांकन रद्द होने के बाद उनकी जीत पक्की हो गई। वार्ड 6-बी से ज्योत्सना प्रफुल पटील भी बिना मुकाबले चुनी गईं।</p>
<p>ज्यादातर बिना मुकाबले जीतें तकनीकी कारणों से विरोधियों के नामांकन रद्द होने या आरक्षित वार्ड में कोई मुकाबला न होने के कारण हुईं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि हर सीट महत्वपूर्ण है, लेकिन बिना मुकाबले जीत का मतलब है कि जनता का भरोसा ज्यादा है और कुछ इलाकों में मजबूत विरोधी नहीं हैं। पार्टी नेताओं ने कहा कि शुरुआती सफलता ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया है। इस चुनाव में महायुति गठबंधन के अंदर मतभेद भी सामने आए हैं। भाजपा और शिवसेना (शिंदे समूह) मुंबई और ठाणे में सीट शेयरिंग कर रही हैं, लेकिन 29 नगर निगमों में से 24 में गठबंधन के बीच सहमति नहीं बन पाई। ऐसे में महायुति की तीन पार्टियां, भाजपा, शिंदे-शिवसेना और अजित पवार-एनसीपी, कई शहरों में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी।</p>
<p>जिन जिलों में ये पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ती नजर आएंगी, वे जलना, परभणी, लातूर, अमरावती, पिंपरी-चिंचवड़, छत्रपति संभाजीनगर, सोलापुर, अकोला, मालेगांव, नांदेड, नागपुर, सांगली, नासिक, धुले, पुणे, मुंबई, ठाणे, उल्हासनगर, नवी मुंबई, मीरा-भायंदर, भिवंडी और वसई-विरार हैं। भाजपा–एनसीपी (अजित पवार) गठबंधन सिर्फ अकोला, अहिल्यानगर और पनवेल में ही है। भाजपा–शिवसेना (शिंदे) गठबंधन केवल चंद्रपुर, नागपुर, मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और भिवंडी में है। इसके अलावा, महायुति की पार्टियां इचलकरंजी (फ्रेंडली फाइट), कोल्हापुर, जलगांव और पनवेल में भी सीधे मुकाबले में होंगी।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jan 2026 12:06:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिंदे गुट के प्रत्याशी की करतूत... जीत के लिए काले जादू का सहारा!</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">विधानसभा चुनाव में काले जादू का प्रयोग किया गया। इसका एक जीता जागता है उदाहरण रायगढ़ जिले के महाड विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला है। जहां मतदान प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही मतदान केंद्र के सामने तीन मटके, जिनके मुंह काले और लाल कपड़े से बंधे थे, उस पर काटे हुए नीबू और सिंदूर छिड़का हुआ मिला। सुबह-सुबह जब मतदाता मतदान के लिए निकले तो उसे देखकर अचंभित और भयभीत हो गए। माना जा रहा है कि यह काला जादू किसी प्रत्याशी की ओर से जीत हासिल करने के लिए किया गया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/35927/shinde-group-candidate-s-antics-resorted-to-black-magic-to-win"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-11/download-(7).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई : </strong>पुरानी कहावत है कि जंग और प्यार में सब कुछ जायज है, लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव में काले जादू का प्रयोग किया गया। इसका एक जीता जागता है उदाहरण रायगढ़ जिले के महाड विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला है। जहां मतदान प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही मतदान केंद्र के सामने तीन मटके, जिनके मुंह काले और लाल कपड़े से बंधे थे, उस पर काटे हुए नीबू और सिंदूर छिड़का हुआ मिला। सुबह-सुबह जब मतदाता मतदान के लिए निकले तो उसे देखकर अचंभित और भयभीत हो गए। माना जा रहा है कि यह काला जादू किसी प्रत्याशी की ओर से जीत हासिल करने के लिए किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों के अनुसार, इस काले जादू की शंका एकनाथ शिंदे गुट के प्रत्याशी भरत गोगावले पर जताई जा रही है। महाड के पास बिरवाड़ी शहर के मुख्य चौराहे पर एक सड़क के बीचोंबीच तीन मटके और नारियल रखे हुए मिले। इन मटकों का मुंह लाल और काले कपड़े से ढका हुआ था और नीचे नारियल और नींबू रखा गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसे देखकर स्थानीय लोग इसे भानमती या जादू-टोने का मामला मान रहे थे। इस घटना से ग्रामवासियों के बीच डर और गुस्से का माहौल था। माना जा रहा है कि मतदान को प्रभावित करने के उद्देश्य से किसी ने इस प्रकार का जादू-टोना किया होगा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर इन मटकों को हटाकर नष्ट कर दिया। ज्यादातर राजनीतिज्ञ और नेता अपने कर्म की बजाय ज्योतिष और कर्मकांड पर भरोसा करते हैं। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव में यह खुलकर दिख रहा है।<br /><br />इस बार महाड विधानसभा क्षेत्र में शिंदे गुट के भरत गोगावले और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की स्नेहल जगताप के बीच लड़ाई है। भरत गोगावले शिंदे गुट के नेता और एसटी महामंडल के अध्यक्ष हैं, उन्होंने इस क्षेत्र से लगातार तीन बार जीत हासिल की है, लेकिन इस बार मतदाता उनसे पीछा छुड़ाते नजर आए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Nov 2024 15:03:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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