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                <title>system - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई : मुंबईकरों को हल्के में लिया गया, सिर्फ़ कॉन्ट्रैक्ट पर ध्यान दिया गया; सिस्टम को निष्पक्ष बनाएँगे  - मेयर रितु तावड़े </title>
                                    <description><![CDATA[<p>बीएमसी की मेयर रितु तावड़े (53) ने कहा कि वह बीएमसी पर ठेकेदारों के एक गुट की पकड़ को तोड़ने के लिए दृढ़ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस ने बृहन्मुंबई नगर निगम में अपने कार्यकाल के दौरान मुंबईकरों को हल्के में लिया। ``उनका ध्यान कभी भी शासन पर नहीं था—उनका सारा ध्यान ठेकों पर था।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48600/mumbai-mumbaikars-were-taken-lightly-only-contract-was-considered-will"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-21t123045.994.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बीएमसी की मेयर रितु तावड़े (53) ने कहा कि वह बीएमसी पर ठेकेदारों के एक गुट की पकड़ को तोड़ने के लिए दृढ़ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस ने बृहन्मुंबई नगर निगम में अपने कार्यकाल के दौरान मुंबईकरों को हल्के में लिया। ``उनका ध्यान कभी भी शासन पर नहीं था—उनका सारा ध्यान ठेकों पर था। स्टैंडिंग कमेटी में इन पार्टियों के बीच आपसी समझ थी, जिसकी वजह से उन्हीं ठेकेदारों को बार-बार मौके मिलते रहे। हम इस गहरी जड़ें जमा चुके सिंडिकेट को तोड़ने, सिस्टम को खोलने और इसे निष्पक्ष बनाने के लिए दृढ़ हैं," उन्होंने जोर देकर कहा। इंटरव्यू के कुछ अंश:</p>
<p> </p>
<p>मेयर के तौर पर आपकी मुख्य चुनौतियां क्या रही हैं? शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस ने अपने कार्यकाल के दौरान मुंबईकरों को हल्के में लिया। उनकी प्राथमिकता कभी भी शासन नहीं थी—उनकी प्राथमिकता ठेके, टेंडर और पर्दे के पीछे की आपसी समझ थी। नतीजतन, 2014 से कई ज़रूरी नागरिक मुद्दे अटके पड़े हैं, जिन्हें अब मैं सुलझाने का काम कर रही हूं। हालांकि मेयर को पहला नागरिक कहा जाता है, लेकिन मैं खुद को मुंबईकरों का पहला ``सेवक" मानती हूं। मेरी सबसे बड़ी चुनौती—और ज़िम्मेदारी—मुंबई को वैसा बनाना है, जिसके उसके नागरिक सचमुच हकदार हैं।</p>
<p><br />मुंबई को चार साल बाद मेयर मिला है, इसलिए नागरिकों को आपसे बहुत उम्मीदें हैं। हर दिन कई लोग बहुत उम्मीद लेकर आपसे मिलने आते हैं। आपका अनुभव कैसा रहा है? जिस दिन से, यानी 11 फरवरी को मैंने पद संभाला, उसी दिन से मैंने यह तय कर लिया था कि जो भी लोग मेरे ऑफिस आएंगे, मैं उन सभी से मिलूंगी। मैं रोज़ाना अपने केबिन में 200 से 250 नागरिकों से खुद बातचीत करती हूं, और जब तक लाइन में खड़े आखिरी व्यक्ति की बात नहीं सुन लेती, तब तक अपनी जगह से नहीं उठती। पहले नागरिकों को इस तरह की पहुंच नहीं दी जाती थी—कई लोगों को तो अपनी शिकायतें लेकर मेयर के ऑफिस में कदम रखने की भी इजाज़त नहीं थी। मैंने इस स्थिति को बदल दिया है। मैं हर मुद्दे को सुनती हूं और जहां भी मुमकिन होता है, संबंधित अधिकारियों को सीधे फोन करके मौके पर ही उसका समाधान कर देती हूं। आज लोग तुरंत नतीजे देख रहे हैं, और यह बात कि मैं काम करवा सकती हूं, लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। इसलिए, ज़्यादा से ज़्यादा मुंबईकर इस भरोसे के साथ आगे आ रहे हैं कि आखिरकार उनकी आवाज़ सुनी जाएगी। जब आपने पदभार संभाला, तो आपने 100-दिन की कार्ययोजना की घोषणा की थी। अब तक क्या काम हुआ है?</p>
<p><br />बीएमसी में हमने जिन 21 मुख्य मुद्दों को अपने एजेंडा में शामिल किया था, उनमें से कई मुद्दे पहले ही सुलझा लिए गए हैं, और बाकी मुद्दों पर तेज़ी से काम चल रहा है। पूरी तरह से पारदर्शिता लाने के लिए, हमने यह फ़ैसला किया है कि इस साल से, कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को बांटे जाने वाले सभी 27 शैक्षणिक सामानों की खरीद 'गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस' के ज़रिए की जाएगी। यह पहले की टेंडर-आधारित व्यवस्था की जगह लेगा, जिसमें अनियमितताओं की गुंजाइश रहती थी। हमने मुंबई के लिए 365-दिन का सफ़ाई अभियान भी शुरू किया है, जिसमें नागरिकों, पार्षदों, अस्पतालों और स्कूलों को शामिल करके इसे सचमुच एक 'जन-आंदोलन' बनाया गया है। साफ़-सुथरी सोसाइटियां अपने काम को बीएमसी पोर्टल पर अपलोड कर सकती हैं और 10 लाख रुपये से लेकर 25 लाख रुपये तक की इनामी राशि जीत सकती हैं। जो पार्षद यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके वार्ड कूड़ेदान-मुक्त रहें, उन्हें नागरिक बुनियादी ढांचे को और मज़बूत करने के लिए 1 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि मिलेगी। गाद निकालने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, हमने 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी - बॉम्बे' द्वारा 'थर्ड-पार्टी ऑडिट' अनिवार्य कर दिया है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—पारदर्शिता, जन-भागीदारी और ज़मीनी स्तर पर दिखाई देने वाले परिणाम।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 12:33:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : लिफ्ट निरीक्षण प्रणाली को किया जाएगा मजबूत, 519 नए पद किए जाएंगे सृजित</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार आपात स्थिति से लोगों को जल्दी बाहर निकालने के लिए लिफ्ट जांच प्रणाली को और बेहतर बनाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य में इस समय करीब 2.10 लाख लिफ्ट चल रही हैं और हाल ही में 25,000 नई लिफ्ट को मंजूरी दी गई है। अभी कम कर्मचारी सभी लिफ्टों की जांच करते हैं, इसलिए सरकार ने 519 नए पद बनाने का फैसला किया है, लेकिन लिफ्टों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भविष्य में ये पद भी कम पड़ सकते हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48192/mumbai-lift-inspection-system-will-be-strengthened-519-new-posts"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-05t095824.576.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार आपात स्थिति से लोगों को जल्दी बाहर निकालने के लिए लिफ्ट जांच प्रणाली को और बेहतर बनाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य में इस समय करीब 2.10 लाख लिफ्ट चल रही हैं और हाल ही में 25,000 नई लिफ्ट को मंजूरी दी गई है। अभी कम कर्मचारी सभी लिफ्टों की जांच करते हैं, इसलिए सरकार ने 519 नए पद बनाने का फैसला किया है, लेकिन लिफ्टों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भविष्य में ये पद भी कम पड़ सकते हैं।</p>
<p> </p>
<p>वे सदस्यों निरंजन दावखरे और सचिन आहिर द्वारा हाउसिंग सोसायटियों में इमरजेंसी लिफ्ट के रखरखाव और मरम्मत पर पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार राज्य में इमरजेंसी लिफ्ट जांच व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए बड़े सुधार करेगी। उन्होंने कहा कि मुंबई में लागू अग्नि सुरक्षा की मान्यता प्राप्त थर्ड पार्टी ऑडिट प्रणाली की तरह, लिफ्ट जांच के लिए भी अधिकृत और मान्यता प्राप्त थर्ड पार्टी सिस्टम बनाया जाएगा।इस व्यवस्था के तहत तकनीकी जांच कराना और लिफ्ट के अंदर वैध जांच प्रमाणपत्र लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही, लिफ्ट में यह साफ लिखा होगा कि उसकी जांच कब हुई और प्रमाणपत्र कितने समय तक मान्य है।</p>
<p>सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि लिफ्ट जांच से जुड़े अधिकारियों को अधिक अधिकार देने के लिए मौजूदा बजट सत्र में विधानसभा में एक विधेयक पेश किया गया है। भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसमें और बदलाव किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि लिफ्ट के रखरखाव के मानक, जांच की आवृत्ति, तकनीकी नियम और लिफ्ट बनाने वाली कंपनियों की जिम्मेदारियां तय करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी। इस समिति में बृहन्मुंबई नगर निगम के आयुक्त, अन्य नगर निगमों के आयुक्त और बिजली विभाग के अधिकारी शामिल होंगे।</p>
<p>छह महीने के भीतर लिफ्ट जांच के लिए नई मानक कार्यप्रणाली तैयार की जाएगी। एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने निजी साहूकारों और माइक्रोफाइनेंस के बारे में कहा कि राज्य में दो तरह के साहूकार हैं, लाइसेंसधारी और अवैध। अवैध साहूकारों द्वारा दिया गया कोई भी कर्ज गैरकानूनी है। ऐसे मामलों में लोग बेझिझक शिकायत कर सकते हैं और सरकार उनका साथ देगी। उन्होंने कहा कि यदि लाइसेंसधारी साहूकार तय दर से ज्यादा ब्याज वसूलते हैं या नियमों का उल्लंघन करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ने पर उनका लाइसेंस रद्द कर आपराधिक मामला भी दर्ज किया जाएगा और पीड़ित लोगों को पूरी राहत दी जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 09:59:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई कलेक्टर बनते ही बदल डाला सिस्टम, मॉर्डन सेतु को लेकर चर्चा में आईएएस सौरभ कटियार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले साल मई में आठ आईएएस ऑफिसर्स का तबादला किया था। तब 2016 बैच के अधिकारी सौरभ कटियार को अमरावती से बुलाकर मुंबई उपनगर जिले का कलेक्टर बनाया था। महाराष्ट्र के युवा आईएएस में शामिल सौरभ कटियार ने सीएम फडणवीस की उम्मीद के अनुसार 9 महीने जिले के सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है। सौरभ कटियार ने मॉडर्न गवर्नेंस के तहत 'मॉडर्न सेतु' इनीशिएटिव शुरू किया है। यह एक कॉम्प्रिहेंसिव सर्विस डिलीवरी इकोसिस्टम है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47755/ias-saurabh-katiyar-in-discussion-about-modern-bridge-changed-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-15t173054.477.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले साल मई में आठ आईएएस ऑफिसर्स का तबादला किया था। तब 2016 बैच के अधिकारी सौरभ कटियार को अमरावती से बुलाकर मुंबई उपनगर जिले का कलेक्टर बनाया था। महाराष्ट्र के युवा आईएएस में शामिल सौरभ कटियार ने सीएम फडणवीस की उम्मीद के अनुसार 9 महीने जिले के सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है। सौरभ कटियार ने मॉडर्न गवर्नेंस के तहत 'मॉडर्न सेतु' इनीशिएटिव शुरू किया है। यह एक कॉम्प्रिहेंसिव सर्विस डिलीवरी इकोसिस्टम है। जिसे ट्रेडिशनल ऑफिस सिस्टम को हाई-परफॉर्मेंस गवर्नेंस मॉडल में मॉडर्न बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। कटियार की इस पहल से लोगों को काफी सहूलियत हो रही है, उनका समय भी बच रहा है। उनकी इस पहल की काफी सराहना भी हो रही है।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div><strong>'मॉडर्न गवर्नेंस' के लिए मॉडर्न सेतु</strong></div>
<div>मुंबई सबअर्बन जिला सबसे ज्यादा आबादी वाले जिलों में से एक है। यह फाइनेंशियल कैपिटल का एक अहम हिस्सा है। हर दिन लाखों नागरिक सर्टिफिकेट, डॉक्यूमेंट और जरूरी सर्विस के लिए सरकारी ऑफिस जाते हैं। कटियार ने कॉर्पोरेट-ग्रेड इंफ्रास्ट्रक्चर को व्हाट्सएप ऑटोमेशन और मोबाइल सेतु आउटरीच जैसे एडवांस्ड डिजिटल सॉल्यूशंस के साथ इंटीग्रेट करके मॉडर्न सेतु की पहल शुरू की है। इससे नागरिकों का समय बच रहा है। सिस्टम की एक्सेसिबिलिटी बढ़ गई है। इतना ही नहीं ओवरऑल एक्सपीरियंस भी बेहतर हो गया।</div>
<div> </div>
<div><strong>फडणवीस ने सौंपी थी बड़ी जिम्मेदारी</strong></div>
<div>महाराष्ट्र कैडर के युवा आईएएस अधिकारी सौरभ कटियार को सीएम फडणवीस ने मुंबई बुलाकर बड़ा प्रमोशन दिया था। तब सौरभ कटियार ने राजेंद्र क्षीरसागर की जगह ली थी। सौरभ कटियार मुंबई के जिस क्षेत्र को बतौर कलेक्टर संभालते हैं। उनमें कुर्ला, अंधेरी, बोरीवली सब डिवीजन शामिल हैं। सौरभ कटियार बतौर अमरावती कलेक्टर ही मुख्यमंत्री फडणवीस की नजर में आए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों से ही प्रशासकीय गतिमानता पुरस्कार हासिल किया था। अब मुंबई उपनगर जिला कलेक्टर के तौर पर सौरभ कटियार फिर सुर्खियों में हैं। सौरभ कटियार ने पिछले दिनों मुंबई के प्रभारी मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा की मौजूदगी में एक टास्क हाथ में लिया था। इसमें उन्होंने एक साल में मुंबई की 500 एकड़ सरकारी जमीन को मुक्त कराने का लक्ष्य तय किया है। यह जमीन अभी भू-माफिया के कब्जे में है। इस जमीन आम मुंबईकर के लिए सुविधाएं विकसित करने में किया जाएगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 17:32:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>  नई दिल्ली : सरकार ला रही है नया ऑटोमैटिक नंबर प्लेट स्कैन सिस्टम, क्या खत्म हो जाएगी फास्टैग की जरूरत?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर ऑटोमैटिक टोल वसूली प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रहा है। यह नई व्यवस्था मार्च 2026 से कुछ चुनिंदा मार्गों पर शुरू हो सकती है। प्रस्तावित सिस्टम के तहत हाईवे पर लगाए गए कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे और तय दूरी के आधार पर टोल राशि सीधे ड्राइवर के खाते से काट ली जाएगी। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47659/new-delhi-government-is-bringing-new-automatic-number-plate-scan"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-11t174909.288.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>नई दिल्ली : </strong>केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर ऑटोमैटिक टोल वसूली प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रहा है। यह नई व्यवस्था मार्च 2026 से कुछ चुनिंदा मार्गों पर शुरू हो सकती है। प्रस्तावित सिस्टम के तहत हाईवे पर लगाए गए कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे और तय दूरी के आधार पर टोल राशि सीधे ड्राइवर के खाते से काट ली जाएगी। </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div><strong>वर्तमान में टोल वसूली कैसे होती है?</strong></div>
<div>फिलहाल देश के लगभग 1.5 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे नेटवर्क में से करीब 45,000 किलोमीटर पर टोल वसूला जाता है। देशभर में 1,000 से अधिक टोल प्लाजा हैं, जहां अक्सर लंबी कतारें लग जाती हैं। खासकर तब जब वाहन में FASTag (फास्टैग) न हो या उसका खाता निष्क्रिय या ब्लॉक हो, तो यात्रियों को अधिक इंतजार करना पड़ता है। </div>
<div> </div>
<div><strong>नया सिस्टम कैसे काम करेगा?</strong></div>
<div>सरकार की योजना के अनुसार, भौतिक टोल बैरियर हटाकर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक लागू की जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/47659/new-delhi-government-is-bringing-new-automatic-number-plate-scan</link>
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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 17:49:58 +0530</pubDate>
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