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                <title>NGT - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>NGT RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वाघिवली क्रीक पाइपलाइन परियोजना: NGT ने मछुआरा संघ को याचिका में संशोधन के निर्देश दिए</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वाघिवली क्रीक पाइपलाइन परियोजना से जुड़े मामले में NGT ने मछुआरा संघ को अपनी मुआवजा याचिका में संशोधन करने का निर्देश दिया है। मछुआरों का दावा है कि परियोजना के कारण उनकी आजीविका प्रभावित हुई है, जबकि मामले की सुनवाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण में जारी है। #NGT #MumbaiNews #MaharashtraNews #Fishermen #PipelineProject </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50087/waghivali-creek-pipeline-project-ngt-directs-fishermen-association-to-amend"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/dc-cover-o61iaifgqg1r0cis59omjr2q07-20190913061025.medi.jpeg" alt=""></a><br /><p>मुंबई महानगर क्षेत्र से जुड़ी वाघिवली क्रीक पाइपलाइन परियोजना को लेकर चल रहे विवाद में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने मछुआरा संघ को अपनी मुआवजा याचिका में संशोधन करने का निर्देश दिया है। अधिकरण ने कहा कि याचिका में कुछ आवश्यक तथ्यों और दावों को अधिक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने की जरूरत है, ताकि मामले की प्रभावी सुनवाई हो सके।</p>
<p>मामला उन मछुआरों से जुड़ा है जिन्होंने दावा किया है कि पाइपलाइन परियोजना के निर्माण कार्य के कारण उनकी आजीविका प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि परियोजना के चलते मछली पकड़ने की गतिविधियों पर असर पड़ा है, जिससे स्थानीय मछुआरा समुदाय को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान NGT ने याचिकाकर्ता संघ को निर्देश दिया कि वह अपने दावों, प्रभावित लोगों की संख्या, कथित नुकसान और मांगे गए मुआवजे से संबंधित विवरणों को संशोधित याचिका में स्पष्ट रूप से शामिल करे। इसके बाद ही मामले की आगे की सुनवाई की जाएगी।</p>
<p>परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह पाइपलाइन क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, प्रभावित समुदायों की चिंताओं को भी ध्यान में रखा जा रहा है और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।</p>
<p>मछुआरा संगठनों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के साथ-साथ पारंपरिक आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव का उचित आकलन होना चाहिए। उनका आग्रह है कि जिन लोगों की आय प्रभावित हुई है, उन्हें उचित मुआवजा और राहत प्रदान की जाए।</p>
<p>फिलहाल NGT ने मामले की अगली सुनवाई तक संशोधित याचिका दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। संशोधित दस्तावेज जमा होने के बाद अधिकरण आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 13:54:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : 45 में से 22 स्टेशनों पर ओजोन प्रदूषण; एनजीटी ने गहरी चिंता जताते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के 57 में से 25 निगरानी स्टेशनों पर आठ घंटे की सीमा से अधिक समय तक ओजोन प्रदूषण रहा, जबकि मुंबई के 45 में से 22 स्टेशनों पर भी यही स्थिति देखी गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ताजा रिपोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में ग्राउंड-लेवल ओजोन प्रदूषण के खतरनाक स्तर को उजागर किया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44438/mumbai--ozone-pollution-detected-at-22-out-of-45-stations--ngt-expresses-deep-concern-and-demands-immediate-action"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-10/download---2025-10-06t115813.791.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के 57 में से 25 निगरानी स्टेशनों पर आठ घंटे की सीमा से अधिक समय तक ओजोन प्रदूषण रहा, जबकि मुंबई के 45 में से 22 स्टेशनों पर भी यही स्थिति देखी गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ताजा रिपोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में ग्राउंड-लेवल ओजोन प्रदूषण के खतरनाक स्तर को उजागर किया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की है। </p>
<p> </p>
<p>सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के 57 में से 25 निगरानी स्टेशनों पर आठ घंटे की सीमा से अधिक समय तक ओजोन प्रदूषण रहा, जबकि मुंबई के 45 में से 22 स्टेशनों पर भी यही स्थिति देखी गई। रिपोर्ट में बताया गया कि वाहनों, बिजलीघरों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स), वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (वीओसी) और कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ) सूरज की रोशनी में रासायनिक प्रतिक्रिया से ओजोन बनाते हैं। यह गैस सांस की बीमारियों, विशेष रूप से अस्थमा और दमा को बढ़ावा देती है, साथ ही फसलों को नुकसान पहुंचाकर खाद्य सुरक्षा को खतरे में डालती है। </p>
<p>यह रिपोर्ट, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की एक अध्ययन पर आधारित मीडिया रिपोर्ट से जुड़ी है। रिपोर्ट में ग्राउंड-लेवल ओजोन में खतरनाक वृद्धि बताया गया है। यह श्वसन संबंधी समस्याओं और पर्यावरणीय क्षति से जुड़ा एक शक्तिशाली प्रदूषक है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गर्मी और सूरज की रोशनी ओजोन निर्माण को तेज करती है, जिससे शहरी क्षेत्रों में हॉटस्पॉट बन रहे हैं। एनजीटी ने इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाते हुए पर्यावरण मंत्रालय और सीपीसीबी से ओजोन नियंत्रण के लिए विशेषज्ञ समिति गठन का प्रस्ताव स्वीकार किया है। मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी। </p>
<p><strong>विशेषज्ञ समिति का गठन प्रस्तावित</strong><br />रिपोर्ट में कहा गया कि पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्रालय व सीपीसीबी ने ओजोन और उसके कारकों को नियंत्रित करने के उपायों पर सिफारिश करने के लिए विशेषज्ञ समिति के गठन का प्रस्ताव दिया था। एक अन्य मामले में दायर रिपोर्ट में ओजोन और इसके कारणों को नियंत्रित करने के लिए एक अध्ययन करने का सुझाव दिया गया है। सुनवाई के दौरान सीपीसीबी ने इस प्रकरण से जुड़े दो आवेदनों पर एक साथ सुनवाई करने का अनुरोध किया। </p>
<p><strong>क्या है ओजोन प्रदूषण?</strong><br />ओजोन एक गैस है जो तीन ऑक्सीजन अणुओं से बनती है। ऊंचे आसमान में यह हमें सूरज की हानिकारक किरणों से बचाती है, लेकिन जमीन के पास यह प्रदूषण बन जाता है। यह सीधे किसी स्रोत से नहीं निकलता, बल्कि वाहनों, उद्योगों और बिजलीघरों से निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स), वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (वीओसी) और कार्बन मोनोआक्साइड (सीओ) के सूरज की रोशनी में रासायनिक प्रतिक्रिया से बनता है। यह गैस बहुत प्रतिक्रियाशील होती है और हवा में लंबी दूरी तक फैल सकती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 12:00:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली :हस्तशिल्प निर्यातक कंपनी पर 50 करोड़ रुपये का जुर्माना;  सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के आदेश को रद कर दिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश के शीर्ष न्यायालय ने एनजीटी के उस आदेश पर आपत्ति जताई है, जिसमें पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करने वाली मुरादाबाद स्थित हस्तशिल्प निर्यातक कंपनी पर 50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। दरअसल, मामले से जुड़ी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के आदेश को रद कर दिया। न्यायालय ने इसके साथ ही कहा कि देश का कानून राज्य या किसी भी जांच एजेंसी को पर्यावरण संबंधी मामलों में किसी का मांस खींचने की अनुमति नहीं देता।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43400/new-delhi--rs-50-crore-fine-imposed-on-handicraft-exporting-company--supreme-court-quashes-ngt-order"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-08/download---2025-08-26t163018.772.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>देश के शीर्ष न्यायालय ने एनजीटी के उस आदेश पर आपत्ति जताई है, जिसमें पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करने वाली मुरादाबाद स्थित हस्तशिल्प निर्यातक कंपनी पर 50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। दरअसल, मामले से जुड़ी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के आदेश को रद कर दिया। न्यायालय ने इसके साथ ही कहा कि देश का कानून राज्य या किसी भी जांच एजेंसी को पर्यावरण संबंधी मामलों में किसी का मांस खींचने की अनुमति नहीं देता।</p>
<p> </p>
<p><strong>मुरादाबाद की कंपनी से जुड़ा है मामला</strong><br />बता दें कि शीर्ष अदालत ने पर्यावरण मानदंडों के कथित उल्लंघन के लिए मुरादाबाद स्थित हस्तशिल्प निर्यातक सीएल गुप्ता एक्सपोर्ट लिमिटेड पर जुर्माना लगाने वाले एनजीटी के लंबे फैसले की भी आलोचना की। वहीं, 22 अगस्त को अपने फैसले में शीर्ष न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि अगर कंपनी ने नियमों का उल्लंघन किया, तो उसके कारोबार के आधार पर लगाया गया जुर्माना कानूनी आधार से रहित था।</p>
<p><strong>एनजीटी के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई आपत्ति</strong><br />मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मापदंडों के कथित उल्लंघन के लिए इस कंपनी पर जुर्माना लगाने वाले एनजीटी के 145 पन्नों के फैसले की आलोचना भी की। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि विवेक का इस्तेमाल उपयोग के लाए गए पन्नों की संख्या के अनुपात में नहीं है।</p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी को दी नसीहत</strong><br />शीर्ष न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि न्यायिक निर्णय की मूल आत्मा विवेकापूर्ण विचार है और अदालतों व अधिकरणों को केवल सामान्य रूप से कानून का उल्लेख करने वाले भाषणात्मक रुख अपनाने से बचना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इससे अधिक कुछ नहीं कह सकते एवं एनजीटी के आदेश को ऊपर उल्लेखित सीमा तक निरस्त करने वाली अपील को स्वीकार करते हैं।</p>
<p><strong>गलत तरीके से लगाया गया जुर्माना</strong><br />सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वार्षिक कारोबार के आधार पर जुर्माना लगाना गलत है। चूंकि एनजीटी ने मामले में कंपनी का राजस्व 100 से 500 करोड़ के बीच में पाया। इसे देखते हुए एनजीटी ने कंपनी 50 करोड़ो का जुर्माना ठोक दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जुर्माना लगाने के लिए एनजीटी द्वारा अपनाई गई पद्धिति किसी भी विधिक सिद्धांत के तहत स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हम इस टिप्पणी से पूर्णतः सहमत है और यह जोड़ते हैं कि कानून किसी भी राज्य या उसकी एजेंसी को पर्यावरण से जुड़े किसी भी मामले पर एक दमड़ी दमड़ी तक वसूलने की परमिशन नहीं दे सकता है। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Aug 2025 16:31:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एनजीटी ने सीआरजेड मंजूरी के बारे में स्पष्टीकरण मांगा... </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">नैटकनेक्ट फाउंडेशन के निदेशक बी एन कुमार ने सीआरजेड मंजूरी को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि मंदिर को आवंटित 40,000 वर्ग मीटर का भूखंड मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (एमटीएचएल) के लिए स्थापित अस्थायी कास्टिंग यार्ड से बाहर ले जाया गया है और यह एक प्रतिबंधित क्षेत्र है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/28777/ngt-seeks-clarification-regarding-crz-approval"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-02/download-(2)26.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नवी मुंबई: </strong>नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (एमसीजेडएमए) से नवी मुंबई में उल्वे तट पर तिरूपति बालाजी मंदिर के लिए सीआरजेड मंजूरी देने का आधार बताने को कहा है, जबकि हरित समूहों ने अपनी चिंता व्यक्त की है।</p>
<p style="text-align:justify;">नैटकनेक्ट फाउंडेशन के निदेशक बी एन कुमार ने सीआरजेड मंजूरी को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि मंदिर को आवंटित 40,000 वर्ग मीटर का भूखंड मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (एमटीएचएल) के लिए स्थापित अस्थायी कास्टिंग यार्ड से बाहर ले जाया गया है और यह एक प्रतिबंधित क्षेत्र है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनजीटी में कुमार के आवेदन में कहा गया है कि अस्थायी कास्टिंग यार्ड 2019 में आया था, जबकि 2018 के गूगल अर्थ मैप्स में स्पष्ट रूप से इंटरटाइडल वेटलैंड्स, मछली पकड़ने के तालाब, मडफ्लैट और यहां तक कि मैंग्रोव का एक विशाल विस्तार दिखाई देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुमार की वकील रोनिता भट्टाचार्य ने पिछले गुरुवार को सुनवाई के दौरान तर्क दिया कि पिछले नवंबर को अंतिम मंजूरी देते समय एमसीजेडएमए द्वारा कास्टिंग यार्ड के इस पहलू पर विचार नहीं किया गया था।वकील ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र राज्य रिमोट एप्लीकेशन सेंटर (एमआरएसएसी) के एक मानचित्र में मंदिर के लिए आवंटित भूखंड में मडफ्लैट की उपस्थिति दिखाई गई है, जबकि कास्टिंग यार्ड क्षेत्र में आर्द्रभूमि दिखाई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">बेंच ने आवेदक की बात को रिकॉर्ड में रखा है कि एमटीएचएल के लिए अस्थायी कास्टिंग यार्ड के उद्देश्य से परियोजना स्थल के उपयोग के परिणामस्वरूप स्पष्ट रूप से निर्माण कार्य, मैंग्रोव की कटाई, मलबे का पुनर्ग्रहण और डंपिंग और निचले इलाकों में लैंडफिलिंग हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके परिणामस्वरूप भूमि की कुछ प्राकृतिक विशेषताओं में बदलाव आया है और "क्षेत्र की पारिस्थितिक संवेदनशीलता की हानि के साथ समझौता" हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में एचटीएल के स्थान में लगभग 5 प्रतिशत का परिवर्तन हुआ है। मीटर, जिसने, बदले में, क्षेत्र में सीआरजेड- I और सीआरजेड- II क्षेत्रों के रूप में वर्गीकृत भूमि के विस्तार को बदल दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एनजीटी के न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. विजय कुलकर्णी की पश्चिमी जोनल पीठ ने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ एंड सीसी) द्वारा जारी सीआरजेड मंजूरी के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना में कुछ शर्तें अनिवार्य हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सीआरजेड अधिसूचना- 2019 का विनियमन 8 1:4000 पैमाने में सीआरजेड मानचित्र के आधार पर सीआरजेड निकासी की प्रक्रिया निर्धारित करता है, जिसे हाई टाइड लाइन या लो टाइड लाइन के सीमांकन का उपयोग करके MoEF&amp;CC अधिकृत एजेंसी द्वारा तैयार किया जाना है।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्वार रेखाएं नेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबल कोस्टल मैनेजमेंट (एनसीएससीएम) के विनिर्देशों के अनुसार होनी चाहिए।अधिसूचना में यह भी निर्धारित किया गया है कि प्रासंगिक परियोजना लेआउट को सीआरजेड मानचित्र पर अनुमोदित सीजेडएमपी के अनुसार परियोजना की सीमाओं और परियोजना स्थान की सीआरजेड श्रेणी का विधिवत संकेत दिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए, एनजीटी पीठ ने इन मानचित्रों को मंगवाया और एमसीजेडएमए को इन्हें चार सप्ताह के भीतर पेश करने का निर्देश दिया। पीठ इस मामले पर 18 मार्च को फिर सुनवाई करेगी।पर्यावरणविदों ने टिप्पणियों का स्वागत किया है और इस संबंध में फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नैटकनेक्ट फाउंडेशन को परियोजना के लिए दी गई सीआरजेड मंजूरी के खिलाफ एक नया आवेदन दायर करने की अनुमति दी थी। एनजीओ ने अस्थायी कास्टिंग यार्ड से 40,000 वर्ग मीटर के भूखंड के आवंटन पर आपत्ति जताई थी और एनजीटी से एमसीजेडएमए को सीआरजेड की अनुमति नहीं देने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">तिरुमाला तिरूपति देवस्थानम ने सेक्टर 12, उल्वे में 40,000 वर्ग मीटर के भूखंड पर तिरूपति वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर का निर्माण करने का प्रस्ताव दिया है। एमसीजेडएमए ने पाया था कि परियोजना योजनाकार को अनुमोदित सीजेडएमपी, 2011 के अनुसार गैर-सीआरजेड क्षेत्र में प्रस्तावित निर्माण को प्रतिबंधित करने की आवश्यकता है। सदस्यों ने सुझाव दिया कि गैर-सीआरजेड क्षेत्र में प्रस्तावित निर्माण गतिविधियों से सीआरजेड क्षेत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 20 Feb 2024 09:33:23 +0530</pubDate>
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