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                <title>excavation - Rokthok Lekhani</title>
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                <description>excavation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title> मुंबई : कंस्ट्रक्शन सेक्टर को राहत, खुदाई रॉयल्टी माफ और नॉन-एग्रीकल्चरल परमिशन ऑनलाइन ₹ 83.7 6 </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>कंस्ट्रक्शन सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए, महाराष्ट्र के रेवेन्यू मिनिस्टर चंद्रशेखर बावनकुले ने खुदाई की रॉयल्टी माफ करने और नॉन-एग्रीकल्चरल परमिशन प्रोसेस को डिजिटाइज़ करने जैसे बड़े सुधारों का ऐलान किया है। ये फैसले मंत्रालय में क्रेडाई के रिप्रेजेंटेटिव के साथ हुई मीटिंग में लिए गए। नई पॉलिसी के अनुसार, अगर कंस्ट्रक्शन के दौरान खोदे गए माइनर मिनरल्स को उसी प्रोजेक्ट साइट पर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, तो डेवलपर्स से कोई रॉयल्टी नहीं ली जाएगी। इस कदम से प्रोजेक्ट की कुल लागत में कमी आने की उम्मीद है और डेवलपर्स पर फाइनेंशियल दबाव कम होगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49087/relief-to-mumbai-construction-sector-excavation-royalty-waiver-and-non-agricultural"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-09t175612.026.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>कंस्ट्रक्शन सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए, महाराष्ट्र के रेवेन्यू मिनिस्टर चंद्रशेखर बावनकुले ने खुदाई की रॉयल्टी माफ करने और नॉन-एग्रीकल्चरल परमिशन प्रोसेस को डिजिटाइज़ करने जैसे बड़े सुधारों का ऐलान किया है। ये फैसले मंत्रालय में क्रेडाई के रिप्रेजेंटेटिव के साथ हुई मीटिंग में लिए गए। नई पॉलिसी के अनुसार, अगर कंस्ट्रक्शन के दौरान खोदे गए माइनर मिनरल्स को उसी प्रोजेक्ट साइट पर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, तो डेवलपर्स से कोई रॉयल्टी नहीं ली जाएगी। इस कदम से प्रोजेक्ट की कुल लागत में कमी आने की उम्मीद है और डेवलपर्स पर फाइनेंशियल दबाव कम होगा। रॉयल्टी पेमेंट सिस्टम को भी आसान बनाया जाएगा और यह छह महीने के लिए लागू रहेगा। </p>
<p> </p>
<p>इसके अलावा, राज्य सरकार ने निर्देश दिया है कि अगले 10 दिनों के अंदर पूरी नॉन-एग्रीकल्चरल परमिशन प्रोसेस को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया जाएगा। इससे डेवलपर्स को डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के पास जाने की जरूरत खत्म हो जाएगी और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण होने वाली देरी में भी कमी आएगी। मीटिंग में पूरे राज्य में डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के ‘पुणे पैटर्न’ को अपनाने पर भी चर्चा हुई। इस मॉडल ने ट्रांसपेरेंसी और प्रोजेक्ट प्रोसेसिंग की गति बढ़ाने में असरदार साबित किया है। नए सिस्टम में, डॉक्यूमेंट्स के रजिस्ट्रेशन के बाद प्रॉपर्टी कार्ड को तुरंत अपडेट करने की सुविधा भी शामिल होगी। मंत्री ने प्रिंसिपली इस मांग को मान लिया।</p>
<p>क्रेडाई के प्रतिनिधियों ने इस सुधार को कंस्ट्रक्शन सेक्टर के लिए अहम और सकारात्मक कदम बताया। उनके अनुसार, रॉयल्टी माफ करने और नॉन-एग्रीकल्चरल  परमिशन ऑनलाइन करने से नए प्रोजेक्ट्स को तेजी से शुरू करने में मदद मिलेगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। मंत्री बावनकुले ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि कंस्ट्रक्शन सेक्टर में प्रक्रियाओं को सरल, तेज़ और पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि ऑनलाइन सिस्टम के जरिए हर प्रोजेक्ट की ट्रैकिंग संभव होगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता को तुरंत पकड़ने में मदद मिलेगी।</p>
<p>विशेष रूप से यह सुधार माइनर मिनरल्स के उपयोग को अधिक प्रभावी और आर्थिक रूप से लाभकारी बनाएगा। पहले खोदे गए मिनरल्स के लिए रॉयल्टी देना डेवलपर्स के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ बन जाता था, जिसे अब खत्म किया गया है। इसके अलावा, नॉन-एग्रीकल्चरल  परमिशन ऑनलाइन करने से प्रोजेक्ट की योजना बनाने और मंजूरी लेने की प्रक्रिया भी तेज़ और आसान होगी। इस पहल से महाराष्ट्र में कंस्ट्रक्शन सेक्टर को तत्काल और दीर्घकालीन लाभ मिलने की उम्मीद है। अधिकारीयों का कहना है कि ऑनलाइन प्रोसेसिंग और डिजिटल ट्रैकिंग से भ्रष्टाचार कम होगा और निवेशकों और डेवलपर्स के लिए एक भरोसेमंद माहौल तैयार होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 17:57:03 +0530</pubDate>
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                <title>बीड जिले में सकलेश्वर मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान मिले दो प्राचीन मंदिरों के आधार</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">बीड जिले के अंबाजोगाई के पास सकलेश्वर मंदिर परिसर में चल रही खुदाई के दौरान दो मंदिर के आधार मिलने की पुष्टि हुई है। पुरातत्व विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।  मामले के जानकारी देते हुए अधिकारी ने बताया कि सकलेश्वर मंदिर का निर्माण तकरीबन 1228 ईस्वी में यादव राजवंश द्वारा किया गया गया, जो पहले मिले एक शिलालेख के मुताबिक देवगिरि किले से शासन करते थे। इसे बाराखंबी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/29788/foundations-of-two-ancient-temples-found-during-excavation-in-the-sakleshwar-temple-complex-in-beed-district"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-03/download-(2)37.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बीड:  </strong>बीड जिले के अंबाजोगाई के पास सकलेश्वर मंदिर परिसर में चल रही खुदाई के दौरान दो मंदिर के आधार मिलने की पुष्टि हुई है। इसकी जानकारी राज्य पुरातत्व के सहायक निदेशक अमोल गोटे ने दी। उन्होंने कहा कि खुदाई के दौरान हमें कुछ प्राचीन ईटें भी मिली हैं।<br />महाराष्ट्र के पुरातत्व विभाग के हाथ बड़ी सफलता लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीड जिले के अंबाजोगाई के पास सकलेश्वर मंदिर परिसर में चल रही खुदाई के दौरान दो मंदिर के आधार मिलने की पुष्टि हुई है। पुरातत्व विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।  मामले के जानकारी देते हुए अधिकारी ने बताया कि सकलेश्वर मंदिर का निर्माण तकरीबन 1228 ईस्वी में यादव राजवंश द्वारा किया गया गया, जो पहले मिले एक शिलालेख के मुताबिक देवगिरि किले से शासन करते थे। इसे बाराखंबी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य पुरातत्व के सहायक निदेशक अमोल गोटे जानकारी देते हुए कहा कि सकलेश्वर मंदिर के परिसर में खुदाई 15 मार्च से शुरू हुई थी। प्रत्येक 100 वर्ग फुट की 14 खाइयां बनाई गई है। अपनी पुरातत्व खोज के दौरान हमें परिसर में दो मंदिरों के आधार मिले हैं, जिनमें से एक खोलेश्वर हैं। जिसका नाम एक यादव जनरल के नाम पर रखा गया है। खुदाई के दौरान हमें कुछ प्राचीन ईटें भी मिली है। जो मंदिर के शिखर होने का प्रमाण देती है। साथ ही हाथ, पैर जैसे मूर्तिकला के हिस्से में खुदाई के दौरान सामने आए।</p>
<p style="text-align:justify;">अमोल गोटे ने कहा कि इसी परियोजना के तहत हम अंबाजोगाई में प्राचीन स्मारकों का सर्वेक्षण भी करेंगे, जो क्षेत्र को विरासत गांव का दर्जा देने में बहुत मदद करेगा। अंबाजोगाई शहर को पहले के समय में अमरापुर, जयंतीपुर, जोगायम्बे के नाम से भी जाना जाता था। इसे हैदराबाद निजाम काल के दौरान मोमिनाबाद के नाम से भी जाना जाता था। इसमें हत्थीखाना, दासोपंत मंदिर, योगेश्वरी मंदिर जैसे अन्य स्मारक भी हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त माह में पुरातत्व विभाग को  महाराष्ट्र के औरंगाबाद में सदियों पुराने मकाई (मक्का) गेट के पास टैंक जैसी संरचना पाई गई है। एक अधिकारी ने बताया था कि टैंक जैसी संरचना मिलने के बाद राज्य पुरातत्व विभाग ऐसी संरचनाओं को खोजने के लिए खुदाई करने के लिए प्रेरित हुआ। बता दें, मकाई गेट का निर्माण 17वीं शताब्दी में मुगल काल के दौरान किया गया था। खाम नदी के तट पर स्थित यह गेट औरंगाबाद शहर के चारों ओर निर्मित किलेबंदी का हिस्सा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Mar 2024 11:13:58 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मीठी नदी पुनर्जीवन परियोजना में बीएमसी ने चरण 3 सुरंग की खुदाई पूरी की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बीएमसी के मुताबिक, मुंबई सीवरेज प्रोजेक्ट के तहत 15 मीटर नीचे 6.70 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जा रही है। यह भारत की सबसे छोटी सुरंग है जिसकी चौड़ाई 2.60 व्यास और बाहरी चौड़ाई 3.20 मीटर है। सुरंग में पांच शाफ्ट हैं और सुरंग का निर्माण अर्थ प्रेशर बैलेंस टनल बोरिंग मशीन की मदद से सेगमेंटल लाइनिंग सिस्टम पर किया जा रहा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/28454/bmc-completes-excavation-of-phase-3-tunnel-in-mithi-river-rejuvenation-project"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-02/download-(8).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई :</strong> मीठी नदी के पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए बीएमसी ने मीठी नदी पुनर्जीवन परियोजना शुरू की है। परियोजना के तहत, बीएमसी ने बापट नाला, सफेद पुल से धारावी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक 2.60 व्यास की सुरंग की खुदाई का काम शुरू किया है। काम तीन चरणों में हो रहा है. बुधवार को कनकिया ज़ेलियन (सांताक्रूज़-चेंबूर रोड) से एलबीएस रोड तक सुरंग खुदाई का काम खत्म हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">बापट नाला से सफेद पुल नाला होते हुए मीठी नदी में प्रतिदिन 168 मिलियन लीटर प्रदूषित पानी जाता है। अब इस पानी को सुरंगों के माध्यम से एसटीपी तक लाया जाएगा और उपचार के बाद माहिम प्राकृतिक उद्यान के पास एक खाड़ी में पानी छोड़ा जाएगा। यह परियोजना मीठी नदी के पानी को साफ रखने में मदद करेगी जिससे मुंबई का पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अतिरिक्त नगर आयुक्त, पी. वेलरासु ने कहा, “प्रदूषित पानी मीठी नदी में नहीं जाएगा और उपचार के बाद इसे खाड़ी में छोड़ दिया जाएगा। परियोजना प्रदूषित पानी को मीठी नदी में जाने से रोकेगी और समुद्र तट के पास रहने वाले लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाएगी।” ।</p>
<p style="text-align:justify;">बीएमसी के मुताबिक, मुंबई सीवरेज प्रोजेक्ट के तहत 15 मीटर नीचे 6.70 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जा रही है। यह भारत की सबसे छोटी सुरंग है जिसकी चौड़ाई 2.60 व्यास और बाहरी चौड़ाई 3.20 मीटर है। सुरंग में पांच शाफ्ट हैं और सुरंग का निर्माण अर्थ प्रेशर बैलेंस टनल बोरिंग मशीन की मदद से सेगमेंटल लाइनिंग सिस्टम पर किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/28454/bmc-completes-excavation-of-phase-3-tunnel-in-mithi-river-rejuvenation-project</link>
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                <pubDate>Thu, 08 Feb 2024 17:53:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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