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                <title>doctor - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>doctor RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : 7 साल तक टीबी और अस्थमा का इलाज करते रहे मुंबई के डॉक्टर, 10 वर्षीय बच्ची के फेफड़े में फंसा मिला पेन का ढक्कन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>एक 10 साल की बच्ची के फेफड़े का कुछ हिस्सा निकालना पड़ा क्योंकि सात साल से ज्यादा समय तक उसके बाएं फेफड़े के निचले हिस्से की नली (ब्रोंकस) के पास पेन का ढक्कन फंसा हुआ था। कई डॉक्टरों ने उसके असामान्य एक्स-रे को टीबी या अस्थमा समझकर गलत इलाज किया था।  बच्ची की मां और धारावी की रहने वाली मैमुना शेख ने बताया कि जब लगातार खांसी और अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण दिखे, तो कई डॉक्टरों ने संक्रामक बीमारी का शक होने पर उसका इलाज किया और एंटीबायोटिक्स दीं। इसके बाद उसे बीएमसी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने टीबी का इलाज शुरू कर दिया, जबकि उसका बलगम का सैंपल नेगेटिव आया था। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50971/mumbai-doctors-kept-treating-tb-and-asthma-for-7-years"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-27t122456.725.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>एक 10 साल की बच्ची के फेफड़े का कुछ हिस्सा निकालना पड़ा क्योंकि सात साल से ज्यादा समय तक उसके बाएं फेफड़े के निचले हिस्से की नली (ब्रोंकस) के पास पेन का ढक्कन फंसा हुआ था। कई डॉक्टरों ने उसके असामान्य एक्स-रे को टीबी या अस्थमा समझकर गलत इलाज किया था।  बच्ची की मां और धारावी की रहने वाली मैमुना शेख ने बताया कि जब लगातार खांसी और अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण दिखे, तो कई डॉक्टरों ने संक्रामक बीमारी का शक होने पर उसका इलाज किया और एंटीबायोटिक्स दीं। इसके बाद उसे बीएमसी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने टीबी का इलाज शुरू कर दिया, जबकि उसका बलगम का सैंपल नेगेटिव आया था। </p>
<p> </p>
<p>उस समय अस्पताल में मौजूद और मायशा के केस में शामिल एक रेजिडेंट डॉक्टर ने कहा कि यह शायद उन दुर्लभ मामलों में से एक था जहां चीज की जगह की वजह से सही बीमारी का पता लगाना बहुत मुश्किल था, और इलाज लक्षणों के आधार पर किया गया। डॉक्टर ने कहा कि हम तब तक एंटी-कोच थेरेपी का कोर्स शुरू नहीं कर सकते जब तक कि कोई पक्का संकेत न मिले। नेगेटिव रिज़ल्ट के बावजूद इलाज भविष्य के डॉक्टरों के लिए टीबी की संभावना को खत्म करने में मददगार होता है।</p>
<p><strong>टीबी का इलाज होने के बाद भी हालत नहीं हुई ठीक</strong><br />टीबी का इलाज होने के बाद भी जब मैमुना ने देखा कि उसकी बच्ची की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है, तो वह उसे दूसरे प्राइवेट अस्पताल ले गईं। वहाँ डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि मायशा को अस्थमा है और राहत के लिए इनहेलर दिया। एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल (नारायण हेल्थ) की पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. इंदु खोसला, जो इस केस में शामिल थीं, ने कहा कि ज़्यादातर डॉक्टरों को निमोनिया दिखा जो ठीक नहीं हो रहा था, इसलिए उन्होंने एंटी-टीबी दवाएं लिख दीं। उन्होंने कहा कि फेफड़े के अंदर किसी बाहरी चीज के होने का शक किया जाना चाहिए था, लेकिन यह राय का फर्क है और इसके लिए डॉक्टरों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।</p>
<p><strong>ब्रोंकोस्कोपी में दिखा पेन का ढक्कन</strong><br />डॉ. इंदु ने बताया कि सीटी स्कैन में फेफड़ा सिकुड़ा हुआ (कोलेप्स) दिखा, और क्योंकि बाकी अंग सामान्य लग रहे थे, इसलिए उन्हें बाहरी चीज के होने का शक हुआ। डॉ. खोसला ने कहा, ब्रोंकोस्कोपी के दौरान हमने देखा कि पेन का ढक्कन गहराई में फंसा हुआ था। उसे बाहर निकालने के लिए हमें अपनी ईएनटी टीम की मदद लेनी पड़ी और ज्यादा एनेस्थीसिया देना पड़ा। </p>
<p><strong>प्रोसीजर के बाद ठीक हुआ निमोनिया, पर...</strong><br />इसे निकालते ही मायशा को काफी बेहतर महसूस हुआ। डॉ. खोसला ने कहा कि प्रोसीजर के लगभग दो से तीन हफ्ते बाद, उसका निमोनिया- जो फेफड़े के निचले बाएं हिस्से और बीच वाले हिस्से में फैला था- कम हो गया और सिर्फ निचले हिस्से तक ही सीमित रह गया। फेफड़े का जो हिस्सा खराब नहीं हुआ था, वह खुल गया। </p>
<p>डॉक्टरों ने एक महीने तक इंतजार किया कि क्या फेफड़े का बाकी प्रभावित हिस्सा फिर से फैल पाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गंभीर इन्फेक्शन और टिश्यू को हुए ऐसे नुकसान की वजह से जिसे ठीक नहीं किया जा सकता था, उन्हें आख़िरकार उसके फेफड़े का लगभग एक-तिहाई हिस्सा निकालना पड़ा। उम्मीद है कि मायशा सामान्य जिंदगी जी पाएगी, लेकिन मैमूना ने कहा कि एक मेडिकल चूक की वजह से वह लगभग अपनी बेटी को खो ही बैठी थीं। उन्होंने कहा कि अब तक हुए खर्च का तो हमें हिसाब ही नहीं रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/50971/mumbai-doctors-kept-treating-tb-and-asthma-for-7-years</link>
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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 12:35:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: अंधेरी में बस की टक्कर के बाद चालक पर प्राथमिकी, महिला डॉक्टर समेत कई लोग घायल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के अंधेरी (पश्चिम) स्थित अंबोली नाका इलाके में शुक्रवार को हुई सड़क दुर्घटना के बाद डी.एन. नगर पुलिस ने बस चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हादसे में एक महिला पैदल यात्री सहित कई लोग घायल हुए। पुलिस ने बस चालक को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने के आरोप में प्राथमिकी  दर्ज की है। अधिकारियों के अनुसार, घटना में किसी की मौत नहीं हुई है और सभी घायल खतरे से बाहर हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50678/fir-against-driver-after-bus-collision-in-mumbai-andheri-many"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/mumbai-best-bus-accident-784x441.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई के अंधेरी (पश्चिम) स्थित अंबोली नाका इलाके में शुक्रवार को हुई सड़क दुर्घटना के बाद डी.एन. नगर पुलिस ने बस चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हादसे में एक महिला पैदल यात्री सहित कई लोग घायल हुए। पुलिस ने बस चालक को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने के आरोप में प्राथमिकी  दर्ज की है। अधिकारियों के अनुसार, घटना में किसी की मौत नहीं हुई है और सभी घायल खतरे से बाहर हैं।</p>
<p> </p>
<p>पुलिस के मुताबिक, आरोपी बस चालक की पहचान साहिल सावंत (30 वर्ष) के रूप में हुई है। दुर्घटना के बाद उसे हिरासत में लिया गया और प्रारंभिक जांच के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत लापरवाही से वाहन चलाने का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। घटना अंधेरी (पश्चिम) के व्यस्त अंबोली नाका क्षेत्र में हुई, जहां उस समय सामान्य दिनों की तरह लोगों और वाहनों की आवाजाही बनी हुई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बस की टक्कर में एक महिला पैदल यात्री घायल हो गईं, जिनकी पहचान डॉ. साक्षी (33 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस ने उनका बयान दर्ज कर लिया है, जिसे मामले की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना में कुल छह से सात लोगों को मामूली चोटें आईं। हालांकि अधिकांश घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता नहीं पड़ी। केवल एक घायल व्यक्ति ने कूपर अस्पताल में उपचार कराया, जहां चिकित्सकीय जांच के बाद उसकी हालत सामान्य पाए जाने पर छुट्टी दे दी गई। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस दुर्घटना में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई है। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित किया तथा यातायात को सामान्य करने के लिए आवश्यक कदम उठाए।</p>
<p>डी.एन. नगर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों के अनुसार, घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस ने बस को अपने कब्जे में लेकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ शुरू की। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि दुर्घटना चालक की लापरवाही, तेज गति, यातायात नियमों के उल्लंघन या किसी अन्य कारण से हुई। यदि जांच में अतिरिक्त तथ्य सामने आते हैं तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>पुलिस का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और तकनीकी जांच के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत इस मामले में भी सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अंबोली नाका अंधेरी पश्चिम का व्यस्त चौराहा माना जाता है, जहां दिनभर बड़ी संख्या में निजी वाहन, बसें और पैदल यात्री आते-जाते हैं। ऐसे क्षेत्रों में छोटी सी लापरवाही भी दुर्घटना का कारण बन सकती है। पुलिस समय-समय पर वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन करने और निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने की अपील करती रही है। </p>
<p>सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ते यातायात के बीच सार्वजनिक परिवहन चालकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। बस स्टॉप, चौराहों और पैदल पार पथों के आसपास वाहन की गति नियंत्रित रखना और पैदल यात्रियों को प्राथमिकता देना सुरक्षित यातायात व्यवस्था के लिए आवश्यक है। फिलहाल पुलिस ने बस चालक साहिल सावंत के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। घायलों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है और सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।</p>
<p>पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी ने घटना को देखा है या उसके पास दुर्घटना से संबंधित कोई वीडियो या अन्य साक्ष्य हैं तो वे जांच में सहयोग करें। इस घटना ने एक बार फिर व्यस्त शहरी इलाकों में सड़क सुरक्षा और सावधानीपूर्वक वाहन संचालन की आवश्यकता को रेखांकित किया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:48:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ठाणे:  डॉक्टर बोले- कभी वापस नहीं आएंगे, छोड़ दिया शहर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों के साथ कथित मारपीट के मामले के बाद दो डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। इनमें महिला डॉक्टर सृष्टि बाविस्कर और डॉक्टर वैभव सालुंखे शामिल हैं। दोनों डॉक्टरों ने अस्पताल में काम करने के दौरान डर और असुरक्षा का माहौल होने का हवाला दिया है। वैभव सालुंखे ने इस्तीफा देने के बाद शहर भी छोड़ दिया है।  </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50654/thane-doctor-said-will-never-return-left-the-city"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/aa27uxwk.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>ठाणे:  </strong>डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों के साथ कथित मारपीट के मामले के बाद दो डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। इनमें महिला डॉक्टर सृष्टि बाविस्कर और डॉक्टर वैभव सालुंखे शामिल हैं। दोनों डॉक्टरों ने अस्पताल में काम करने के दौरान डर और असुरक्षा का माहौल होने का हवाला दिया है। वैभव सालुंखे ने इस्तीफा देने के बाद शहर भी छोड़ दिया है। डॉक्टर वैभव सालुंखे ने कहा कि उन्होंने डर के माहौल के कारण इस्तीफा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग लगातार उन पर नजर रख रहे हैं और वह खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अब दोबारा अस्पताल नहीं लौटना चाहते। उनका कहना है कि भले ही अन्य डॉक्टर वहां काम करते रहें, लेकिन वह इस माहौल में काम नहीं कर सकते।</p>
<p> </p>
<p>मामला डोंबिवली स्थित कल्याण-डोंबिवली नगर निगम के शास्त्री नगर अस्पताल का है। आरोप है कि शिवसेना पार्षद राकेश म्हात्रे ने अस्पताल में डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की। इस घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ गई और सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे। जानकारी के अनुसार, यह घटना 6 जुलाई को हुई थी। अस्पताल अधिकारियों के मुताबिक, मामला उस समय शुरू हुआ जब दो डॉक्टरों ने एक नवजात शिशु के परिजनों को बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी। डॉक्टरों ने बताया था कि अस्पताल की नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) में जगह उपलब्ध नहीं थी और नवजात को बेहतर देखभाल की जरूरत थी।</p>
<p>डॉक्टरों की सलाह के बाद बच्चे के परिजनों और अस्पताल प्रशासन के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसी दौरान कथित तौर पर पार्षद के अस्पताल पहुंचने और डॉक्टरों के साथ विवाद होने की बात सामने आई। आरोप है कि इस दौरान एक डॉक्टर के साथ मारपीट की गई। घटना के बाद डॉक्टरों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। डॉक्टर वैभव सालुंखे ने कहा कि काम करने के लिए सुरक्षित माहौल जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद से डर बना हुआ है और ऐसे हालात में मरीजों की सेवा करना मुश्किल हो रहा है।</p>
<p>वहीं, महिला डॉक्टर सृष्टि बाविस्कर ने भी इस्तीफा देकर अपना विरोध जताया है। उनके इस्तीफे के बाद अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा और कर्मचारियों के सम्मान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस मामले में अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। डॉक्टरों का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मियों के साथ इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, ताकि वे बिना किसी दबाव के मरीजों की सेवा कर सकें। इस घटना के बाद चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। फिलहाल इस मामले में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें हैं। डॉक्टरों के इस्तीफे के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है और अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 14:08:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : बांद्रा वेस्ट में फर्जी डॉक्टर का भंडाफोड़, बिना डिग्री क्लिनिक चलाने का खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के बांद्रा वेस्ट इलाके में क्राइम ब्रांच और सिविक हेल्थ डिपार्टमेंट के संयुक्त ऑपरेशन में एक फर्जी डॉक्टर द्वारा चलाए जा रहे अवैध क्लिनिक का भंडाफोड़ हुआ है। इस कार्रवाई के बाद बांद्रा पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और बिना वैध योग्यता के मेडिकल प्रैक्टिस करने के आरोप में FIR दर्ज की है। यह मामला बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की असिस्टेंट मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रिया जितेंद्र जाधव (46) की शिकायत पर सामने आया। डॉ. जाधव वर्ष 2008 से BMC में कार्यरत हैं और वर्तमान में H/वेस्ट वार्ड में तैनात हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49386/fake-doctor-busted-in-mumbai-bandra-west-revelation-of-running"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-22t125926.897.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> मुंबई के बांद्रा वेस्ट इलाके में क्राइम ब्रांच और सिविक हेल्थ डिपार्टमेंट के संयुक्त ऑपरेशन में एक फर्जी डॉक्टर द्वारा चलाए जा रहे अवैध क्लिनिक का भंडाफोड़ हुआ है। इस कार्रवाई के बाद बांद्रा पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और बिना वैध योग्यता के मेडिकल प्रैक्टिस करने के आरोप में FIR दर्ज की है। यह मामला बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की असिस्टेंट मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रिया जितेंद्र जाधव (46) की शिकायत पर सामने आया। डॉ. जाधव वर्ष 2008 से BMC में कार्यरत हैं और वर्तमान में H/वेस्ट वार्ड में तैनात हैं।</p>
<p> </p>
<p>पुलिस के अनुसार, 20 अप्रैल को दोपहर करीब 3:30 बजे डॉ. जाधव को क्राइम ब्रांच यूनिट-9 से सूचना मिली कि बांद्रा (वेस्ट) स्थित नंदी टॉकीज के पास नंदी गली में “अनुज हेल्थ सेंटर” नाम से एक अवैध क्लिनिक चलाया जा रहा है, जहां एक व्यक्ति खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज कर रहा है। इसके बाद पुलिस ने एक जाल बिछाया। गोवंडी निवासी अब्दुल अरशद अब्दुल समद शेख (51) को नकली मरीज के रूप में इस्तेमाल किया गया। उसे पहले से मार्क किए गए ₹500 के छह नोट (कुल ₹3,000) दिए गए, जिनके सीरियल नंबर पंच गवाहों की मौजूदगी में दर्ज किए गए थे।</p>
<p>डिकॉय मरीज क्लिनिक पहुंचा, जहां आरोपी ने उसका इलाज किया और दवाइयां दीं तथा बदले में नकद राशि ली। लेनदेन की पुष्टि होने के बाद पुलिस टीम ने डॉ. जाधव और पंच गवाहों के साथ शाम करीब 4:09 बजे क्लिनिक पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान आरोपी ने अपनी पहचान मुंब्रा, ठाणे निवासी आसिफ हुसैन सरवर शेख (44) के रूप में बताई। जांच में सामने आया कि उसने खुद को डॉक्टर बताकर क्लिनिक चला रखा था। मौके पर उसका सहयोगी अनवर अंसार हुसैन शेख (46), मूल रूप से बरेली, उत्तर प्रदेश का निवासी, भी मौजूद था।</p>
<p>पूछताछ में आसिफ शेख ने स्वीकार किया कि उसके पास किसी भी मान्यता प्राप्त मेडिकल संस्थान की डिग्री नहीं है। वह न तो किसी मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड था और न ही उसके पास BMC का रजिस्ट्रेशन या गुमास्ता लाइसेंस था। इसके बावजूद वह पिछले लगभग पांच वर्षों से “अनुज हेल्थ सेंटर” के नाम से क्लिनिक चला रहा था और मरीजों का इलाज कर रहा था। पुलिस के अनुसार, इस दौरान वह कई लोगों को इलाज के नाम पर दवाइयां देता था और उनसे पैसे वसूलता था। अब यह भी जांच की जा रही है कि उसके इलाज से किसी मरीज को कोई नुकसान तो नहीं हुआ।</p>
<p>बांद्रा पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस अवैध क्लिनिक नेटवर्क में और कोई व्यक्ति शामिल तो नहीं था। इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी क्लिनिक में इलाज कराने से पहले डॉक्टर की वैध योग्यता और पंजीकरण की जांच जरूर करें, ताकि ऐसे फर्जी प्रैक्टिशनरों से बचा जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 13:00:25 +0530</pubDate>
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