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                <title>doctor - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई : बांद्रा वेस्ट में फर्जी डॉक्टर का भंडाफोड़, बिना डिग्री क्लिनिक चलाने का खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के बांद्रा वेस्ट इलाके में क्राइम ब्रांच और सिविक हेल्थ डिपार्टमेंट के संयुक्त ऑपरेशन में एक फर्जी डॉक्टर द्वारा चलाए जा रहे अवैध क्लिनिक का भंडाफोड़ हुआ है। इस कार्रवाई के बाद बांद्रा पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और बिना वैध योग्यता के मेडिकल प्रैक्टिस करने के आरोप में FIR दर्ज की है। यह मामला बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की असिस्टेंट मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रिया जितेंद्र जाधव (46) की शिकायत पर सामने आया। डॉ. जाधव वर्ष 2008 से BMC में कार्यरत हैं और वर्तमान में H/वेस्ट वार्ड में तैनात हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49386/fake-doctor-busted-in-mumbai-bandra-west-revelation-of-running"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-22t125926.897.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> मुंबई के बांद्रा वेस्ट इलाके में क्राइम ब्रांच और सिविक हेल्थ डिपार्टमेंट के संयुक्त ऑपरेशन में एक फर्जी डॉक्टर द्वारा चलाए जा रहे अवैध क्लिनिक का भंडाफोड़ हुआ है। इस कार्रवाई के बाद बांद्रा पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और बिना वैध योग्यता के मेडिकल प्रैक्टिस करने के आरोप में FIR दर्ज की है। यह मामला बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की असिस्टेंट मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रिया जितेंद्र जाधव (46) की शिकायत पर सामने आया। डॉ. जाधव वर्ष 2008 से BMC में कार्यरत हैं और वर्तमान में H/वेस्ट वार्ड में तैनात हैं।</p>
<p> </p>
<p>पुलिस के अनुसार, 20 अप्रैल को दोपहर करीब 3:30 बजे डॉ. जाधव को क्राइम ब्रांच यूनिट-9 से सूचना मिली कि बांद्रा (वेस्ट) स्थित नंदी टॉकीज के पास नंदी गली में “अनुज हेल्थ सेंटर” नाम से एक अवैध क्लिनिक चलाया जा रहा है, जहां एक व्यक्ति खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज कर रहा है। इसके बाद पुलिस ने एक जाल बिछाया। गोवंडी निवासी अब्दुल अरशद अब्दुल समद शेख (51) को नकली मरीज के रूप में इस्तेमाल किया गया। उसे पहले से मार्क किए गए ₹500 के छह नोट (कुल ₹3,000) दिए गए, जिनके सीरियल नंबर पंच गवाहों की मौजूदगी में दर्ज किए गए थे।</p>
<p>डिकॉय मरीज क्लिनिक पहुंचा, जहां आरोपी ने उसका इलाज किया और दवाइयां दीं तथा बदले में नकद राशि ली। लेनदेन की पुष्टि होने के बाद पुलिस टीम ने डॉ. जाधव और पंच गवाहों के साथ शाम करीब 4:09 बजे क्लिनिक पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान आरोपी ने अपनी पहचान मुंब्रा, ठाणे निवासी आसिफ हुसैन सरवर शेख (44) के रूप में बताई। जांच में सामने आया कि उसने खुद को डॉक्टर बताकर क्लिनिक चला रखा था। मौके पर उसका सहयोगी अनवर अंसार हुसैन शेख (46), मूल रूप से बरेली, उत्तर प्रदेश का निवासी, भी मौजूद था।</p>
<p>पूछताछ में आसिफ शेख ने स्वीकार किया कि उसके पास किसी भी मान्यता प्राप्त मेडिकल संस्थान की डिग्री नहीं है। वह न तो किसी मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड था और न ही उसके पास BMC का रजिस्ट्रेशन या गुमास्ता लाइसेंस था। इसके बावजूद वह पिछले लगभग पांच वर्षों से “अनुज हेल्थ सेंटर” के नाम से क्लिनिक चला रहा था और मरीजों का इलाज कर रहा था। पुलिस के अनुसार, इस दौरान वह कई लोगों को इलाज के नाम पर दवाइयां देता था और उनसे पैसे वसूलता था। अब यह भी जांच की जा रही है कि उसके इलाज से किसी मरीज को कोई नुकसान तो नहीं हुआ।</p>
<p>बांद्रा पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस अवैध क्लिनिक नेटवर्क में और कोई व्यक्ति शामिल तो नहीं था। इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी क्लिनिक में इलाज कराने से पहले डॉक्टर की वैध योग्यता और पंजीकरण की जांच जरूर करें, ताकि ऐसे फर्जी प्रैक्टिशनरों से बचा जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 13:00:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : डॉक्टर साइबर जालसाजों के शिकारडॉक्टर को 11 दिनों में ₹12 करोड़ का नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के पुणे के एक 75 साल के डॉक्टर साइबर जालसाजों के शिकार होकर करीब 12 करोड़ रुपये गंवा बैठे। उनसे यह कहकर ठगी की गई कि अगर वे शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करेंगे तो 11 दिन में रकम दोगुनी हो जाएगी। डॉक्टर को यकीन था कि अगर वे 11 दिन तक स्टॉक में इन्वेस्ट करेंगे तो उन्हें करीब 54 करोड़ रुपये का रिटर्न मिलेगा। कम समय में ज्यादा प्रॉफिट मिलने का भरोसा करके डॉक्टर ने कुछ हफ्तों तक साइबर क्रिमिनल्स को पैसे ट्रांसफर किए।<br />पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, ठगी इसी साल जनवरी में शुरू हुई थी। पीड़ित डॉक्टर को सबसे पहले एक अनजान नंबर से मैसेज आया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49089/mumbai-doctor-becomes-victim-of-cyber-fraudsters-doctor-suffers-loss"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-10t101614.040.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र के पुणे के एक 75 साल के डॉक्टर साइबर जालसाजों के शिकार होकर करीब 12 करोड़ रुपये गंवा बैठे। उनसे यह कहकर ठगी की गई कि अगर वे शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करेंगे तो 11 दिन में रकम दोगुनी हो जाएगी। डॉक्टर को यकीन था कि अगर वे 11 दिन तक स्टॉक में इन्वेस्ट करेंगे तो उन्हें करीब 54 करोड़ रुपये का रिटर्न मिलेगा। कम समय में ज्यादा प्रॉफिट मिलने का भरोसा करके डॉक्टर ने कुछ हफ्तों तक साइबर क्रिमिनल्स को पैसे ट्रांसफर किए।<br />पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, ठगी इसी साल जनवरी में शुरू हुई थी। पीड़ित डॉक्टर को सबसे पहले एक अनजान नंबर से मैसेज आया।</p>
<p> </p>
<p>मैसेज में कहा गया था कि अगर वे शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करेंगे तो उन्हें भारी प्रॉफिट होगा। पैसे की उम्मीद कर रहे डॉक्टर ने साइबर क्रिमिनल्स में दिलचस्पी दिखाई। साइबर क्रिमिनल्स ने वीआईपी स्टॉक 24 नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए बुजुर्ग डॉक्टर को लालच दिया। आरोपियों ने उस व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए एक इन्वेस्टमेंट प्लान शेयर किया। प्लान आकर्षक होने के कारण डॉक्टर ने अपने पैसे ट्रांसफर कर दिए। साइबर क्रिमिनल्स ने डॉक्टर को बार-बार यकीन दिलाया कि अगर वह उनके इंस्ट्रक्शन्स को सही तरीके से फॉलो करेंगे, तो सिर्फ 11 दिनों में रिटर्न आ जाएगा।</p>
<p>पुलिस के मुताबिक, पीड़ित ने एक फेक ट्रेडिंग ऐप का इस्तेमाल किया था। ऐप को एक नामी कंपनी का बताया गया था। सबसे पहले, साइबर क्रिमिनल्स ने पर्सनल और फाइनेंशियल डिटेल्स इकट्ठा कीं। फिर उन्होंने कई बैंक अकाउंट्स में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा। डॉक्टर द्वारा भेजे गए पैसे को फेक ऐप में इन्वेस्टमेंट के तौर पर दिखाया गया। ऐप ने भारी प्रॉफिट भी दिखाया। 7 से 18 मार्च के बीच, पीड़ित ने 8 अकाउंट्स में पैसे ट्रांसफर किए। माना जा रहा है कि डॉक्टर ने करीब 12.31 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए।</p>
<p>हालांकि, जब डॉक्टर ने पैसे इन्वेस्ट करने से मना कर दिया, तो साइबर क्रिमिनल्स ने उन पर दबाव डाला। आरोपियों ने प्रॉपर्टी जब्त करने की धमकी दी। पुलिस ने कहा कि उन्होंने डॉक्टर को पैसे ट्रांसफर करने के लिए डराया। पीड़ित ने करीब तीन महीने तक पैसे ट्रांसफर किए। हालांकि, पुलिस ने कहा कि जब पैसे वापस नहीं आए तो डॉक्टर को एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हुई है। इसके बाद, उन्होंने पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच जारी रखे हुए है।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 10:20:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : कूपर अस्पताल में एक चौंकाने वाला मामला; डॉक्टर बनने के बाद भी भटक रहा युवक </title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>मनपा के अधीन संचालित कूपर अस्पताल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस अस्पताल में एक पूर्व सैनिक के बेटे और एमबीबीएस पास युवा डॉक्टर को स्कॉलरशिप के बावजूद ७.९३ लाख रुपए की भारी भरकम राशि जमा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। डॉक्टर बनने के बाद भी अपना इंटर्नशिप कंप्लीशन सर्टिफिकेट पाने के लिए दर-दर भटक रहे युवक ने इस अन्याय के खिलाफ सीधे डीन को पत्र लिखकर गुहार लगाई है। आरोप है कि डीएचई योजना के तहत शत-प्रतिशत ट्यूशन फीस माफी के बावजूद कॉलेज प्रशासन न केवल इसका लाभ देने से इनकार कर रहा है, बल्कि सर्टिफिकेट रोककर उनके करियर पर ही ताला लगाने जैसा क्रूर कार्य कर रहा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49075/a-shocking-case-in-mumbai-cooper-hospital-a-young-man"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मनपा के अधीन संचालित कूपर अस्पताल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस अस्पताल में एक पूर्व सैनिक के बेटे और एमबीबीएस पास युवा डॉक्टर को स्कॉलरशिप के बावजूद ७.९३ लाख रुपए की भारी भरकम राशि जमा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। डॉक्टर बनने के बाद भी अपना इंटर्नशिप कंप्लीशन सर्टिफिकेट पाने के लिए दर-दर भटक रहे युवक ने इस अन्याय के खिलाफ सीधे डीन को पत्र लिखकर गुहार लगाई है। आरोप है कि डीएचई योजना के तहत शत-प्रतिशत ट्यूशन फीस माफी के बावजूद कॉलेज प्रशासन न केवल इसका लाभ देने से इनकार कर रहा है, बल्कि सर्टिफिकेट रोककर उनके करियर पर ही ताला लगाने जैसा क्रूर कार्य कर रहा है।</p>
<p> </p>
<p>मुंबई मनपा द्वारा संचालित कूपर अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में बैच २०२० के डॉ. अंकुश कुमार ने यहीं से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और हाल ही में अपनी इंटर्नशिप भी समाप्त की है। उनके पिता भारतीय नौसेना से वर्ष २००६ में सेवानिवृत्त हुए थे, जिसके आधार पर वे ‘एजुकेशन कंसेशन टू चिल्ड्रन ऑफ एक्स सर्विस मैन’ योजना के लिए पात्र हैं। कॉलेज के वर्ष २०२३ के ब्रोशर में भी इस योजना के लागू होने का स्पष्ट उल्लेख है। इसके बावजूद जब वे नो-ड्यूज लेने प्रशासनिक कार्यालय पहुंचे तो उन्हें चौंकाते हुए ७,९३,४०० रुपए की बकाया राशि थमा दी गई। डॉ. अंकुश का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन यह कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि यह संस्थान मुंबई मनपा के अधीन है और राज्य सरकार के नियम उस पर लागू नहीं होते। अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या मुंबई मनपा खुद को सरकार से ऊपर समझ रही है? जब योजना स्पष्ट रूप से सरकारी व अनुदानित संस्थानों पर लागू है और कॉलेज स्वयं को उस श्रेणी में दर्शाता है तो फिर लाभार्थी छात्र से किस आधार पर फीस मांगी जा रही है?</p>
<p>डॉ. अंकुश ने इस अन्याय के खिलाफ कॉलेज के डीन को लिखित शिकायत दी है, जिसमें उन्होंने अधिसूचना की प्रति और अन्य कॉलेजों में इस योजना के पालन से जुड़े दस्तावेज भी संलग्न किए हैं। उनका कहना है कि अन्य संस्थान इस नियम का पालन कर रहे हैं और छात्रों से फीस नहीं वसूल रहे, जबकि यहां उल्टा दबाव बनाकर वसूली की जा रही है। सर्टिफिकेट रोके जाने के कारण डॉ. अंकुश का पूरा करियर दांव पर लग गया है।<br />कम समय में राशि जमा करना संभव नहीं</p>
<p>आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले डॉ. अंकुश का कहना है कि इतनी बड़ी राशि कम समय में जमा करना उनके लिए संभव नहीं है। ऐसे में एक तरफ सरकार पूर्व सैनिकों के परिवारों के लिए योजनाएं घोषित कर रही है, दूसरी ओर जमीनी स्तर पर उन्हें लागू करने में इस तरह की बाधाएं गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49075/a-shocking-case-in-mumbai-cooper-hospital-a-young-man</link>
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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 12:58:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पटना : बिहार पुलिस ने मुंबई से मशहूर म्यूजिक कम्पोजर के सौतेले भाई को दबोचा, डॉक्टर से की थी लाखों की ठगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गांधी मैदान थाने की पुलिस ने मुंबई में छापेमारी कर पटना के डॉक्टर के 70.68 रुपये की ठगी मामले में मुख्य आरोपित स्व. शराफत अली खान के पुत्र जावेद शराफत अली खान को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें महाराष्ट्र के मालवानी मलाड़ से गिरफ्तार किया गया है। वह खुद को मशहूर म्यूजिक कम्पोजर का सौतेला भाई बताया था। आरोप है कि उसने पीड़ित से खुद को म्यूजिक डायरेक्टर और अपने दो साथियों को रिकॉर्डिंग स्टूडियो का मालिक बताया था। फिर साथ में व्यापार करने के लिए पूंजी लगाने की बात कहकर पीड़ित से तीनों ने अपने अपने खातों में रकम ट्रांसफर करा लिया था।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48765/patna-bihar-police-arrested-the-step-brother-of-a-famous"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/images---2026-03-28t104623.221.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पटना : </strong>गांधी मैदान थाने की पुलिस ने मुंबई में छापेमारी कर पटना के डॉक्टर के 70.68 रुपये की ठगी मामले में मुख्य आरोपित स्व. शराफत अली खान के पुत्र जावेद शराफत अली खान को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें महाराष्ट्र के मालवानी मलाड़ से गिरफ्तार किया गया है। वह खुद को मशहूर म्यूजिक कम्पोजर का सौतेला भाई बताया था। आरोप है कि उसने पीड़ित से खुद को म्यूजिक डायरेक्टर और अपने दो साथियों को रिकॉर्डिंग स्टूडियो का मालिक बताया था। फिर साथ में व्यापार करने के लिए पूंजी लगाने की बात कहकर पीड़ित से तीनों ने अपने अपने खातों में रकम ट्रांसफर करा लिया था।</p>
<p> </p>
<p><strong>ट्रांजिट रिमांड पर लाएगी पटना</strong><br />अब पटना पुलिस उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लेकर पटना लायेगी। गांधी मैदान थानेदार ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि जावेद शराफत अली खान के अलावा दो के खिलाफ भी केस किया गया था। पाटलिपुत्र निवासी पीड़ित डॉक्टर प्रोड्सूर का कार्य भी करते है। उन्होंने एक मार्च 2024 में गांधी मैदान में शिकायत की थी कि मुंबई निवासी जावेद शराफत अली खान अपने मित्र प्रकाश भारतद्वाज और राकेश वर्मा से मुलाकात कराया था।</p>
<p>तब जावेद ने बताया था कि वह म्यूजिक डायरेक्टर का कार्य करते हैं। जबकि अन्य दोनों साथियों के बारे में रिकॉर्डिंग स्टूडियो का मालिक बताया था। मुलाकात के दौरान इन लोगों ने विश्वास दिलाया कि अगर आप हम लोगों के साथ काम करना चाहते है तो इस व्यापार में पूंजी लगाना होगा।</p>
<p><strong>70 लाख से ज्यादा का ट्रांसफर</strong><br />वह जावेद शराफत के कहने पर अपने तीन बैंक खातों से गाना रिकॉर्डिंग और प्रमोशन के नाम पर तीनों के बैंक खातों में 70 लाख 68 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद वह लगातार उनसे संपर्क कर जिस काम के लिए पैसा दिया गया, वह अब तक पूरा क्यों नहीं किया गया? यह पूछने लगे। जबकि आरोपितों ने भरोसा दिलाया था कि पैसा देते ही काम शुरू हो जाएगा। आरोप है कि इसके बाद जावेद शराफत ने एक और छोटी फिल्म बनाने के लिए 2.25 लाख रुपये लिया। <br />बताया कि फिल्म गाना के प्रमोशन में सहायक होगा, लेकिन उन्होंने कोई फिल्म नहीं बनाई। मिक्सिंग मास्टरिंग के नाम पर भी 80 हजार रुपये लिए गए, जबकि यह काम सिर्फ दो हजार हजार रुपये का था। इसके बाद वह खुद को ठगा महसूस करने लगा। जब अपना पैसा मांगने लगे तो लौटाया नहीं जा रहा था। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत थाने में की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/48765/patna-bihar-police-arrested-the-step-brother-of-a-famous</link>
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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 10:47:39 +0530</pubDate>
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