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                <title>Reserve Bank - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Reserve Bank RSS Feed</description>
                
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                <title>आरबीआई (रिजर्व बैंक) खोलेगा अपना खजाना, बाजार में झोंकेगा १०० बिलियन डॉलर...</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>मुंबई :</strong> पिछले कुछ दिनों से हिंदुस्थानी रुपए की कीमत डॉलर के मुकाबले तेजी से गिरी है। इससे आयात महंगा होने के साथ देश में महंगाई के चरम पर पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। इसके ऊपर लगाम लगाने के लिए आरबीआई (रिजर्व बैंक) योजना बना रहा है। इसके तहत आरबीआई बाजार में अपने रिजर्व विदेशी मुद्रा का भंडार खोल सकता है। रायटर्स के हवाले से मिली एक खबर के अनुसार आरबीआई अपने कुल विदेशी मुद्रा भंडार का छठा हिस्सा बाजार में डाल सकता है।</p>
<p>बता दें कि अमेरिकी डॉलर में आ रही ‘रिकॉर्ड रैली’ के कारण दुनिया भर की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/12179/rbi--reserve-bank--will-open-its-treasury--will-spend-100-billion-dollars-in-the-market-"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2022-07/images-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> पिछले कुछ दिनों से हिंदुस्थानी रुपए की कीमत डॉलर के मुकाबले तेजी से गिरी है। इससे आयात महंगा होने के साथ देश में महंगाई के चरम पर पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। इसके ऊपर लगाम लगाने के लिए आरबीआई (रिजर्व बैंक) योजना बना रहा है। इसके तहत आरबीआई बाजार में अपने रिजर्व विदेशी मुद्रा का भंडार खोल सकता है। रायटर्स के हवाले से मिली एक खबर के अनुसार आरबीआई अपने कुल विदेशी मुद्रा भंडार का छठा हिस्सा बाजार में डाल सकता है।</p>
<p>बता दें कि अमेरिकी डॉलर में आ रही ‘रिकॉर्ड रैली’ के कारण दुनिया भर की करेंसीज बिखरती जा रही हैं। हिंदुस्थानी करेंसी की हालत तुलनात्मक रूप से बेहतर है, लेकिन इसके बाद भी रुपया लगातार गिर रहा है। इसी सप्ताह डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार ८० के भी पार निकल गया। सिर्फ इस साल रुपया डॉलर के मुकाबले ७ फीसदी से ज्यादा कमजोर हो चुका है। ऐसे में रिजर्व बैंक ने रुपए को बचाने की खास तैयारी की है।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, रुपए को तेज गिरावट से बचाने के लिए आरबीआई (रिजर्व बैंक) अरबों डॉलर खर्च करने से भी पीछे नहीं हटेगा। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सेंट्रल बैंक रुपए को बचाने के लिए अपने कुल विदेशी मुद्रा भंडार का छठवां हिस्सा खर्च करने को तैयार है। इसका मतलब हुआ कि रुपए की तेज गिरावट की स्थिति में रिजर्व बैंक बाजार में करीब १०० बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा झोंक सकता है।</p>
<p>गौरतलब है कि ‘रुपया’ के लिए ये सबसे खराब दौर चल रहा है। रुपए की वैल्यू पिछले कुछ समय के दौरान बड़ी तेजी से कम हुई है। इस सप्ताह मंगलवार को शेयर बाजारों में गिरावट के बीच रुपए ने गिरने का नया रिकॉर्ड बना दिया था। आरबीआई के हालिया प्रयासों के बाद भी रुपया डॉलर के मुकाबले पहली बार ८० से भी नीचे गिर गया। हालांकि बाद में यह कुछ सुधरा, लेकिन अभी भी डॉलर के मुकाबले रुपया ८० के साइकोलॉजिकल लेवल के आस-पास ही ट्रेड कर रहा है। रुपए को ये स्थिरता प्रदान करने में रिजर्व बैंक का हाथ है।</p>
<p>रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार को देखें तो यह पिछले साल सितंबर की शुरुआत में ६४२.४५० बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। उसके बाद से रिजर्व बैंक का विदेशी मुद्रा भंडार अब तक ६० बिलियन डॉलर से ज्यादा कम हो चुका है। हालांकि इस गिरावट के बाद भी आरबीआई दुनिया में पांचवां सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडारवाला सेंट्रल बैंक है। रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई के फॉरेक्स रिजर्व में आई गिरावट का एक कारण वैल्यूएशन में आया बदलाव तो है ही, लेकिन रुपए को बचाने के लिए डॉलर बेचकर किया गया दखल भी इस गिरावट के लिए जिम्मेदार है।</p>
<p>रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है, ‘रुपए में उथल-पुथल को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ने डॉलर खर्च करने का इरादा साफ कर दिया है। उन्होंने ऐसा करने का संकेत दिया है। अगर जरूरत पड़ी तो रिजर्व बैंक रुपए को बचाने के लिए १०० बिलियन डॉलर तक खर्च करने को तैयार है।’ हालांकि रिजर्व बैंक ने अभी तक इस बारे में आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है। रिजर्व बैंक का इस बारे में हमेशा ये रुख रहा है कि वह रुपए को स्थिर रखने या गिरावट से बचाने के लिए दखल नहीं देता है। रिजर्व बैंक सिर्फ तभी बीच में आता है, जब रुपया अचानक से तेज गिरावट का शिकार होता है।</p>
<p>ऐतिहासिक आंकड़ों को देखें तो रुपए की वैल्यू डॉलर के मुकाबले लगातार कम होती गई है। अभी प्रमुख मुद्राओं के बास्केट में डॉलर के लगातार मजबूत होने से भी रुपए की स्थिति कमजोर हुई है। करीब दो दशक बाद डॉलर और यूरो की वैल्यू बराबर हो चुकी है, जबकि यूरो लगातार डॉलर से ऊपर रहता आया है। रुपए की बात करें तो दिसंबर २०१४ से अब तक यह डॉलर के मुकाबले करीब २५ फीसदी कमजोर हो चुका है। रुपया साल भर पहले डॉलर के मुकाबले ७४.५४ के स्तर पर था।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Thu, 21 Jul 2022 11:04:18 +0530</pubDate>
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                <title>बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने सवालों का जवाब नहीं मिलने पर रिजर्व बैंक को फटकार लगाई , नोटों और सिक्कों के फीचर्स बार-बार क्यों बदलता रहता है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबईः केंद्र सरकार ने कई करेंसी नोंटों और सिक्कों के स्वरूप में बदलाव किये हैं। सरकार का तर्क ये है कि इससे करेंसी के जाली प्रयोग में लगाम लगती है। लेकिन इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रतिकुल टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि करेंसी नोटों और सिक्कों का आकार प्रकार बदलना प्राय: ठीक नहीं होता क्योंकि जो लोग नहीं देख सकते उन्हें नोटों और सिक्कों का आकार प्रकार समझने में सालों का वक्त लग सकता है।</p> <p>चीफ जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और जस्टिस भारती डांगरे की खंडपीड ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से कहा है कि वह दो सप्ताह में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/1681/the-bombay-high-court-reprimanded-the-reserve-bank-for-not-answering-its-questions-why-do-the-features-of-notes-and-coins-change-frequently"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2019-08/images-28.jpeg" alt=""></a><br /><p>मुंबईः केंद्र सरकार ने कई करेंसी नोंटों और सिक्कों के स्वरूप में बदलाव किये हैं। सरकार का तर्क ये है कि इससे करेंसी के जाली प्रयोग में लगाम लगती है। लेकिन इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रतिकुल टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि करेंसी नोटों और सिक्कों का आकार प्रकार बदलना प्राय: ठीक नहीं होता क्योंकि जो लोग नहीं देख सकते उन्हें नोटों और सिक्कों का आकार प्रकार समझने में सालों का वक्त लग सकता है।</p> <p>चीफ जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और जस्टिस भारती डांगरे की खंडपीड ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से कहा है कि वह दो सप्ताह में बताया कि ये बदलाव प्राय: क्यों कर दिये जाते हैं। इस मामले में कोर्ट नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्लाइंड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें दावा किया गया है कि नई करेंसी और सिक्के को लेकर उन लोगों को बहुत मुश्किल आती है जो देख नहीं सकते। अदालत ने गत एक अगस्त को इस मामले में आरबीआई को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा था।</p> <p>गुरुवार को हुई सुनवाई में आरबीआई ने कहा कि उसे आंकड़े जमा करने के लिये और समय चाहिये। इस पर कोर्ट ने बताया कि वह केवल यह जानना चाहती है कि रंग और आकार और दूसरी चीजें बदलने की वजह क्या है। खंडपीठ ने कहा कि आरबीआई का दावा है कि नई करेंसी के नोट जारी करने और पुरानी के स्वरूप में बदलाव की वजह जाली मुद्रा का चलन है। हालांकि नोटबंदी के बाद से आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि इस दावे में कोई सचाई नहीं हैं क्योंकि सभी मुद्रित नोट वापस आ चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Aug 2019 16:54:14 +0530</pubDate>
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