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                <title>Crisis - Rokthok Lekhani</title>
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                <description>Crisis RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : झीलों पर बड़ा संकट, 10 सालों से साफ नहीं हुआ पानी; अब उठी साइंटिफिक सर्वे की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है. इस समय अधिक तेज धूप पड़ने से कई नदियों और जलाशयों का पानी सूखने लगता है. ऐसे में शहर के लोगों तक पानी की पर्याप्त आपूर्ति के लिए प्रशासन कई तरह के कदम उठाती है. मुंबई में भी गर्मी बढ़ने के साथ प्रशासन ने हर घरों तक पानी पहुंचाने वाली 7 झीलों के पानी के स्तर का साइंटिफिक सर्वे कराने की मांग की है. बता दें कि मुंबई एक प्रायद्वीपीय द्वीप शहर ( Peninsular Island City) होने के चलते 3 तरफ से अरब सागर और खाड़ियों से घिरा है. इसके पास साफ पानी का कोई नेचुरल सोर्स नहीं है. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49101/big-crisis-on-mumbai-lakes-water-has-not-been-cleaned"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-10t114750.359.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है. इस समय अधिक तेज धूप पड़ने से कई नदियों और जलाशयों का पानी सूखने लगता है. ऐसे में शहर के लोगों तक पानी की पर्याप्त आपूर्ति के लिए प्रशासन कई तरह के कदम उठाती है. मुंबई में भी गर्मी बढ़ने के साथ प्रशासन ने हर घरों तक पानी पहुंचाने वाली 7 झीलों के पानी के स्तर का साइंटिफिक सर्वे कराने की मांग की है. बता दें कि मुंबई एक प्रायद्वीपीय द्वीप शहर ( Peninsular Island City) होने के चलते 3 तरफ से अरब सागर और खाड़ियों से घिरा है. इसके पास साफ पानी का कोई नेचुरल सोर्स नहीं है. </p>
<p> </p>
<p><strong>झीलों में जमी गाद  </strong><br />मुंबई शहर को विहार, तुलसी, भाटसा, मोदक सागर, मध्य वैतरणा, तानसा और ऊपरी वैतरणा इन 7 अलग-अलग झीलों से रोज पानी सप्लाई मिलती है. कांग्रेस पार्षद आयशा वानू ने BMC के नगर निगम में एक याचिका दायर कर कहा कि मुंबई के बॉर्डर में वॉटर सप्लाई करने वाली झीलों में भारी मात्रा में गाद जमा हुआ है, जिसके चलते उनकी स्टोरेज कैपिसिटी घट रही है. इसके चलते गर्मी में पानी की समस्या और गंभीर हो जाती है. उन्होंने कहा कि इससे BMC की ओर से नागरिकों को पानी की सप्लाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.   </p>
<p><strong>झीलों का साइंटिफिक सर्वे किया जाए</strong><br />आयशा वानू ने अपने नोटिस में कहा,' बढ़ते शहरीकरण, जंगलों की कटाई और अनियंत्रित गार्बेज डिस्पोजल झीलों में गाद जमा होने के कुछ प्रमुख कारण हैं. इसे ध्यान में रखते हुए नगर निगम का दृढ़ मत है कि मुंबई शहर को पानी सप्लाई करने वाली सभी झीलों का साइंटिफिक सर्वे किया जाए और इन झीलों में जमा गाद को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाए. इसके साथ ही इसके लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम भी तैयार किया जाए.'  नोटिस में नगर प्रशासन से इस संबंध में एक रिपोर्ट पेश करने के लिए भी कहा गया.  </p>
<p><strong>2015 से नहीं हुई सफाई </strong><br />नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 2015 से ही इन 7 झीलों से गाद निकालने की प्रक्रिया नहीं हुई है. इस प्रक्रिया में नदियों, झीलों या तालाब के तल में जमी मिट्टी या गाद को निकाला जाता है. इसका मकसद जलभराव को रोकना, फ्लड मैनेजमेंट करना और पानी की गुणवत्ता सुधारना होता है. रिकॉर्ड से यह भी पता चला है कि मुंबई की 7 झीलों में कुल वॉटर स्टोरेज 14.47 लाख लीटर कुल क्षमता के मुकाबले केवल 35 प्रतिशत यानी 5.20 लाख लीटर है. अधिकारियों का कहना है कि तापमान में वृद्धि के चलते इवैपोरेशन की स्पीड तेज हो गई है. पिछले साल मई 2025 के पहले हफ्ते तक जलस्तर 20 प्रतिशत से नीचरे गिर गया था. हालांकि, मानसून जल्दी होने के चलते समय से पहले ही जलाशय भर गए थे. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 12:48:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : पानी का संकट गहराया, झीलों का जलस्तर घटकर 37.70% पर पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बढ़ती गर्मी के साथ पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है। शहर को पानी सप्लाई करने वाली झीलों का जलस्तर लगातार घट रहा है और फिलहाल यह घटकर 37.70 प्रतिशत रह गया है। इससे आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49013/mumbai-water-crisis-deepens-water-level-of-lakes-drops-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download-(58).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बढ़ती गर्मी के साथ पानी की समस्या गंभीर होती जा रही है। शहर को पानी सप्लाई करने वाली झीलों का जलस्तर लगातार घट रहा है और फिलहाल यह घटकर 37.70 प्रतिशत रह गया है। इससे आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।</p>
<p> </p>
<p><strong>सात झीलों पर टिकी है मुंबई की प्यास</strong><br />मुंबई की जल आपूर्ति पूरी तरह सात प्रमुख झीलों—अपर वैतरणा, मोडकसागर, तानसा, मध्य वैतरणा, भातसा, विहार और तुलसी—पर निर्भर है।</p>
<p>इन सभी जलाशयों का कुल भंडारण क्षमता लगभग 14.47 लाख मिलियन लीटर है, जिससे रोजाना करीब 4000 मिलियन लीटर पानी शहर को सप्लाई किया जाता है। हालांकि सभी झीलों में जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है, जो चिंता का विषय बन गई है।</p>
<p><strong>कई इलाकों में कम दबाव की समस्या</strong><br />शहर के कई हिस्सों में पानी के कम दबाव की शिकायतें सामने आ रही हैं।<br />लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।<br />गर्मी बढ़ने के साथ पानी की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।<br />बीएमसी के सामने बड़ी चुनौती<br />बीएमसी के सामने जुलाई तक पानी की आपूर्ति को संतुलित बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। हालांकि मौजूदा जल भंडारण पिछले दो वर्षों की तुलना में बेहतर बताया जा रहा है, लेकिन अनिश्चित मानसून और बढ़ती गर्मी के चलते यह राहत ज्यादा लंबे समय तक नहीं रह सकती।<br /><strong>आगे और गिर सकता है जलस्तर</strong><br />विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर बारिश नहीं होती है, तो झीलों का जलस्तर और नीचे जा सकता है।<br />ऐसे में पानी की कटौती जैसे सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।<br />इस स्थिति से बचने के लिए नागरिकों को पानी का समझदारी से उपयोग करना बेहद जरूरी हो गया है।<br />मुंबई में संभावित जल संकट को देखते हुए आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 11:22:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : ईंधन संकट के बीच भारत को मिली बड़ी खुशखबरी, होर्मुज पार कर मुंबई आया एलपीजी टैंकर  </title>
                                    <description><![CDATA[<p>ईरान-अमेरिका जंग के बीच भारत को बड़ी खुशखबरी मिली है. ईंंधन संकट की आहट के बीच होर्मुज पार कर एक एलपीजी टैंकर मुंबई आ चुका है. जी हां, भारतीय झंडे वाला एलपीजी कैरियर जहाज बीडब्ल्यू टायर आज यानी बुधवार सुबह होर्मुज को पार कर मुंबई बंदरगाह पर पहुंचा. यह एलपीजी कैरियर जहाज बीडब्ल्यू टायर उन दो एलपीजी कैरियर जहाजों में से एक है, जो शुक्रवार को दुबई-रास अल खैमा से रवाना हुए थे. दूसरा कैरियर  बीडब्ल्यू एल्म है जो रास्ते में है और वह भी न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुंचने वाला है.</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48870/india-got-great-news-amid-mumbai-fuel-crisis-lpg-tanker"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-01t132213.898.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>ईरान-अमेरिका जंग के बीच भारत को बड़ी खुशखबरी मिली है. ईंंधन संकट की आहट के बीच होर्मुज पार कर एक एलपीजी टैंकर मुंबई आ चुका है. जी हां, भारतीय झंडे वाला एलपीजी कैरियर जहाज बीडब्ल्यू टायर आज यानी बुधवार सुबह होर्मुज को पार कर मुंबई बंदरगाह पर पहुंचा. यह एलपीजी कैरियर जहाज बीडब्ल्यू टायर उन दो एलपीजी कैरियर जहाजों में से एक है, जो शुक्रवार को दुबई-रास अल खैमा से रवाना हुए थे. दूसरा कैरियर  बीडब्ल्यू एल्म है जो रास्ते में है और वह भी न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुंचने वाला है.</p>
<p> </p>
<p>दरअसल, बीडब्ल्यू टायर एक एलपीजी टैंकर है. इसे 2008 में बनाया गया था. यह भारत के झंडे के तहत चलता है और इसकी कुल लंबाई 225 मीटर और चौड़ाई 36.6 मीटर है. एलपीजी कैरियर जहाजों यानी बीडब्ल्यू टायर और  बीडब्ल्यू एल्म में लगभग 94,000 टन का माल लदा है. इससे पहले एलपीजी टैंकर पाइन गैस और जग वसंत होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारत पहुंचे थे. इन जहाजों पर लदी गैस देश में लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस की खपत के बराबर थे.</p>
<p>अभी आए एलीपीजी टैंकर बीडब्ल्यू टीवाईआर उन 22 भारतीय झंडे वाले जहाज में शामिल हैं जो पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद फारस की खाड़ी में फंस गए थे. इसका कारण युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य का लगभग बंद होना है. होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच का संकरा जलमार्ग है, जो तेल और गैस उत्पादक खाड़ी देशों को शेष विश्व से जोड़ता है. इससे पहले, लगभग 92,712 टन एलपीजी ला रहे एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी सुरक्षित रूप से भारतीय तट पर पहुंच चुके हैं. यह देश की लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस की खपत के बराबर है.</p>
<p>अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले और ईरान के पलटवार के बाद पश्चिम एशिया में बनाव बढ़ गया है. उस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय ध्वज वाले 28 भारतीय जहाज मौजूद थे. इनमें से 24 जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे. पिछले कुछ दिन में दोनों तरफ से दो-दो जहाज सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य तक पहुंचने में सफल रहे हैं.</p>
<p><strong>भारत को एक और खुशखबरी</strong><br />इस बीच भारत को एक और खुशखबरी मिलने जा रही है. जी हां, करीब सात साल के बाद भारत को ईरान से कच्चा तेल जल्द मिलने की संभावना है.  ईरानी तेल से लदा एक जहाज गुजरात के वाडिनार बंदरगाह की तरफ बढ़ रहा है. जहाजों की निगरानी करने वाले आंकड़ों के मुताबिक, ‘पिंग शुन’ नामक यह जहाज लगभग छह लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत की तरफ बढ़ रहा है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 13:23:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : एलपीजी संकट से इडली-वड़ा बनानी वाली 70 प्रतिशत दुकानें बंद </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में बिकने वाले अधिकांश इडली, वड़े और डोसा धारावी की गलियों में बसे छोटे - छोटे घरों और इंडस्ट्री में बनते हैं। लेकिन एलपीजी की कमी के चलते अब 70 प्रतिशत बिज़नेस ठप पड़ चुके हैं। इसमें घरों में बनाने वाले छोटे व्यवसाय से लेकर इडली इंडस्ट्री दोनों शामिल ही। बिज़नेस मालिकों से बात करने पर पता चला कि उनके इंडस्ट्री और दुकानों में काम करने वाले 80 फीसदी लोग अपने गांव का रुख कर चुके हैं। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48843/70-percent-of-idli-vada-shops-closed-due-to-mumbai-lpg"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-31t120648.623.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई में बिकने वाले अधिकांश इडली, वड़े और डोसा धारावी की गलियों में बसे छोटे - छोटे घरों और इंडस्ट्री में बनते हैं। लेकिन एलपीजी की कमी के चलते अब 70 प्रतिशत बिज़नेस ठप पड़ चुके हैं। इसमें घरों में बनाने वाले छोटे व्यवसाय से लेकर इडली इंडस्ट्री दोनों शामिल ही। बिज़नेस मालिकों से बात करने पर पता चला कि उनके इंडस्ट्री और दुकानों में काम करने वाले 80 फीसदी लोग अपने गांव का रुख कर चुके हैं। </p>
<p> </p>
<p><strong>इडली बनाने वाली 6 कंपनियां बंद</strong><br />होलसेल इडली विक्रेता राज नादर ने बताया कि उनके पास एक होटल भी है , जहां 10 कर्मचारी काम करते थे, फिलहाल 2 ही बचे है। रसोई गैस की किल्लत शुरू होने के बाद से 8 गांव जा चुके हैं। बता दें कि धारावी में 6 कंपनियां ऐसी हैं, जो दिन में 50 000 से 1 लाख इडली बनाती हैं। मुंबई के अलग-अलग इलाकों के वेंडर उनसे इडली ले जाते और बेचते हैं। अब एलपीजी सिलिंडर की कमी ने इस बिज़नेस को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इनमे से 4 कंपनियों में ताला लग चुका है।</p>
<p><strong>12 मार्च से ही पड़ने लगा था इफेक्ट</strong><br />बता दें कि धारावी की दुकानें बंद होना शुरू हो चुकी थींं। बिज़नेस करने वालों ने उत्पादन की संख्या में कमी की थी। उस वक्त भी एलपीजी के कमी के चलते संचालक परेशान थे और अब उनकी यह समस्या ज्यादा बढ़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि उन्हें दुकान का किराया देना होता है। काम करने वाले लोगों को पगार देना होता है। यहां तो इतनी काला बाजारी चल रही है कि घर के लिए सिलिंडर मिलना मुश्किल हो चुका है। इस वजह से बहुत से मुंबईकरों को उनका पसंदीदा नाश्ता नहीं मिल पा रहा है।</p>
<p>घर से छोटा व्यवसाय करने वालों का कहना है कि अब 15 दिनों से ज्यादा हो चुका है। जो उम्मीद थी वो भी ख़तम हो चुकी है। बच्चों का एग्जाम ख़तम होते ही हम गांव चले जाएंगे। स्थिति सुधरने पर ही लौटेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 12:13:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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