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                <title>Machines - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Machines RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : युद्ध के बीच चीन से जहाजों पर लदकर आईं सुरंगें खोदने वाली मशीनें, अंडरग्राउंड दौड़ेगी बुलेट ट्रेन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अमेेरिका-ईरान में चले रहे युद्ध के बीच भारत की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए दो टनल बोरिंग मशीनें  मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट पर पहुंच गई हैं। सुरंगें खोदने वाली हर मशीन करीब 2,000 टन की हैं। ये मशीनें जर्मन कंपनी हेरेनकनेक्ट  ने बनाई हैं, जिनका प्रोडॅक्शन चीन में गुआंगझू की फैक्ट्री में किया गया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48763/amidst-the-mumbai-war-tunnel-digging-machines-came-loaded-on"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-28t104328.084.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>अमेेरिका-ईरान में चले रहे युद्ध के बीच भारत की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए दो टनल बोरिंग मशीनें  मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट पर पहुंच गई हैं। सुरंगें खोदने वाली हर मशीन करीब 2,000 टन की हैं। ये मशीनें जर्मन कंपनी हेरेनकनेक्ट  ने बनाई हैं, जिनका प्रोडॅक्शन चीन में गुआंगझू की फैक्ट्री में किया गया है। इन मशीनों को चीन से भारत जहाजों के जरिये लाने में नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय को बीजिंग, बर्लिन से संपर्क साधना पड़ा और अरसे से कूटनीतिक बातचीत के बाद सरकार को ये बड़ी कामयाबी मिली है। इन मशीनों के आने से अब बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को पूरा करने में तेजी आएगी। </p>
<p> </p>
<p><strong>मुंबई के नीचे चट्टान काटकर बनेगा अंडरग्राउंड टनल</strong><br />मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जल्द ही ये मशीनें एक शहर के नीचे चट्टानों को काटकर अंडरग्राउंड टनल बना देंगी, जिससे होकर भारत की पहली बुलेट ट्रेन गुजरेगी। 13.56 डायमीटर वाली ये टनल बोरिंग मशीनें भारत की धरती पर अब तक की सबसे बड़ी मशीनें हैं।</p>
<p><strong>मुंबई के नीचे चट्टान काटकर बनेगा अंडरग्राउंड टनल</strong><br />मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जल्द ही ये मशीनें एक शहर के नीचे चट्टानों को काटकर अंडरग्राउंड टनल बना देंगी, जिससे होकर भारत की पहली बुलेट ट्रेन गुजरेगी। 13.56 डायमीटर वाली ये टनल बोरिंग मशीनें भारत की धरती पर अब तक की सबसे बड़ी मशीनें हैं।<br />रिपोर्टों के अनुसार, इन मशीनों को लाने में भारत के कूटनीतिक संपर्कों का बड़ा इस्तेमाल हुआ है। नई दिल्ली, बीजिंग और बर्लिन के बीच कूटनीतिक प्रयास करने के मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय, भारतीय विदेश मंत्रालय 18 महीनों से लगा हुआ था, तब जाकर ये मशीनें चीन से भारत आ पाईं। </p>
<p><strong>मुंबई से अहमदाबाद तक 508 किमी दौड़ेगी बुलेट ट्रेन</strong><br />रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी बुुलेट ट्रेन परियोजना के लिए मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल  का कॉरिडोर 508 किलोमीटर लंबा होगा, जो महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा। इस कॉरिडोर का करीब 323 किलोमीटर का हिस्सा तकरीबन पूरा हो चुका है। </p>
<p><strong>21 किलोमटर का अंडरग्राउंड कॉरिडोर बनेगा</strong><br />हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का सबसे ज्यादा तकनीकी हिस्सा अंडरग्राउंड वाला है, जो 21 किलोमीटर लंबा है।<br />यह मुंबई में बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स से नवीं मुंबई के शिलफाटा के बीच होगा।<br />यहां बेहद घनी आबादी और इन्फ्रास्ट्रक्चर है, ऐसे में इसे बनाना बेहद जटिल साबित हो रहा था।<br />मगर, अब इन टीबीएम मशीनों के आने से टनल बनाने का काम संभव हो पाएगा। </p>
<p><strong>कितना हो चुका है काम, कितना है बकाया</strong><br />इन 21 किलोमीटर की सुरंग में से 4.8 किमी का काम तो पूरा हो चुका है। इस हिस्से को न्यू ऑस्ट्रियाई टनलिंग मेथड यानी ड्रिल और ब्लास्ट के तरीके से बनाया गया है। बचा हुआ 15.5 किलोमीटर के हिस्से को बनाने के लिए इन TBM मशीनों की जरूरत थी।</p>
<p>एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि पहली बुलेट ट्रेन 15 अगस्त, 2027 तक चलने की उम्मीद है।<br />केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने बुलेट ट्रेन के लिए 7 नए कॉरिडोर का ऐलान किया था, जिनमें दिल्ली-वाराणसी, मुंबई-पुणे और पुणे-हैदराबाद शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 10:44:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्रपति संभाजीनगर : पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीनें अवैध गर्भपात रैकेट को बढ़ावा दे रही</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सोनोग्राफी मशीनों का एक ही जगह पर (स्थिर रूप से) इस्तेमाल करने की अनुमति है। हालाँकि, राज्य में पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीनों का इस्तेमाल करके लिंग-निर्धारण और गर्भपात के अवैध मामले बड़े पैमाने पर हो रहे हैं। भले ही सरकार ने ऐसी मशीनों के इस्तेमाल पर साफ़ तौर पर रोक लगा दी है, फिर भी इन्हें ऑनलाइन खरीदने और चोरी-छिपे इस्तेमाल करने की घटनाएँ बढ़ रही हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48498/chhatrapati-sambhajinagar-portable-sonography-machines-promoting-illegal-abortion-racket"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-17t124416.913.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>छत्रपति संभाजीनगर:</strong> सोनोग्राफी मशीनों का एक ही जगह पर (स्थिर रूप से) इस्तेमाल करने की अनुमति है। हालाँकि, राज्य में पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीनों का इस्तेमाल करके लिंग-निर्धारण और गर्भपात के अवैध मामले बड़े पैमाने पर हो रहे हैं। भले ही सरकार ने ऐसी मशीनों के इस्तेमाल पर साफ़ तौर पर रोक लगा दी है, फिर भी इन्हें ऑनलाइन खरीदने और चोरी-छिपे इस्तेमाल करने की घटनाएँ बढ़ रही हैं। इसलिए, आम जनता यह सवाल उठा रही है कि प्रशासन इस मामले में क्या कर रहा है। </p>
<p> </p>
<p>छत्रपति संभाजीनगर में, दो दिन पहले एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ हुआ था, जो पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीनों का इस्तेमाल करके लिंग-निर्धारण का काम करता था। पिछले कुछ सालों में, महाराष्ट्र के अलग-अलग ज़िलों में ऐसे कई गिरोह पकड़े गए हैं, जो पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीनों की मदद से लिंग-निर्धारण और अवैध गर्भपात करते थे। जाँच में पता चला है कि ग्रामीण इलाकों में ऐसी मशीनों का इस्तेमाल घरों, गौशालाओं या गाड़ियों में भी किया जा रहा है। कुछ मामलों में, वायरलेस और ब्लूटूथ तकनीक पर चलने वाली सोनोग्राफी मशीनों के इस्तेमाल ने प्रशासन की चिंता और भी बढ़ा दी है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 13:41:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : वेस्टर्न रेलवे द्वारा 325 डिजिटल ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन जोड़ने से टिकट की कतारें कम होंगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लोकल ट्रेन का टिकट लेना अब और भी तेज़ और आसान होने वाला है, क्योंकि वेस्टर्न रेलवे अपने सबअर्बन नेटवर्क पर 325 नई ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन लगा रहा है। इस कदम का मकसद टिकट काउंटरों पर लंबी कतारों को काफी कम करना और ज़्यादा से ज़्यादा यात्रियों को डिजिटल और सेल्फ सर्विस टिकटिंग ऑप्शन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47458/mumbai-western-railway-adds-325-digital-automatic-ticket-vending-machines"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-03t192301.822.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>लोकल ट्रेन का टिकट लेना अब और भी तेज़ और आसान होने वाला है, क्योंकि वेस्टर्न रेलवे अपने सबअर्बन नेटवर्क पर 325 नई ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन लगा रहा है। इस कदम का मकसद टिकट काउंटरों पर लंबी कतारों को काफी कम करना और ज़्यादा से ज़्यादा यात्रियों को डिजिटल और सेल्फ सर्विस टिकटिंग ऑप्शन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। नई ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन स्टेशन परिसर और फुट ओवरब्रिज पर लगाई जाएंगी, जिससे पीक ट्रैवल घंटों के दौरान बेहतर एक्सेस मिल सकेगी। अधिकारियों ने बताया कि अपग्रेडेड मशीनें ट्रांजैक्शन तेज़ी से प्रोसेस करेंगी और आसान डिजिटल पेमेंट ऑप्शन देंगी।<br /></p><p><br /></p><p><strong>चर्चगेट स्टेशन पर कैंपेन लॉन्च किया गया </strong><br />इस पहल को औपचारिक रूप से चर्चगेट स्टेशन पर 'मेरा टिकट मेरी शान, आपके संत भारत के लिए मेरा योगदान' नाम के कैंपेन के तहत लॉन्च किया गया। इस कैंपेन का उद्घाटन वेस्टर्न रेलवे के जनरल मैनेजर प्रदीप कुमार ने किया, जिन्होंने रेलवे के आधुनिकीकरण और राष्ट्रीय विकास में टिकट वाली यात्रा की भूमिका पर ज़ोर दिया।</p><p> “जो यात्री वैलिड टिकट के साथ यात्रा करता है, वह सीधे तौर पर रेलवे के आधुनिकीकरण और राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है। यात्रियों को हमेशा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे वैलिड टिकट के साथ यात्रा कर रहे हैं,” कुमार ने यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 19:24:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : बीएमसी चुनावों में पीएडीयू मशीनें सिर्फ बैकअप के तौर पर, एसईसी ने दी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में बीएमसी चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने बुधवार को स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान अगर कोई तकनीकी दिक्कत आती है तो ही प्रिंटिंग ऑक्सिलरी डिस्प्ले यूनिट (पीएडीयू) मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47005/sec-informed-that-padu-machines-are-only-used-as-backup"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-15t122405.620.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र में बीएमसी चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने बुधवार को स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान अगर कोई तकनीकी दिक्कत आती है तो ही प्रिंटिंग ऑक्सिलरी डिस्प्ले यूनिट (पीएडीयू) मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि पीएडीयू मशीनें सामान्य तरीके से वोट गिनने के लिए नहीं लगाई जाएंगी, बल्कि सिर्फ उन मामलों में जब बीएलई (भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड) की वोटिंग मशीनों में कोई तकनीकी गड़बड़ी हो, तभी इन्हें बैकअप के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।</p>
<p> </p>
<p>एसईसी ने बताया कि बीएमसी चुनावों में इस्तेमाल हो रही बीएलई मशीनें 'एम3ए' मॉडल की हैं, जो कि चुनाव आयोग की हैं। वोट गिनती की प्रक्रिया के अनुसार, सबसे पहले बैलट यूनिट (बीयू) को कंट्रोल यूनिट (सीयू) से जोड़ा जाएगा और इसी के जरिए वोट गिने जाएंगे। पीएडीयू सिर्फ असाधारण परिस्थितियों में काम आएगी। बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी ने भी कहा कि पीएडीयू मशीनें केवल बैकअप के तौर पर उपयोग की जाएंगी। एसईसी ने जारी किए गए बयान में कहा कि पीएडीयू डिवाइस केवल उन दुर्लभ मामलों में इस्तेमाल किया जाना चाहिए जब तकनीकी समस्याओं के कारण सामान्य गिनती संभव न हो। इसके लिए कुल 140 पीएडीयू यूनिट्स बीएमसी चुनावों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं। यदि किसी स्थिति में पीएडीयू का इस्तेमाल करना पड़े, तो यह बीएलई तकनीशियन की मौजूदगी में ही होगा।</p>
<p>एसईसी ने पहले ही निर्देश दिए थे कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को पीएडीयू मशीन का फंक्शनिंग दिखाया जाए ताकि सभी को प्रक्रिया की जानकारी और पारदर्शिता मिले। इसके अनुसार बीएमसी ने भी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के लिए मशीन का व्यावहारिक डेमो करवा दिया। यह स्पष्टीकरण उस समय आया जब महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे ने वोटिंग प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। उन्होंने पीएडीयू मशीन को बैकअप के रूप में पेश करने पर सवाल उठाए और कहा कि यह मशीन राजनीतिक दलों को पहले से नहीं दिखाई गई थी।</p>
<p>उनका आरोप था कि एसईसी ने राजनीतिक दलों को इस डिवाइस की जानकारी तक नहीं दी। राज ठाकरे ने कहा कि जब ईवीएम का इस्तेमाल होता है, तो पार्टी प्रतिनिधियों को बटन और मशीन की जांच करने के लिए बुलाया जाता है। लेकिन पीएडीयू मशीन के मामले में ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने इसे शुद्ध अराजकता बताया। उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे समेत कई नेताओं की लिखित पूछताछ के बावजूद एसईसी ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 12:25:07 +0530</pubDate>
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